| ०१ |
अजामिलोपाख्यानं विष्णुदूतयमदूतसंवादश्च |
पाठम् |
| ०२ |
विष्णुदूतमुखेन भागवतधर्मनाममाहात्म्यनिरूपणं याम्यपाशान्मुक्तस्याजामिलस्य भगवदाराधनया परमधामगमनं च |
पाठम् |
| ०३ |
यमयमदूतसंवादः, वैष्णवोत्कर्षवर्णनं च |
पाठम् |
| ०४ |
दक्षजन्म, तत्कृततपसोऽवसाने भगवतो दर्शनं हंसगुह्यस्तोत्रं दक्षभगवत्संवादश्च् |
पाठम् |
| ०५ |
नारदोपदेशेन हर्यश्वशबलाश्वाख्यानां दक्षपुत्राणां विरक्तिर्नारदाय दक्षकर्तृकं शापदानं च |
पाठम् |
| ०६ |
दक्षस्य षष्टिकन्यानां वंशविस्तारः |
पाठम् |
| ०७ |
इन्द्रेण कृतं गुरोरवमाननं ततो देवानामैश्वर्यध्वंसः, विश्वरूपस्य पौरोहित्ये वरणं च |
पाठम् |
| ०८ |
विश्वरूपद्वारा इन्द्राय नारायणवर्मोपदेशः |
पाठम् |
| ०९ |
विश्वरूपवधः, वृत्रस्योत्पत्तिर्देवकृतभगवत्स्तवनं भगवद्वरप्रदानं च |
पाठम् |
| १० |
देवानां दधीचेः सकाशात्तद्स्थियाचनं वज्रनिर्माणं देवदानवयुद्धं च |
पाठम् |
| ११ |
वृत्रस्य भक्तिज्ञानवैराग्ययुक्तवीरोचितोद्गाराः |
पाठम् |
| १२ |
इन्द्रवृत्रयुद्धं वृत्रस्य वधश्च |
पाठम् |
| १३ |
ब्रह्महत्याभयादिन्द्रस्य पलायनम्, अश्वमेधयज्ञेन ब्रह्महत्यानिवारणं च |
पाठम् |
| १४ |
वृत्रासुरस्य पूर्वजन्मवृत्तान्ते चित्रकेतूपाख्यानम्, अङ्गिरःप्रसादेन लब्धे स्वसुते विनष्टे चित्रकेतोरत्यन्तशोकः, कृतद्युतेर्विलापश्च |
पाठम् |
| १५ |
चित्रकेतवेऽङ्गिरोनारदयोरुपदेशः |
पाठम् |
| १६ |
राजपुत्रदेहवियुक्तस्य जीवात्मन उक्तिः, चित्रकेतवे नारदकर्तृकं सङ्कर्षणमन्त्रप्रदानं तज्जपेन विद्याधरत्व प्राप्तिर्भगवतोऽनन्तस्य दर्शनं च |
पाठम् |
| १७ |
कैलासे पार्वतीसहितस्य शिवस्योपहासकरणात् पार्वतीशापेन चित्रकेतोर्वृत्रजन्मप्राप्तिश्च |
पाठम् |
| १८ |
दितिवंशवर्णनं मरुतामुत्पत्तिश्च |
पाठम् |
| १९ |
पुंसवनव्रतविधिः |
पाठम् |