| ०१ |
नैमिषक्षेत्रे श्रीमद्भागवतविषये सूतं प्राति शौनकादिमुनीनां प्रश्नः |
पाठम् |
| ०२ |
सूतप्रतिवचनम, भगवत्कथायाः श्रवणकीर्तनयो र्निःश्रेयसकरत्वं भगवद्भक्तेर्माहात्म्यवर्णनं च |
पाठम् |
| ०३ |
भगवतश्चतुर्विंशत्यवताराणं संक्षेपतो वर्णनम् |
पाठम् |
| ०४ |
महर्षेर्व्यासस्यापरितोषः, तदाश्रमे देवर्षिनारदस्यागमनं च |
पाठम् |
| ०५ |
नारदव्याससंवादः भगवद्गुणकर्मवर्णनस्य महत्तवं देवर्षिनारदकर्तृकं स्वकीयपूर्वजन्मवृत्तान्तकथनं च |
पाठम् |
| ०६ |
पूर्वजन्मवृत्तान्तशेषांशः नारदस्य भगवदाराधन पूर्वकं ब्रह्मणः सकाशाज्जन्मग्रहणम् |
पाठम् |
| ०७ |
नारदोपदेशेन व्यासद्वारा श्रीमद्भागवतारम्भः, तत्र परीक्षिज्जन्मप्रतावेऽश्वत्थाम्ना कृतः सुप्तानां द्रौपदीसुतानां वधः, अश्वत्थाम्नः पराभवश्च |
पाठम् |
| ०८ |
उत्तरागर्भे द्रौण्यस्त्रतः परीक्षितो रक्षणम्, कुन्तीकृता श्रीकृष्णस्तुतिः, युधिष्ठराउतापश्च |
पाठम् |
| ०९ |
युधिश्ठिरादीनां भीष्मसमीपे गमनम, तत्र विविधान धर्मानुपदिश्य श्रीकृष्णस्तवनपूर्वकं भीष्मस्य महाप्रस्थानं च |
पाठम् |
| १० |
भगवतः श्रीकृष्णस्य द्वारकागमनम् |
पाठम् |
| ११ |
द्वारकावासिभिः कृतं भगवतोऽभिनन्दनम्, पुरप्रवेशवर्णनं च |
पाठम् |
| १२ |
परीक्षितो जन्मोत्सवः |
पाठम् |
| १३ |
विदुरोपदेशेन गन्धार्या सह धृतराष्ट्रस्य वनाय प्रस्थानम् |
पाठम् |
| १४ |
अपशकुनदर्शनेन युधिष्ठिरस्य चिन्ता, द्वारकातोऽर्जुनस्यागमनं च |
पाठम् |
| १५ |
अर्जुनाद् यदुकुलसंहारं भगवतस्तिरोधानं च श्रुत्वा पाण्डवानां हिमालयदिशि महाप्रयाणम् |
पाठम् |
| १६ |
परीक्षितो राज्यलाभः, दिग्विजयः, भूमिधर्मसंवादश्रवणं च |
पाठम् |
| १७ |
परीक्षिद्धर्मसंवादः, कलिनिग्रहणं च |
पाठम् |
| १८ |
परीक्षिते मुनिकुमारशापः |
पाठम् |
| १९ |
परीक्षितो गङ्गातटे प्रायोपवेशनम्, ऋषिसमागमः, शुकागमनम्, राजः प्रश्नश्च |
पाठम् |