THIRUKKURAL IN HINDI
तिरुक्कुरळ हिन्दी मे (तमिल से)

 

 

Thirukkural

Hindi Translation by:
M.G. Venkatakrishan

 


Revised and enlarged Edition November, 1998.

 

Publisher:
Sakthi Finance Ltd.
Madras-600004.

 

 

तिरुक्कुरल के तीन भाग हैं- धर्म, अर्थ और काम । उनमें क्र्मशः 38, 70 और 25 अध्याय हैं । हर एक अध्याय में 10 कुरल के हिसाब से समूचे ग्रंथ में 1330 कुरल हैं । यह मुक्तक काव्य होने पर भी विषयों के प्रतिपादन में एक क्रम-बद्धता है और विषयों की व्यापकता विषय-सूची को देखने से ही ज्ञात हो सकती है । □□□□□

 

भाग: धर्म- कांड

अध्याय 001 to 010

1. ईश्वर- स्तुति

6. सहधर्मिणो

2. वर्षा- महत्व

7. संतान- लाभ

3. संन्यासी- महिमा

8. प्रेम-भाव

4. धर्म पर आग्रह

9. अतिथि- सत्कार

5. गार्हस्थ्य

10. मधुर- भाषण

अध्याय 011 to 020

11. कृतज्ञता

16. क्षमाशीलता

12. मध्यस्थता

17. अनसूयता

13. संयमशोलता

18. निर्लोंभता

14. आचारशीलता

19. अपिशुनता

15. परदारविरति

20. वृथालाप- निषेध

अध्याय 021 to 030

21. पाप- भीरुता

26. माँस- वर्जन

22. लोकोपकारिता

27. तप

23. दान

28. मिध्याचार

24. कीर्ति

29. अस्तेय

25. दयालुता

30. सत्य

अध्याय 031 to 038

31. अक्रोध

35. संन्यास

32. अहिंसा

36. तत्वज्ञान

33. वध- निषेध

37. तृष्णा का उ़न्मूलन

34. अनित्यता

38. प्रारब्ध


भाग
: अर्थ- कांड

अध्याय 039 to 050

39. महीश महिमा

45. सत्संग- लाभ

40. शिक्षा

46. कुसंग- वर्जन

41. अशिक्षा

47. सुविचारित कार्यकुशलता

42. श्रवण

48. शक्ति का बोध

43. बुद्धिमत्ता

49. समय का बोध

44. दोष- निवारण

50. स्थान का बोध

अध्याय 051 to 060

51. परख कर विश्वास करना

56. क्रूर शासन

52. परख कर कार्य सौंपना

57. भयकारी कर्म न करना

53. बंधुओं को अपनाना

58. दया- दृष्टि

54. अविस्मृति

59. गुप्तचर- व्यवस्था

55. सुशासन

60. उत्साहयुक्तता

अध्याय 061 to 070

61. आलस्यहोनता

66. कर्म- शुद्धि

62. उद्यमशोलता

67. कर्म में दृढ़ता

63. संकट में अनाकुलता

68. कर्म करने की रीति

64. अमात्य

69. दूत

65. वाक्- पटुत्व

70. राजा से योग्य व्यवहार

अध्याय 071 to 080

71. भावज्ञत

76. वित्त- साधन- विधि

72. सभा- ज्ञान

77. सैन्य- माहात्म्य

73. सभा में निर्भीकता

78. सैन्य- साहस

74. राष्ट्र

79. मैत्री

75. दुर्गी

80. मैत्री की परख

अध्याय 081 to 090

81. चिर- मैत्री

86. विभेद

82. बुरी मैत्री

87. शत्रुता- उत्कर्ष

83. कपट मैत्री

88. शत्रु- शक्ति का ज्ञान

84. मूढ़ता

89. अन्तवैंर

85. अहंम्मन्य मूढ़्ता

90. बड़ों का अपचार न करना

अध्याय 91 to 100

91. स्त्री- वश होना

96. कुलोनता

92. वार- वनिता

97. मान

93. मद्य- निषेध

98. महानता

94. जुआ

99. सर्वगुणपूर्णता

95. औषध

100. शिष्टाचार

अध्याय 101 to 108

101. निष्फल धन

105. दरिद्रता

102. लज्जा शोलता

106. याचना

103. वंशोत्कर्ष- विधान

107. याचना- भय

104. कृषि

108. नीचता


भाग: काम- कांड

अध्याय 109 to 120

109. सौंदर्य की पीड़ा

115.प्रवाद जताना

110. संकेत समझना

116. विरह- वेदना

111. संयोग का आनन्द

117. विरह- क्षामा को व्यथा

112. सौंदर्य- वर्णन

118. नेत्रों का आतुरता से क्षय

113. प्रेम- प्रशंसा

119. पीलापन- जनित पीड़ा

114. लज्जा- त्याग- कथन

120. विरह वेदनातिरेक

अध्याय 121 to 133

121. स्मरण में एकान्तता- दःख

128. इंगित से बोध

122. स्वप्नावस्था का वर्णन

129. मिलन- उत्कंठा

123. संध्या- दर्शन से व्यथिअत होना

130. हृदय से रुठना

124. अंगगच्छवि- नाशा

131. मान

125. हृदय से कथन

132. मान की सूक्ष्मता

126. धैर्य- भंग

133. मान का आनन्द

127. उनको उत्कंठा

 

 

 

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