लिनक्स में हिन्दी, हिन्दी में लिनक्स
मैनड्रैकलिनक्स
सर्वर व डेस्कटॉप दोनों के लिए उपयोग-में-सहज एक मित्रवत लिनक्स संचालन तंत्र, जो कि सम्पूर्ण विश्व में अनेकों भाषाओं में उपलब्ध है ।
मैनड्रैकलिनक्स द्वारा 'लिनक्स में हिन्दी, हिन्दी में लिनक्स' के उपयोग के अनुभवों को साझा करने हेतु कटिबद्ध एक वेब-स्थल

||  जीने की कला - प्रस्तावना||
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जीने की कला

1. स्वंय को जानें । 6. दिल दुखने की भावना पर विजय कैसे पायें ?
2. लघु योजनायें बनायें । 7. अपनी चिंताओं से कैसे मुक्त हो ?
3. स्वंय में विश्वास करें । 8. अपनी निराशा से स्वंय कैसे बचें?
4. अपने व्यक्तित्त्व को आकर्षक कैसे बनायें ? 9. मास्टर-माइंड
5. हीन-भावना पर विजय कैसे पायें ? 10. विश्रांति

मैने वर्ष १९८१ में "जीने की कला" नामक विषय पर एक पाठ्यक्रम में भाग लिया था । इस ज्ञान को देने वाले दार्शनिक डा० चित्रे थे । उस समय के लिखे हुए हस्तलिखित नोट्स आज भी मेरे पास सुरक्षित रखे हुए थे । इस वेब-स्थल के माध्यम से, उन विचारों व विधियों को मै आपके के साथ साझा कर रहा हूँ । आज के परिवेश में इस कला का महत्त्व व उपयोग और भी बढ़ गया है ।

आज चारों तरफ़ तनाव नामक शब्द की बहुत चर्चा होती रहती है तथा इसे सामान्य तौर पर विपरीत व जीवन-नाशक समझा जाता है । वास्तव में "तनाव" क्या है ?

तनाव, उत्तेजना का वह स्तर है जहाँ घटनायें और उत्तरदायित्व व्यक्ति की क्षमता से बाहर हो जाते है ।

जब इसी तनाव का हम सकारात्मक उपयोग करते है तो यह हमारी क्षमताओं को असीमित बनाता है और हमसे उन कार्यों तक को करता है जो कि उससे पूर्व असम्भव माने जाते थे । जब इसी तनाव का, हम नकारत्मक उपयोग करते है तो यह हमारी क्षमताओं को उनके न्यूतम-स्तर तक ले जाता है और हम अपने को पंगु महसुस करते है । जीने की कला हमें इस तनाव को नियंत्रित करना सीखाती है । जिससे कि न सिर्फ़ हम अपनी क्षमताओं को बढ़ाते है, बल्कि अपना कल्याण करते हुए, इस समस्त जगत के कल्याण में भी अपना योगदान दे पाते है ।

"सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ायें" की कहावत को चरितार्थ करते हुए, इस विषय-वस्तु में से जो कुछ भी आपको अच्छा लगें, उससे लाभ उठाएँ । जीने की कला हमें मुक्त होना सिखाती है । मै के बजाये हमें 'हम' बनाती है । समस्त विश्व के साथ हमारे ज्ञान व अनुभवों का निस्वार्थ आदान-प्रदान करना सिखाती है और यही सब तो एक मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयर योगदानकर्ता करता है । अनेकों ऐसे योगदान-कर्ताओं द्वारा रचित असंख्य मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयरों को हम प्रतिदिन उपयोग में लाते हैं । इस भावना के साथ ही, इस विषय-वस्तु का समावेश मैने इस वेब-स्थल में किया है | आशा करता हूँ कि आप इससे लाभान्वित होगें ।

धन्यवाद
धनञ्जय शर्मा


मूल विषय-वस्तु को आरम्भ करने के पूर्व, "राजस्थान-पत्रिका" नामक हिन्दी दैनिक समाचार-पत्र में पढ़े हुए सुखी और शांत जीवन बिताने हेतु आवश्यक कुछ विचारों को प्रस्तुत कर रहा हूँ ।

सुखी और शांत जीवन जीने हेतु .......

  • अपनी प्राथमिकताएं तय करें ताकि आप सही समय पर सही निर्णय ले सकें ।
  • मन को एकाग्र रखने की कोशिश करें ।
  • प्रतिदिन एक परमार्थ का ऐसा निस्वार्थ कार्य करें जिसके द्वारा आप अपने अनुभव और ज्ञान से इस संसार के किसी मनुष्य, जीव, प्राणी, पशु-पक्षी, वॄक्ष इत्यादि को लाभ पहुँचा सकें ।
  • आपकी जीवन-शैली आसान होनी चाहिए ताकी जीवन आनन्द-पूर्वक जिया जा सकें ।
  • मन में संतोष का भाव रखें, किसी के प्रति ईर्ष्या ना रखें । सही दिशा की ओर जाने का प्रयास करें ।
  • अपने लक्ष्यों का निर्धारण करें और जितना हो उसी में कुछ प्राप्त करने की चेष्ठा करें ।
  • शरीर, मस्तिष्क और आत्मा के बीच समांजस्य बनाने की कोशिश करें ।
  • कल्पना में ना जिएँ और व्यवाहरिक बनने की कोशिश करें ।
  • दूसरों से अपेक्षा ना रखें ।
  • नकारात्मक भावनाओं को त्याग, सकारात्मक बातों को सोचें ।
  • खुश रहने की कोशिश करें और सॄजनात्मक कार्यो को करें ।
साभार: राजस्थान-पत्रिका, अंक: १६ जनवरी, २००४


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