लिनक्स में हिन्दी, हिन्दी में लिनक्स
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4. अपने व्यक्तित्व को आकर्षक कैसे बनायें?पीछे ||  जीने की कला - हीन-भावना पर विजय कैसे पायें ? || आगे 6. दिल दुखने की भावना पर विजय कैसे पायें ?
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5. हीन-भावना पर विजय कैसे पायें ?

  • यदि आपके अन्दर हीनता की ग्रन्थि है तो आपका विकास नहीं हो पायेगा । माँ-बाप के लालन-पालन का अथवा कभी-कभी जीवन-साथी का हीन-ग्रन्थि बनाने में सबसे अधिक हाथ होता है ।
  • हमको सबको मनुष्य समझना चाहिए । हमें ये सोचना चाहिए कि जितना ईश्वर मेरे अन्दर है उतना ही दूसरे में भी है । इसलिए मै किसी से कम नहीं हूँ । ये सोचने से हमारे अन्दर हीन-ग्रन्थि नहीं बनेगी ।
  • जब कभी कोई नकारात्मक विचार आयें या आप सोचें कि मै किसी से कम हूँ या लोग मुझसे प्यार नहीं करते हौ तब उसका ठीक उल्टा बोलें या सोचें । हीनता की भावना का बीज दिमाग में न बोयें । अपने मन में कोई रूकावट न पैदा करें ।
  • अपनी कठिनाइयों का सोच-सोच कर निर्माण न करें । अगर कोई कठिनाई है तो उसे बड़ा न करें । आदमी के अन्दर कितनी शक्ति है, इसके बारे में सोचें और उसको बड़ा करें । विचारों के द्वारा ठोस चीजों को भी चलायमान किया जा सकता है।
  • दूसरों की नकल न करें । उनसे न डरें क्योंकि तुम्हारे मुकाबले में कोई नहीं है । अपनी तुलना किसी से न करें क्योंकि आप अपनी तरह के अकेले इस संसार में हैं ।
आपके पास जीने के लिए कुछ रस/आनंद है ।
  • जो हमारा स्वरूप है, हम उस स्वरूप में जाते है, खाते है और अन्य काम करते है । ईश्वर की जो शक्ति है वो सदा आपके साथ है और सदा आपको मदद दे रही है । अगर तुम्हारे अन्दर इतना करने पर भी हीन-ग्रन्थि नहीं जाती है तो मनोवैज्ञानिक को अपना परीक्षण करायें । जैसा हम दूसरों से चाहते है वैसा खुद करें जिससे कि वो उदाहरण से सीखें ।
हमेशा याद रक्खें :

जो मनुष्य ने किया है,
वो मनुष्य कर सकता है ।
मै भी एक मनुष्य हूँ और ईश्वर मेरे अन्दर है,
अतैव मै भी कर सकता हूँ ।

4. अपने व्यक्तित्व को आकर्षक कैसे बनायें?पीछे जीने की कला - मुख्य पृष्ट
आगे 6. दिल दुखने की भावना पर विजय कैसे पायें ?
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