![]() |
![]() |
|
मानसून के दौरान स्वास्थ्यवर्धक खाना
|
|
| आगे |
मुख्य पृष्ठ |
पीछे |
इस
पृष्ठ को अंग्रेजी में देखने के लिए यहाँ क्लिक करें। |
| मुख्य पृष्ठ |
सफाई व खाने की आदतें, ये दो मुख्य कारक हैं जिनका कि हमें ध्यान रखना जरूरी है। मलेरिया और दस्त, वर्षा ऋतु में सामान्यत: होने वाले रोग हैं, इनसे सावधान रहें। इसके अलावा हमें अपने खाने की आदतों की ओर भी बारीकी से ध्यान देनें की जरूरत है। निम्नलिखित जानकारियों का हमें सदैव ध्यान रखना चाहिए : 1. पेय जल : स्वच्छ पेय जल का उपयोग करें। पेय जल को उबाल कर व छान कर साफ करें या जल स्वच्छ करने वाले यंत्र का प्रयोग करें तथा उसे किसी बंद बर्तन में रखें। परंतु इस प्रकार स्वच्छ किए गए पेय जल का भंडारण अधिक दिनों तक नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से जल के दूषित होने की संभावनाएँ बढ जाती हैं। स्मरण रहे, प्रतिदिन छ: से आठ ग्लास पानी पीने से आपके शरीर में उत्पन्न ‘टॉकसिन’ पूर्णरूप से निकल जाता है। 2. बाहर का खाना : हमें मुख्यत: ध्यान रखना चाहिए कि हम क्या खा रहे हैं कहाँ से ले कर खा रहे हैं। जिस जगह से भी तैयार खाद्य सामग्री लें वह साफ-सुथरी होनी चाहिए। कटे हुए फलों, चाट व ज्यूस इत्यादि को सड़क के किनारे लगे ठेलों आदि से लेकर खाने से जितना हो सके परहेज़ करें क्योंकि हमें पता नहीं होता कि इनको कब उबाला गया है तथा उनके बनाने में किस प्रकार के जल का उपयोग किया गया है। परिणामस्वरूप ये अत्यधिक संक्रमक हो कर हमें (Gastro Intestinal Diseases) पेट की पाचन क्रिया संबंधी रोगों जैसे दस्त, तपैदिक, पीलिया इत्यादि का शिकार बना सकते हैं। 3. तले हुए भोजन का उपयोग सीमित करें : तले हुए भोजन जैसे पकौड़े, ब्रेड़ रोल आदि का सेवन करते समय दो बातों का ध्यान रखें| प्रथम, इन्हें बाहर से ले कर न खाएँ। दूसरे, घर में भी इनका प्रयोग कम से कम करें। पकौड़े अत्यधिक मोटापा बढ़ाते हैं तथा अनचाही कैलोरी में वृद्धि करते हैं और वह भी बिना किसी पोषण के। लेखक : डा0 आर0 राजेश हिंदी अनुवादक: प्रदीप त्यागी, जामनगर, भारत अनुवाद तिथि : 21-06-2004 |
| लेख | |
| आभार | |
| संपर्क करें | |