Why can't I see the Hindi section?
अनुवाद कैसे करें

6.1. पाठ्य सम्पादन तन्त्र

6.1.1. पाठ्य सम्पादन तन्त्र क्यों?

कम से कम एक पाठ्य सम्पादन तन्त्र की जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है. अपने यन्त्र के संचालन का कार्य स्वयं करने की ओर यह् पहला कदम है.

अगले अध्याय तक पहुंचने से पहले आवश्यक है कि पाठ्य सम्पादन तन्त्र में आप पारंगत हो जायें. एक उन्नत प्रयोगकर्ता बन जाने पर हो सकता है कि आप शैल-कूट, किताबें, वेब-पृष्ठ, अथवा प्रोग्राम लिखना प्रारंभ कर दें. सम्पादन तन्त्र में आपकी निपुणता आपकी कार्य-क्षमता व उत्पादकता में बड़ा सुधार लाएगी.

6.1.2. कौनसा पाठ्य सम्पादन तन्त्र प्रयोग करें?

चैत्रिक सम्पादन तंत्र जो कि एक्स-सत्र के अंतरगत चलते हैं, विण्डोज़ या मॅकिण्टाश से मिलते-जुलते हैं; अतः हम उनके बारे में यहाँ चर्चा नहीं करेंगे. इनके बारे में जानने के लिए उनमें सम्मिलित सहायक जानकारी पढ़ें.

हमारा ध्यान केवल पाठ्य सम्पादन तन्त्र पर है, जो कि बिना चैत्रिक सुविधा वाले पर्यावरण में भी काम कर सकते हैं. पाठ्य सम्पादन तंत्र में दक्षता प्राप्त करने का अतिरिक्त लाभ यह भी है कि आप उसे गैर-स्थानीय यन्त्र पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे जालबन्धन की गति में भी सुधार होता है क्योंकि सम्पूर्ण चैत्रिक पर्यावरण को जालबन्धन से स्थानन्तरित नहीं करना पड़ता.

जैसा कि आम है, हमारे पास कईं विकल्प उपलब्ध हैं. आइये नज़र डालें उनमें से कुछ पर:

6.1.2.1. पिको (Pico)

पिको एक सरल पाठ्य सम्पादन तन्त्र है जो के पाइन कम्पोज़र से मिलता जुलता है (पाइन, देखें अध्याय 10 डाक तन्त्र पर). जैसा कि पाइन में होता है, निर्देश दृश्य पटल के निचले हिस्से में दर्शाए जाते हैं. जैसे-जैसे अक्षर टाइप किये जाते हैं, वैसे-वैसे पाठ्य में प्रदर्शित किए जाते हैं.

सम्पादन निर्देश कण्ट्रोल कुञ्जी के साथ अक्षर को जोड़ कर दिए जाते हैं. कुछ संचार तन्त्र कण्ट्रोल चिह्नों को खा जाते हैं. उस परिस्थिती में आप कण्ट्रोल की जगह [एस्केप] कुञ्ज़ी दो बार दबाकर फिर अपने अक्षर को टाइप करें. इस सम्पादन तन्त्र में बुनियादी सुविधायें जैसे परिच्छेद का पंक्तिबद्ध् करना, खोजना, पाठ्य-खण्ड को नकल कर चिपकाना, अक्षर-विन्यास में त्रुटि सुधारना, और फ़ाइलों का चुनाव, उपलब्ध हैं. अधिक जानकारी के लिए इन्फ़ो पृष्ठ पढ़ें.

पिको नौसिखियों के लिए उपयुक्त सम्पादन तन्त्र है, पर इसके दो नुकसान हैं: यह् पूर्ण रूप से मुक्त तन्त्र नहीं है, और उन्नत प्रयोगकर्ता एक सम्पादन तन्त्र से और अधिक सुविधायें चाहते हैं.

6.1.2.2. ग्नू ईमॅक्स (Emacs)

ईमॅक्स एक लचीला, स्व-प्रलेखित सम्पादन तन्त्र है जिसे आप अपनी मर्ज़ी के अनुसार ढाल सकते हैं. जैसे-जैसे आप टाइप करते हैं, वैसे-वैसे सम्पादित किया जाने वाला पाठ्य दृष्य पटल् पर स्वतः प्रकट होता जाता है. प्रत्येक कुञ्जी दबाने पर दृष्य पटल को पुनर्चित्रित किया जाता है. इससे आपको अधिक मसला याददाश्त में नहीं रखना पड़ता बल्कि आप अपना टाइप किया हुआ सीधा दृष्य पटल पर देख सकते हैं. ईमॅक्स उन्नत इसलिए कहलाता है क्योंकि यह बुनियादी सुविधाओं से कहीं बढ़ कर सुविधायें उपलब्ध कराता है: जैसे प्रकार्यों (sub-processes) का नियन्त्रण; कूट का स्वतः पक्षीकरण; अनेक फ़ाइलों को प्रदर्शित करना; प्रारूपित फ़ाइलों का सम्पादन; अक्षर, शब्द, लाइन, वाक्य, परिच्छेद, पृष्ठ स्तर पर सम्पादन, यहाँ तक कि प्रोग्राम में टिप्पणियों व शब्द समूहों का भी सम्पादन.

स्व-प्रलेखित का अर्थ है कि आप कभी भी सहायता के लिए विशेष निर्देश [CTRL]-[H] दे सकते हैं. यदि आप यह जनना चाहें कि कोई निर्देश क्या करता है, या फिर किसी विशय से सम्बद्ध सारे निर्देश दर्शाना चाहें तो भी आप इसका उपयोग कर सकते हैं. ईमॅक्स को आप अपनी रीति के अनुसार ढाल सकते हैं. उदहरण के तौर पर यदि आप एक ऐसी प्रोग्रमन् भाषा में कार्य करते हैं जिसमें टिप्प्णियों का प्रारम्भ `<**' से होता है और अंत `**>' से, तो आप ईमॅक्स को इस तथ्य की जानकारी दे सकतें हैं; इन्हें पहचान लेने के पश्चात ईमॅक्स टिप्पणियों को एक विशेष रंग में दर्शा सकता है. एक अन्य उदाहरण है कर्सर चलाने के निर्देशों का फेरबदल. जैसे कि यदि आप कर्सर चलाने की विभिन्न कुञ्जियों (ऊपर्, नीचे, दायें, बायें) के बजाय अन्य कुञ्जियों का उपयोग करना चाहें तो ईमॅक्स को इसके लिए निर्देश दे सकतें हैं.

लचीलेपन का अर्थ है कि ऐसे साधारण फेरबदल से बढ़ कर आप स्वयं अपने निर्देश परिभाषित कर सकते हैं. ऐसे निर्देश ईमॅक्स की अपनी लिस्प (Lisp) नाम की प्रोग्रामन् भाषा में लिखे जाते हैं जो कि ईमॅक्स अपने ही लिस्प तन्त्र-अनुवादक द्वारा चलाता है. ईमॅक्स एक ऒनलाइन सम्पादन तन्त्र है, जिसका अर्थ यह है कि ईमॅक्स अनेक प्रकार्यों (functions) में विभाजित है, जो कि एक-दूसरे से सम्बंधित हैं, और जिन्हें सम्पादन सत्र के दौरान ही परिवर्तित करा जा सकता है. ईमॅक्स के तकरीबन किसी भी अवयव को इस प्रकार बदला जा सकता है, अन्य तन्त्रों की तरह परिवर्तन करने के पश्चात पुनः कम्पाइल करने की आवश्यकता नहीं. ईमॅकस के अधिकांश सम्पादन निर्देश लिस्प में लिखे गए हैं सिवाए उन निर्देशों के जिन्हें सी (C) भाषा में लिखना अधिक प्रभावकारी था. हालंकि अपने निर्देश परिभाषित करने के लिए लिस्प प्रोग्रमन् की जानकारी आवश्यक है परंतु उसके उपरांत उनका उपयोग करने के लिए आवश्यक नहीं.

एक्स विण्डोज़ के अन्तर्गत ईमॅकस चलाने पर ईमॅक्स स्वयं की चैत्रिक निर्देश-सूची (menu) व सुविधाजनक माउज़ निर्देश उपलब्ध कराता है. परंतु पाठ्य-टर्मिनल पर भी वह चैत्रिक माध्यमों की सुविधा उपलब्ध करा सकता है. उदहरण के लिए दो फ़ाइलों को एक ही पाठ्य टर्मिनल पर सम्पादित कर सकते हैं, पाठ्य को एक फ़ाइल से दूसरी में स्थानांतरित कर सकते हैं, और शेल निर्देश देने के साथ-साथ फ़ाइलों का सम्पादन कर सकते हैं.

6.1.2.3. वीआई (vi) व विम (vim)

विम (Vim) का अर्थ अंग्रेज़ी में "उन्नत वीआई" है. पहले अर्थ "वीआई की नकल" हुआ करता था, परंतु उसमें इतने सुधार किये गए कि नाम को बदलना ही उपयुक्त प्रतीत हुआ. विम सम्पादन तन्त्र में यूनिक्स तन्त्र वीआई के लगभग सभी निर्देश और अनेक नए निर्देश भी सम्मिलित हैं.

वीआई सम्पादन तन्त्र मे निर्देश मात्र कुञ्जी पट से ही दिए जाते हैं. इसका लाभ यह है कि आप अपने हाथ कुञ्जी पटल पर और आंखें दृष्टि पटल पर केन्द्रित कर सकते हैं, बजाय इसके कि अपने हाथ बारबार माउज़ की ओर लपकायें. जिन लोगों को माउज़ की आवश्यकता हो, वे चैत्रिक प्रयोग-माध्यम, माउज़ स्क्रालबार (scrollbar) इत्यादि को क्रियाशील कर सकते हैं.

इस पुस्तक में हम सम्पादन के लिए वीआई अथवा विम का प्रयोग प्रयोग करेंगे, पर आप को पूरी स्व्तन्त्रता है कि आप अपनी पसन्द का सम्पादन तन्त्र प्रयोग करें. हमने vi का चुनाव इसलिए किया है कि लगभग सभी यूनिक्स यन्त्रों पर यह मानक सम्पादन तन्त्र है, परंतु emacs ईमॅक्स एक वैक्ल्पिक तन्त्र है जो कि अनुपस्थित भी हो सकता है. अलग-अलग यन्त्रों व टर्मिनलों पर भिन्न्ताएं हो सकती हैं परंतु मुख्य बात है कि अगर आप विआई में काम करना जानते हैं तो किसी भी युनिक्स यन्त्र पर गुज़ारा चला सकते हैं.

Hosted by www.Geocities.ws

1