Harshal Chandak

Never Say Die

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POEMS & SHAYARIES

बचपन ››› 

याद आती है मुझे वोह बचपन के बतें..
वोह पप्पू की मेठाई वोह दिवाली के पटाखे..

दादी की अलमारी से वोह तोफियाँ चुराना..
वोह गिर कर संभल ना और वोह झूटमूट का रोना..

दोस्तो के साथ वोह खेले हम लुका छुपी..
वोह हमारी बरी आना वोह करना काम का बहाना...

भैया से डर कर वोह हमारी चीजों को छुपाना...
वोह लडना झगडना वोह भैया की मार खाना...

सभी के साथ वोह मिलजुल के क्रिकेट खेलना..
वोह हमारा आउट होना वोह बॉट लेके बगजाना..

बारिश के दिनों में वोह पानी का जमना..
वोह कीचड में कूदना वोह पनि में भीगना..

रजा रानी की कहानी वोह नानी ने हर बार सुनाना..
वोह भूतों से दरना वोह गद्दे को गीला करना..

बीच बीच में यूं वोह पुराणी अल्बम को देखना..
वोह बचपन का तुतलाना वोह बचपन को याद करना..

कभी पंछी बन जाऊ ››› 

मैं पंछी बनकर कही उड जाऊ. || नीले गगन में कही समा जाऊ ||
वादियों में कही मैं बस जाऊ || सप्नो का हसी आशियाँ बनाऊं ||
सितारों को अपनी बाग में सजाऊ || सच्चाई की रोशनी से उसी चमकाऊ ||
गुद-गुदा कर गमो के बादलों को हसाऊ || प्यार के एहसास से विशवास को मेहकाऊ ||
फिर भी कभी गुरूर को मेहमा ना बनाऊ || मैं कभी पंछी बन जाऊ ||

Local Train ››› 

लोकल ट्रेन की भी अजीब है बात..
यहा हड्डी पस्लिया हो जाती है एक साथ॥
लम्हों में ये बदलती है हजार..
इसिपे तो टिके है ढेर सारे संसार॥
मिलाती है ये अनगिनत राहों को..
छोड जाती है पीछे सूरज और सितारों को॥
लाखो दिलो की धड़कन है ये..
चलती और मुम्बई को चलती है ये॥

खामोशियाँ ››› 

खामोशियाँ गूंजती है तनहाई की स्याहियों में
नजार आती है यादें अपनी अक्स की पर्छाइयों में

सिमट गए है ख्वाब बिखरकर रख्श-ए-उम्र की लकिरों में
जिन्दगी है मेरी जैसे शम्मा-खुश्ता अपके अज्म की लप्टों में

स्याह = dark
अक्स = image
रख्श-ए-उम्र = gallop of life and time
शम्मा-खुश्ता = extingushed lamp
अज्म = decision

आरक्षण हटाओ देश बचाओ ››› 

आज और कल के वक्त में कोई फरक नही॥
सूरज और चांद की रोशनी में कोई फरक नही॥
आकाश और धरती की सीमा में कोई फरक नही॥
तुम्हारी और मेरी बूमी में कोई फरक नही॥

लहू के रंग में कोई फरक नही॥
मिलने वाली शिक्षा में कोई फरक नही॥
वर्णों की लाखेरिएँ हमने किचे थी कभी॥
क्या करे आब लोगो को योग्यता की भी परख नही॥

सूरज ढल गया तो क्या ››› 

आज सूरज ढल गया तो क्या हुआ,
राह-बर बंकर कोई जुगनू जरूर चमकेगा ||

आज अँधेरा हो गया तो क्या हुआ,
रोशनी की किरणों को लिए कोई कासिद आयेगा ||

आज गम-में डूब गए तो क्या हुआ,
खुशियों का संदेसा लिए कोई गम-गुस्सर आयेगा ||

राह-बर = guide
कासिद = messenger
गम-गुस्सर= comforter

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