मीराबाई
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घर आवो जी सजन मिठ बोला। मीराबाई
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- मीराबाई |
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- मीराबाई |
पायो जी म्हें तो राम रतन धन
पायो।
वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरच न खूटै चोर न लूटै, दिन-दिन बढ़त सवायो॥
सत की नाँव खेवटिया सतगुरू, भवसागर तर आयो।
'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर, हरख-हरख जस पायो॥
- मीराबई
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मेरे तो गिरिधर गोपाल
दूसरो न कोई। - मीराबाई |
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- मीराबाई |