पुस्तकों, प्रवचनों एवं विभिन्न विषयों का गूगल नोटबुक द्वारा बनाया हुआ चर्चा-परिचर्चा रूप में ऑडियो सार-संक्षेप (हिन्दी में)
पुस्तकें / पॉकेट बुक्स / फोल्डर
प्रवचन व सार
विभिन्न विषय
पुस्तकें—वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा
परमात्मा की सर्वोत्कृष्ट कृति नारी
बच्चों के शासक नहीं, सहायक बनें
बच्चों की शिक्षा ही नहीं, दीक्षा भी आवश्यक
महिला जागरण — दिशा और धारा
नारी शृंगारिकता नहीं पवित्रता है
नारी की गरिमा गिराने में घाटा ही घाटा
आधी जनशक्ति अपंग न रहे
नारी उत्थान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता
नारी उत्थान में समाज का उत्तरदायित्व
गायत्री परिवार — लक्ष्य एवं उद्देश्य
शान्तिकुञ्ज—विचारक्रान्ति का एक छोटा मॉडल
शान्तिकुञ्ज — जीवन निर्माण का केन्द्र
युग निर्माण योजना एक दृष्टि में
करिष्ये वचनम् तव
जप का रहस्य — क्यों और कैसे?
क्रान्तिधर्मी साहित्य का महत्त्व
कृतज्ञता — मानवता का प्रथम गुण
उपासना का सच्चा स्वरूप
परम पूज्य गुरुदेव की अपने अंग अवयवों से अपेक्षा
स्वयं को पहचानो — मैं क्या हूँ
गायत्री साधना का उद्देश्य और प्रक्रिया
गायत्री साधक का जीवन कैसा हो?
हमारा युग निर्माण सत्संकल्प
प्रातः काल का संध्या वन्दन—आत्मबोध की साधना
सायंकाल का संध्या वन्दन—तत्त्वबोध
सच्ची उपासना — हमारी वसीयत और विरासत
सही जीवन साधना — हमारी वसीयत और विरासत
सभी की आराधना — हमारी वसीयत और विरासत
विचार क्रान्ति के बीजों से क्रान्ति की केसरिया फसल लहलहा उठे
महाकाल के तेवर समझें, दण्ड के नहीं-पारितोषिक के पात्र बनें
युग निर्माण का शत सूत्री कार्यक्रम
प्रज्ञा परिजनों के सप्त महाव्रत
अध्यात्म क्षेत्र की वरिष्ठता विनम्रता पर निर्भर
युग शिल्पी अहमन्यता के विषपान से बचे रहें
ऋषि परम्परा का पुनर्जीवन
युग निर्माण सत्संकल्प: प्रज्ञा गीत
आत्मावलोकन का सरल उपाय
जलवायु परिवर्तन
पर्यावरण संकट कारण, प्रभाव और समाधान
जलवायु परिवर्तन — एक अस्तित्व का खतरा
Climate Change - An Existential Threat
जलवायु परिवर्तन — एक परिदृश्य-1
जलवायु परिवर्तन — एक परिदृश्य-2
भारत में भीषण गर्मी का जोखिम मानचित्रण
पॉकेट बुक्स—वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा
उत्कर्ष के लिए स्वयं आगे बढ़ें
गृह व्यवस्था के सूत्र
नारी की क्षमता का सदुपयोग हो
नारी की सनातन गरिमा
नारी को रचनात्मक दिशा दी जाय
न्याय नारी को भी मिलना चाहिए
परिवार निर्माण के पाँच आधार
प्रौढ़ महिला शिक्षा योजना
महिला जागरण अभियान की संगठन प्रक्रिया
क्रान्तिधर्मी साहित्य
क्रान्तिधर्मी साहित्य का महत्त्व
इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य-भाग १
इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य-भाग २
युग की माँग प्रतिभा परिष्कार-भाग १
युग की माँग प्रतिभा परिष्कार-भाग २
सतयुग की वापसी
परिवर्तन के महान् क्षण
जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
महाकाल का प्रतिभाओं को आमंत्रण
प्रज्ञावतार की विस्तार प्रक्रिया
नवसृजन के निमित्त महाकाल की तैयारी
समस्याएँ आज की समाधान कल के
मन: स्थिति बदले तो परिस्थिति बदले
स्रष्टा का परम प्रसाद-प्रखर प्रज्ञा
आद्य शक्ति गायत्री की समर्थ साधना
शिक्षा ही नहीं विद्या भी
संजीवनी विद्या का विस्तार
भाव सम्वेदनाओं की गंगोत्री
महिला जागृति अभियान
महिला जागृति अभियान-1
जीवन देवता की साधना-आराधना
समयदान ही युग-धर्म
इन्टरनेट और मोबाइल — उपयोग, हानि और सुरक्षा
मोबाइल — उपयोग, हानि और सुरक्षा
इन्टरनेट जाल और जीवनशैली विकार
स्पूफिंग के प्रकार और बचाव
ओटीपी हैकिंग से बचाव के तरीके
वीडियो रील्स से दिमाग को नुकसान
फोल्डर—वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा
अगले दिनों बहुत बड़े कदम उठाने होंगे
अभीष्ट क्षमता हो तो ही प्रजनन का साहस करें
आदर्श के निर्वाह में नर नारी से पीछे न रहे
इस प्राण तत्त्व को प्रखर बनाया जाय
इस समय का सबसे बड़ा पुण्य ब्रह्मभोज
नारी को उसका उचित स्थान देना ही होगा
नारी को प्रतिबन्धित करके किसने क्या पाया
नारी दलित एवं प्रताड़ित न रहे, न रहने दी जाय
नारी मीनार से खाई में कैसे जा गिरी
परम पूज्य गुरुदेव की सूक्ष्मीकृत जीवनचर्या
परिवार को स्वस्थ परपंराओं का प्रशिक्षण केन्द्र बनाया जाय
पारिवारिक सद्भावना और सहकारिता को अधिकाधिक विकसित करें
प्रथम चरण का उत्तरदायित्व पुरुषों पर
प्राणवान संगठनों की सुनियोजित प्रक्रिया प्रारम्भ हो
प्रौढ़ महिला शिक्षा के लिये विशेष प्रबन्ध किया जाय
बहुत खो चुके—अब और न खोएँ
भारतीय संस्कृति में नारी का उच्च स्थान
लोक शिक्षण के लिये धर्म परपंरा युक्त प्रचार प्रक्रिया
विवाह शादियों में हमारा दृष्टिकोण साफ रहे
शान्तिकुञ्ज द्वारा महिला जागरण अभियान का सूत्र संचालन
सामाजिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें
स्वास्थ्य संरक्षण इस तरह सम्भव होगा
पुस्तकें—पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
हमारी वसीयत और विरासत
मैं क्या हूँ?
मैं क्या हूँ?—आत्मज्ञान की साधना-1
मैं क्या हूँ?—आत्म-स्वरूप की पहचान-2
मैं क्या हूँ?—मन, बुद्धि और आत्मा-3
मैं क्या हूँ?—आत्मा और परमात्मा का सम्बन्ध-4
समय का सदुपयोग
धन का सदुपयोग
पवित्र जीवन
कर्मों का रहस्य—गहना कर्मणो गति
इक्कीसवीं सदी का संविधान — हमारा युग निर्माण सत्संकल्प
उन्नति का मूलमन्त्र—ब्रह्मचर्य
अभिभावकों और सन्तानों के बीच भावनात्मक आदान-प्रदान
स्वाध्याय में प्रमाद न करें
वातावरण के परिवर्तन का आध्यात्मिक प्रयोग
गायत्री का सूर्योपस्थान
सद्विचारों की सृजनात्मक शक्ति
क्या खायें? क्यों खायें? कैसे खायें?
युगऋषि की सूक्ष्मीकरण साधना
युगऋषि की वेदना एवं उमंगें जानें — तदनुसार कुछ करें
गायत्री की चौबीस शिक्षाएँ
समस्त विश्व को भारत के अजस्र अनुदान
शक्ति संचय के पथ पर
शक्ति संचय के पथ पर आरूढ़ हूजिये
उपासना के दो चरण — जप व ध्यान
AI सम्बन्धित — आधार, लाभ, हानियाँ और सावधानियाँ
AI शोधपत्र की अवधारणा का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
अटेंशन इज़ ऑल यू नीड — AI का आधारभूत रिसर्च पेपर
प्रवचन—वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा
भगवान भाव के भूखे होते हैं
गुरुसत्ता के महाप्रयाण के बाद मातृसत्ता का सन्देश
नारी अपनी गरिमा को जाने और आगे बढ़े
आत्मा की भूख उपासना
गुरु को वरण करके तो देखिए
करोड़ों का परिवार—समर्पण है आधार
अध्यात्म का सच्चा स्वरूप
मनुष्य में देवत्व का उदय
वसन्त—श्रद्धा, समर्पण व बलिदान का पर्व
परिवार—एक पाठशाला
जिएँ ईमानदारी का जीवन
आत्मसमीक्षा का पर्व
नारी का सम्मान जहाँ है
देवत्व के जागरण का आधार यज्ञ
गायत्री मन्त्र की अद्भुत शक्ति
गायत्री की चमत्कारिक शक्ति
गुरुसत्ता को श्रद्धांजलि
सन्त के अनुयायी हैं हम
गायत्री उपासना का प्रतिफल
समय की पुकार सुनें
तपश्चर्या के लाभ
इस युग के भगीरथ
प्रबुद्धों को आमंत्रण
अनुदान और वरदान
विषम परिस्थितियों में हमारे दायित्व
ज्योति कभी बुझेगी नहीं
वसुधैव कुटुम्बकम्
प्रायश्चित का पर्व
उपासना का आधार
श्रद्धा के बीजारोपण की साधना
ज्ञान की गंगा का अवतरण
समझदारों की नासमझी
जीवन के देवता को, आओ तनिक सँवारें
विशेष प्रवचन — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
दीक्षा और उसका स्वरूप
युग परिवर्तन और ज्ञानयज्ञ
बच्चों के व्यक्तित्व का विकास
भावी महाभारत — तीनों मोर्चे खुले
सेवा-साधना
अखण्ड ज्योति पत्रिका के मुख्य लेख
हमारी भविष्यवाणी सतयुग की वापसी
इस नक्शे में आमूल चूल परिवर्तन होगा
24 प्रवचन (5 मिनट) — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
अपने व्यक्तित्व को बदलिये
देवता बनिये, स्वर्ग में रहिये
विधेयात्मक चिन्तन-प्रगति का द्वार
चिन्तन का महत्त्व और स्वरूप
मनन का महत्त्व और स्वरूप
उपासना का महत्त्व
हँस बनिये
संकल्प जगायें-ऊँचे उठें
बोना और काटना
समयदान का महत्त्व
ज्ञान सम्पदा
व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण
जन्मदिन का महत्त्व
सच्ची आध्यात्मिकता
मेरा जीवन अखण्ड दीपक
त्याग और समर्पण
पूजा-उपासना के लाभ
पूजा-उपासना के मर्म
जीवन कैसे जीयें?
साधक कैसे बनें?
सामाजिक क्रान्ति
एक विशेष समय
युग परिवर्तन
संकल्पवान्-व्रतशील बनें
विधि नहीं, विधा समझें
24 कल्प साधना प्रवचन — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
कल्प साधना क्या है?
कल्प साधना का स्वरूप
पात्रता की महत्ता
उपासना — सच्चा समर्पण
साधना — पात्रता का विकास
आराधना — क्यों और कैसे?
बन्धनों से मुक्ति
स्वर्ग का जीवन कैसे जियें?
आत्मबोध और तत्त्वबोध की साधना
चिन्तन और मनन
संकल्प बल का महत्त्व
पूजन कृत्यों का उद्देश्य
तीर्थ यात्रा का उद्देश्य
तीर्थ कैसे होने चाहिए?
शान्तिकुञ्ज — एक श्रेष्ठ गायत्री तीर्थ
आज की युग साधना क्या है?
सेवा-साधना
जीवन का महत्त्व एवं जिम्मेदारी समझें
परिवार—व्यक्तित्व के विकास की प्रयोगशाला
शिक्षा और विद्या का ज्ञान-विज्ञान
तपश्चर्या का ज्ञान और विज्ञान
तपश्चर्या कैसे करें?
पारिवारिक जीवन में कर्मयोग
दिव्य अनुदान
वांगमय 68-1 के प्रवचन — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
मनुज देवता बने, बने यह धरती स्वर्ग समान
देवत्व विकसित करें, कालनेमि न बनें
अपने ब्राह्मण एवं सन्त को जिन्दा कीजिए
भाव-सम्वेदना का विकास करना ही साधुता है
आत्मोन्नति के चार आधार
सूक्ष्मीकरण के बाद का ऐतिहासिक वसन्त
युगनिर्माण योजना और उसके भावी कार्यक्रम
युग-मनीषा जागे, तो क्रान्ति हो
युगशोधन हेतु मनीषा को आमंत्रण
गुरुतत्त्व की गरिमा और महिमा
सुसंस्कारी बनाए, कैसी हो वह शिक्षा?
संजीवनी विद्या बनाम जीवन जीने की कला
देवात्मा हिमालय एवं ऋषि-परम्परा
हिमालय का अज्ञातवास एवं हमारी तपश्चर्या
नया इनसान बनायेंगे, नया जमाना लायेंगे
वासन्ती हूक, उमंग और उल्लास यदि आ जाए
वांगमय 68-2 के प्रवचन — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
भारतीय संस्कृति का मूल—गायत्री महामंत्र
गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य
गायत्री महामंत्र की महत्ता
गायत्री महाशक्ति की महान फलश्रुतियाँ
त्रिपदा गायत्री के तीन चरण
देव-संस्कृति का बीज मंत्र—गायत्री महामंत्र
गायत्री उपासना का स्वरूप
गायत्री उपासना की सफलता के आधारभूत तथ्य
ब्रह्मवर्चस कैसे जगाती है गायत्री?
ब्रह्मतेजस् के अभिवर्द्धन हेतु गायत्री उपासना
ऋतम्भरा-प्रज्ञा का अवतरण
गायत्री की युगान्तरीय चेतना
युग शक्ति का अवतरण
गायत्री उपासना सफल एवं सार्थक कैसे बने?
हमारी स्वयं की गायत्री उपासना कैसे फली?
हमारी यज्ञीय परम्परा
यज्ञों से सूक्ष्म वातावरण का संशोधन एवं जनमानस का परिष्कार
महायज्ञों का स्वरूप व उद्देश्य
भारतीय संस्कृति के प्रतीक—शिखा और सूत्र
नवरात्रि साधना का तत्त्वदर्शन
हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन
आत्मबल सम्पादन ही सर्वोपरि लक्ष्य हो
ओजस्वी, तेजस्वी एवं मनस्वी व्यक्तित्वों का निर्माण
वांगमय 68-3 के प्रवचन — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
आध्यात्मिक कायाकल्प के मूलभूत सिद्धान्त
कैसे हो आध्यात्मिक कायाकल्प?
अनुग्रह के लिए अन्तराल का सुविकसित होना..
कायाकल्प का मर्म और दर्शन
कल्प साधना और उसकी तात्विक विवेचना
प्रायश्चित क्यों? कैसे?
तीर्थयात्रा बनाम प्रायश्चित प्रक्रिया
तीर्थसेवन का महत्त्व और प्रयोजन
साधना में श्रद्धा की महत्ता और वातावरण की उपयोगिता
पारस को छूकर सोना बनने का तरीका
जीवन-साधना आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य भी
शक्तिपात एवं कुण्डलिनी जागरण का तत्त्वदर्शन
आत्मावलोकन का सरल उपाय-एकान्तवास
तपस्वी जीवन और उसके मूलभूत सिद्धान्त
तपकर कुंदन बनने की प्रक्रिया
दृष्टिकोण-परिवर्तन ही वास्तविक कायाकल्प
आध्यात्मिक सिद्धान्तों का आत्मसात करना ही जीवन का लक्ष्य हो
आन्तरिक अमीरी ही वास्तविक सम्पन्नता है
वांगमय 68-4 के प्रवचन — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
उपासना, साधना, आराधना का त्रिवेणी संगम
उपासना फलदायी कैसे बने?
उपासना की सफलता साधना पर निर्भर
विधा को समझें, विधि में न उलझें
जप का ज्ञान और विज्ञान
साधना से सिद्धि
अनुदान की तीन शर्तें-तीन कसौटियाँ
आध्यात्मिक जीवन में पात्रता की अनिवार्यता
जाग्रत आत्माओं को हमारे अजस्र अनुदान
शक्ति-भण्डार के साथ जुड़ें
भगवान के साथ साझेदारी घाटे का सौदा नहीं
श्रद्धा, सिद्धान्तों के प्रति हो
प्रज्ञायोग की साधना
पंचकोशों का अनावरण
ध्यानयोग का व्यावहारिक क्रिया पक्ष
भगवान शिव और उनका तत्त्वदर्शन
बहुदेववाद को समझें, भ्रम-जंजाल में न उलझें
आपत्तिकाल में मोहग्रस्त बने न रहें
वांगमय 68-5 के प्रवचन — पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य
युग-परिवर्तन की पूर्व वेला एवं सन्धिकाल
विषम परिस्थिति में नवयुग की तैयारी
आपत्तिकाल का अध्यात्म
अन्तर की हूक को ही अवतार कहते हैं
आज के प्रज्ञावतार की, युग- देवता की अपील
युगसन्धि की वेला व हमारे दायित्व
युग-परिवर्तनकारी महाक्रान्ति में सहभागी बनें
महाकाल की पुकार सुनें और जीवन को धन्य बनाएँ
कैसे होगा समन्वय, विज्ञान और अध्यात्म का?
यह चिनगारी दावानल बनेगी
धर्मतंत्र की गरिमा एवं महत्ता
परमार्थपरायण बनें—दैवी अनुग्रह पाएँ
वातावरण-परिशोधन हेतु युगशिल्पियों का दायित्व