| प्रातः जागरण |
आत्मबोध - नित्य नया जन्म - सविता ईष्ट, लक्ष्य, उपास्य - सविता रूप में विद्यमान पूज्य गुरुसत्ता/ईश्वर/परमात्मा को आज के जीवन के लिए धन्यवाद और आज मिलने वाले सभी परिजनों को भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद। दिन भर की मानसिकता और कार्यों की संक्षिप्त रूपरेखा-योजना। मानवीयता का प्रथम गुण - कृतज्ञता। |
| प्रार्थना |
ईष्ट ध्यान - सविता देवता से प्रार्थना - हम क्या चाहते हैं? - दीक्षा में लिए गए व्रत के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प। |
| तीर्थक्षेत्र की पवित्रता, प्रखरता व प्रेरणाएँ |
गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित, यज्ञ ऊर्जा से ऊर्जित, स्वर्णिम किरणों से ओत-प्रोत प्रत्येक श्वाँस - पूज्य गुरुसत्ता का प्राण भरा स्नेह और गीतों-प्रवचनों-सद्वाक्यों के माध्यम से स्नेह भरी प्रेरणाएँ। |
| उषापान, ताड़ासन आदि |
स्वस्थ शरीर भगवान का मन्दिर। |
| स्वच्छता |
घर - शरीर - मन - अन्तःकरण की नियमित सफाई। |
| आरती |
विवेक की देवी गायत्री माता की आरती - विश्व में सभी के लिए सद्बुद्धि-सद्भाव की प्रार्थना। |
| सविता देवता की उपासना |
सविता देवता की गुणों-विशेषता का वर्णन और सभी के लिए पवित्रता - पात्रता की प्रार्थना। |
| मौन |
अन्तर्मुखी अभ्यास। |
| ध्यान |
मैं क्या हूँ? का प्रयोग रूप - गायत्री मंत्र से तीनों शरीरों का - पंचकोषों का जागरण और अभिमंत्रित होना। |
| प्रणाम व तीर्थ दर्शन |
अखण्ड दीप, गायत्री मन्दिर, भटका हुआ देवता, ऋषि-क्षेत्र, समाधि स्थल व देवात्मा हिमालय दर्शन - दिव्य सत्ताओं की अनुभ्ूति और उनके जीवन मूल्यों के प्रति आदर व कृतज्ञता के भाव। |
| सद्वाक्य |
दिव्य प्रेरणाएँ - सूक्ष्म शरीर की साधना। जीवन की समस्याओं का समाधान। |
| गीत |
प्रेरणा, प्रार्थना, प्रतिज्ञा-संकल्प - गीतों में जीवन की समस्याओं का समाधान। |
| यज्ञ |
सहयजन, सामूहिक मन, सद्भावों का सामूहिक जागरण, कर्मकाण्डों से प्रेरणा। |
| जप |
सहभजन, सविता देवता से प्रार्थना, अनुशासन, प्रतिज्ञा-संकल्प - गायत्री मंत्र के तत्त्व दर्शन को (भगवान् के अनुशासन को - ईश्वर-स्वयं-प्रकृति क्या-कैसा है? - क्या, क्यों, कैसे, कहाँ, कब करें?) बार-बार समझना-स्वीकारना - जीवन में अपनाना। |
| व्यायाम |
आसन, प्राणायाम, प्रज्ञायोग, मुद्रा, बन्ध - स्वस्थ शरीर भगवान का मन्दिर। |
| उदीयमान सूर्य का दर्शन |
प्रणाम - आत्म स्वरूप की अवधारणा - मैं क्या-कैसा हूँ? लक्ष्यबोध - साधक सविता एक - भक्त भगवान् एक। |
| ‘‘अपने अंग-अवयवों से’’ चिन्तन |
प्रतिदिन स्वाध्याय-स्वीेकारना - पूज्य गुरुसत्ता से आत्मीेयता के भाव का बढ़ना - एकत्व बोध - सजल श्रद्धा। |
| ‘‘युग निर्माण सत्संकल्प’’ चिन्तन |
प्रतिदिन स्वाध्याय-स्वीेकारना - पूज्य गुरुसत्ता के अनुशासन से स्वयं को अनुबन्धित करना - प्रखर प्रज्ञा। |
| अंकुरित अन्न |
जीवन्त भोजन - चलें प्रकृति की ओर। |
| सत्संग - सत्य का संग |
दिव्य प्रेरणाओं और सद्भावनाओं से अभिभूत होना - प्रवचन, ऑडियो-वीडियो या पुस्तकोंके माध्यम से। |
| सहभोजन |
सहभोजन, सामूहिक भोजन एक जैसा, भेदभाव रहित - भोजन परसना - आत्मीयता का विस्तार। |
| स्वाध्याय |
जीवन की मार्गदर्शक प्रेरणाएँ - महापुरुषों का सत्संग - आत्म निरीक्षण-परीक्षण व समीक्षा। |
| ध्यान दोपहर |
गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित होना, सवेरे से अभी तक की आत्मसमीक्षा - आत्म निरीक्षण-परीक्षण - चिन्तन-मनन। |
| श्रमदान |
सुव्यवस्था-स्वच्छता का व्यक्तिगत व सामूहिक अभ्यास, झूठे अहंकार का स्वयंसेवक भाव में परिवर्तन। |
| आरती |
साकार उपासना - ईष्ट गुणगान-चिन्तन और वैसा ही बनने-बनाने का संकल्प। |
| नादयोग |
मौन अन्तर्मुखी ॐकार नाद - भाव सम्वेदनाओं का - उदार आत्मीयता का जागरण-विस्तार। |
| रात्रि प्रार्थना |
तत्त्वबोध - दिन भर की मानसिकता व कार्यों की कठोर समीक्षा - क्षमा प्रार्थना - सभी के प्रति कृतज्ञता-आभार के भाव - अगले दिन की मानसिकता और कार्यों की संक्षिप्त रूपरेखा-योजना, प्रतिदिन प्रगति पथ पर चलने की चाह-संकल्प। |
अन्य प्रक्रियाएँ |
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| गायत्री मंत्र दीक्षा |
पूज्य गुरुसत्ता के जीवन का अनुकरण-अनुगमन का संकल्प - सविता रूप में पूज्य गुरुसत्ता का वरण - गायत्री मंत्र दीक्षा में लिए गए व्रत-अनुशासन-अनुबन्धों के अनुरूप महान जीवन जीने का संकल्प। |
| ज्ञानघट - अंशदान |
ज्ञान-यज्ञ के लिए उपार्जित धन-साधन का एक अंश लगाना। |
| अन्नघट |
ज्ञान-यज्ञ के लिए उपार्जित अन्न का एक अंश लगाना। |
| बलिवैश्व यज्ञ |
अन्न से बने मन - विश्व के सभी प्राणियों को देकर यज्ञ प्रसाद के रूप में भोजन प्रसाद ग्रहण करना। |
| जल अर्घ्य |
लघु का विभु में समर्पण-विसर्जन-विलय, व्यष्टि का समष्टि में समर्पण-विसर्जन-विलय। |
| दीपयज्ञ |
दैनिक, साप्ताहिक, पूर्णिमा - सविता देवता के प्रतिनिधि दीपकों के साथ यज्ञ। |
| जन्म दिन |
जीवन की महत्ता व लक्ष्य का चिन्तन-मनन। |
| विवाह दिन |
समूह जीवन की महत्ता व लक्ष्य का चिन्तन-मनन। |
| विभिन्न संस्कार - पुंसवन आदि। |
जीवन की महत्ता व लक्ष्य का चिन्तन-मनन और सामयिक मार्गदर्शन। |
| विभिन्न त्यौहार |
समूह जीवन की महत्ता व लक्ष्य का चिन्तन-मनन और सामयिक मार्गदर्शन। |
| हेमाद्रि संकल्प |
कर्मफल और पुनर्जन्म के सिद्धान्त को समझना, नए निर्धारण और प्रायश्चित करना - जैसा बोओ - वैसा काटो। |