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- व्यक्तित्व का परिष्कार - योग किसे कहते हैं? इसको कहेंगे—संस्कृति। संस्कृति क्या होती है? संस्कृति
- परमार्थ में ही छिपा है सच्चा स्वार्थ - है। योग किसे कहते हैं? बेटे! घुला देने को योग कहते हैं। घुला देना किसे कहते हैं? घुला देना यह है
- समस्त सिद्धियों का आधार तप - ध्यानयोग किसे कहते हैं? योग को। योग की व्याख्या कीजिए? योग की व्याख्या है—ध्यानयोग। ध्यानयोग के बहुत से तरीके हैं। इनमें
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - साथियो! योग किसे कहते हैं? योग क्रिया नहीं है, योग एक भावना
- परमार्थ में ही छिपा है सच्चा स्वार्थ - योग है। योग किसे कहते हैं? बेटे! घुला देने को योग कहते हैं। घुला देना किसे कहते हैं? घुला देना यह
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - को तैयार नहीं है। योग किसे कहते हैं? योग उसे कहते हैं, जो पूजा-पाठ का विकसित रूप है, जिसमें हम अमुक
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - योग और तप कहते हैं। योग किसे कहते हैं? बेटे! योग क्रियाओं का नाम नहीं है। इसे मैं तुझे समझाऊँगा, बार-बार
- अध्यात्म का पहला पाठ — कर्मयोग - का आश्रय लेना पड़ेगा। कर्मयोग किसे कहते हैं? कर्मयोग उसे कहते हैं, जिससे सम्पत्ति पैदा होती है, दौलत पैदा होती है
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - से देने को तैयार नहीं है। योग किसे कहते हैं? योग उसे कहते हैं, जो पूजा-पाठ का विकसित रूप है, जिसमें
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - जिसको हम योग और तप कहते हैं। योग किसे कहते हैं? बेटे! योग क्रियाओं का नाम नहीं है। इसे मैं तुझे
- अध्यात्म का पहला पाठ — कर्मयोग - हमको आ जाय, तब मजा आ जाय। कर्मयोग किसे कहते हैं? इस सम्बन्ध में हमने आपको एक बात यह बतायी थी
- समस्त सिद्धियों का आधार तप - और उसका नाम है—ध्यानयोग। ध्यानयोग किसे कहते हैं? योग को। योग की व्याख्या कीजिए? योग की व्याख्या है—ध्यानयोग। ध्यानयोग के बहुत
- तप और योग के मार्मिक पक्ष - और उसका नाम है-ध्यानयोग। ध्यानयोग किसे कहते हैं? योग को। योग की व्याख्या कीजिए। योग की व्याख्या है-ध्यानयोग। ध्यानयोग के बहुत
- समस्त सिद्धियों का आधार तप - चाहता हैं। उसका नाम है—‘योग।’ योग किसे कहते हैं? योग कहते हैं—परमात्मा से जुड़ने को। आज का ‘योगा’ अलग-अलग जगहों पर
- परमार्थ में ही छिपा है सच्चा स्वार्थ - देने का तरीका क्या है? योग है। योग किसे कहते हैं? बेटे! घुला देने को योग कहते हैं। घुला देना किसे
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - हो सकती है और उसका नाम है—योग। योग किसे कहते हैं? अपने आप को भगवान को सौंप देना। सौंप देने से
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - तरीके से देने को तैयार नहीं है। योग किसे कहते हैं? योग उसे कहते हैं, जो पूजा-पाठ का विकसित रूप है,
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - है, जिसको हम योग और तप कहते हैं। योग किसे कहते हैं? बेटे! योग क्रियाओं का नाम नहीं है। इसे मैं
- अध्यात्म का पहला पाठ — कर्मयोग - अगर हमको आ जाय, तब मजा आ जाय। कर्मयोग किसे कहते हैं? इस सम्बन्ध में हमने आपको एक बात यह बतायी
- नकद धर्म है अध्यात्म - जाती है, उसे उपभोग कहते हैं। और उपयोग किसे कहते हैं? उपयोग में हम यह नहीं देखते कि इसकी जरूरत किसके
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - ही हो सकती है और उसका नाम है—योग। योग किसे कहते हैं? अपने आप को भगवान को सौंप देना। सौंप देने
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - भी तरीके से देने को तैयार नहीं है। योग किसे कहते हैं? योग उसे कहते हैं, जो पूजा-पाठ का विकसित रूप
- परमार्थ में ही छिपा है सच्चा स्वार्थ - घुला देने का तरीका क्या है? योग है। योग किसे कहते हैं? बेटे! घुला देने को योग कहते हैं। घुला देना
- समस्त सिद्धियों का आधार तप - बताना चाहता हैं। उसका नाम है—‘योग।’ योग किसे कहते हैं? योग कहते हैं—परमात्मा से जुड़ने को। आज का ‘योगा’ अलग-अलग जगहों
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - वो है, जिसको हम योग और तप कहते हैं। योग किसे कहते हैं? बेटे! योग क्रियाओं का नाम नहीं है। इसे
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - एक ही हो सकती है और उसका नाम है—योग। योग किसे कहते हैं? अपने आप को भगवान को सौंप देना। सौंप
- नकद धर्म है अध्यात्म - कमाई जाती है, उसे उपभोग कहते हैं। और उपयोग किसे कहते हैं? उपयोग में हम यह नहीं देखते कि इसकी जरूरत
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - किसी भी तरीके से देने को तैयार नहीं है। योग किसे कहते हैं? योग उसे कहते हैं, जो पूजा-पाठ का विकसित
- समस्त सिद्धियों का आधार तप - हथियार है और उसका नाम है—ध्यानयोग। ध्यानयोग किसे कहते हैं? योग को। योग की व्याख्या कीजिए? योग की व्याख्या है—ध्यानयोग। ध्यानयोग
- तप और योग के मार्मिक पक्ष - हथियार है और उसका नाम है-ध्यानयोग। ध्यानयोग किसे कहते हैं? योग को। योग की व्याख्या कीजिए। योग की व्याख्या है-ध्यानयोग। ध्यानयोग
- परमार्थ में ही छिपा है सच्चा स्वार्थ - दें। घुला देने का तरीका क्या है? योग है। योग किसे कहते हैं? बेटे! घुला देने को योग कहते हैं। घुला
- समस्त सिद्धियों का आधार तप - उसको बताना चाहता हैं। उसका नाम है—‘योग।’ योग किसे कहते हैं? योग कहते हैं—परमात्मा से जुड़ने को। आज का ‘योगा’ अलग-अलग
- अध्यात्म का पहला पाठ — कर्मयोग - कर्मयोग अगर हमको आ जाय, तब मजा आ जाय। कर्मयोग किसे कहते हैं? इस सम्बन्ध में हमने आपको एक बात यह
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - कीमत एक ही हो सकती है और उसका नाम है—योग। योग किसे कहते हैं? अपने आप को भगवान को सौंप देना।
- नकद धर्म है अध्यात्म - लिए कमाई जाती है, उसे उपभोग कहते हैं। और उपयोग किसे कहते हैं? उपयोग में हम यह नहीं देखते कि इसकी
- समस्त सिद्धियों का आधार तप - ही हथियार है और उसका नाम है—ध्यानयोग। ध्यानयोग किसे कहते हैं? योग को। योग की व्याख्या कीजिए? योग की व्याख्या है—ध्यानयोग।
- तप और योग के मार्मिक पक्ष - ही हथियार है और उसका नाम है-ध्यानयोग। ध्यानयोग किसे कहते हैं? योग को। योग की व्याख्या कीजिए। योग की व्याख्या है-ध्यानयोग।
- दो ही सम्पत्ति, दो ही विभूति: योग एवं तप - चीज किसी भी तरीके से देने को तैयार नहीं है। योग किसे कहते हैं? योग उसे कहते हैं, जो पूजा-पाठ का