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- सादा जीवन—उच्च विचार - है? तो क्या वहाँ खीर खाने जाएँगे? उसके लिए यहाँ स्वर्ग होता है, हमें यह स्वर्ग चाहिए जहाँ व्यक्ति हमारा स्वर्ग
- गायत्री उपासना का प्रतिफल - है? तो क्या वहाँ खीर खाने जाएँगे? उसके लिए वहाँ स्वर्ग होता है, हमें यह स्वर्ग चाहिए, जहाँ व्यक्ति हमारा स्वर्ग
- आत्मदेव की साधना-आराधना - होता है? स्वर्गलोक में होता है। इसकी क्या विशेषता होती है? इसकी विशेषता मैंने यह सुनी है कि जो कोई उस
- मनुष्य एक भटका हुआ देवता - होता है? स्वर्गलोक में होता है। इसकी क्या विशेषता होती है? इसकी विशेषता मैंने यह सुनी है कि जो कोई उस
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं नरक की मान्यतायें सही है? (४) सूक्ष्म व स्थूल शरीर में क्या भेद है। (५)
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं नरक की मान्यतायें सही है? (४) सूक्ष्म व स्थूल
- आत्मदेव की साधना-आराधना - होता है। कहाँ होता है? स्वर्गलोक में होता है। इसकी क्या विशेषता होती है? इसकी विशेषता मैंने यह सुनी है कि
- मनुष्य एक भटका हुआ देवता - होता है। कहाँ होता है? स्वर्गलोक में होता है। इसकी क्या विशेषता होती है? इसकी विशेषता मैंने यह सुनी है कि
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं नरक की मान्यतायें सही है? (४) सूक्ष्म व
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - सफलता का आधार क्या है? (८) पाणिग्रहण की महत्ता क्या है? (९) दाम्पत्य जीवन में स्वर्ग उतारने की व्यवहारिक योजना बनाइये।
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं नरक की मान्यतायें सही है? (४)
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - की सफलता का आधार क्या है? (८) पाणिग्रहण की महत्ता क्या है? (९) दाम्पत्य जीवन में स्वर्ग उतारने की व्यवहारिक योजना
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - (८) पाणिग्रहण की महत्ता क्या है? (९) दाम्पत्य जीवन में स्वर्ग उतारने की व्यवहारिक योजना बनाइये। कथाएँ —— (१) च्यवन समाधि
- गर पूछे कोई मुझसे तो मैं कहूँ कि स्वर्ग बस यहीं है - है। तो फिर आपको क्या मिलने वाला है? आप कब स्वर्ग जायेंगे? उन्होंने कहा कि स्वर्ग जाने वालों में मैं आखिरी
- परिष्कृत मनःस्थिति ही स्वर्ग है - है। क्या वास्तव में स्वर्ग है? किसी ने देखा है स्वर्ग को? किसी ने देखा हो या नहीं, लेकिन मित्रो! मैंने
- सादा जीवन—उच्च विचार - फिर देख तेरे पेट की क्या हालत होती है? तो क्या वहाँ खीर खाने जाएँगे? उसके लिए यहाँ स्वर्ग होता है,
- गायत्री उपासना का प्रतिफल - फिर देख तेरे पेट की क्या हालत होती है? तो क्या वहाँ खीर खाने जाएँगे? उसके लिए वहाँ स्वर्ग होता है,
- वासन्ती हूक, उमंग और उल्लास यदि आ जाए जीवन में - स्वर्ग के वातावरण का क्या मतलब है? अच्छे वातावरण को स्वर्ग बैकुण्ठ में ही नहीं वरन् जमीन पर भी हो सकता
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 71-80 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - तब क्या स्वर्ग-नरक मात्र कल्पना भर है? कर्मों के फल प्राप्त करने
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 71-80 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - तब क्या स्वर्ग-नरक मात्र कल्पना भर है? कर्मों के फल प्राप्त करने के लिए कोई माध्यम नहीं
- आत्मदेव की साधना-आराधना - मैंने सुना है कि एक कल्पवृक्ष होता है। कहाँ होता है? स्वर्गलोक में होता है। इसकी क्या विशेषता होती है? इसकी
- मनुष्य एक भटका हुआ देवता - मैंने सुना है कि एक कल्पवृक्ष होता है। कहाँ होता है? स्वर्गलोक में होता है। इसकी क्या विशेषता होती है? इसकी
- कर्मकाण्ड की प्रेरणाओं में छिपा अध्यात्म - की यात्रा करने के बाद में अब क्या हो सकता है? बैकुंठ जाना पड़ेगा। अच्छा! और? स्वर्गलोक जाना पड़ेगा। अच्छा! और?
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - की यात्रा करने के बाद में अब क्या हो सकता है? वैकुंठ जाना पड़ेगा। अच्छा! और? स्वर्गलोक जाना पड़ेगा। अच्छा! और?
- सादा जीवन—उच्च विचार - खा लें फिर देख तेरे पेट की क्या हालत होती है? तो क्या वहाँ खीर खाने जाएँगे? उसके लिए यहाँ स्वर्ग
- गायत्री उपासना का प्रतिफल - खा लें, फिर देख तेरे पेट की क्या हालत होती है? तो क्या वहाँ खीर खाने जाएँगे? उसके लिए वहाँ स्वर्ग
- वासन्ती हूक, उमंग और उल्लास यदि आ जाए जीवन में - धरती पर स्वर्ग के वातावरण का क्या मतलब है? अच्छे वातावरण को स्वर्ग
- वासन्ती हूक, उमंग और उल्लास यदि आ जाए जीवन में - धरती पर स्वर्ग के वातावरण का क्या मतलब है? अच्छे वातावरण को स्वर्ग बैकुण्ठ में ही नहीं
- वासन्ती हूक, उमंग और उल्लास यदि आ जाए जीवन में - धरती पर स्वर्ग के वातावरण का क्या मतलब है? अच्छे वातावरण को स्वर्ग बैकुण्ठ में ही नहीं वरन् जमीन
- नकद धर्म है अध्यात्म - शास्त्रों में पढ़ा था कि मरने के बाद क्या होता है? कोई कहता है कि मरने के बाद में हम स्वर्गलोक
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 71-80 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - उसे अपना जीवन सुधारना चाहिए। स्वर्ग और नरक कहाँ है? क्या वस्तुतः मरणोत्तर जीवन में आत्मा ऐसे किसी लोक, नगर, ग्राम,
- गर पूछे कोई मुझसे तो मैं कहूँ कि स्वर्ग बस यहीं है - मिलने वाला नहीं है। तो फिर आपको क्या मिलने वाला है? आप कब स्वर्ग जायेंगे? उन्होंने कहा कि स्वर्ग जाने वालों
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि परम्परा - पर है। इसलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए जब पांडव गए थे तो यहीं
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि-परम्परा - पर है। इसीलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए जब पाण्डव गये थे तो यहीं
- विचारक्रान्ति जन-जन तक फैलाएँ - स्वर्ग क्या होता है और नरक क्या होता है? खुदगर्ज क्या होता है और परोपकारी क्या होता है? ब्राह्मणत्व क्या होता
- गुरुसत्ता को श्रद्धांजलि - स्वर्ग क्या होता है और नरक क्या होता है? खुदगर्ज क्या होता है और परोपकारी क्या होता है?
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-2 - युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नाटकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि परम्परा - उसी पर है। इसलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए जब पांडव गए थे तो
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि-परम्परा - उसी पर है। इसीलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए जब पाण्डव गये थे तो
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - आपकी जानकारी नहीं है। स्वर्ग कैसा होता है, आपको मालूम है? नहीं मालूम है, इसलिए मैं आपसे क्या कहूँ। मुक्ति किसे
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 71-80 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - इसलिए उसे अपना जीवन सुधारना चाहिए। स्वर्ग और नरक कहाँ है? क्या वस्तुतः मरणोत्तर जीवन में आत्मा ऐसे किसी लोक, नगर,
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला जा सकता है? (३) मानवीय सुख-शान्ति बढ़ाने के लिए आजकल क्या किया जाता
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला जा सकता है? (३) मानवीय सुख-शान्ति बढ़ाने के लिए आजकल क्या किया जाता
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला जा सकता है? (३) मानवीय सुख-शान्ति बढ़ाने के लिए आजकल क्या किया जाता
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला जा सकता है? (३) मानवीय सुख-शान्ति बढ़ाने के लिए आजकल क्या किया जाता
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला जा सकता है? (३) मानवीय सुख-शान्ति बढ़ाने के लिए आजकल क्या किया जाता
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-2 - नाटकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे बदला जा सकता है? (३) मानवीय सुख-शान्ति बढ़ाने के लिये आजकल क्या किया जाता
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - पड़ती है चारों ओर। इसका नाम है स्वर्ग। नर्क क्या है? नर्क उसी का नाम है कि जहाँ कहीं भी हम
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - इसी जीवन में सम्भव है प्रश्न —— (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - पर लेकर पन्द्रह दिन घूमें। क्या यह स्वर्ग से कम है? आज आदमी इसी तरीके से विचार करता है। आध्यात्मिकता की
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - (१) युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - (१) युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-2 - (१) युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नाटकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - (१) युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - (१) युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - (१) युग की अशान्ति, आशंका एवं असन्तोष का मूल कारण क्या है? (२) वर्तमान नारकीय वातावरण को स्वर्गीय सुषमा में कैसे
- गुरुतत्त्व की गरिमा और महिमा - हैं। स्वर्ग सोचने का एक तरीका है। किताब में क्या है? वह तो काला अक्षर भर है। हर चीज की गहराई
- भारतीय संस्कृति के निर्माता—यज्ञ पिता, गायत्री माता - मुझे नामंजूर है। स्वर्ग को जाने के लिए जरूरी क्या है? एक बार ऐसा हुआ कि हजरत इब्राहिम जन्नत में गये,
- कर्मकाण्ड की प्रेरणाओं में छिपा अध्यात्म - साहब! चारों धाम की यात्रा करने के बाद में अब क्या हो सकता है? बैकुंठ जाना पड़ेगा। अच्छा! और? स्वर्गलोक जाना
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - साहब! चारों धाम की यात्रा करने के बाद में अब क्या हो सकता है? वैकुंठ जाना पड़ेगा। अच्छा! और? स्वर्गलोक जाना
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि परम्परा - पर्वत उसी पर है। इसलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए जब पांडव गए थे
- गुरुतत्त्व की गरिमा और महिमा - आते हैं। स्वर्ग सोचने का एक तरीका है। किताब में क्या है? वह तो काला अक्षर भर है। हर चीज की
- आत्मदेव की साधना-आराधना - वहीं अपने लिए स्वर्ग बना लूँगा।" क्या ऐसा होना सम्भव है? हाँ, ऐसा सम्भव है। आदमी अपने श्रेष्ठ गुण, श्रेष्ठ विचार,
- भारतीय संस्कृति के निर्माता—यज्ञ पिता, गायत्री माता - तो मुझे नामंजूर है। स्वर्ग को जाने के लिए जरूरी क्या है? एक बार ऐसा हुआ कि हजरत इब्राहिम जन्नत में
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि-परम्परा - पर्वत उसी पर है। इसीलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए जब पाण्डव गये थे
- मनुष्य एक भटका हुआ देवता - वहीं अपने लिए स्वर्ग बना लूँगा।'' क्या ऐसा होना सम्भव है? हाँ ऐसा सम्भव है। आदमी अपने श्रेष्ठ गुण, श्रेष्ठ विचार,
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - आनन्द इसी जीवन में सम्भव है प्रश्न —— (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह
- विचारक्रान्ति जन-जन तक फैलाएँ - बताएँगे कि स्वर्ग क्या होता है और नरक क्या होता है? खुदगर्ज क्या होता है और परोपकारी क्या होता है? ब्राह्मणत्व
- गुरुसत्ता को श्रद्धांजलि - बताएँगे कि स्वर्ग क्या होता है और नरक क्या होता है? खुदगर्ज क्या होता है और परोपकारी क्या होता है?
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - दिखायी पड़ती है चारों ओर। इसका नाम है स्वर्ग। नर्क क्या है? नर्क उसी का नाम है कि जहाँ कहीं भी
- आ रहा है युगावतार, प्रज्ञावतार - इस धरती पर स्वर्ग बनकर रहेगा। गुरुजी! आपकी प्लानिंग क्या है? बेटे हमारी प्लानिंग सारे विश्व के लिए है। अतः गायत्री
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - का आनन्द इसी जीवन में सम्भव है प्रश्न —— (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है?
- युग-साधना में भागीदारी की दावत - हैं। स्वर्ग में खुशहाली आती है, मस्ती आती है। यह क्या चीज है? बेटे! यह हमारी अन्तरात्मा का, अन्त:करण का गुण
- आत्मदेव की साधना-आराधना - दिया था और स्वर्ग बनाने में सफल हो गए थे। क्या ऐसा हो सकता है? हाँ बेटे! हो सकता है। जहाँ
- मनुष्य एक भटका हुआ देवता - दिया था और स्वर्ग बनाने में सफल हो गए थे। क्या ऐसा हो सकता है? हाँ बेटे! हो सकता है। जहाँ
- परिष्कृत मनःस्थिति ही स्वर्ग है - पास जाने से स्वर्ग मिलता है। क्या वास्तव में स्वर्ग है? किसी ने देखा है स्वर्ग को? किसी ने देखा हो
- आ रहा है युगावतार, प्रज्ञावतार - कि इस धरती पर स्वर्ग बनकर रहेगा। गुरुजी! आपकी प्लानिंग क्या है? बेटे हमारी प्लानिंग सारे विश्व के लिए है। अतः
- विचारक्रान्ति जन-जन तक फैलाएँ - और हम बताएँगे कि स्वर्ग क्या होता है और नरक क्या होता है? खुदगर्ज क्या होता है और परोपकारी क्या होता
- गुरुसत्ता को श्रद्धांजलि - और हम बताएँगे कि स्वर्ग क्या होता है और नरक क्या होता है? खुदगर्ज क्या होता है और परोपकारी क्या होता
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - क्या खाते हैं? अमृत खाते हैं। स्वर्गलोक में क्या रहता है? अमृत रहता है। हम आपको अमृतपान कराएँगे, जो आपने कभी
- कर्मकाण्ड की प्रेरणाओं में छिपा अध्यात्म - क्या खाते हैं? अमृत खाते हैं। स्वर्गलोक में क्या रहता है? अमृत रहता है। हम आपको अमृतपान कराएँगे, जो आपने कभी
- परिष्कृत मनःस्थिति ही स्वर्ग है - के पास जाने से स्वर्ग मिलता है। क्या वास्तव में स्वर्ग है? किसी ने देखा है स्वर्ग को? किसी ने देखा
- अखण्ड ज्योति पत्रिका से संकलित पूज्य गुरुदेव के प्रवचन - स्वर्ग समान Feb 2010 ऑडियो सुनें (130): आध्यात्मिक शिक्षण क्या है? Apr 2010 ऑडियो सुनें (131): सही अध्यात्म जीवन में आ
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 71-80 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - बाद उसे नरक मिलेगा, इसलिए उसे अपना जीवन सुधारना चाहिए। स्वर्ग और नरक कहाँ है? क्या वस्तुतः मरणोत्तर जीवन में आत्मा
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - वहाँ शिकारा किराये पर लेकर पन्द्रह दिन घूमें। क्या यह स्वर्ग से कम है? आज आदमी इसी तरीके से विचार करता
- अखण्ड ज्योति पत्रिका से संकलित पूज्य गुरुदेव के प्रवचन - धरती स्वर्ग समान Feb 2010 ऑडियो सुनें (130): आध्यात्मिक शिक्षण क्या है? Apr 2010 ऑडियो सुनें (131): सही अध्यात्म जीवन में
- आत्मदेव की साधना-आराधना - में भेज दो, मैं वहीं अपने लिए स्वर्ग बना लूँगा।" क्या ऐसा होना सम्भव है? हाँ, ऐसा सम्भव है। आदमी अपने
- गर पूछे कोई मुझसे तो मैं कहूँ कि स्वर्ग बस यहीं है - कहा-नहीं, मुझे स्वर्ग मिलने वाला नहीं है। तो फिर आपको क्या मिलने वाला है? आप कब स्वर्ग जायेंगे? उन्होंने कहा कि
- मनुष्य एक भटका हुआ देवता - में भेज दो, मैं वहीं अपने लिए स्वर्ग बना लूँगा।'' क्या ऐसा होना सम्भव है? हाँ ऐसा सम्भव है। आदमी अपने
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - देवता लोग क्या खाते हैं? अमृत खाते हैं। स्वर्गलोक में क्या रहता है? अमृत रहता है। हम आपको अमृतपान कराएँगे, जो
- कर्मकाण्ड की प्रेरणाओं में छिपा अध्यात्म - देवता लोग क्या खाते हैं? अमृत खाते हैं। स्वर्गलोक में क्या रहता है? अमृत रहता है। हम आपको अमृतपान कराएँगे, जो
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि परम्परा - गया, लेकिन यह कैलाश पर्वत उसी पर है। इसलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए
- देवात्मा हिमालय एवं ऋषि-परम्परा - गया। लेकिन यह कैलाश पर्वत उसी पर है। इसीलिए यह स्वर्ग भी है। हिमालय क्या है? स्वर्ग है। स्वर्गारोहण के लिए
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - वर्तमान प्रगति की वस्तुस्थिति खुली आँखों से— हमें पूर्वजों से क्या मिला? हमने अपने बच्चों को क्या दिया?— 6E's – Empathy
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - से— हमें पूर्वजों से क्या मिला? हमने अपने बच्चों को क्या दिया?— 6E's – Empathy > Energy > Ecology > Environment
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - असंख्यों बवण्डर क्यों और कैसे घसीटती, बटोरती चली जा रही है? मनुष्य जाति आज जिस दिशा में चल पड़ी है, उससे
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - हमें पूर्वजों क्या मिला? हमने अपने बच्चों को क्या दिया?—
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - हमें पूर्वजों क्या मिला? हमने अपने बच्चों को क्या दिया?—