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- गायत्री उपासना का प्रतिफल - रावण कैसा बलशाली था? क्या कहने का, चारों वेदों का ज्ञाता,
- सादा जीवन—उच्च विचार - रहे, तो उस उपासना से क्या लाभ? रावण कैसा बलशाली था? क्या कहने का, चारों वेदों का ज्ञाता तेजस्वी, बलशाली, सारे
- सादा जीवन—उच्च विचार - बने रहे, तो उस उपासना से क्या लाभ? रावण कैसा बलशाली था? क्या कहने का, चारों वेदों का ज्ञाता तेजस्वी, बलशाली,
- सादा जीवन—उच्च विचार - ही बने रहे, तो उस उपासना से क्या लाभ? रावण कैसा बलशाली था? क्या कहने का, चारों वेदों का ज्ञाता तेजस्वी,
- सादा जीवन—उच्च विचार - जैसे-तैसे ही बने रहे, तो उस उपासना से क्या लाभ? रावण कैसा बलशाली था? क्या कहने का, चारों वेदों का ज्ञाता
- मैं ढूँढ़ता तुझे था, जब कुञ्ज और वन में - रहा था, तेरा प्रताप धन में॥ मैं सोचता तुझे था, रावण की लालसा में। पर था दधीचि के तू, परमार्थ रूप
- ओजस्वी, तेजस्वी एवं मनस्वी व्यक्तित्वों का निर्माण - मनस्वी कैसा होता है? मनस्वी ऐसा होता है जो मन का मालिक
- ओजस्वी, तेजस्वी एवं मनस्वी व्यक्तित्वों का निर्माण - ऊपर हावी बना रहता है कि हमारी महत्त्वाकांक्षाएँ, हमारा अहंकार रावण के बराबर होनी चाहिए, हमारी अमीरी हिरण्यकश्यपु के बराबर होनी
- ओजस्वी, तेजस्वी एवं मनस्वी व्यक्तित्वों का निर्माण - पर हम विचार करते हैं कि नये युग का आदमी कैसा होगा? मनुष्य में से देवता उदय होगा तो कैसा होगा?
- ओजस्वी, तेजस्वी एवं मनस्वी व्यक्तित्वों का निर्माण - आदमी कैसा होगा? मनुष्य में से देवता उदय होगा तो कैसा होगा? मनुष्य में से देवता उदय होने से सिर्फ एक