Search Results
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - समझता तो है नहीं कि मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र कहते हैं—विचारों को। तीखे वाले विचार, गहरे वाले विचार, सिद्धान्तवादी विचार,
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - विचार कहलाते हैं और मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र उसे कहते हैं, जिसमें संकल्प जुड़े हुए होते हैं, निष्ठाएँ जुड़ी हुई
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - तू समझता तो है नहीं कि मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र कहते हैं—विचारों को। तीखे वाले विचार, गहरे वाले विचार, सिद्धान्तवादी
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - बेटे, तू समझता तो है नहीं कि मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र कहते हैं—विचारों को। तीखे वाले विचार, गहरे वाले विचार,
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - होती। ये विचार कहलाते हैं और मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र उसे कहते हैं, जिसमें संकल्प जुड़े हुए होते हैं, निष्ठाएँ
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - नहीं होती। ये विचार कहलाते हैं और मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र उसे कहते हैं, जिसमें संकल्प जुड़े हुए होते हैं,
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - जाये। बेटे, तू समझता तो है नहीं कि मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र कहते हैं—विचारों को। तीखे वाले विचार, गहरे वाले
- परिष्कृत तपःपूत वाणी से होते हैं चमत्कार - समाप्त होता है। किसका? शृंगी ऋषि का। मंत्र किसे कहते हैं? ऋषि की वाणी से निकला हुआ वचन मंत्र होता है।
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - हो जाये। बेटे, तू समझता तो है नहीं कि मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र कहते हैं—विचारों को। तीखे वाले विचार, गहरे
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - तैयारी नहीं होती। ये विचार कहलाते हैं और मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र उसे कहते हैं, जिसमें संकल्प जुड़े हुए होते
- परिष्कृत तपःपूत वाणी से होते हैं चमत्कार - अध्याय समाप्त होता है। किसका? शृंगी ऋषि का। मंत्र किसे कहते हैं? ऋषि की वाणी से निकला हुआ वचन मंत्र होता
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - अच्छी हो जाये। बेटे, तू समझता तो है नहीं कि मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र कहते हैं—विचारों को। तीखे वाले विचार,
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - कोई तैयारी नहीं होती। ये विचार कहलाते हैं और मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र उसे कहते हैं, जिसमें संकल्प जुड़े हुए
- परिष्कृत तपःपूत वाणी से होते हैं चमत्कार - पहला अध्याय समाप्त होता है। किसका? शृंगी ऋषि का। मंत्र किसे कहते हैं? ऋषि की वाणी से निकला हुआ वचन मंत्र
- मनुष्य शरीर की वास्तविक संपदाएँ - होती, कोई तैयारी नहीं होती। ये विचार कहलाते हैं और मंत्र किसे कहते हैं? मंत्र उसे कहते हैं, जिसमें संकल्प जुड़े
- परिष्कृत तपःपूत वाणी से होते हैं चमत्कार - और पहला अध्याय समाप्त होता है। किसका? शृंगी ऋषि का। मंत्र किसे कहते हैं? ऋषि की वाणी से निकला हुआ वचन
- परिष्कृत तपःपूत वाणी से होते हैं चमत्कार - किसे कहते हैं? ऋषि की वाणी से निकला हुआ वचन मंत्र होता है। मंत्र की बनावट के ऊपर मत जाइए। नहीं
- गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य - चराइए। नन्दिनी किसे कहते हैं? नन्दिनी बेटे गायत्री मंत्र को कहते हैं। हमारी नन्दिनी गौ को चराइए। रानी ने और उन्होंने
- गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य - कहा—नन्दिनी गौ चराइए। नन्दिनी किसे कहते हैं? नन्दिनी बेटे गायत्री मंत्र को कहते हैं। हमारी नन्दिनी गौ को चराइए। रानी ने
- भारतीय संस्कृति का मूल—गायत्री महामंत्र - कहते हैं, नमक एवं शक्कर किसे कहते हैं? हमने गायत्री मंत्र की उपासना अवश्य की है, परन्तु हमारे बॉस तथा हमारे
- गायत्री साधना की उपलब्धियाँ - को गायत्री मंत्र कहते हैं। प्राण किसे कहते हैं? प्राण कहते हैं, बेटे! हिम्मत को, प्राण कहते हैं, जीवट को और
- देव-संस्कृति का बीज मंत्र—गायत्री महामंत्र - संस्कृति का बीज मंत्र—गायत्री महामंत्र - वेद मंत्र का एक विनियोग होता है। विनियोग किसे कहते हैं? विनियोग संकल्प को कहते हैं। संकल्प में क्या होता है?
- गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य - पास गये तो उन्होंने कहा—नन्दिनी गौ चराइए। नन्दिनी किसे कहते हैं? नन्दिनी बेटे गायत्री मंत्र को कहते हैं। हमारी नन्दिनी गौ
- भारतीय संस्कृति का मूल—गायत्री महामंत्र - कि गेहूँ किसे कहते हैं, नमक एवं शक्कर किसे कहते हैं? हमने गायत्री मंत्र की उपासना अवश्य की है, परन्तु हमारे
- गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य - के पास गये तो उन्होंने कहा—नन्दिनी गौ चराइए। नन्दिनी किसे कहते हैं? नन्दिनी बेटे गायत्री मंत्र को कहते हैं। हमारी नन्दिनी
- गायत्री महाविद्या की उच्चस्तरीय साधना - मंत्र की शक्ल और सूरत हमको बताइए कि गायत्री माता किसे कहते हैं? गायत्री माता उसे कहते हैं बेटे, जो एक
- देव-संस्कृति का बीज मंत्र—गायत्री महामंत्र - संस्कृति का बीज मंत्र—गायत्री महामंत्र - प्रत्येक वेद मंत्र का एक विनियोग होता है। विनियोग किसे कहते हैं? विनियोग संकल्प को कहते हैं। संकल्प में क्या होता
- गायत्री साधना की उपलब्धियाँ - करने वाले को गायत्री मंत्र कहते हैं। प्राण किसे कहते हैं? प्राण कहते हैं, बेटे! हिम्मत को, प्राण कहते हैं, जीवट
- भारतीय संस्कृति का मूल—गायत्री महामंत्र - जाना कि गेहूँ किसे कहते हैं, नमक एवं शक्कर किसे कहते हैं? हमने गायत्री मंत्र की उपासना अवश्य की है, परन्तु
- गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य - गुरु के पास गये तो उन्होंने कहा—नन्दिनी गौ चराइए। नन्दिनी किसे कहते हैं? नन्दिनी बेटे गायत्री मंत्र को कहते हैं। हमारी
- देव-संस्कृति का बीज मंत्र—गायत्री महामंत्र - संस्कृति का बीज मंत्र—गायत्री महामंत्र - हैं। प्रत्येक वेद मंत्र का एक विनियोग होता है। विनियोग किसे कहते हैं? विनियोग संकल्प को कहते हैं। संकल्प में क्या
- भारतीय संस्कृति का मूल—गायत्री महामंत्र - नहीं जाना कि गेहूँ किसे कहते हैं, नमक एवं शक्कर किसे कहते हैं? हमने गायत्री मंत्र की उपासना अवश्य की है,
- गायत्री साधना की उपलब्धियाँ - त्राण करने वाले को गायत्री मंत्र कहते हैं। प्राण किसे कहते हैं? प्राण कहते हैं, बेटे! हिम्मत को, प्राण कहते हैं,
- गायत्री साधना की उपलब्धियाँ - का त्राण करने वाले को गायत्री मंत्र कहते हैं। प्राण किसे कहते हैं? प्राण कहते हैं, बेटे! हिम्मत को, प्राण कहते
- गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य - मंत्र कहते हैं। शब्दार्थ ये होता है गायत्री का। प्राण किसे कहते हैं? प्राण कहते हैं बेटे हिम्मत को, प्राण कहते
- गायत्री साधना की उपलब्धियाँ - देने वाली, प्राण का त्राण करने वाले को गायत्री मंत्र कहते हैं। प्राण किसे कहते हैं? प्राण कहते हैं, बेटे! हिम्मत
- भारतीय संस्कृति का मूल—गायत्री महामंत्र - हमने इन दिनों में यह नहीं जाना कि गेहूँ किसे कहते हैं, नमक एवं शक्कर किसे कहते हैं? हमने गायत्री मंत्र
- गायत्री साधना की उपलब्धियाँ - ताकत देने वाली, प्राण का त्राण करने वाले को गायत्री मंत्र कहते हैं। प्राण किसे कहते हैं? प्राण कहते हैं, बेटे!