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अवांछनीयता अपना कर हमने क्या खोया?... क्या पाया? इस प्रश्न पर गम्भीरता पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। प्रकृति प्रदत्त सुविधाओं का उपभोग करन...
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आहार में इस बात का महत्त्व कम है कि क्या खाया गया, तथ्य इसमें है कि कैसे खाया जाय?... साधारण रोटी, दाल, शाक जो भारत जैसे गरीब देश की बहुसंख्यक जनता के लिए सम्भव है, उसी के सहारे स्वास्थ्...
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इस पीड़ित नारी से नर को क्या लाभ मिला?... उसे असहाय बना कर किसने क्या पाया? घर परिवार के लोगों की इससे क्या सुविधा बढ़ी? पति को उससे क्या सहयो...
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किसी बच्चे के बारे में उसके विवाह की बात सोचते समय सबसे पहले यह देखने की आवश्यकता है कि क्या वह उस गुरुतर जिम्मेदारी को वहन कर सकने के योग्य हो गया?... यदि भली प्रकार ठीक जानने के उपरान्त उत्तर हाँ में मिलता हो तो ही उस बात को आगे बढ़ाना चाहिए। इस संदर...
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ज्ञान दान का यह ब्रह्मभोज सम्पन्न कैसे किया जाय?... इसके लिए बहुत अधिक माथापच्ची करने की आवश्यकता नहीं है। शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार एवं गायत्री तपोभूमि, मथ...
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परिवार के छोटे-बड़े सदस्यों के विकास के लिए जब समय और धन की कमी अनुभव हो रही है तो उन्हें उस आवश्यकता से वंचित रखकर नई जिम्मेदारी बढ़ाने में क्या बुद्धिमत्ता?... अपनी और अपनी पत्नी के शारीरिक, मानसिक विकास की स्थिति यदि पूर्णता की स्थिति तक पहुँच गई हो तो फालतू ...
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पर्दे के पक्ष में क्या तर्क हो सकता है?... उससे किसे क्या लाभ मिल सकता है? उसका प्रचलन किन कारणों को लेकर चल पड़ा? इन प्रश्नों का कोई विवेक सम्...
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पाठशाला कहाँ चले?... इसके लिये उपयुक्त स्थान ही चुनना चाहिए। जहाँ उस क्षेत्र की महिलाएँ आसानी से पहुँच सकें—बैठने, पढ़ने ...
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वे हिमालय रहेंगे या शान्तिकुञ्ज?... इस स्थान परिवर्तन का कुछ भी महत्त्व नहीं। व्यक्ति कहीं भी रहे धरती भी वही रहेगी और काया भी वैसी ही, ...
- इतने साधन वह कहाँ से कैसे जुटावेगी?... जुटावेगी तो नये टैक्सों से जनता की कमर ही टूट जायगी। यह कार्य हमें जनता स्तर पर ही करना होगा और उसकी...
- इस पर्दे से हानि ही हानि है, अनौचित्य ही अनौचित्य है, फिर उसे क्यों पकड़े-जकड़े रहा जाय?... नारी के बिगड़े हुए स्वास्थ्य की ओर प्रत्येक ईमानदार पति को तत्काल ध्यान देना चाहिए। उसके आहार-विहार ...
- इस स्थिति में महिलाओं का स्वास्थ्य क्यों कर नष्ट न होगा?... नारी यदि कल अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राप्त कर सके तो वह स्वर्ग की अप्सरा बन कर इन्हीं ट...
- उनके समान मूर्तिकार, चित्रकार, कलाकार कौन हो सकता है?... उनसे अधिक आकर्षक, सुन्दर, कलात्मक, कोमल कला कृति इस संसार में दूसरी नहीं है। परमेश्वर ने अपना सारा द...
- उसका प्रचलन किन कारणों को लेकर चल पड़ा?... इन प्रश्नों का कोई विवेक सम्मत उत्तर नहीं मिलता। प्राचीन भारत की महान परम्पराओं का पर्यवेक्षण करने प...
- उसका साहस करने से पूर्व सौ बार विचार करना चाहिए कि प्रस्तुत उत्तरदायित्वों को पूरा करने के उपरान्त क्या उनके पास इतनी क्षमता बचती है कि नये मेहमान को बुलाया जाय?... सोचना चाहिए कि माँ के शरीर में नये शरीर को जन्म देने योग्य प्रसव वेदना सहन करने योग्य क्षमता है या न...
- उससे किसे क्या लाभ मिल सकता है?... उसका प्रचलन किन कारणों को लेकर चल पड़ा? इन प्रश्नों का कोई विवेक सम्मत उत्तर नहीं मिलता। प्राचीन भार...
- उसे असहाय बना कर किसने क्या पाया?... घर परिवार के लोगों की इससे क्या सुविधा बढ़ी? पति को उससे क्या सहयोग मिला? बच्चे क्या अनुदान पा सके? ...
- ऐसी स्थिति में ब्राह्मण-परम्परा का निर्वाह कैसे हो?... क्या उपयुक्त व्यक्तित्वों के अभाव मात्र से किसी श्रेष्ठ परम्परा का लोप हो जाना चाहिए? समाज की प्रगति...
- क्या उपयुक्त व्यक्तित्वों के अभाव मात्र से किसी श्रेष्ठ परम्परा का लोप हो जाना चाहिए?... समाज की प्रगति अवरुद्ध हो जानी चाहिए? नहीं ! समय और परिस्थिति के अनुरूप रीति-रिवाज बदलते रहे हैं और ...
- क्या कर रही हैं?... यह तथ्य यदि उन्हें सुनाये जाते रहें तो सहज ही अभिनव प्रेरणा उत्पन्न होगी और प्रगति की दिशा में कुछ क...
- खाने को उन्हें बहुमूल्य भोजन कहाँ मिलता है?... सर्दी-गर्मी से बचने का भी प्रबन्ध नहीं होता। गाड़ी की छाया में ही गुजर कर लेते हैं, फिर भी उनके शरीर...
- गंगा की उलटी धारा बहने कैसे लगी?... सूर्य पच्छिम से उदय और पूर्व में अस्त कैसे हो रहा है? इस पहेली को बूझने के लिए हमें पिछले एक हजार वर...
- घर के कामों से ही फुरसत नहीं, फिर संगठन के लिए समय कौन निकालेंगी?... जहाँ बिना संरक्षक के घर की देहरी पार करना जुर्म समझा जाता है वहाँ घर-घर जाकर संगठन का कार्य कैसे हो ...
- घर के लोगों की अप्रसन्नता का एक और कारण खड़ा करने का वे कैसे साहस कर सकेंगी?... पहले से ही आये दिन डाँट-डपट के अनेक आधार खड़े रहते हैं, फिर एक और नया कारण उसमें क्यों जोड़ा जाय? ऐस...
- घर परिवार के लोगों की इससे क्या सुविधा बढ़ी?... पति को उससे क्या सहयोग मिला? बच्चे क्या अनुदान पा सके? देश की अर्थ-व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नार...
- छोटे-बड़े पहिये की गाड़ी कैसे चलेगी?... हल में एक ओर बैल जुता हो दूसरी ओर बकरा, तो जुताई कैसे होगी? हाथ-पैरों में से एक छोटा हो एक बड़ा तो च...
- जन्म से मरण पर्यन्त एक छोटे से पिंजड़े में घुटते रहना पड़े और शिक्षा की प्रकाश किरणें समीप तक न पहुँचे तो समाज-संसार से पूरी तरह कटी हुई नारी का बौद्धिक विकास कैसे होगा?... भावनाओं पर खराद चढ़ाने वाली संगीत साहित्य कला का जिसे दर्शन तक नहीं होता उससे उदात्त और परिष्कृत भाव...
- जब पाप ही नहीं किया तो दण्ड किस बात का?... भारत में पुरुष अनीति बरतता है और नारी उसे अपनी मानसिक अशक्तता के कारण डरी-सहमी सहन करती है। अनीति कर...
- जब बड़ा पेड़ छोटे की खुराक खा जाता है और बड़ी मछली छोटी को निगल जाती है तो शक्तिशाली मनुष्य भी वैसा ही क्यों न करे?... यही विचार विकृति भारत के पतन का कारण बनी। बुद्धिमान और शक्तिशाली दोनों ही वर्ग इस संकीर्ण स्वार्थ सा...
- देश की अर्थ-व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया?... समाज को समुन्नत बनाने में वह क्या योगदान दे सकी? स्वयं नारी, जीवन का क्या सौभाग्य पा सकी? इन प्रश्नो...
- नारी को नारी से पर्दा किस लिये करना चाहिए?... माँ-बेटी के बीच पर्दा कैसा? इससे तो उनके बीच स्नेह-सौजन्य का, आदान-प्रदान का, मन की बात कहने-सुनने क...
- पति को उससे क्या सहयोग मिला?... बच्चे क्या अनुदान पा सके? देश की अर्थ-व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया? समाज क...
- पहले से ही आये दिन डाँट-डपट के अनेक आधार खड़े रहते हैं, फिर एक और नया कारण उसमें क्यों जोड़ा जाय?... ऐसे-ऐसे अनेक कारण हैं जिनकी वजह से न नारियाँ संगठन के लिए घर पर जा सकती हैं और न जिन घरों में वे जाय...
- पुस्तकों में से पढ़कर सुनाते रहने से भी यह कार्य अच्छी तरह पूरा हो सकता है, संसार भर में प्रगतिशील स्त्रियाँ क्या कर चुकीं?... क्या कर रही हैं? यह तथ्य यदि उन्हें सुनाये जाते रहें तो सहज ही अभिनव प्रेरणा उत्पन्न होगी और प्रगति ...
- बच्चे क्या अनुदान पा सके?... देश की अर्थ-व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया? समाज को समुन्नत बनाने में वह क्य...
- बच्चों को समझा देना चाहिए कि यदि शालीनता और सज्जनता को अपनाने वाले लोग कहीं मिलेंगे तो उन्हीं के साथ सम्बन्ध जोड़ा जायगा अन्यथा यदि सारा समाज मोहान्ध हो चुका हो तो फिर विवाह करके उस दुष्टता को और अधिक बढ़ाने से क्या लाम?... इससे अच्छा तो अविवाहित रहना ही है। बच्चे यदि यह बात सुनते-समझते रहेंगे तो यदि भ्रष्ट परम्परा अपनाये ...
- बात विचारणीय इतनी भर है कि क्या उपयुक्त परिस्थितियाँ उत्पन्न किये बिना, आवश्यक सामर्थ्य उत्पन्न किये बिना, इतना गुरुतर भार वहन करना मनुष्य जैसे दुर्बल प्राणी के लिए सम्भव भी हो सकता है या नहीं?... पति और पत्नी को मित्रता के समस्त आदर्शों का पालन करना चाहिए। जिस पक्ष से भूल होती हो उसे तत्काल सुधा...
- माँ-बेटी के बीच पर्दा कैसा?... इससे तो उनके बीच स्नेह-सौजन्य का, आदान-प्रदान का, मन की बात कहने-सुनने का व्यवहार ही नहीं बनेगा। दोन...
- यह अप्रत्याशित और अवांछनीय परिवर्तन आखिर हो कैसे गया?... गंगा की उलटी धारा बहने कैसे लगी? सूर्य पच्छिम से उदय और पूर्व में अस्त कैसे हो रहा है? इस पहेली को ब...
- व्यक्ति कहीं भी रहे धरती भी वही रहेगी और काया भी वैसी ही, इससे क्या फर्क पड़ता है?... महत्ता क्रिया की है। आत्मविज्ञानी जानते हैं कि मानवी सत्ता के स्थूल, सूक्ष्म और कारण तीन शरीर हैं। उ...
- शहर, कस्बों में कन्या पाठशालाएँ खुली हैं और लड़कियों के पढ़ाने का कुछ प्रबन्ध हुआ है, पर छोटे देहातों में तो लड़कों के पढ़ाने तक का प्रबन्ध नहीं, फिर लड़कियों को कौन पूछता है?... कन्या शिक्षा तो कस्बे, शहरों में अब चली है। प्रौढ़ पीढ़ी के समय में तो पिछले दिनों वैसा कुछ भी प्रबन...
- समय पूछता है कि अनुचित को कब तक सहन किया जायेगा और कब तक उसे इसी तरह चलने दिया जायेगा?......
- समाज की प्रगति अवरुद्ध हो जानी चाहिए?... नहीं ! समय और परिस्थिति के अनुरूप रीति-रिवाज बदलते रहे हैं और लम्बे समय से उन-उन कमियों की पूर्ति नय...
- समाज को समुन्नत बनाने में वह क्या योगदान दे सकी?... स्वयं नारी, जीवन का क्या सौभाग्य पा सकी? इन प्रश्नों पर विचार करने से लगता है नारी को पीड़ित, पद-दलि...
- सूर्य पच्छिम से उदय और पूर्व में अस्त कैसे हो रहा है?... इस पहेली को बूझने के लिए हमें पिछले एक हजार वर्ष के मध्यकालीन अन्धकार युग का लेखा-जोखा लेने से उन का...
- स्कूलों में पढ़ने वाली पाँच प्रतिशत लड़कियों की शिक्षा व्यवस्था ही उसके लिये भारी पड़ रही है, तो प्रौढ़ पीढ़ी की नारी को समग्र रूप से शिक्षित कर सकना किस प्रकार सम्भव होगा?... इतने साधन वह कहाँ से कैसे जुटावेगी? जुटावेगी तो नये टैक्सों से जनता की कमर ही टूट जायगी। यह कार्य हम...
- स्वयं नारी, जीवन का क्या सौभाग्य पा सकी?... इन प्रश्नों पर विचार करने से लगता है नारी को पीड़ित, पद-दलित, प्रतिबन्धित, उपेक्षित रखा जाना किसी प्र...
- हल में एक ओर बैल जुता हो दूसरी ओर बकरा, तो जुताई कैसे होगी?... हाथ-पैरों में से एक छोटा हो एक बड़ा तो चलने और करने की क्रियाएँ बेतुकी हो जायेंगी। एक आँख छोटी एक बड...
- नारी को प्रतिबन्धित करके किसने क्या पाया?...? नारी को बाधित-प्रतिबन्धित करके हमने पाया कुछ नहीं खोया इतना है जिसे अपार या असीम से कम नहीं कहा जा ...
- नारी मीनार से खाई में कैसे जा गिरी?...? अपने देश में अनादि काल से नारी को अत्यन्त उच्च स्थान और सम्मान प्राप्त होता रहा है। जिस गर्भ से मन...