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अब आपके पास जो कुछ भी है, उसको निकालने की तैयारी कीजिए और निकालने की तैयारी इसलिए कीजिए, किस काम के लिए निकालें?...मन्दिर बनवा दें, नहीं, मन्दिर मत बनवाइए। मन्दिर जिन लोगों ने बना दिये हैं, उन लोगों से हम प्रसन्न नही...
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अब नए जन्म में क्या करना चाहिए?...आपकी सारी बुद्धिमानी इस बात पर टिकी हुई है, कि आप अपने जीवन की सम्पदा का किस तरीके से उपयोग किया—बस ए...
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आप क्या करेंगे?...और कैसे करेंगे? क्यों करेंगे? क्रिया के साथ-साथ में चिन्तन को आप जोड़ दीजिए। चिन्तन और क्रिया को, दोनों...
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इसके लिए क्या करना चाहिए?...आमतौर से आदमी भूल जाते हैं—काम-काम की बातें सब भूल जाते हैं, और बेकार की बातें, बेवकूफी की बातें सब य...
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और कुछ कहना है?...और नहीं कुछ कहना है। ‘करिष्ये वचनम् तव’। हमने भी अपने गुरु से कहा था—‘करिष्ये वचनम् तव’, ‘करिष्ये वचन...
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करेंगे तो उससे लाभ क्या होगा?...हमको यही लाभ हो जाएगा, जैसे कि हम प्रसन्न हैं और हमसे भी ज्यादा हमारा बॉस प्रसन्न हैं। आप भी प्रसन्न ...
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कौन कर सकते हैं?...आप कर सकते हैं। आप के पास सामर्थ्य है, आपके पास साधन है। नहीं साहब, हम गरीब आदमी हैं। आपके पास बहुत स...
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क्या अच्छा उपयोग बन सकता है?......
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क्या काम करना शुरू कर दें?...कोई आपने ऐसा काम बता दिया जो कि हम नहीं कर सकते। भाई साहब! ऐसा काम आपको बताएँगे नहीं। देख करके अपने ज...
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क्या मन है आपका?...हमारा मन ये है कि दो चीजें इस तरह की है जिसके लिए आप ये मना नहीं कर सकते कि ये चीजें हमारे पास नहीं ह...
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क्या शामिल करें?...बस एक बात शामिल कीजिए कि आपके पास कम-से-कम दो चीजें हैं। विद्या आपके पास है कि नहीं हमें नहीं मालूम। ...
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ये कहाँ से सामर्थ्य आई?...ये बाजार में से नहीं खरीदी है। हमें सामर्थ्य वहाँ से आई, जहाँ कि अपना चिन्तन और जहाँ अपना चरित्र और जह...
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ये किस चीज के चमत्कार हैं?...ये नारद जी के चमत्कार हैं। अरे नहीं साहब नारद जी के नहीं। विचारणा के, विचार-पद्धति को बदल देने की वजह...
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सुनने से क्या फायदा?...सत्य नारायण की कथाएँ सुनते-सुनते आप बुड्ढे हो गए, रामायण सुनते-सुनते आप बुड्ढे हो गए, भागवत सुनते-सुन...
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आप ऐसे कीजिए कि मन्त्र के साथ-साथ में आपने पढ़ा होगा—योगशास्त्र में लिखा है—क्या लिखा है?... मन्त्र को अर्थ समेत जपना चाहिए। अर्थ समेत आप कहाँ जपते हैं? ये गलत बात है। गायत्री मन्त्र की जिस प्र...
- अब घर वाले बहुत परेशान थे कि उनका पता कैसे लगाया जाय?...ंयोग से उन दिनों पूज्यवर राजनांदगाँव व दुर्ग (छ.ग.) गये हुए थे। साकुरे जी ने घर वालों से कहा- ‘‘आप ...
- नहीं करेंगे, तो फिर आत्मा की बात कहाँ रही?...त्मा की उन्नति का सवाल कहाँ रहा? आत्मा की उन्नति कोई खेल-खिलौने थोड़े ही है कि आप रामायण पढ़ लेंगे,...
- अकेले गाँधी कहाँ तक क्या कर सकते थे?... दोनों को जो काम के आदमी मिले और ऐसे काम के आदमी मिले जैसे दोनों ही धन्य हो गए।
हमारा वास्तविक थ...
- अनुशासन में व्यतिरेक तो नहीं हुआ?... अपने कृत्यों को दूसरे से अधिक समझने की अहंता कहीं छद्म रूप में आप पर सवार तो नहीं हो गयी? यह विराट् ...
- अपने कृत्यों को दूसरे से अधिक समझने की अहंता कहीं छद्म रूप में आप पर सवार तो नहीं हो गयी?... यह विराट् योजना पूरी होकर रहेगी। देखना इतना भर है कि इस अग्नि परीक्षा की वेला में आपका शरीर, मन और व...
- अभी कल-परसों झगड़े हुए थे वो दिखाई नहीं पड़े?... संसार में जितने भी युद्ध हो चुके है और बिना युद्धों के कितनी लड़कियाँ जल जाती है? आपने नहीं पढ़ते अखबा...
- अर्थ का चिन्तन कितने धीमे से होता है?... जप के साथ चिन्तन नहीं हो सकता | गलत कहा है—गलत या तो गलत लिखा है या आपने गलत समझा है। गलत क्या बात है...
- अर्थ समेत आप कहाँ जपते हैं?... ये गलत बात है। गायत्री मन्त्र की जिस प्रकार से बोलने की स्पीड है, उस तरह से विचार की स्पीड नहीं हो स...
- अस्पताल खोल दें तो बीमारियाँ अच्छी हो जाएँगी?... नहीं, अस्पतालों से बीमारियाँ अच्छी नहीं हो सकतीं। अगर अस्पतालों से बीमारियाँ अच्छी होतीं तो जितने भी...
- आज की परिस्थितियों में क्या ऐसा सम्भव है?... इस पर सहज ही विश्वास नहीं होता। कारण कि इन दिनों आदर्शवादिता मात्र कहने की चीज रह गई है। वह व्यवहा...
- आत्मा का कोई मूल्य नहीं है?... आत्मा से आपका कोई सम्बन्ध नहीं है?
अगर है, तो फिर आपको ऐसा करना पड़ेगा—उसके साथ-साथ में दिन दिनचर्...
- आत्मा का कोई वकत नहीं है?... आत्मा की कोई इज़्ज़त नहीं है? आत्मा का कोई मूल्य नहीं है? आत्मा से आपका कोई सम्बन्ध नहीं है?
अगर है...
- आत्मा की उन्नति का सवाल कहाँ रहा?... आत्मा की उन्नति कोई खेल-खिलौने थोड़े ही है कि आप रामायण पढ़ लेंगे, गीता पढ़ लेंगे, माला घुमा देंगे...
- आत्मा की कोई इज़्ज़त नहीं है?... आत्मा का कोई मूल्य नहीं है? आत्मा से आपका कोई सम्बन्ध नहीं है?
अगर है, तो फिर आपको ऐसा करना पड़ेगा—...
- आत्मा से आपका कोई सम्बन्ध नहीं है?... अगर है, तो फिर आपको ऐसा करना पड़ेगा—उसके साथ-साथ में दिन दिनचर्या में आदर्शवादी सिद्धान्तों को मिला ...
- आध्यात्मिक ज्ञान कहाँ है?... हमारे पास है और किसी के पास नहीं है। नहीं साहब वहाँ वो स्वामी जी सत्संग करते हैं, बकते सब हैं। स्वाम...
- आप अपने से विचारों को बदलना शुरू करेंगे, तब फिर क्या हो जाएगा?... तब फिर आप देखना आप सारी दुनिया के विचार बदलने में आप समर्थ हो जाएँगे। हम समर्थ हुए। बीस लाख आदमियों ...
- आप उनके साथ में समृद्धि मिलाइये न, जो आपसे कहीं गये-बीते हैं, कितने किफायत से गुजारा करते हैं, कितने मामूली से काम चला लेते हैं?... आप ऐसा कीजिये ‘सादा जीवन उच्च विचार’ के सिद्धान्तों का परिपालन कीजिये। सादगी, सादगी, सादगी...।...
- आप ऐसी बात क्यों कहते हैं?... इसीलिए कहते हैं कि हमारे मन ने हमारी बात मान ली और अपने मन को अपनी बात मनाने के लिए हमने रजामन्द कर ...
- आप कहाँ हैं?... आइए | हमारी जीवात्मा! आप कहाँ हैं? आइए। हमारे जीवन-लक्ष्य, हमारे उद्देश्य, हमारे जीवन की महानता आप क...
- आप कितने दण्ड-बैठक करते हैं?... उत्तर मिलेगा 200-300 बैठक करते हैं। यह क्या है? रेपिटिशन जिसे बार-बार करना पड़ता है। मिलिट्री वाले ले...
- आप कौन हैं और आपके जीवन का लक्ष्य क्या है?... तो पढ़ें—
1. मैं क्या हूँ? 2. जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति 3. आत्मा वाऽरे ज्ञातव्यः 4. आत्मा न न...
- आप क्या चाहते हैं?... बराबर माता जी से कहते रहते हैं—‘हमारे बाल-बच्चे हो जाएँ, लड़की होती है तो लड़का हो जाए। हमारा मुकदमा च...
- आप गरीब हैं तो क्या और अमीर हैं तो क्या?... आप गेहूँ की खाते होंगे, जौ की खाते होंगे, बाजरा की खाते होंगे। किसी की न किसी की जरूर खाते होंगे। तन...
- आप जीवन में बहुत प्रसिद्ध और समृद्ध होना चाहते हैं?... आप चाहते हैं कि आपके बहुत से चाहने वाले हों, तो निम्न पुस्तकें पढ़ें—
1. प्रसिद्धि और समृद्धि 2. म...
- आप तो कर्मकाण्ड करते रहते हैं और ये विचार तक नहीं करते कि क्यों करते हैं?... वेदान्त का, फिलॉसफी का पहला वाला सूत्र है, क्या सूत्र है? ब्रह्म-जिज्ञासा। पहला काम ये है कि आप जानि...
- आप तो सिर्फ एक बात सोचें कि अधिकाधिक श्रम व समर्पण करने में एक दूसरे में कौन अग्रणी रहा?... साधन, योग्यता, शिक्षा आदि की दृष्टि से हनुमान् उस समुदाय में अकिंचन थे। उनका भूतकाल भगोड़े सुग्रीव क...
- आप नहीं कुछ देंगे?... नहीं, दीजिए। आपसे हमारी ये प्रार्थना है, जैसे हमारे गुरु ने हमसे कहा था—दीजिए, बोइए। हमने अपना श्रम ...
- आप पूँजी कहाँ से लाएँगे, बताइये?... श्रम की पूँजी आप कहाँ से लाएँगे? समय की पूँजी आप कहाँ से लाएँगे? साधनों की पूँजी आप आत्मा की उन्नत...
- आप यही रेपिटिशन बार-बार क्यों कराते हैं?... किस काम के लिए कराते हैं? आपको यह सवाल करना चाहिए और इसका जवाब मालूम करना चाहिए।
साथियो! रेपिटिशन ...
- आपके पास शरीर है न?... हाँ, तो शरीर की माने श्रम, शरीर का जो गुण है वो है श्रम। श्रम अगर न कर सके तो। तो फिर मरा हुआ शरीर ह...
- आपको अपने लिए हम क्या कहेंगे?... हमको उसके लिए कहना है आपसे जिससे कि आपका भी कल्याण होता हो और आपको भी सन्तोष होता हो और हमारा भी कल्...
- आपको समझ नहीं आता कि आखिर लोग आपसे दूर क्यों भागते हैं?... जानने के लिए पढ़ें—
1. मानसिक सन्तुलन 2. मित्र भाव बढ़ाने की कला 3. आन्तरिक उल्लास का विकास 4. आत्...
- आपने उपासना की है, कर्मकाण्ड किया है, तो इस कर्मकाण्ड के माध्यम से जो आपको अपने जीवन में हेर-फेर करने चाहिए, विचारों में परिवर्तन करने चाहिए, उस परिवर्तन के लिए आप विचारमग्न हों और विचार करें कि आखिर ये क्यों किया जाए?... आप तो कर्मकाण्ड करते रहते हैं और ये विचार तक नहीं करते कि क्यों करते हैं? वेदान्त का, फिलॉसफी का पहल...
- आपने कुछ फायदा उठा लिया क्या?... न, कभी नहीं फायदा उठाया होगा। आपने कितने सत्संग सुने होंगे, कितनी चीज बनी होगी। उन सत्संगों से कुछ ब...
- आपने नहीं पढ़ते अखबार?... क्या से क्या हो रहा है? डकैतियाँ आप नहीं पढ़ते? बलात्कार आप नहीं पढ़ते? हत्याएँ आप नहीं पढ़ते? और इन्सा...
- आलस्य-प्रमाद को कहीं चुपके से आपके क्रिया-कलापों में घुस पड़ने का अवसर तो नहीं मिल गया?... अनुशासन में व्यतिरेक तो नहीं हुआ? अपने कृत्यों को दूसरे से अधिक समझने की अहंता कहीं छद्म रूप में आप ...
- इंसान गिरा कैसे?... समय की परिस्थितियाँ उल्टी कैसे हो गईं? दुःख कैसे हो गया? इसमें संसार में क्या कमी दिखाई पड़ती है आपको...
- इतने साधन कहाँ से आएँगे?... इसकी चिन्ता आप न करें। जिसने करने के लिए कहा है, वही उसके साधन भी जुटायेगा। आप तो सिर्फ एक बात सोचें...
- इन सभी सरंजामों को जुटाने पर ही विचार-क्रान्ति का गतिचक्र आगे बढ़ सकता है, भले ही वह छोटे आकार तथा धीमी गति से चलने वाला ही क्यों न हो?......
- इनके द्वारा आप अपने व्यक्तित्व को विकसित कैसे कर सकेंगे?... फिर क्या करना चाहिए? किफायतसार बनिये। किफायतसार अगर बनते हैं, तो आपको नौ सौ निन्यानवे बुराइयों से ...
- इनसान की आवश्यकताएँ क्या हैं?... मुट्ठी भर का पेट। तीन मुट्ठी चावलों की खिचड़ी से हमारा गुजारा हो जाता है। आप से क्या कहेंगे। आप हमारे...
- इन्सान न हो तब, जानवर हो तब?... तब क्या कहना है? तब तो खाएगा और सोएगा। खाने और सोने के अलावा और कुछ कर नहीं पाएगा। अगर उसको खाने और ...
- इसमें पूजा-पाठ भी शुमार है, तीर्थयात्रा भी शुमार है, ये भी शुमार है तब; तब आपको करना क्या है?... आपको एक काम करना है और उसी की आवश्यकता है। इंसान गिरा कैसे? समय की परिस्थितियाँ उल्टी कैसे हो गईं? द...
- इसमें संसार में क्या कमी दिखाई पड़ती है आपको?... बाप-दादों की तुलना में हम हजारों गुने ज्यादा सुखी हैं। पोस्ट कार्ड हमारे बाप-दादों ने, उसके ऊपर तीन ...
- इससे बड़ी सम्पत्ति भगवान के खजाने में कोई नहीं है, आप विश्वास रखें—मनुष्य के जीवन से बढ़ के और क्या हो सकता है?... आप दूसरे प्राणियों पे नज़र डालिए न—सब बेचारे किस तरीके से—कोई नंगा फिर रहा है, किसी का खाने का ठिकान...
- इसीलिए यह उपाय सोचा गया है कि इतने महान प्रयोजन की पूर्ति एवं विशाल आयोजन के लिए एक विश्वस्त, परिचय देने वाला मॉडल खड़ा किया जाए कि प्रज्ञा अभियान की रूप रेखा का व्यावहारिक क्रियान्वयन किस प्रकार सम्भव है?... इसी के लिए एक छोटा, किन्तु आदर्श एवं आनुपातिक मॉडल शान्तिकुञ्ज के रूप में बनाकर खड़ा कर दिया गया है...
- इसे देख समझ कर सही कल्पना की जा सकती है कि भविष्य कैसे बदलेगा?... नूतन सदी कैसे आएगी। सामान्यतया अपने चारों ओर दृष्टि दौड़ाने पर पता चलता है कि जनसाधारण के लिए प्रचलनो...
- उन सत्संगों से कुछ बात बनी है क्या?... नहीं, हमारे भी सत्संग सुने होंगे, औरों के भी सुने होंगे लेकिन उससे कोई लाभ नहीं बना है और न लाभ होने...
- उनकी नकल क्यों करना चाहते हैं?... उनके साथ में अपनी समृद्धि क्यों मिलाना चाहते हैं? आप उनके साथ में समृद्धि मिलाइये न, जो आपसे कहीं ...
- उनके साथ में अपनी समृद्धि क्यों मिलाना चाहते हैं?... आप उनके साथ में समृद्धि मिलाइये न, जो आपसे कहीं गये-बीते हैं, कितने किफायत से गुजारा करते हैं, कित...
- उनको चोर और उठाईगिरी हमने देखा है तो फिर आपको सत्यनारायण कथा सुनने से और रामायण की कथा सुनने से और भागवत की कथा सुनने से कैसे हो जाएगी?... बेकार की बात मत करिए आप पागलों की तरीके से। ऐसे मत कीजिए! ऐसे मत कीजिए। यह अध्यात्म सुनने का नहीं है...
- उसकी कितनी जबरदस्त क्षमताएँ हैं?... दिमाग की क्षमताओं से कैसे लाभ उठाया जा सकता है? तो निम्न पुस्तकें पढ़ें—
1. मस्तिष्क प्रत्यक्ष कल्प...
- उससे क्या फायदा?... गायत्री मंत्र याद भी हो गया और उसका अर्थ भी हम समझ गए कि हे भगवान हमारी बुद्धि को शुद्ध-पवित्र बना द...
- ऋषियों में क्या बात थी खास बताइए जरा?... ऐसे ही हाथ थे, उनके ऐसे ही पाँव थे, ऐसी ही उनकी टाँगे थीं, ऐसे ही उनका सारा शरीर था। जैसे हमारे-आपके...
- ऐसा क्यों होता है?... कारण जानने के लिए पढ़ें—
1. आद्य शक्ति गायत्री की समर्थ साधना 2. ईश्वर और उसकी अनुभूति 3. परिष्कृ...
- ऐसा भुलक्कड़ है कि इससे ज्यादा भुलक्कड़ इस दुनिया में कोई होगा क्या?... जहाँ तक भौतिक जीवन का सवाल है, वहाँ तक हम और आप बिल्कुल सही हैं, कभी भुलक्कड़ नहीं हो सकते। इस मामले...
- और इन्सान का एक-दूसरे इन्सान के तईं जो व्यवहार है उसको आप नहीं देखा नहीं है?... पढ़ा नहीं है? आप सब जानते हैं। क्या इसका कोई विरोधी नहीं होना चाहिए? कोई इसकी देखभाल नहीं होनी चाहिए?...
- और किसी का कल्याण हुआ?... किसी का कल्याण नहीं हुआ। किसी का कल्याण हो सकेगा? कभी किसी का कल्याण नहीं हो सकेगा। क्यों? जो आदमी अ...
- और कुछ कहना, और क्या कहें आपसे?... आप कुछ करते तो हैं नहीं, करने का वक्त आता है तो आप दाँया-बाँया देखना शुरू कर देते हैं। कभी उत्साह आ ...
- और कुछ माँगेंगे तो आप बच्चों से माँगेंगे क्या?... बच्चों को तो गुब्बारे दिए जाते हैं, पैसे दिए जाते हैं, मिठाई दी जाती है, चाकलेट दी जाती है और चीज दी...
- और कैसे करेंगे?... क्यों करेंगे? क्रिया के साथ-साथ में चिन्तन को आप जोड़ दीजिए। चिन्तन और क्रिया को, दोनों को जोड़ देते ह...
- और ध्रुव और प्रहलाद क्या हो सकते थे?... कुछ भी नहीं हो सकते थे। राजकुमार जैसे होते हैं, शिकार खेलते रहते हैं, शिकार खाते रहते हैं और खुराफात...
- औसत भारतीय स्तर पर अपने मुल्क में कितने आदमी रहते हैं?... सत्तर करोड़ आदमी रहते हैं। अत: मुट्ठी भर आदमियों की ओर गौर मत कीजिये।...
- कहने का सारांश इतना ही है, आप नित्य अपनी अन्तरात्मा से पूछें कि जो हम कर सकते थे, उसमें कहीं राई-रत्ती त्रुटि तो नहीं रही?... आलस्य-प्रमाद को कहीं चुपके से आपके क्रिया-कलापों में घुस पड़ने का अवसर तो नहीं मिल गया? अनुशासन में ...
- कहाँ से ज्ञान बाँटेंगे?... ज्ञान को खरीदिए और बाँट दीजिए। काहे से खरीदें? आपके पास दो सामान हैं। कौन से सामान हैं? एक है आपके प...
- काम क्या करना पड़ेगा?... यह निर्देश और परामर्श आप लोगों को समय-समय पर मिलता रहेगा। वह तो समय की बात है। काम बदलते भी रहेंगे औ...
- कार्य कैसे पूरा होगा?... इतने साधन कहाँ से आएँगे? इसकी चिन्ता आप न करें। जिसने करने के लिए कहा है, वही उसके साधन भी जुटायेगा।...
- काहे से खरीदें?... आपके पास दो सामान हैं। कौन से सामान हैं? एक है आपके पास साधन और एक है आपके पास श्रम। आप अपना श्रम और...
- कितना आगे रह सकते हैं?... कितना भार उठा सकते हैं? स्वयं को अधिकाधिक विनम्र, दूसरों को बड़ा मानें। स्वयंसेवक बनने में गौरव अनुभ...
- कितना भार उठा सकते हैं?... स्वयं को अधिकाधिक विनम्र, दूसरों को बड़ा मानें। स्वयंसेवक बनने में गौरव अनुभव करें। इसी में आपका बड़...
- कितनी बड़ी छलाँग लगा सका?... यही आपकी अग्नि परीक्षा है। इसी में आपका गौरव और समर्पण की सार्थकता है। अपने साथियों की श्रद्धा व क्ष...
- किस काम के लिए कराते हैं?... आपको यह सवाल करना चाहिए और इसका जवाब मालूम करना चाहिए।
साथियो! रेपिटिशन इसलिए कराते हैं कि हमारा म...
- किसकी समस्याएँ हो गई हैं?... गायत्री परिवार वालों की? नहीं गायत्री परिवार वालों की तो मुट्ठी भर समस्याएँ हैं। मुट्ठी भर समस्याएँ ...
- किसी का कल्याण हो सकेगा?... कभी किसी का कल्याण नहीं हो सकेगा। क्यों? जो आदमी अपने जीवन में जो अपना व्यक्तित्व, चरित्र और मन और व...
- कीजिए न कुछ; क्या करें?... आप एक काम कीजिए सिर्फ और कुछ मत कीजिए कि अपनी पात्रता को विकसित कर लीजिए। ताकि हम आपकी कोई बड़ी सेवा ...
- कैसे उसमें मोती बनेगा?... सीप तो पहले भी थी और बाद में भी रहेगी। सीप से मोती नहीं बनते। स्वाती और सीप के सहयोग से मोती बन जाते...
- कैसे मेरी बात सुन रहे हैं?... शरीर है तो आपके पास श्रम करने की भी ताकत है। आप कृपा करके जितना वाला श्रम अपने लिए करते हैं, अपनी औल...
- कोई इसकी देखभाल नहीं होनी चाहिए?... कोई इसको दूर करने की बात नहीं होनी चाहिए? हाँ, होनी चाहिए। इन्सान ने ही गिराया है। इन्सान बड़ा ताकतवर...
- कोई इसको दूर करने की बात नहीं होनी चाहिए?... हाँ, होनी चाहिए। इन्सान ने ही गिराया है। इन्सान बड़ा ताकतवर है। भगवान के बाद दूसरा नम्बर है इन्सान का...
- कौन ले गया?... अब तो हम भी गरीब हैं। आप गरीब हैं, तो हम भी गरीब हैं। ऋषि भी गरीब थे। लेकिन फिर गरीब रहते हुए भी आप ...
- कौन से सामान हैं?... एक है आपके पास साधन और एक है आपके पास श्रम। आप अपना श्रम और साधन अर्थात अपना समय, अंशदान और श्रमदान।...
- कौन हो गए थे?... वाल्मिकी। वाल्मिकी नहीं, वाल्मिकी की तो शक्ति का क्या कहने। वाल्मिकी को जिन लोगों ने बताया। फिर आप व...
- कौन-सा मंत्र है?... सिद्धान्तों को जीवन में शामिल कर लीजिए। हमने सिद्धान्तों को जीवन में शामिल किया है। आप भी शामिल कीजि...
- क्या अक्सर आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता?......
- क्या आप जानते हैं कि कौन सी अदृश्य शक्तियाँ इस सृष्टि को चला रही हैं?... इस सृष्टि की बागडोर किस परम सत्ता के हाथ में है।...
- क्या आप जानते हैं कि हमारा दिमाग (मस्तिष्क) क्या-क्या कर सकता है?... उसकी कितनी जबरदस्त क्षमताएँ हैं? दिमाग की क्षमताओं से कैसे लाभ उठाया जा सकता है?...
- क्या आप जानना चाहते हैं कि आपका इस धरती पर जन्म क्यों हुआ है?... आप कौन हैं और आपके जीवन का लक्ष्य क्या है? तो पढ़ें—
1. मैं क्या हूँ? 2. जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप...
- क्या आप दिमागी कशमकश (आन्तरिक संघर्ष) से परेशान हैं; समझ नहीं आता क्या करें?... क्या सही-गलत का निर्णय नहीं कर पा रहे?...
- क्या आप बुद्धि बढ़ाना चाहते हैं?... क्या आप चाहते हैं कि आप जो भी पढ़ें वो आपको झटपट याद हो जाये, तो पढ़ें—
1. बुद्धि बढ़ाने की वैज्ञानिक...
- क्या आप सत्य की खोज में हैं?... क्या आप जानना चाहते हैं कि आपका इस धरती पर जन्म क्यों हुआ है? आप कौन हैं और आपके जीवन का लक्ष्य क्या...
- क्या आपका वैवाहिक जीवन लड़ाई-झगड़ों से ग्रसित है, जिसके चलते आपकी नींद-चैन आपसे छिन गया है?......
- क्या आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है?......
- क्या आपके दिल में क्रान्ति की आग धधकती है और आप आज की विकट सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव लाना चाहते हैं?... गुण्डागर्दी, आतंकवाद, भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहते हैं, तो पढ़ें—
1. सतयुग की वापसी 2. क्...
- क्या इसका कोई विरोधी नहीं होना चाहिए?... कोई इसकी देखभाल नहीं होनी चाहिए? कोई इसको दूर करने की बात नहीं होनी चाहिए? हाँ, होनी चाहिए। इन्सान न...
- क्या करना चाहिए?... आपको वह काम करना चाहिए, जो कि हमने किया है। हमने आस्था जगाई, श्रद्धा जगाई, निष्ठा जगाई। निष्ठा, ...
- क्या करना पड़ेगा?... आपको ये करना पड़ेगा कि क्रिया के साथ-साथ में शिक्षाएँ और प्रेरणाएँ आपको समझनी चाहिए और समझनी ही नहीं ...
- क्या कहना चाहिए?... क्या विचार करना चाहिए?
आपको इन दोनों समय में, आत्मबोध और तत्त्वबोध की साधना करनी चाहिए।
प्रात...
- क्या कहनी है?... आप करना शुरू कर दें बस। जो कुछ आपने सुना है और जो कुछ आपने पढ़ा है, अब उसको पढ़ने और सुनने से काम चलने...
- क्या काम करेंगे?... हमने एक बहुत ही शानदार भवानी तलवार निकाली है। ऐसी शानदार योजना दुनिया में आज तक नहीं बनी। क्या बनी...
- क्या चीज मिली उनको?... कोई चीज नहीं मिली। उनको एक ही चीज मिली ज्ञान।
ज्ञान को आप ग्रहण नहीं कर पाते। सुनते तो हैं आप, ...
- क्या पता चलाना पड़ेगा कि इसके पीछे प्रेरणा क्या है?... शिक्षा क्या है? स्थूल शरीर से आप प्रतीकों का पूजन करेंगे, चावल चढ़ाएँ हाथ जोड़ें, नमस्कार करें, माला...
- क्या प्रसन्न करता है क्या?... क्या प्रसन्न करेगा उस माँ को? माँ तो प्रसन्न है, लेकिन अपने आपको धोने के लिए और अपनी पात्रता के लिए ...
- क्या प्रसन्न करेगा उस माँ को?... माँ तो प्रसन्न है, लेकिन अपने आपको धोने के लिए और अपनी पात्रता के लिए 24 लाख के हमको पुरश्चरण करने प...
- क्या बनी है?... हमने हर दिन पढ़े-लिखे को नियमित रूप से बिना मूल्य युग-साहित्य पढ़ाने की योजना बनायी है। आप पढ़े-लि...
- क्या बात कहें आपसे?... मिठाई खिला दीजिए, दावत दे दीजिए। तीर्थयात्रा हो आइए। नहीं, ये बातें हम नहीं कह सकते क्योंकि ये शरीर ...
- क्या विचार करना चाहिए?...
आपको इन दोनों समय में, आत्मबोध और तत्त्वबोध की साधना करनी चाहिए।
प्रात:काल जब उठा करें, तो आप ...
- क्या सही-गलत का निर्णय नहीं कर पा रहे?... तो सही मार्गदर्शन के लिए पढ़ें—
1. मानसिक सन्तुलन 2. आध्यात्मिक काम-विज्ञान 3. अन्तरंग जीवन का दे...
- क्या से क्या हो रहा है?... डकैतियाँ आप नहीं पढ़ते? बलात्कार आप नहीं पढ़ते? हत्याएँ आप नहीं पढ़ते? और इन्सान का एक-दूसरे इन्सान के ...
- क्यों नहीं निकालेंगे?... अगर आप निकालेंगे नहीं तो एक दिक्कत आएगी आपको।
अगर आप बोएँगे नहीं तो कुछ पैदावार नहीं कर सकेंगे।...
- क्यों नाराज हैं?... आपने कहा था मन्दिर बना दीजिए। नहीं, मन्दिर नहीं कहा था हमने। हमने उनको ये कहा था कि आप ज्ञान मन्दिर ...
- क्यों हो गए ऋषि?... क्या चीज मिली उनको? कोई चीज नहीं मिली। उनको एक ही चीज मिली ज्ञान।
ज्ञान को आप ग्रहण नहीं कर पात...
- खून-खच्चर दिखाई नहीं पड़ते?... अभी पंजाब का खून-खच्चर दिखाई नहीं पड़ा।...
- गड्ढे तमाम जगह क्यों नहीं हो गए?... भर क्यों नहीं दिए इसने तमाम जगह? बहुत सारे विरान क्यों पड़े हुए हैं? रेगिस्तान क्यों वीरान पड़े हैं? ब...
- गलत क्या बात है?... इसका अर्थ ये है—कोई आप कृत्य करते हैं। प्रत्येक कृत्य को पीछे ये पता चलाना पड़ेगा। क्या पता चलाना पड...
- गायत्री परिवार वालों की?... नहीं गायत्री परिवार वालों की तो मुट्ठी भर समस्याएँ हैं। मुट्ठी भर समस्याएँ हैं तो अगर हम आपसे नहीं भ...
- गायत्री माता को क्या प्रसन्न करना है?... माँ को भी कोई प्रसन्न करता है क्या? छोटा बच्चा माँ के पेट में से पैदा होता है। क्या प्रसन्न करता है ...
- चावल रखे तो चावलों का सौ गुना अरे सौ गुना क्या?... मैं तो कहता हूँ आपसे सौ गुना हो जाता है, हजारों गुना हो जाता है। हमने जो दिया है उसका सौ गुना हो गया...
- जब छोड़नी ही पड़ेगी, तो आप उन लोगों के लिए क्यों न छोड़ें, जो कि इसके हकदार हैं?... आप उतनी ही क्यों न कमाएँ, जिससे कि आप ईमानदारी के साथ में अपने लोक और परलोक को बनाए रह सकते हैं। आप ...
- जबान से हम कहते हैं तो क्या बना?... रीकॉग्नीशन नहीं हो सका। मान्यताएँ, निष्ठाएँ परिपक्व नहीं हो सकीं। निष्ठाओं को परिपक्व करने के लिए बर...
- जलाराम बापा का नाम नहीं सुना है क्या आपने?... वो मेहनत करते थे और मसक्कत करते थे, लेकिन जो कमाई उनके पास आती थी, उसको सबको बाँट देते थे, खाते नहीं...
- जिसके भाग्य में जैसा होता है वैसा यदि अमिट ही है तो फिर पुरुषार्थ करने से भी अधिक क्या मिलता और पुरुषार्थ न करने पर भी भाग्य में लिखी सफलता अनायास ही क्यों न मिल जाती?... हर व्यक्ति अपने-अपने अभीष्ट उद्देश्यों के लिए पुरुषार्थ करने में संलग्न रहता है इससे प्रकट है, कि आत...
- जो कर गुजरें, उसका अहंकार न करें, वरन् इतना ही सोचें कि हमारा चिन्तन, मनोयोग एवं श्रम कितनी अधिक ऊँची भूमिका निभा सका?... कितनी बड़ी छलाँग लगा सका? यही आपकी अग्नि परीक्षा है। इसी में आपका गौरव और समर्पण की सार्थकता है। अपन...
- जो है फिर आप उनके मालिक कैसे हुए?... सम्पत्ति, जो आप में पेट में खा सकते हों, तन में ढक सकते हैं, सिर्फ उतनी ही आपके इस्तेमाल करने के लिए...
- टेलीफोन देखा था?... रेल देखी थीं? सड़कें देखी थीं? पैदल चला करते थे पगडण्डियों पर बेचारे। और, और गरीबी में दिन काटते थे। ...
- डकैतियाँ आप नहीं पढ़ते?... बलात्कार आप नहीं पढ़ते? हत्याएँ आप नहीं पढ़ते? और इन्सान का एक-दूसरे इन्सान के तईं जो व्यवहार है उसको ...
- डॉक्टर बुद्धि, मैंने भी उनका पता नोट किया कि देखें आखिर होता क्या है?... सन् 1982 से 1991 तक वे बिलकुल स्वस्थ रहे। कैंसर का कहीं अता-पता भी नहीं था। सूर्य की ओर देखकर समाध...
- ढेरों-के-ढेरों लिखा है, आपने पढ़ा नहीं है?... आपने ढेरों पढ़ा है, पर आप पढ़ें चाहे मत पढ़ें, अब आप हमको सुने चाहे मत सुनें। अब आप हमको देखें चाहे मत ...
- तब क्या कहना है?... तब तो खाएगा और सोएगा। खाने और सोने के अलावा और कुछ कर नहीं पाएगा। अगर उसको खाने और सोने के अलावा भी ...
- तब क्या फायदा होगा आपको?... आपकी पात्रता विकसित हो जाएगी। पात्रता विकसित अगर आपकी हो गयी तो आपको इतना ज्यादा मिलेगा, जितना ज्याद...
- तो पात्रता कैसे बढ़ेगी?... पात्रता बढ़ाने के लिए कोई बर्तन नहीं खरीदने पड़ेंगे आपको, कि आपको स्टेनलेस स्टील के बर्तन खरीदने हैं क...
- तो फिर आपसे क्या कहें?... सारी बातें अखण्ड ज्योति में बताई जा चुकी हैं, कहते रहें क्या कहें आपसे। बस एक ही बात कहनी थी कि जो आ...
- तो हम कहाँ से शुरुआत करें?... अपने से शुरू कीजिए। आप अपने से विचारों को बदलना शुरू करेंगे, तब फिर क्या हो जाएगा? तब फिर आप देखना आ...
- थोड़े-से आदमी मालदार हैं, थोड़े-से आदमी सम्पन्न हैं, थोड़े-से आदमी मजा उड़ाते हैं, थोड़े-से आदमी फिजूलखर्च करते हैं, थोड़े-से आदमी ठाठ-बाट से रहते हैं, तो आप उनको क्यों महत्त्व देते हैं?... उनकी नकल क्यों करना चाहते हैं? उनके साथ में अपनी समृद्धि क्यों मिलाना चाहते हैं? आप उनके साथ में स...
- दिमाग की क्षमताओं से कैसे लाभ उठाया जा सकता है?... तो निम्न पुस्तकें पढ़ें—
1. मस्तिष्क प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष 2. बुद्धि बढ़ाने के वैज्ञानिक विधि 3. अती...
- दुःख कैसे हो गया?... इसमें संसार में क्या कमी दिखाई पड़ती है आपको? बाप-दादों की तुलना में हम हजारों गुने ज्यादा सुखी हैं। ...
- नब्बे वर्ष की उम्र हो न हो, कौन कह सकता है?... लेकिन हम आपकी देखभाल बराबर करते रहेंगे। गायत्री परिवार वाले लोग हमारे बहुत प्राणों से भी प्यारे हैं।...
- नहीं यूँ नहीं कहना चाहिए मुझे?... मुझे यूँ कहना चाहिए कि हम तो निहाल हो गए। इसीलिए हो गए कि किसी आदमी का हमने पल्ला पकड़ा। जिस दिन से ह...
- नाम नहीं लेंगे तो बात कैसे बनेगी?... जिस तक पहुँचना है उसका नाम तो लेना ही पड़ेगा। स्टेशन का नाम बताए बिना तो उसका टिकट भी नहीं मिलता।......
- निष्ठा, श्रद्धा और आस्था किसके प्रति जगाई?... व्यक्ति के ऊपर? व्यक्ति तो माध्यम होते हैं। हमारे प्रति, गुरुजी के प्रति श्रद्धा है। बेटा! यह तो ठ...
- परमात्मा समदर्शी और न्यायकारी है , उसे अपने सब पुत्र समान रूप से प्रिय हैं फिर वह किसी का भाग्य अच्छा किसी का बुरा लिखने का अन्याय और पक्षपात क्यों करेगा?... उसने अपने हर बालक को भले या बुरे कर्म करने की पूर्ण स्वतन्त्रता प्रदान की है पर साथ ही यह भी बता दिय...
- पैर पकड़ा कि हाथ पकड़ा, गर्दन पकड़ी?... नहीं, न हमने गर्दन पकड़ी, न हाथ पकड़ा, न पाँव पकड़ा बल्कि ‘करिष्ये वचनम् तव’। श्रीकृष्ण और अर्जुन जब यु...
- पोस्ट कार्ड हमारे बाप-दादों ने, उसके ऊपर तीन पीढ़ी वालों ने देखा था?... टेलीफोन देखा था? रेल देखी थीं? सड़कें देखी थीं? पैदल चला करते थे पगडण्डियों पर बेचारे। और, और गरीबी म...
- पढ़ा नहीं है?... आप सब जानते हैं। क्या इसका कोई विरोधी नहीं होना चाहिए? कोई इसकी देखभाल नहीं होनी चाहिए? कोई इसको दूर...
- फिर आप बार-बार क्यों कराते हैं?... उससे क्या फायदा? गायत्री मंत्र याद भी हो गया और उसका अर्थ भी हम समझ गए कि हे भगवान हमारी बुद्धि को श...
- फिर आपका शरीर नहीं रहा तो?... हाँ, दिखाई तो हमको भी पड़ता है कि हम सन् 2000 तक शायद न होने को बढ़े। दस साल होने को आये हैं। अभी इसमे...
- फिर क्या करना चाहिए?... किफायतसार बनिये। किफायतसार अगर बनते हैं, तो आपको नौ सौ निन्यानवे बुराइयों से छुटकारा मिल जाएगा। जि...
- बच्चों से माँगना क्या?... माँगने में क्या रखा है उनके पास। इसीलिए तुमसे हमको तो कुछ माँगना नहीं है, लेकिन माँगना ये है कि वहाँ...
- बलात्कार आप नहीं पढ़ते?... हत्याएँ आप नहीं पढ़ते? और इन्सान का एक-दूसरे इन्सान के तईं जो व्यवहार है उसको आप नहीं देखा नहीं है? प...
- बस इसके अलावा कुछ किया है क्या आपने?... ना इसके लिए नहीं किया।
नहीं साहब! भगवान जी की कथा कहलवाई थी। भाई साहब! भगवान जी की कथा आपने इसल...
- बहुत सारे विरान क्यों पड़े हुए हैं?... रेगिस्तान क्यों वीरान पड़े हैं? बादलों ने वहाँ क्यों नहीं पानी बरसा दिया? बादलों की कृपा तो है, बादलो...
- बादलों की कृपा अगर रही होती तो तमाम जगह क्यों नहीं हो गए पानी?... गड्ढे तमाम जगह क्यों नहीं हो गए? भर क्यों नहीं दिए इसने तमाम जगह? बहुत सारे विरान क्यों पड़े हुए हैं?...
- बादलों ने वहाँ क्यों नहीं पानी बरसा दिया?... बादलों की कृपा तो है, बादलों की महिमा तो है। मैं ये तो आपसे नहीं कहता कि बादलों की कोई महिमा नहीं है...
- भगवान के यहाँ गए, तो फिर क्या करना चाहिए ऐसी स्थिति में?... आपका लगाव जितना ज्यादा होगा, उतने ज्यादा आप कष्ट पाएँगे। आप लगाव को छुटा दीजिए। लगाव ही सबसे ज्यादा ...
- भर क्यों नहीं दिए इसने तमाम जगह?... बहुत सारे विरान क्यों पड़े हुए हैं? रेगिस्तान क्यों वीरान पड़े हैं? बादलों ने वहाँ क्यों नहीं पानी बरस...
- मजा आ जाएगा, फिर आप देखेंगे कि आध्यात्मिकता के सिद्धान्त गलत हैं क्या या सही हैं?... फिर आप देखेंगे कि ऋद्धियों और सिद्धियों के बारें में जो बातें कही जाती रही हैं, वो बातें गलत हैं कि ...
- मन में नाना प्रकार की इच्छायें, कामनायें रहती हैं, पर बुद्धि उनका निर्णय करती है कि कौन-सी इच्छा प्रकट करने योग्य है, कौन-सी दबा देने योग्य है?... इसे बुद्धि जानती है और वह सभ्यता, लोकाचार, सामाजिक नियम, धर्म, कर्तव्य, असम्भव आदि का ध्यान रखते ह...
- माँ को भी कोई प्रसन्न करता है क्या?... छोटा बच्चा माँ के पेट में से पैदा होता है। क्या प्रसन्न करता है क्या? क्या प्रसन्न करेगा उस माँ को? ...
- माँगा है आपने?... नहीं, माँगा नहीं है फिर खर्च हमने बहुत किया है। लाखों, हजारों आदमी, हजारों नहीं, लाखों नहीं, करोड़ों ...
- यदि सिद्धान्तों के प्रति हम आस्थावान न हुए होते तो सम्भव है कि कितनी बार भटक गए होते और कहाँ से कहाँ चले गए होते और हवा का झोंका उड़ाकर हमको कहाँ ले गया होता?... लोभों के झोंके, मोहों के झोंके, नामवरी के झोंके, यश के झोंके, दबाव के झोंके ऐसे हैं कि आदमी को ल...
- यह क्या है?... रेपिटिशन जिसे बार-बार करना पड़ता है। मिलिट्री वाले लेफ्ट-राइट और कवायद के रूप में रोज रियाज करते रहते...
- यह क्या है?... ’’ तो गुरुजी ने कहा, ‘‘माताजी के इसी दिव्य प्रकाश और शक्ति से शान्तिकुञ्ज और युग निर्माण योजना संच...
- ये आपकी क्या है?... जिज्ञासा है। प्रत्येक कर्मकाण्ड देखने से खिलवाड़ मालूम पड़ते हैं—बच्चों जैसे। खिलवाड़ मालूम पड़ते है...
- ये कैसे आ गया?... हमें भी आप ये विद्या सिखा दीजिए। हमें भी कोई मन्त्र सिखा दीजिए। नहीं कोई मन्त्र नहीं है ऐसा। कोई ऐसा...
- ये कोई आधार थोड़े ही हैं, जिनके आधार आप न जाने क्या-क्या सपने देखते रहते हैं?... ये तो वास्तव में माध्यम हैं कि आपके व्यक्तित्व का कैसे विकास हो? व्यक्तित्व का विकास न हुआ इनके मा...
- ये क्या चक्कर है?... गायत्री माता की मूर्ति हो, तो आप ये पूछिए कि क्या बात है साहब! हमने तो मूर्ति रख दी और दण्ड पेल रहे ...
- ये क्यों नहीं सोचते?... इतना बड़ा मनुष्य का जीवन भगवान ने आपको दे दिया, और इतने आप बड़े सौभाग्यशाली हैं।
आप सौभाग्य को सर...
- ये तो वास्तव में माध्यम हैं कि आपके व्यक्तित्व का कैसे विकास हो?... व्यक्तित्व का विकास न हुआ इनके माध्यम से, तो इनको फिर सिवाय ढकोसले के और क्या कहेंगे? ये ढकोसले है...
- ये मेरा ही बच्चा है—अब भगवान का बच्चा है, ये क्यों नहीं मान सकते?... ये हमारी बीवी है—आप यों क्यों कहते हैं? यों क्यों नहीं कहते—भगवान की बेटी है? यों कह देंगे तो क्या ह...
- ये हमारी बीवी है—आप यों क्यों कहते हैं?... यों क्यों नहीं कहते—भगवान की बेटी है? यों कह देंगे तो क्या हर्ज़ है?
आप इस तरीके से, आप रात्रि क...
- यों कह देंगे तो क्या हर्ज़ है?... आप इस तरीके से, आप रात्रि को, जब आप सोया करें, और आप मौत को याद किया करें, तो आप साथ-साथ में दो बाते...
- यों क्यों नहीं कहते—भगवान की बेटी है?... यों कह देंगे तो क्या हर्ज़ है?
आप इस तरीके से, आप रात्रि को, जब आप सोया करें, और आप मौत को याद क...
- रामचन्द्र जी ने मार डाला तो हम क्या कर सकते हैं?... रावण हुआ, मार डाला। नहीं साहब वो हुआ था; शंकर जी ने गणेश जी का सिर काट डाला और हाथी का सिर उगा दिया,...
- रावण कब पैदा हुआ था?... रामचन्द्र जी ने मार डाला तो हम क्या कर सकते हैं? रावण हुआ, मार डाला। नहीं साहब वो हुआ था; शंकर जी ने...
- रेगिस्तान क्यों वीरान पड़े हैं?... बादलों ने वहाँ क्यों नहीं पानी बरसा दिया? बादलों की कृपा तो है, बादलों की महिमा तो है। मैं ये तो आपस...
- रेल देखी थीं?... सड़कें देखी थीं? पैदल चला करते थे पगडण्डियों पर बेचारे। और, और गरीबी में दिन काटते थे। लेकिन हम पैसे ...
- रोटी खाते है कि नहीं खाते?... आप गरीब हैं तो क्या और अमीर हैं तो क्या? आप गेहूँ की खाते होंगे, जौ की खाते होंगे, बाजरा की खाते हों...
- लाखों-करोड़ों मील दूर दिन-रात चक्कर काटते हुए अपनी मौत के दिन पूरे करने वाले ग्रह-नक्षत्र भला हमें क्या सुख-सुविधा प्रदान करेंगे?... उनको छोड़कर और सच्चे ग्रहों का पूजन आरम्भ करें जिनकी थोड़ी-सी कृपा कोर से ही हमारा सारा प्रयोजन सिद्...
- लेकिन पैसे की दृष्टि से सम्पन्न होते हुए भी, सुखी होते हुए भी, बहुत सारे सुविधा-साधन हमारे पास होते हुए भी दिन-दिन जो गिरावट आ रही है उसका क्या वजह है?... एक वजह है सिर्फ एक वजह है। वो ये है कि इंसान के विचार, आदमी के खयालात, आदमी का दृष्टिकोण, आदमी का चि...
- लेकिन फिर उनको कमाने की या अपने गरीबी की, अभावों की जरूरत क्यों पड़ती है?... केवल एक ही चीज दुनिया में है, जिससे आप किसी का भला कर सकते हैं और वो है उनके खयालातों को बदल देना। ख...
- लेकिन सबसे ज्यादा हमारा जो गुरु है, आप मालवीय जी को मानते हैं?... मानते हैं। जब कभी हमारा काशी जाना हुआ, उनके चरण स्पर्श करते रहे। जब कभी भी उनका आना हुआ, वो इधर हमसे...
- वाल्मिकी के पास क्या था?... पहले क्या था और पीछे क्या था। पहले जो था उससे कुछ कमी हो गई होगी। पहले जिस घर में रहता होगा, जब वाल्...
- वाहियात जीवन होने की वजह से कोई किसी ने सुना उनकी बात?... किसी ने उनकी बात सुनी नहीं। किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। और किसी का कल्याण हुआ? किसी का कल्याण नहीं ह...
- विचारक्रान्ति के लिए हमने आपसे नहीं कहा है?... हमने सारे जिन्दगी भर कहा है। एक बात कही है और दूसरी कुछ बात कही नहीं है।
कोई और बात कहिए हमसे। ...
- विचारणाएँ क्या हैं?... प्रत्येक कर्मकाण्ड हमको कुछ शिक्षा देता है, कुछ नसीहत देता है, कुछ उम्मीदें कराता है।...
- विश्राम की बात न सोचें, अहर्निश एक ही बात मन में रहे कि हम इस प्रस्तुतीकरण में पूर्णरूपेण खपकर कितना योगदान दे सकते हैं?... कितना आगे रह सकते हैं? कितना भार उठा सकते हैं? स्वयं को अधिकाधिक विनम्र, दूसरों को बड़ा मानें। स्वयं...
- वेदान्त का, फिलॉसफी का पहला वाला सूत्र है, क्या सूत्र है?... ब्रह्म-जिज्ञासा। पहला काम ये है कि आप जानिए। ये क्या चक्कर है? गायत्री माता की मूर्ति हो, तो आप ये प...
- वो किस तरीके से किए?... इसमें हमारा अकेले का साहस, हमारा अकेले का पराक्रम और अकेले का हमारा शौर्य काफी नहीं है। हमारी अकेले ...
- वो ज्ञान कहाँ है?... वो आध्यात्मिक ज्ञान है। आध्यात्मिक ज्ञान कहाँ है? हमारे पास है और किसी के पास नहीं है। नहीं साहब वहा...
- व्यक्ति के ऊपर?... व्यक्ति तो माध्यम होते हैं। हमारे प्रति, गुरुजी के प्रति श्रद्धा है। बेटा! यह तो ठीक है, लेकिन व...
- व्यक्तित्व का विकास न हुआ इनके माध्यम से, तो इनको फिर सिवाय ढकोसले के और क्या कहेंगे?... ये ढकोसले हैं। इनके द्वारा आप अपने व्यक्तित्व को विकसित कैसे कर सकेंगे? फिर क्या करना चाहिए? किफाय...
- व्यायामशाला में आप जाइए और पहलवान जी से पूछिए क्यों साहब, क्या हो रहा है?... आप कितने दण्ड-बैठक करते हैं? उत्तर मिलेगा 200-300 बैठक करते हैं। यह क्या है? रेपिटिशन जिसे बार-बार कर...
- शरीर नहीं है तो आप कैसे बैठे हुए हैं?... कैसे मेरी बात सुन रहे हैं? शरीर है तो आपके पास श्रम करने की भी ताकत है। आप कृपा करके जितना वाला श्रम...
- शिक्षा क्या है?... स्थूल शरीर से आप प्रतीकों का पूजन करेंगे, चावल चढ़ाएँ हाथ जोड़ें, नमस्कार करें, माला घुमाएँ, मन्त्र ...
- श्रम की पूँजी आप कहाँ से लाएँगे?... समय की पूँजी आप कहाँ से लाएँगे? साधनों की पूँजी आप आत्मा की उन्नति के लिए लगा सकते थे, उसको कहाँ स...
- संसार में जितने भी युद्ध हो चुके है और बिना युद्धों के कितनी लड़कियाँ जल जाती है?... आपने नहीं पढ़ते अखबार? क्या से क्या हो रहा है? डकैतियाँ आप नहीं पढ़ते? बलात्कार आप नहीं पढ़ते? हत्याएँ ...
- सब कुछ शरीर को ही खिलाने और पिलाने के लिए आप करेंगे—ऐसा क्यों करेंगे?... आत्मा का कोई वकत नहीं है? आत्मा की कोई इज़्ज़त नहीं है? आत्मा का कोई मूल्य नहीं है? आत्मा से आपका को...
- समय की परिस्थितियाँ उल्टी कैसे हो गईं?... दुःख कैसे हो गया? इसमें संसार में क्या कमी दिखाई पड़ती है आपको? बाप-दादों की तुलना में हम हजारों गुने...
- समय की पूँजी आप कहाँ से लाएँगे?... साधनों की पूँजी आप आत्मा की उन्नति के लिए लगा सकते थे, उसको कहाँ से लाएँगे? ‘सादा जीवन उच्च विचार’...
- साधनों की पूँजी आप आत्मा की उन्नति के लिए लगा सकते थे, उसको कहाँ से लाएँगे?... ‘सादा जीवन उच्च विचार’ का मतलब ये है कि ऊँचे विचार की जिन्दगी अगर आपको जीनी है, उत्कृष्ट जीवन आपको...
- स्वाती की बूँद जब तक उसमें न पड़े सीप में तब तक आप क्या कर सकते हैं?... कैसे उसमें मोती बनेगा? सीप तो पहले भी थी और बाद में भी रहेगी। सीप से मोती नहीं बनते। स्वाती और सीप क...
- सड़कें देखी थीं?... पैदल चला करते थे पगडण्डियों पर बेचारे। और, और गरीबी में दिन काटते थे। लेकिन हम पैसे की दृष्टि से सम्...
- हत्याएँ आप नहीं पढ़ते?... और इन्सान का एक-दूसरे इन्सान के तईं जो व्यवहार है उसको आप नहीं देखा नहीं है? पढ़ा नहीं है? आप सब जानत...
- हम और आप दो हैं क्या?... नहीं हम और आप दो नहीं हैं एक हैं। तो आप के लिए कुछ करें। नहीं भाई साहब! मत कीजिए हमारे लिए। हमारी जर...
- हम कौन अमीर दिखाई पड़ते हैं आपको?... जो कुछ था अमीरी से, ले गया। कौन ले गया? अब तो हम भी गरीब हैं। आप गरीब हैं, तो हम भी गरीब हैं। ऋषि भी...
- हम कौन हैं?... हमारा क्या लक्ष्य है? हमारा क्या कर्तव्य है? हमारे जीवन का स्वरूप क्या है? हमको मालूम नहीं है। मूल च...
- हम क्या करें?... आपको मुसीबत में नहीं डालें, त्याग के लिए न डालें। हमारे बॉस को देखिए न। हमारा दिवाला निकाल दिया। हमा...
- हमने एक आदमी का ऐसा पल्ला पकड़ा, किस तरीके से पल्ला पकड़ा?... पैर पकड़ा कि हाथ पकड़ा, गर्दन पकड़ी? नहीं, न हमने गर्दन पकड़ी, न हाथ पकड़ा, न पाँव पकड़ा बल्कि ‘करिष्ये वच...
- हमारा क्या कर्तव्य है?... हमारे जीवन का स्वरूप क्या है? हमको मालूम नहीं है। मूल चीज को हम एकदम भूल जाते हैं। बाहर की सब चीजें ...
- हमारा क्या लक्ष्य है?... हमारा क्या कर्तव्य है? हमारे जीवन का स्वरूप क्या है? हमको मालूम नहीं है। मूल चीज को हम एकदम भूल जाते...
- हमारी जरूरतें कितनी हैं?... इनसान की आवश्यकताएँ क्या हैं? मुट्ठी भर का पेट। तीन मुट्ठी चावलों की खिचड़ी से हमारा गुजारा हो जाता ह...
- हमारे जीवन का स्वरूप क्या है?... हमको मालूम नहीं है। मूल चीज को हम एकदम भूल जाते हैं। बाहर की सब चीजें हमको याद रहती हैं कि दुकान में...
- हमारे जीवन-लक्ष्य, हमारे उद्देश्य, हमारे जीवन की महानता आप कहाँ हैं?... हे हमारे आदर्श! आप कहाँ हैं? आप आइए और हमको ले करके चलिए। बेटे, इसी के लिए हम जप कराते हैं आपसे।.......
- अनाचार से कैसे निपटें?...? 4. युग परिवर्तन क्यों और कैसे? 5. महाकाल का प्रतिभाओं को आमंत्रण 6. मनुष्य की दुर्बुद्धि और भाव...
- इक्कीसवीं सदी के लिये हमें क्या करना होगा?...? 22. जिज्ञासा— क्या आप जानते हैं कि हमारा दिमाग (मस्तिष्क) क्या-क्या कर सकता है? उसकी कितनी जबरदस...
- ईश्वर कौन है?...? कहाँ है? कैसा है? ईश्वर कौन है? कहाँ है? कैसा है? (छोटा) 3. दृश्य जगत के अदृश्य संचालक सूत्र 19....
- क्यों और क्या?...? पहले यहाँ से चल। भजन पीछे करना। ये क्या चक्कर है? पहले ये पूछना, फिर इसके बाद शुरू करना। ये आपकी क्...
- गायत्री मंत्र कैसे जपें?...?
मात्र अक्षर दोहरा लेने से तो स्कूली बच्चे प्रथम कक्षा में ही बने रहते हैं। उन्हें प्रशिक्षित बनने...
- गायत्री मंत्र क्यों जपें?...?
मित्रो! अध्यात्म में जो शिक्षण हम प्राप्त करते हैं, उसको जीवन में उतारना पड़ता है। इससे कम में ...
- जिन्दगी कैसे जीयें?...? 3. समय का सदुपयोग 4. जीवन जीने की कला 5. आगे बढ़ने की तैयारी 6. अपने दीपक आप बनो 7. सफल जीवन क...
- तो गुरुजी क्या यही अध्यात्म है?...? हाँ बेटे, यही अध्यात्म है और यही धर्म है। यही भगवान् की भक्ति है। हमको और आपको भगवान् की यही भक्त...
- परिवार को सुव्यवस्थित कैसे बनायें?...?...
- प्रात:काल की संध्या—सायंकाल की संध्या—क्या करें?...? क्या कहना चाहिए? क्या विचार करना चाहिए?
आपको इन दोनों समय में, आत्मबोध और तत्त्वबोध की साधना कर...
- मैं क्या हूँ?...? 2. जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति 3. आत्मा वाऽरे ज्ञातव्यः 4. आत्मा न नारी है न नर ‘‘क्रान्तिधर्...
- युग परिवर्तन क्यों और कैसे?...? 5. महाकाल का प्रतिभाओं को आमंत्रण 6. मनुष्य की दुर्बुद्धि और भावी विनाश 7. इक्कीसवीं सदी के लिय...
- ’ जब मैंने यह शोक सुनाया तो गुरुजी ने कहा, ‘‘बेटा कहाँ पढ़ा है?...? ’’ मैंने गुरुदेव को बता दिया कि ‘गायत्री का सूर्योपस्थान’ पुस्तक में पढ़ा है। तब गुरुजी कहने लगे...
- ’ ये भी कोई माँगने की बात है क्या?...? ये चीजें मिल जाएगी तो आपका कुछ फायदा नहीं है और न मिले उसके बिना कुछ काम नहीं रुका हुआ है आपका, तो ...
- गायत्री मंत्र क्यों और कैसे जपें?...? गायत्री मंत्र क्यों जपें?
मित्रो! अध्यात्म में जो शिक्षण हम प्राप्त करते हैं, उसको जीवन में उत...
- हमारा जीवन कैसा हो?...? इस प्रयोग के अन्तर्गत अपना आहार-विहार, वस्त्र-विन्यास, रहन-सहन, व्यवहार, अभ्यास ऐसा रखा गया जो न...