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"मैं अपने दोनों किशोर बच्चों को अपरिचित सड़कों पर भेजता हूँ और निर्देश दे देता हूँ कि एक घण्टे घूमकर आओ और मुझे बतलाओ कि तुमने कहाँ क्या देखा?...जब वे लौटकर आते हैं तब मैं उनसे उनकी जानकारी के विषय में प्रश्न करता हूँ। उत्तर सन्तोषजनक न होने पर द...
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"स्त्रियाँ अपने आप को पुरुषों की गुलाम या उनसे गिरी हुई क्यों मानें?...विविध भाषाओं में स्त्रियों के लिए प्रचलित शब्दों और मुहावरों में उन्हें पुरुष का आधा अंग कहा गया है औ...
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अपने लिए किसी से कुछ माँगना बहुत निकृष्ट काम समझा जाता है, लेकिन दहेज माँगने में न जाने क्यों किसी को शरम का अनुभव नहीं होता?...मुफ्त का अनीतिपूर्ण धन पाने की लालसा वर पक्ष को पागल बनाए रहती है। अपनी श्रेष्ठता का झूठा अहंकार उन्ह...
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अशोभनीय और अश्लील चित्र किन्हें कहा जाए?...इन्दौर में एक बार जागरूक महिलाओं ने अश्लील पोस्टरों का प्रतिरोध किया तो पूछा गया कि अशोभनीय पोस्टर कि...
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आज नारी बुरी तरह टूट गई है और उसके फलस्वरूप परिवार संस्था भी टूट रही है, फिर यह कैसे सम्भव हो सकता है कि उसके आश्रय में रहने वाले स्वर्गीय सुख-शान्ति का रस चख सकें?...जब साँचा ही बिगड़ गया है तो उसमें ढलकर निकलने वाले देवमानवों का दर्शन कैसे हो?
हमारे हर परिवार को स...
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इस पीड़ित नारी से नर को क्या लाभ मिला?...उसे असहाय बनाकर किसने क्या पाया? घर परिवार के लोगों की इससे क्या सुविधा बढ़ी? पति को उससे क्या सहयोग ...
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इस मेकअप महाविज्ञान से आखिर लाभ क्या?...जितना समय इस लिपाई-पुताई में लगता है, आज के मँहगाई के जमाने में जहाँ खाने को तेल भी नसीब नहीं होता हो...
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एक नारी दूसरी नारी के दुःख-दरद को कम करने की जगह उल्टे उसे बढ़ाने में ही अपना सहयोग क्यों देने लगती है?...यह आश्चर्य और दुःख की बात तो है, लेकिन स्थिति को देखकर चुप ही रह जाना पड़ता है। अविकसित मस्तिष्क भला-...
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कुछ लोग कह सकते हैं कि इससे व्यक्तित्व निखरता है?...व्यक्तित्व का अर्थ कि जो कुछ आप हैं उसकी झलक आपके सम्पर्क में आने वाले को मिल जाए। उसका शरीर प्रदर्शन...
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क्या करें, क्या न करें?...इसी मानसिक उद्विग्न स्थिति में वे एक बार कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए। वहाँ उन्हें भगवान बुद्ध की शान्त...
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क्या रूप के अतिरिक्त नारी के पास और कोई विभूति नहीं?...जरा-मरण के अदृश्य धागों से बँधी यह अस्थायी मृग मरीचिका ही नारी की विभूति नहीं हो सकती। बिना शील के रू...
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जब शारीरिक सौन्दर्य एक भ्रमजाल ही है तो फिर अपने आप को सुन्दर बनाने के लिए रोज-रोज ना मालूम कितने सौन्दर्य प्रसाधनों का उपयोग किया जाना अन्ध विश्वास नहीं तो और क्या है?...उनके उपयोग से व्यक्तित्व में निखार आएगा किन्तु वास्तव में यदि व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने का प्रया...
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नारी पर ऐसे प्रतिबन्ध क्यों लगे हैं?...कोई व्यक्ति यदि इसका उचित कारण विवेक से सोचना चाहे तो दो ही अंदाज लगाए जा सकते हैं—एक तो यह कि अपने स...
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निःसन्देह यह अभिभावक एक बुद्धिमान अभिभावक हैं और बच्चों के प्रति किसी पिता का क्या कर्तव्य है?...इसको अच्छी तरह जानते तथा पालन करते हैं। जिन बच्चों को हर चीज तथा घटना को ध्यान से देखने का अभ्यास हो ...
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प्रश्न उठता है कि यदि यह बात सही है तो फिर भारतीय नारी दीन-हीन दुर्दशाग्रस्त स्थिति में क्यों है?...इसके लिए यदि हमारे जीवन मूल्य जिम्मेदार नहीं हैं तो क्या कारण है कि भारतीय नारी को घर की चहारदीवारी म...
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प्रश्न यह उठता है कि यह सब विषय कैसे पढ़ाए जाएँ?...उनके लिए पाठ्य पुस्तकें कहाँ से मिलें? यह सच है कि ऐसे साहित्य का अब तक नितान्त अभाव रहा है। किन्तु अ...
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मानसिक स्वास्थ्य, सुशिक्षा से, सुसंस्कारी वातावरण से और ज्ञान अनुभव संचय करने की परिस्थितियों से बनता है, वैसी परिस्थितियाँ कहाँ हैं?...जन्म से मरण पर्यन्त एक छोटे से पिंजड़े में घुटते रहना पड़े और शिक्षा की प्रकाश किरणें समीप तक न पहुँच...
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यों तो तर्क देने की बात ही क्या?...जब तक ही आधार है तब तो जिन्दगी को मौत और दिन को रात कहने के लिए अनेक लक्षणों को दिखाया और निकाला जा स...
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लेकिन प्राचीन ग्रन्थों में नारी के लिए प्रयुक्त सभी शब्दों की व्युत्पत्ति पर ही यदि विचार करें तो भी स्पष्ट हो जाएगा कि मध्यकालीन अन्धकार युग से पहले अपने यहाँ महिलाओं के प्रति समाजशास्त्रियों का मनोभाव क्या था?...सबसे पहले 'महिला' शब्द को ही लें—मह + इलच् + आ = महिला। मह का अर्थ श्रेष्ठ या पूजा है। पूज्य, श्रेष्ठ...
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लोग फूहड़ न कहें, स्वयं को भी अपने वेष विन्यास से मानसिक व बौद्धिक परिपक्वता, हीनता का बोध न हो इसके लिए ढंग की जलवायु और स्वास्थ्य के अनुसार साफ कपड़े पहनना तो ठीक है किन्तु शरीर को सजाने और आकर्षक बनाने के लिए ऐसे वस्त्र पहनना जिससे कि लोगों का ध्यान आकर्षित हो यह कहाँ की समझदारी है?...कुछ लोग कह सकते हैं कि इससे व्यक्तित्व निखरता है? व्यक्तित्व का अर्थ कि जो कुछ आप हैं उसकी झलक आपके स...
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वस्तुतः सौन्दर्य है क्या?...सौन्दर्य की न कोई परिभाषा है न मापदण्ड। एक ही वस्तु कुछ व्यक्तियों के लिए सौन्दर्य की निशानी हो सकती ...
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सम्पन्नता की परिस्थिति में जब अयोग्य नारी जीवन को कण्टकाकीर्ण बना देती है तब विपत्ति और विपन्नता के समय वह पुरुष का क्या हाथ बँटा सकती है?...उस समय तो वह और भी एक भारी विपत्ति बन जाती है।
मध्यकाल में विदेशी आक्रमणों के समय यही तो हुआ। उस सम...
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सौन्दर्य प्रसाधनों के उपयोग के समय, श्रम, धन और स्वास्थ्य की कितनी हानियाँ उठानी पड़ती हैं फिर भी महिलाएँ इनका अँधाधुन्ध प्रयोग बढ़ाती ही रहें तो उसे अन्धविश्वास नहीं तो और क्या कहा जा सकता है?...जबकि पाश्चात्य देश की नारियाँ इन प्रसाधनों से बेजार हो चली हैं और वे अब 'फेयर सेक्स' नहीं कहलाना चाहत...
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ऐसी नारी कनिष्ठ कैसे हुई?...िकृष्ट कैसे मानी गई? नर ने उसका अभिवन्दन करने के स्थान पर उस पर आधिपत्य कैसे जमा लिया? पूजार्ह को शोष...
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जब हम स्वयं हर काम में समय की पाबन्दी नहीं करते तो भला बच्चों में इसकी आदत कैसे डाल सकते हैं?...्रायः हर घर में बच्चे दिन भर खाया करते हैं। मैंने एक माताजी से पूछा—'आप अपने बच्चों को कितनी बार दूध ...
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जो अपनी मौत आप मर रहा हो, उसके अनौचित्य के सन्दर्भ में बहुत चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं, आवश्यकता इस बात की है कि कोठी को भरा कैसे जाए?...्षति की पूर्ति कैसे हो? खाईं पाटने के लिए क्या किया जाए और खण्डहरों के स्थान पर नया भवन कैसे खड़ा हो?...
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ढर्रा चल रहा है तो उसे ऐसे ही क्यों न चलने दिया जाए?...ुरुष को लाभ प्रतीत होता है और नारी भी उसकी अभ्यस्त हो गई है, तो इस प्रसंग में क्यों छेड़-छाड़ की जाए?...
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पिछड़ापन कौन दूर करे?...सके लिए उनसे कहा जाएगा जो गतिशील हैं। सुख और सौभाग्य को मिल-बाँटकर खाया जाना चाहिए। अन्यथा वह विग्रह,...
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सामाजिक न्याय मिलने पर नारी को क्या मिलेगा?...स प्रश्न के उत्तर में स्वाभिमान और स्वावलम्बन की स्थिति प्राप्त करने का अधिकार ही कहा जा सकता है। श्र...
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सामान्य दृष्टि से भी देखा जाए तो नेलकटर या चाकू ब्लेड से नाखून काटने की अपेक्षा दाँत से नाखून काटना क्यों अच्छा लगता है?...ीधा सा उत्तर है—सहज रास्ता तलाश करना, श्रम से बचना और ये सब प्रयत्न की, सुरक्षा के अभाव की अनुभूति बन...
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चिन्ता और परेशानी की भट्टी में जलते हुए मानव के लिए शान्ति कहाँ?...ैं कहूँगी कि शान्ति है। शान्ति मस्ती में, खुशमिजाजी में, परिहासपूर्ण स्वभाव में, आनन्दी और उत्साही मु...
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इन प्रयासों और परिवर्तनों के बावजूद भी महिलाओं की वर्तमान स्थिति क्या है?... स्पष्ट करना कठिन है। एक कारण तो यह है कि हमारे देश में क्षेत्रीय, धार्मिक एवं शहरी तथा ग्रामीण विभिन...
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फिर किस दुर्भाग्य की घड़ी में नारी का पतन होने लगा कि आज नारी समाज अपंग, विकलांग बन कर रह गया है?...के बहुत से राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। जिनकी वजह से स्त्रियों का अवमूल्यन होने लगा और अठाहर...
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हमें हजार बार विचार करना होगा कि नारी के प्रति बरती जाने वाली अपनी नीति कहाँ तक उचित और कहाँ तक अनुचित है?...से हम क्या पाते और क्या खोते हैं? यदि ऐसी विवेचना की जा सके तो प्रतीत होगा कि जो पाया है इससे खोया अध...
- "का तहि यज्ञे सहधर्मचारिणी" तो फिर उनके यज्ञ में उनकी सहधर्मचारिणी कौन है?... विश्वावारा ने तब बताया कि इस निमित्त सोने की सीता जी की प्रतिमा बनाई गई है।
इस आख्यान से यह स्पष्ट...
- (२) सारा जीवन पाप और प्रतारना में बीत जाए और पारमार्थिक जीवन के विकास के लिए बिलकुल प्रयत्नशील न हुआ जाए?... इन दोनों अवस्थाओं का सामना केवल पुरुष को ही नहीं करना पड़ता, स्त्रियों को भी करना पड़ता है। यदि पुरुष...
- अंग्रेज-अमेरिकन क्यों पुरुषार्थी होते हैं?... छोटे से टापू पर निवास करने वाले ६ करोड़ अंग्रेज लोगों ने सारे संसार पर राज्य क्यों कर डाला? उत्तर यह...
- अगर आधी दुनियाँ इस तरह दलित और पीड़ित रहे तो मनुष्य समाज को सुखी कैसे कह सकते हैं?... इसलिए नर-नारी समभाव की सख्त जरूरत है। मतलब यह नहीं है कि कोई भी नारी किसी भी नर के समान है। सैकड़ों ...
- अच्छे और प्रेरणादायक चित्र ध्यानपूर्वक देखने से अपना इतना प्रभाव उत्पन्न करते हैं तो निम्नकोटि के चित्र अपना प्रभाव छोड़ने से क्यों चूकते होंगे?... पत्र-पत्रिकाओं और सार्वजनिक स्थानों में विज्ञापन चित्र लगाए जाते हैं। अधिकांश चित्रों में विज्ञापित ...
- अब भला बताइये जिस काम के कारण शुरू में ही बच्चे का खेलना बन्द हो जाए, तीन घण्टे कक्षा में कैदी के समान बँधकर बैठना पड़े, न हँस सके, न बोल सके, न कहीं इधर-उधर जा सके, पढ़ाई कुछ समझ में न आने पर मास्टर से तथा घर पर मारपीट अलग सहनी पड़े, उस काम में बच्चे की दिलचस्पी कैसे हो सकती है?... वह तो मास्टर को एक हऊआ तथा पढ़ाई को मुसीबत समझने लगते हैं। लड़का जब घर पर कुछ शरारत करता है तो माँ-ब...
- अब रामचन्द्र क्या करते हैं?... "तेन राज्ञा राजक्रतुरश्वमेधः प्रकान्तः" अर्थात हे आर्य पुत्रियो! वे इन दिनों अश्वमेध यज्ञ की तैयारी ...
- अब वे परिवार कहाँ रह गए हैं, जो नररत्न, महामानव, देव पुरुष उत्पन्न करके दिखा सकें?... आज नारी बुरी तरह टूट गई है और उसके फलस्वरूप परिवार संस्था भी टूट रही है, फिर यह कैसे सम्भव हो सकता ह...
- अम्मा से कहो कि क्या चाय बिना नाश्ते की चलेगी?... जिस सामान की जरूरत हो दौड़कर बाजार से ले आओ, जरा घर तक तो चले जाओ बेटा, अपनी चाची से कह आओ कि चाय भा...
- अरब के रेगिस्तान में उड़ने वाले सूखे रेत से आँखों की रक्षा करने के लिए बुरका ओढ़े रहने का औचित्य हो सकता है, पर अपने यहाँ वैसी कोई कठिनाई नहीं, फिर मुँह पर नकाब ओढ़ने की जरूरत किसलिए मानी जाए?... भारतीय समाज में, नारी के प्रति उच्च भावना और उच्च मान्यताएँ सदा से रही हैं। यहाँ नारी मात्र को अभी भ...
- अविकसित मस्तिष्क भला-बुरा सोच ही नहीं पाता, फिर उससे भले की आशा कैसे की जाए?... कैकेयी और मंथरा ने तो अपनी समझ में उस समय बहुत अच्छा ही कार्य किया था, लेकिन वह अनिष्टकारी सिद्ध हुआ...
- अविकसित माँ, असंस्कृत बहन, उपेक्षित बेटी और अपरिष्कृत मनोभूमि की पत्नी के साथ रहकर भी भला कोई व्यक्ति अपनी श्रेष्ठता का दम्भ रखे, डींग हाँके तो उस पर हँसने के सिवाय किया भी क्या जा सकता है?... नारी के किसी भी रूप की गरिमा घटाने पर पुरुष को घाटा ही घाटा उठाना पड़ता है। नारी के विकास में ही उसक...
- अव्यवस्थित और अस्त-व्यस्त स्थिति में कोई कब तक निरोग रह सकता है?... गर्भधारण से लेकर शिशु-पालन तक के कष्ट-साध्य कार्य में कितनी जीवनी-शक्ति नष्ट होती है, उसका अनुभव वही...
- अव्यवस्थित और अस्त-व्यस्त स्थिति में कोई कब तक निरोग रह सकता है?... गर्भधारण से लेकर शिशु-पालन तक के कष्ट-साध्य कार्य में कितनी जीवनी-शक्ति नष्ट होती है, उसका अनुभव वही...
- अशोभनीय और अश्लील रूप में चित्रित स्त्री आकृतियों का क्या प्रभाव देखने वालों पर पड़ता होगा कुछ कहना मुश्किल है और आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस विषय में माता-पिता अपने बच्चों के सामने अधिक चर्चा करना भी पसन्द नहीं करते जब ऐसे चित्रों को अपने बच्चों के साथ देखते होंगे और बच्चे उस चित्र के सम्बन्ध में अपने माता-पिता से पूछते होंगे तो माता-पिता कैसे उत्तर देते होंगे?... युवक, युवतियों और वृद्ध व्यक्तियों पर अशोभनीय चित्रों का उतना बुरा प्रभाव नहीं होता जितना कि बच्चों ...
- आज उन्हीं की जन्मभूमि पर नारी पर किया जाने वाला अत्याचार क्यों?... आज के युग में भारतीय नारी की शिक्षा का औसत सोचते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं और आश्चर्य होता है कि क्...
- आज की पिछड़ी हुई नारी के अज्ञान का दण्ड भी यदि परिवार और समाज को भुगतना पड़ रहा है तो क्या आश्चर्य?... इसलिए यदि हमें अपने देश और समाज की स्थिति अच्छी रखनी हो तो उसके लिए नारी का स्तर ऊँचा उठाए बिना और क...
- आज के युग में भारतीय नारी की शिक्षा का औसत सोचते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं और आश्चर्य होता है कि क्या यही उन ब्रह्मवादिनी की भूमि है?... जो-जो अत्याचार आज तक नारी पर अबला समझ कर किये गये, चाहे उससे अन्तरिक्ष फट पड़ा हो; परन्तु पुरुष का ह...
- आज समाज से यदि नारी अपने आप को दूर कर ले अथवा अपने को निकाल ले तो क्या समाज का रथ केवल पुरुष रूपी एक पहिए पर एक दिन भी चल सकता है?... नारी समाज की आधी जनसंख्या है। समाज के बहुत से ऐसे काम हैं जो नारी द्वारा ही किए जाते हैं। सदस्य, जिन...
- आज समाज से यदि नारी अपने आपको दूर कर ले अथवा अपने को निकाल ले तो क्या समाज का रथ केवल पुरुष रूपी एक पहिए पर एक दिन भी चल सकता है?... नारी समाज की आधी जनसंख्या है। समाज के बहुत-से ऐसे काम है, जो नारी द्वारा ही किए जाते हैं। सदस्य जिनस...
- आज्ञा देने से पूर्व बच्चे से यह न पूछे कि क्या तुम यह कार्य करोगे या करोगी?... क्योंकि ऐसे पूछने पर ना की ही अधिक सम्भावना रहती है और ना कर देने पर फिर उससे जोर-जबरदस्ती से काम ले...
- आत्मा की चिन्ता तो ऐसी स्थिति में क्या होगी?... किन्तु आध्यात्मिक बौद्धिक तृप्ति के बिना जीवन में न तो गहरे सुख की अनुभूति सम्भव है और न शान्ति की। ...
- आने वाले २०-२५ वर्षों में जबकि आज की सन्तान वयस्क होगी, तब तो समय और न जाने क्या करवट लेगा?... अत: लड़के को बुढ़ापे की लाठी मानकर लड़की को दुत्कारना भी अनुचित है। अच्छा तो यही है कि वृद्धावस्था क...
- आम रास्ते पर चलने वाले नागरिकों की आँखों पर हमला करने का किसी को क्या हक है?... " विनोबाजी का यह प्रश्न अपने आप में एक सच्चाई है। अधिकांश लोग न तो इस प्रश्न की आवश्यकता अनुभव करते ...
- इतिहास काल और स्वाधीनता संग्राम में जिन महिलाओं ने यश पाया है, क्या वे शिक्षा के अभाव में वैसा कर सकती थीं?... हम यह सब पढ़ते और समझते हुए भी नारी शिक्षा से मुँह मोड़ें तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?
...
- इनके अतिरिक्त माता क्या उन्हें कुछ कम घर-गृहस्थी के कामों में लगाए रहती है?... यह अभिभावकत्व नहीं है। यह अन्याय है।
सेवा भाव का विकास भी आवश्यक है
जिन बच्चों में आरम्भ से सेवा...
- इन्दौर में एक बार जागरूक महिलाओं ने अश्लील पोस्टरों का प्रतिरोध किया तो पूछा गया कि अशोभनीय पोस्टर किन्हें कहा जाए?... तो उत्तर था—जिन पोस्टरों को माता-पिता अपने बच्चों के साथ नहीं देख सकते।
यह व्याख्या एक सीमा तक ठीक...
- इस अनियमितता का प्रभाव उसके भावी जीवन पर क्या पड़ेगा?... क्या उसके जीवन को नष्ट करने का दोष माता-पिता का नहीं? संध्या जैसे लाखों लड़के-लड़कियों की यही दशा रह...
- इस अमृत-तत्त्व पर नारी प्रवचन तो नहीं करती, पर पितृ-कुल और पति-कुल के सदस्यों के साथ भाव-भरे अनुदान प्रस्तुत करते हुए बताती है कि प्रेम क्या है, किस प्रकार किया जाता है, और उसके कितने मधुर फल इसी जीवन में चखे जा सकते हैं?......
- इस प्रथा के खिलाफ हमारे यहाँ सन् १९६१ में ही कानून बन गया था, जिसके अनुसार दहेज लेना व देना गैर कानूनी घोषित किया गया; लेकिन क्या दहेज प्रथा बन्द हुई?... नहीं, हमारे यहाँ के लगभग सभी धर्मों, क्षेत्रों और जातियों के प्रत्येक वर्ग में दहेज प्रथा जोर-शोर से...
- इस समय उनके स्कूल में क्या पढ़ाई चल रही है, कितना पाठ्यक्रम हो चुका है और कितना शेष है, इसका पता लगाया करें, साथ ही उससे पढ़े पाठों के विषय में प्रश्न करके यह पता लगाया करें कि बच्चे जो पाठ पढ़ चुके होते हैं, वह याद भी करते हैं या नहीं?... उनकी कापियाँ देखा करें और पता लगाया करें कि वे अपना काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं? जो गलतियाँ ठीक की...
- इस स्थिति को अपने लिए भले ही कोई स्वीकार न करे पर पूछा जाय कि आप अपने कामकाजी जीवन के सम्बन्ध में पत्नी से परामर्श लेते हैं?... उसकी राय को कितना महत्त्व देते हैं? उसके सुख-दुख और सुविधा-असुविधा का कितना ख्याल रखते हैं? तो मिलने...
- इस हृदय-द्रावक स्थिति को कब तक सहन किया जाय?...
नारी की आज जो स्थिति है, उसे किसी भी प्रकार न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। मनुष्य के कुछ जन्मसिद्ध...
- इसका कारण समाज में प्रचलित दहेज-प्रथा, विवाह-समस्या का विस्तृत ढाँचा है?... परन्तु इस कारण कोई अभिभावक अपने दायित्व से नहीं भागता। वह लड़की को गृह-कार्यों में दक्ष बनाने के साथ...
- इसका क्षेत्र कितना बड़ा है?... काम कितना वजनदार है? यह देखते हुए अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है कि इसके लिए कितने बड़े प्रयत्न करन...
- इसके लिए उनका आत्मिक और बौद्धिक स्तर कितना ऊँचा रहा होगा, उनका चिन्तन और दृष्टिकोण कितना विशाल रहा होगा, यह कोई कहने की बात नहीं?... क्या किसी अशिक्षित नारी में यह गुण हो सकते हैं? शकुन्तला अशिक्षित रहकर भरत बना सकती थी क्या? गार्गी ...
- इसके लिए बेइमानी से पैसा कमाने के अलावा और क्या तरीका हो सकता है?... ईमानदार व्यक्ति के लिए घर की सारी जमा पूँजी स्वाहा करने के बाद भी एक कन्या के विवाह का सरंजाम जुटाना...
- इसके लिए यदि हमारे जीवन मूल्य जिम्मेदार नहीं हैं तो क्या कारण है कि भारतीय नारी को घर की चहारदीवारी में ही अपना सारा जीवन व्यतीत करना पड़ता है और क्यों परमुखापेक्षी रहना पड़ता है?... यह स्थिति भारतीय संस्कृति के और भारतीय जीवन मूल्यों के कारण नहीं बनी है, बल्कि देश, काल और समाज में ...
- इसके विपरीत अपराधी प्रवृत्ति के मनुष्यों की जीवनी से पता चलता है कि उनका बाल्यकाल किस प्रकार कुण्ठाओं से ग्रस्त था, अव्यवस्थित था?... बच्चे भावी समाज की नींव होते हैं। जिस प्रकार की नींव होगी, उसी के अनुरूप महल या भवन का निर्माण किया ...
- इसलिए अकेली लड़की ही कहाँ दोषी हुई?... परिवारों में बच्चों का पालन-पोषण करते समय समानता का बरताव करना चाहिए। घर में जब से बच्चा आए, चाहे वह...
- इससे बढ़कर लज्जाजनक बात और क्या हो सकती है?... जिसने नहला-धुलाकर अपने सम्वेदनशील संस्कारों से अभिसिंचित कर अपने रस, रक्त और प्राणों से पोषण प्रदान क...
- इसी समय बच्चों को स्वयं भी कुछ न कुछ पढ़ाना चाहिए और कभी-कभी उनकी परीक्षा लेकर यह पता भी करना चाहिए कि वे किस गति से प्रगति कर रहे हैं?... इस प्रकार बच्चों की पढ़ाई में स्वयं भाग लेकर उनकी अभिरुचि बढ़ाते रहना चाहिए, जो अभिभावक बच्चों की पढ...
- उदाहरण के लिए एक वर्ष का बच्चा जब खड़े होने का प्रयास करता है तो उसे इतनी बुद्धि नहीं होती कि वह पहले यह अनुमान लगाए कि उसमें खड़े होने की सामर्थ्य आ भी गई है या नहीं?... वह तो माता-पिता की तरह या बड़े भाई-बहिनों की तरह स्वयं भी अपना पाँवों पर खड़ा होना चाहता है, इसके लि...
- उनकी कापियाँ देखा करें और पता लगाया करें कि वे अपना काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं?... जो गलतियाँ ठीक की जाती हैं, उन्हें बार-बार लिखकर अभ्यास कर लेते हैं या यों ही छोड़ देते हैं।
इस दे...
- उनके लिए पाठ्य पुस्तकें कहाँ से मिलें?... यह सच है कि ऐसे साहित्य का अब तक नितान्त अभाव रहा है। किन्तु अब महिला जागरण अभियान का केन्द्रीय संस्थ...
- उन्हें शायद कभी कोई तकलीफ ही महसूस नहीं होती और न शायद यह अहसास होता है कि उनके जीवन में आधुनिक जीवन के साधनों का कितना अभाव है?... दूसरी तरफ गाँवों में कुछ सम्पन्न घर की महिलाएँ भी होती हैं, जो पढ़ी-लिखी तो नहीं होती लेकिन पहनने-ओढ...
- उस क्षेत्र में भी वह बहुत कुछ कर सकती थी पर करे कैसे?... जिसे तुच्छ माना गया है, जिसे तुच्छ बनाया गया है, वह तुच्छता की भूमिका ही निभाता रह सकता है।
कोयले...
- उस स्थिति में पुरुष पागल नहीं होगा तो क्या दार्शनिक बनेगा?... आज की सामाजिक परिस्थितियाँ कुछ ऐसी ही हैं। यह कुल्हाड़ी किसी देवी-देवता या भगवान ने नहीं, पुरुष ने स...
- उसका रक्त, माँस, हड्डी आदि जो कुछ है वह स्पष्टत: माता के पास जो शरीर-सम्पत्ति थी, उसी का एक टुकड़ा अलग से टूट कर खड़ा हो गया है, जो दूध बच्चा पीता है, वह माता के रस-रक्त के अतिरिक्त और क्या है?... उसे बच्चा पीता रहेगा तो माता के शरीर में उसकी कमी पड़ेगी ही। जो रक्त-माँस लड़कियों के अपने स्वास्थ्य...
- उसकी अपनी मर्जी कहाँ?... बन्दी को मालिकों की मर्जी पर ही चलना पड़ता है। उसे अपने स्वास्थ्य की बात सोचने का अधिकार ही किसने दि...
- उसकी अपनी मर्जी कहाँ?... बन्दी को मालिकों की मर्जी पर ही चलना पड़ता है। उसे अपने स्वास्थ्य की बात सोचने का अधिकार ही किसने दि...
- उसकी राय को कितना महत्त्व देते हैं?... उसके सुख-दुख और सुविधा-असुविधा का कितना ख्याल रखते हैं? तो मिलने वाले उत्तर, बरते गए दृष्टिकोण को और...
- उसके सुख-दुख और सुविधा-असुविधा का कितना ख्याल रखते हैं?... तो मिलने वाले उत्तर, बरते गए दृष्टिकोण को और अच्छी तरह स्पष्ट करेंगे।
अधिकांश लोगों की मान्यता ह...
- उसने अनीति के आगे सिर क्यों झुकाया?... यह परिमार्जन की बेला है। दुष्टता अपनी पकड़ कब शिथिल करेगी इसकी प्रतीक्षा किए बिना दुर्बलता को अपना प...
- उससे हम क्या पाते और क्या खोते हैं?... यदि ऐसी विवेचना की जा सके तो प्रतीत होगा कि जो पाया है इससे खोया अधिक है। ऐसे अहितकर, अनीतियुक्त दृष...
- उसे अपने स्वास्थ्य की बात सोचने का अधिकार ही किसने दिया है?... सोने, उठने का कोई समय नहीं। मर्द रात को १२ बजे आए तो उसी समय चूल्हा फूँकना चाहिए। सब लोग खा जाएँ उसक...
- उसे अपने स्वास्थ्य की बात सोचने का अधिकार ही किसने दिया है?... सोने-उठने का कोई समय नहीं। मर्द रात को १२ बजे आवे तो उसी समय चूल्हा फूँकना चाहिए। सब लोग खा जायँ, उस...
- उसे असहाय बनाकर किसने क्या पाया?... घर परिवार के लोगों की इससे क्या सुविधा बढ़ी? पति को उससे क्या सहयोग मिला? बच्चे क्या अनुदान पा सके? ...
- उसे असहाय बनाकर किसने, क्या पाया?... घर-परिवार के लोगों को इससे क्या सुविधा बढ़ी? पति को उससे क्या सहयोग मिला? बच्चे क्या सुरक्षा पा सके?...
- उसे जोड़े बिना मन्दिर की पवित्रता कैसे प्रतिष्ठित होगी?... नारी जीवन के प्रति सामाजिक जीवन में आनन्द, आदर और आस्था पैदा करके ही उस विसंगति को दूर किया जा सकता ...
- उसे दर-दर, गली-गली मारा-मारा फिरने दिया जाए तो अनिष्ट क्या होगा?... अपनी श्रद्धा और कोमलता का ही सर्वनाश होगा। उसका प्रतिफल प्रभाव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को कलुषित, क...
- उसे देखकर दर्शन सोचने लगता है कि क्या संध्या जब बड़ी होगी तो उसे पेट की शिकायत न होगी?... क्या वह चटोरे स्वभाव को छोड़ सकेगी? इस अनियमितता का प्रभाव उसके भावी जीवन पर क्या पड़ेगा? क्या उसके ...
- उसे श्रेय-सम्मान मिलने की क्या आवश्यकता है?... पशुओं से लाभ उठाया जाता है, पर उन्हें श्रेय-सम्मान देने की आवश्यकता नहीं समझी जाती, फिर स्त्री के लि...
- उसे समानता का स्तर देना किसे अच्छा लगेगा?... यह दोनों ही प्रकार की झिझक बिलकुल भ्रान्तिपूर्ण है। हर नारी को और उसका हित चाहने वालों को इसे अपने म...
- उसे समानता का स्तर देना किसे अच्छा लगेगा?... यह दोनों ही प्रकार की झिझक बिल्कुल भ्रान्तिपूर्ण है। हर नारी को और उसका हित चाहने वालों को इन्हें अप...
- एक बार एक महिला से पूछा गया कि आपके कितने बच्चे हैं?... उसने कहा—९ बच्चे हैं और १०वाँ होने वाला है। उस पढ़ी-लिखी महिला ने उसके सामने आबादी बढ़ने तथा भारत की...
- एक बार किसी ने उनसे पूछा—आप राजकुमारी हैं, आभूषण धारण क्यों नहीं करती?... " उन्होंने कहा—"जेवो जीनत बस हमीरस्थ नामेमन जेवुन्निसा अर्थात् मैं चाहती हूँ कि मैं नारी जाति का आदर...
- एक हाथ से जंजीर ढीली होने और दूसरे हाथ से नई रस्सी कस देने से स्थिति कहाँ बदली?... परिवर्तन ऐसा लाया जाना चाहिए जिससे नारी द्वारा भी नर की ही तरह एक सुयोग्य और सुसंस्कारी मानव की भूमि...
- ऐसी दयामयी नारी का उपकार यदि तिरस्कार तथा उपेक्षा से चुकाया जाता है तो इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है?... पत्नी के रूप में उसका महत्त्व कुछ कम नहीं है। नारी पुरुष की अर्द्धांगिनी है। पत्नी के बिना पति का व्...
- ऐसी दशा में कोल्हू के बैल की तरह एक नीरस चक्र की धुरी पर घूमती रहने वाली नारी को अपनी स्थिति की निराशा और व्यथा अनुभव होती हो और खीज उठती हो तो आश्चर्य ही क्या है?... कहना न होगा कि यह स्थिति पिछड़ेपन की ही सूचक है, भले ही उसके परिवार के लोग कितनी ही सम्पन्नता का दम ...
- ऐसी दशा में कोल्हू के बैल की तरह एक नीरस-चक्र की धुरी पर घूमती रहने वाली नारी को अपनी स्थिति से निराशा और व्यथा अनुभव होती हो और खीज उठती हो तो आश्चर्य ही क्या है?... कहना न होगा कि यह स्थिति पिछड़ेपन की ही सूचक है, भले ही उसके परिवार के लोग कितनी ही सम्पन्नता का दम ...
- ऐसी महत्त्वपूर्ण तथा जीवनदायिनी नारी की उपेक्षा करना कहाँ तक ठीक है?... यह एक विचारणीय विषय है।
नारी अपने विभिन्न रूपों में सदैव मानव जाति के लिए त्याग, बलिदान, स्नेह, ...
- ऐसी हालत में बेकार छेड़छाड़ क्यों की जाए?... इस प्रकार के प्रश्न कई परम्परावादी उठाया करते हैं।
स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहने देने से, उथल-पुथ...
- ऐसे वातावरण में भूखे भेड़ियों से उनके शील की रक्षा के लिए परदा ओढ़ने की आवश्यकता किस आधार पर अनुभव की जानी चाहिए?... यह प्रथा भारतीय पुरुष समाज पर गहरा लांछन है कि उनकी बहनों और बेटियों को परदा ओढ़कर किसी तरह अपना शील...
- ऐसे समय में पूरी सावधानी रखनी चाहिए और वह कैसे बच्चों के साथ रह रहा है तथा उनकी प्रवृत्ति और स्वभाव कैसा है?... इनका ध्यान रखना चाहिए। पाठशाला की संगति के सम्बन्ध में बच्चे के दूसरे साथियों, अध्यापकों और स्वयं बच...
- कन्या देकर उसने क्या अपराध कर डाला, जिसका जुरमाना घर की कुर्की करा देने पर भी पूरा नहीं होता?... समय-कुसमय उसकी माँग-फरमाइश का दबावपूर्ण सिलसिला सदा ही चलता रहता है। जब भी कुछ कमी पड़ती है, तभी अपम...
- काम का दबाव ही अहर्निश छाया रहता है, फिर मनोरंजन की इच्छा उठे तो उसका क्या महत्त्व?... अवसर न मिलने से वह उमंग भी असमय में ही मर जाती है। नीरसता स्वभाव का अंग बन जाती है। न उत्साह, न उमंग...
- काम कितना वजनदार है?... यह देखते हुए अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है कि इसके लिए कितने बड़े प्रयत्न करने होंगे और कितने अधिक...
- किन्तु इससे क्या?... जब तक हमारा व्यवहार न बदले तब तक उस कानूनी सुधार भर से समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
समाज में एक ...
- किसी ने एम०ए०, बी०ए० तक शिक्षा भी प्राप्त कर ली, किन्तु वह समाज से दूर-दूर संसार की गतिविधियों से विरत आत्मलीन जैसा रहता है, न लोगों के सम्पर्क में आता है और न विचारों का आदान-प्रदान ही करता है, तो उसकी शिक्षा उसके क्या काम आ सकती है?... इस प्रकार एकाकी रहकर वह अपनी विद्या का लाभ न स्वयं उठा पाता है और न किसी दूसरे को दे पाता है।...
- कुछ ही दिन पहले उसी घर में बहू बनकर आई जेठानी भी अपनी स्थिति भूलकर अपनी उस बेबस बहन के प्रति कैसे हृदयहीन बन पाती है?... एक नारी दूसरी नारी के दुःख-दरद को कम करने की जगह उल्टे उसे बढ़ाने में ही अपना सहयोग क्यों देने लगती ...
- कैसे उनके बच्चे महान बन सकेंगे?... इसके लिए माता-पिता का त्याग, परिश्रम तथा अथक प्रयास व लगन के साथ बच्चे की नींव मजबूत बनानी होगी।
प...
- कैसे दुःख और आश्चर्य की बात है कि रूढ़िवादिता के पक्षपाती व्यक्तियों की समझ में यह छोटी सी बात भी नहीं आती, कि जब नारियाँ वेदमंत्रों की स्रष्टा हो सकती हैं तो उन्हें पढ़ने का अनधिकारी कैसे कहा जा सकता है?... ज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र में तो नर-नारी का भेद करना किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। परब्रह...
- कोई भी आदेश देते समय यह जरूर देखा जाना चाहिए कि उस समय बच्चा कर क्या रहा है और उसकी मनःस्थिति क्या है?... उदाहरणार्थ बच्चा किसी रुचिकर खेल में लगा है या एकाग्रता के साथ पढ़ रहा है या किसी हानिरहित चेष्टा मे...
- क्या इतनी सुविधा स्त्रियों को नहीं मिल सकती?... प्राणी को पिंजड़े में कैद करने पर उसकी प्रकृति प्रदत्त स्फूर्ति क्रमश: नष्ट होती चली जाती है। इसका प...
- क्या उसकी त्याग शक्ति पुरुष से ज्यादा नहीं है?... क्या उसकी सहिष्णुता और उसका साहस पुरुष को पीछे नहीं छोड़ देता? उसके बिना पुरुष की हस्ती ही सम्भव नही...
- क्या उसकी सहज बोध की शक्ति पुरुष से अधिक नहीं है?... क्या उसकी त्याग शक्ति पुरुष से ज्यादा नहीं है? क्या उसकी सहिष्णुता और उसका साहस पुरुष को पीछे नहीं छ...
- क्या उसकी सहिष्णुता और उसका साहस पुरुष को पीछे नहीं छोड़ देता?... उसके बिना पुरुष की हस्ती ही सम्भव नहीं हो सकती थी। अगर अहिंसा हमारे जीवन का धर्म है तो भविष्य स्त्री...
- क्या उसके जीवन को नष्ट करने का दोष माता-पिता का नहीं?... संध्या जैसे लाखों लड़के-लड़कियों की यही दशा रहती है।
छोटे बच्चे के पारिवारिक जीवन का यदि पूरी तरह...
- क्या उसे निराश कर दिया जाएगा?... क्या पौरुष अपनी भूमिका भुला देगा? नहीं, जहाँ पुरुषार्थ जिन्दा है, वहाँ इस दिशा में तुरन्त सक्रियता द...
- क्या कर रहा है?... बालक ने अपनी बाल सुलभ भाषा में कहा—अम्मा मैं लकड़ी की थाली बना रहा हूँ। जब तू बूढी हो जाएगी तो इसी म...
- क्या किसी अशिक्षित नारी में यह गुण हो सकते हैं?... शकुन्तला अशिक्षित रहकर भरत बना सकती थी क्या? गार्गी ने हजारों लोगों का आध्यात्मिक मार्गदर्शन किया, म...
- क्या पौरुष अपनी भूमिका भुला देगा?... नहीं, जहाँ पुरुषार्थ जिन्दा है, वहाँ इस दिशा में तुरन्त सक्रियता दिखाई देगी।
महिलाओं में से अनेकों...
- क्या यह उसका अपना उपार्जन है?... गहराई से देखने पर पता चलेगा कि यह बलिष्ठता उसे माता के, पत्नी के, भगिनी के, पुत्री के अजस्र अनुदानों...
- क्या वह चटोरे स्वभाव को छोड़ सकेगी?... इस अनियमितता का प्रभाव उसके भावी जीवन पर क्या पड़ेगा? क्या उसके जीवन को नष्ट करने का दोष माता-पिता क...
- क्या हमने कभी सोचा है कि हमारे मरने के बाद पत्नी-बेटी, जो कभी घर से बाहर नहीं निकलीं, उनकी क्या दशा होगी?... सम्पत्ति दो दिन की मेहमान है, कल चली जाएगी। पुरुषार्थी का ही संसार में रहना योग्य है। अस्तु नारी वर्...
- क्या हमने कभी सोचा है कि हमारे मरने के बाद पत्नी-बेटी, जो कभी घर से बाहर नहीं निकलीं, उनकी क्या दशा होगी?... सम्पत्ति दो दिन की मेहमान है, कल चली जायगी। पुरुषार्थी का ही संसार में रहना योग्य है। अस्तु, नारीवर्...
- क्षति की पूर्ति कैसे हो?... खाईं पाटने के लिए क्या किया जाए और खण्डहरों के स्थान पर नया भवन कैसे खड़ा हो?
समय की माँग यह है क...
- खाईं पाटने के लिए क्या किया जाए और खण्डहरों के स्थान पर नया भवन कैसे खड़ा हो?... समय की माँग यह है कि रचनात्मक प्रयोगों को हाथ में लिया जाए। अनौचित्य को निरस्त करना ही काफी नहीं, मह...
- खाते-पीते तक नींद धर दबाती है और फिर कहाँ की पुस्तकें और कहाँ की पढ़ाई?... सायंकाल तो ऐसा रहता ही है। इस प्रकार के न जाने कितने काम उनके लिए सबेरे भी लगे रहते हैं। इनके अतिरिक...
- गाँधी ने दक्षिण अफ्रीका में गोरे और काले रंग वालों के साथ बरते जाने वाले भेदभाव के विरुद्ध जब आन्दोलन खड़ा किया था, तो उन्हें यह कहकर चिढ़ाया गया था कि आप भारतवासी भी तो अछूतों और स्त्रियों के साथ समान व्यवहार नहीं करते हैं?... हमसे वैसा न्याय पाने की माँग करने से पहले आप अपने यहाँ तो सामाजिक न्याय लागू कीजिए। हम जब भी जहाँ भी...
- घर परिवार के लोगों की इससे क्या सुविधा बढ़ी?... पति को उससे क्या सहयोग मिला? बच्चे क्या अनुदान पा सके? देश की अर्थ व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नार...
- घर में छिपाकर रखने से, जौहर और आत्मघात करने से भी इज्जत बच सकी क्या?... यदि उसे भी दुर्बुद्धि और मदान्धता से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता तो उस स्थिति में उसकी सन्तान...
- घर-परिवार के लोगों को इससे क्या सुविधा बढ़ी?... पति को उससे क्या सहयोग मिला? बच्चे क्या सुरक्षा पा सके? देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रगति में पि...
- छोटे से टापू पर निवास करने वाले ६ करोड़ अंग्रेज लोगों ने सारे संसार पर राज्य क्यों कर डाला?... उत्तर यही है कि वे पुरुषार्थी थे और हैं। पुरुषार्थ का सबसे बड़ा चिह्न नियमित दिनचर्या है। अंग्रेज जा...
- जन्म से मरण पर्यन्त एक छोटे से पिंजड़े में घुटते रहना पड़े और शिक्षा की प्रकाश किरणें समीप तक न पहुँचे तो समाज संसार से पूरी तरह कटी हुई नारी का बौद्धिक विकास कैसे सम्भव होगा?... भावना पर खराद चढ़ाने वाली संगीत साहित्य कला का जिसे दर्शन तक नहीं होता उससे उदात्त और परिष्कृत भावना...
- जब फूहड़ चित्रण में निम्नवर्ग की निकृष्टता और सम्पन्न वर्ग की कुत्सा भड़काने के निमित्त बनकर इन तथाकथित कलाकारों को प्रचुर धन कमाने और बहती गंगा में हाथ धोने का अवसर मिलता है तो वे उसे छोड़ें भी क्यों?... जहाँ नारी फैशन परस्त, भड़कीली और निर्लज्ज होती दिखाई पड़े वहाँ वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उसे...
- जब साँचा ही बिगड़ गया है तो उसमें ढलकर निकलने वाले देवमानवों का दर्शन कैसे हो?... हमारे हर परिवार को सज्जनता, सद्भावना और सत्प्रवृत्तियों का अभ्यास कराने वाली एक प्रयोगशाला के रूप मे...
- जवाहरलाल जी की यह उक्ति स्वीकार्य है कि किसी देश की प्रगति का मापदण्ड है कि उसका महिला समाज कितनी प्रगति कर चुका है?... परन्तु भारत में नारी का पश्चिमीकरण, विवाह में माँगों की प्रथा, नारी का आर्थिक स्वावलम्बन आदि ने नई स...
- जहाँ प्रजा के सात-आठ सौ नुमाइन्दे बैठते हैं, वहाँ स्त्रियों की संख्या कितनी है?... लोक संख्या के अनुपात से देखा जाए तो स्त्रियों की संख्या कम से कम आधी होनी चाहिए। आज उनकी संख्या दस फ...
- जिन गुणों और क्षमताओं के द्वारा वह भार उठा सकती है, हाथ बँटा सकती है उन्हें कौन जगाए, कौन बढ़ाए?... वह स्वयं उन्हें भूल चुकी है और समाज उसके विकास को अधर्म एवं अनावश्यक माने बैठा है। यदि उस पर लगे प्र...
- जिस बालक की बुद्धि का विकास न हुआ हो, जिसमें सांसारिक और पारिवारिक परिस्थितियों के अध्ययन तथा अपने विवेक से उनका निष्कर्ष निकालने की क्षमता ही न हो वह गृहस्थ जैसे महान सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वाह कैसे कर सकता है?... मदालसा ने जब जिस तरह का बालक चाहा, तब वैसा ही बालक उत्पन्न किया।...
- जिस माँ का स्वयं अपना विकास न हुआ हो, वह भला विकासशील सन्तान दे भी कैसे सकती है?... जिसको देशकाल की आवश्यकता और समाज की स्थिति और संसार की गतिविधि का ज्ञान ही न हो, वह उसके अनुसार अपनी...
- जिस माँ का स्वयं अपना विकास न हुआ हो, वह भला विकासशील सन्तान दे भी कैसे सकती है?... जिसको देश-काल की आवश्यकता और समाज की स्थिति और संसार की गतिविधि का ज्ञान ही न हो, वह उसके अनुरूप अपन...
- जिसको देश-काल की आवश्यकता और समाज की स्थिति और संसार की गतिविधि का ज्ञान ही न हो, वह उसके अनुरूप अपनी सन्तान को किस प्रकार बना सकती है?... अपने इस दायित्व को ठीक प्रकार से निभा सकने के लिए आवश्यक है कि नारी को सारे शैक्षणिक एवं सामाजिक अधि...
- जिसको देशकाल की आवश्यकता और समाज की स्थिति और संसार की गतिविधि का ज्ञान ही न हो, वह उसके अनुसार अपनी सन्तान को किस प्रकार बना सकती है?... अपने इस दायित्व को ठीक प्रकार से निभा सकने के लिए आवश्यक है कि नारी को सारे शैक्षणिक एवं सामाजिक अधि...
- जीवन जीने की कला, बच्चों का पालन-पोषण, घर की व्यवस्था, धन का सन्तुलन, उसे खरच करने का ढंग, रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाला सामान्य ज्ञान, भोजन पकाने का सुधरा हुआ ढंग, स्वास्थ्य रक्षा, शिष्टाचार, रोगियों की देखभाल, सफल दाम्पत्य के सूत्र, संयुक्त परिवार के लिए आवश्यक जानकारी, परिवार के सदस्यों में भावनात्मक एकता बनाए रखने का ढंग, अपने गुण, कर्म, स्वभाव का परिष्कार, जीवन का लक्ष्य तथा उसे पाने का क्रम हँसते-हँसाते जीवन जीने का दृष्टिकोण, प्रतिभाशाली व्यक्तित्व बनाना, परिवार संस्था का नवनिर्माण, नारी की प्रगति कैसे हो?... इसकी दिशा, सम्भावना और योजना, अध्यात्म का व्यावहारिक रूप जैसे अनेकों विषय इस ज्ञान सम्वर्द्धन पाठ्यक...
- जैसे पैरों में एक पैर मोटा और एक पैर पतला हो जाए तो क्या वह आदमी अपने जीवन में उन्नति कर पाएगा?... कदापि नहीं। उसी प्रकार धन का भी है। धन से भौतिक वस्तुओं का खरीदना सम्भव है, लेकिन व्यक्तित्व नहीं खर...
- जैसे—'मुखिया को बुला लाओ' 'विमलेश को आवाज देना' या 'देखना, अम्मा क्या करती है?... ' इसके विपरीत कहना इस तरह चाहिए कि 'अपनी दीदी जी को बुला लाइये' 'अपने दद्दा, बड़े भाई साहब या दादाजी...
- जो इतना दे सके वह दाता हुई, उसे उपभोग सामग्री कैसे कहा जाए?... दाम्पत्य जीवन में पुरुष को सरसता, सहकारिता, सेवा के जितने अनुदान, जितने स्वरूप प्रतिदान से प्रदान कर...
- जो ढर्रा चल रहा है उसे बदलने की कोशिश क्यों की जाए?... जो कुछ हो रहा है उसमें पुरुष को अपना लाभ दिखाई देता है और नारी उसकी अभ्यस्त हो गई है। ऐसी हालत में ब...
- जो दूध बच्चा पीता है वह माता के रस के अतिरिक्त और क्या है?... उसे बच्चा पीता रहेगा तो माता के शरीर में उसकी कमी पड़ेगी ही। जो रक्त-माँस लड़कियों के अपने स्वास्थ्य...
- तथ्य के सम्मुख विडम्बना का आग्रह कब तक चले?... जो अपनी मौत आप मर रहा हो, उसके अनौचित्य के सन्दर्भ में बहुत चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं, आवश्यकता इ...
- तब सामाजिक जीवन की सुचारुता की सम्भावना कैसे की जा सकती है?... पुरुष अपनी योग्यता से जो कुछ सुख-शान्ति की परिस्थितियाँ पैदा करेगा उसे घर की गँवार नारी बिगाड़ देगी।...
- तो उन्होंने दूसरा विवाह भी कर लिया?... क्योंकि यज्ञ तो बिना पत्नी के पूर्ण होता ही नहीं। आचार्या विश्वावारा उनका सन्देह निवारण करते हुए बोल...
- दिनभर बाहर काम करके और तरह-तरह के संघर्षों से थककर आने पर भोजन, स्नान तथा आराम-विश्राम की व्यवस्था पत्नी के सिवाय और कौन करेगा?... पुरुष एक उद्योगी तथा उच्छृंखल इकाई है। परिवार बसाकर रहना उसका सहज स्वभाव नहीं है। यह नारी की ही कोमल...
- दूसरों की अनुमति, प्रेरणा, प्रोत्साहन या बढ़ावा दिलाने की क्यों प्रतीक्षा करते हैं?... प्रसन्न और सफल हम तभी हो सकते हैं, जब इन्हें उपेक्षित छोड़कर इनकी आलोचना या उत्साह की परवाह न करते ह...
- देश की अर्थ व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया?... समाज को समुन्नत बनाने में वह क्या योगदान दे सकी? स्वयं नारी, जीवन का क्या सौभाग्य पा सकी? इन प्रश्नो...
- देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया?... स्वयं नारी, जीवन का क्या आनन्द पा सकी? इन प्रश्नों पर विचार करने से लगता है कि नारी को सताकर, नीचे ग...
- नई सुविधाजनक वस्तुओं का विरोध कोई इसलिए नहीं करता है कि उन्हें पूर्वज प्रयोग नहीं करते थे, तो अब हम क्यों करें?... ठण्ढक के दिनों में जो कपड़े पहने जाते हैं, उन्हें गरमी के दिनों में कोई नहीं पहनता। इसी प्रकार गरमी ...
- नर ने उसका अभिवन्दन करने के स्थान पर उस पर आधिपत्य कैसे जमा लिया?... पूजार्ह को शोषण के बन्धनों में क्यों कर बाँधा गया? यह सभी अनबूझे प्रश्न अन्तरिक्ष में गूँजते हैं और ...
- नारी अशिक्षित है, आत्म-निर्भर नहीं है तो शादी करने वाला वर-पक्ष दहेज माँगता है, यह कितनी शर्म की बात है?... हमें चाहिए कि नारी-उत्थान के कदम बढ़ायें। प्रत्येक मनुष्य अपने घर के नारीवर्ग को सुशिक्षा प्रदान करे...
- नारी के अधिकारों को कौन स्वीकार करेगा?... उसे समानता का स्तर देना किसे अच्छा लगेगा?
यह दोनों ही प्रकार की झिझक बिलकुल भ्रान्तिपूर्ण है। हर न...
- नारी के अधिकारों को कौन स्वीकार करेगा?... उसे समानता का स्तर देना किसे अच्छा लगेगा?
यह दोनों ही प्रकार की झिझक बिल्कुल भ्रान्तिपूर्ण है। ह...
- नारी के अविकसित होने से अपनी उचित-अनुचित मनमानी चलाने का अवसर वह क्यों खोए?... नारी वर्ग इसलिए सन्तुष्ट है कि उसे पिंजड़े में पाले पक्षी की तरह निश्चिन्त रहने का ठिकाना मिल जाता ह...
- नारी को अस्वस्थ बनाकर उसके मालिक पालने हारे भी इस स्थिति में क्या सुख-सन्तोष अनुभव कर रहे हैं?... रोते-कराहते स्वर, आखिर उन्हें भी कुछ तो कष्ट देंगे ही। सहानुभूति समाप्त हो गई हो तो भी खोज और झूँझल ...
- नारी को इस तरह कब तक छला जाएगा, उत्तर कहीं से भी नहीं मिलता?... हम चाहते हैं अच्छी सन्तानें उत्पन्न हों पर यह तभी सम्भव है जब कि नारी को शिक्षित तथा पूर्ण स्वतंत्रत...
- नारी को नारी से परदा किसलिए करना चाहिए?... माँ-बेटी के बीच, पिता-पुत्री के बीच परदा कैसा? इससे तो उनके बीच विचारों का आदान-प्रदान ही रुक जाता ह...
- निकृष्ट कैसे मानी गई?... नर ने उसका अभिवन्दन करने के स्थान पर उस पर आधिपत्य कैसे जमा लिया? पूजार्ह को शोषण के बन्धनों में क्य...
- निस्सन्देह उस समय यह आरम्भ बुद्धिमानी और दूरदर्शिता का प्रतीक था, पर आज तो वैसी विपत्ति नहीं, फिर हम क्यों उसी लकीर के फकीर बने रहें और क्यों नुकसान उठाते रहें?... किसी समय सामन्तों-नवाबों में बड़ी संख्या में औरतें-रखैलें रखने की होड़ चल पड़ी थी। स्त्रियों से अन्त...
- न्याय पूछता है कि वसूली का यह निर्णय किस ऋण के बदले में किया जाता है?... कन्या देकर उसने क्या अपराध कर डाला, जिसका जुरमाना घर की कुर्की करा देने पर भी पूरा नहीं होता? समय-कु...
- पति को उससे क्या सहयोग मिला?... बच्चे क्या सुरक्षा पा सके? देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया...
- पति को उससे क्या सहयोग मिला?... बच्चे क्या अनुदान पा सके? देश की अर्थ व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया? समाज क...
- पर अब सुरक्षा का खतरा भी है तथा अब सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु बैंक जैसे प्रबन्ध भी हैं, तब फिर स्त्रियाँ शरीर पर व्यर्थ बोझ क्यों डालें?... व्यर्थ में गहने क्यों पहनें? यह हमारी सामाजिक सुव्यवस्था, राष्ट्रीय विकास तथा नैतिकता के लिए अब परमा...
- पर आज तो वैसी अनीति का अस्तित्व रह नहीं गया है, फिर उन घृणास्पद बन्धनों में नारी को जकड़े रहने की आवश्यकता क्यों समझी जाए?... अरब के रेगिस्तान में उड़ने वाले सूखे रेत से आँखों की रक्षा करने के लिए बुरका ओढ़े रहने का औचित्य हो ...
- पर क्या यह प्रकृति की देन है?... क्या यह उसका अपना उपार्जन है? गहराई से देखने पर पता चलेगा कि यह बलिष्ठता उसे माता के, पत्नी के, भगिन...
- पराधीन की स्वेच्छा क्या?... उसकी अपनी मर्जी कहाँ? बन्दी को मालिकों की मर्जी पर ही चलना पड़ता है। उसे अपने स्वास्थ्य की बात सोचने...
- पराधीन की स्वेच्छा क्या?... उसकी अपनी मर्जी कहाँ? बन्दी को मालिकों की मर्जी पर ही चलना पड़ता है। उसे अपने स्वास्थ्य की बात सोचने...
- पशुओं से लाभ उठाया जाता है, पर उन्हें श्रेय-सम्मान देने की आवश्यकता नहीं समझी जाती, फिर स्त्री के लिए ही किसी प्रकार की कृतज्ञता प्रकट करना अथवा श्रेय-सम्मान देना क्यों आवश्यक समझा जाए?... नारी का पिछड़ापन दूर करने के लिए उस पर लगे असमानता सूचक प्रतिबन्ध हटाए जाएँ। उसे मानव-जाति का समान घ...
- पशुओं से लाभ उठाया जाता है, पर उन्हें श्रेय-सम्मान देने की आवश्यकता नहीं समझी जाती, फिर स्त्री के लिए ही किसी प्रकार की कृतज्ञता प्रकट करना अथवा श्रेय-सम्मान देना क्यों आवश्यक समझा जाए?... नारी का पिछड़ापन दूर करने के लिए उस पर लगे असमानता सूचक प्रतिबन्ध हटाए जाएँ। उसे मानव जाति का समान घ...
- पश्चिमी देशों में 'मैत्री' शब्द को इन अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है कि कौन लड़की कितने बायफ्रेंड रखती है या किस लड़के की कितनी गर्लफ्रेंड हैं?... माता-पिता का अपनी सन्तानों पर तो कोई ध्यान रहता नहीं और जहाँ ध्यान रखने की बात भी आती है, वहीं लड़के...
- पिंजड़े की कैद में अनुभव बढ़ाने के अवसर ही कहाँ हैं?... काम का दबाव ही अहर्निश छाया रहता है, फिर मनोरंजन की इच्छा उठे तो उसका क्या महत्त्व? अवसर न मिलने से ...
- पिंजड़े में पलने वाले और उन्मुक्त आकाश में उड़ने वाले समान आयु और स्वास्थ्य के तोतों को किन्हीं पक्षी विशेषज्ञों के सुपुर्द करके पूछा जाए कि इनकी शारीरिक, मानसिक स्थिति में क्या कुछ अन्तर है?... वे बतायेंगें कि पालतू पशु का शरीर जीर्ण हो गया और मन टूट गया है। यह हारा, थका और निराश दिखाई पड़ता ह...
- पिछड़ापन किसी को भी कुछ करने नहीं देता फिर भारतीय नारी भी यदि अपने थोड़े से उत्तरदायित्वों को भी ठीक तरह न निभा सके तो इसमें आश्चर्य की बात ही क्या है?... मनुष्य द्वारा मनुष्य की प्रताड़ना नितान्त पाशविक है। सभ्य देशों की अदालतों से कोड़े मारने का दण्ड उठ...
- पुत्री और पुत्र के बीच कितना भेदभाव चलता है, इससे कौन परिचित नहीं है?... अब तक यह कहा जाता रहा है कि स्त्रियों को गायत्री जपने, हवन करने, यज्ञोपवीत पहनने जैसे शुभ कर्म करने ...
- पुरुष को लाभ प्रतीत होता है और नारी भी उसकी अभ्यस्त हो गई है, तो इस प्रसंग में क्यों छेड़-छाड़ की जाए?... ऐसे विचार पुरातन पन्थी अकसर प्रकट करते रहते हैं। यथास्थिति बने रहने में उथल-पुथल के झंझट से तो बचा ज...
- पुरुष यदि इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते तो अकेली स्त्री को ही उस सीमा बन्धन में बाँधना किस तर्क एवं न्याय के आधार पर उचित ठहराया जा सकता है?... विशेष कार्य तो हर किसी के जिम्मे होता है पर वह उतने तक ही सीमित रहने के लिए विवश नहीं किया जाता। पण्...
- पूछा जाना चाहिए कि सहयोगी को बोझ बना लेने के लिए जिम्मेदार कौन है?... प्रायः लोग रटा-रटाया उत्तर देते हैं कि यह हमेशा से चला आ रहा है।
पहली बात तो यह है कि इस तरह के उत...
- पूजार्ह को शोषण के बन्धनों में क्यों कर बाँधा गया?... यह सभी अनबूझे प्रश्न अन्तरिक्ष में गूँजते हैं और अपना समाधान पूछते हैं।
नारी को भी परिप...
- पूर्णाहुति के लिए आते समय यह निश्चय भी साथ ही करते हुए आना चाहिए कि आमंत्रित देवशक्तियों के सम्मुख अपनी निष्ठा और श्रद्धा का क्या प्रमाण प्रस्तुत करेंगे?... देवदक्षिणा का प्रतिज्ञापत्र ही हमारे अन्दर जाग्रत दैवी भावना का सच्चा सबूत माना जा सकता है।
प्रतिज...
- प्रकाश के सामने अन्धकार कैसे टिके?... तथ्य के सम्मुख विडम्बना का आग्रह कब तक चले?
जो अपनी मौत आप मर रहा हो, उसके अनौचित्य के सन्दर्भ मे...
- प्रबल पुरुषार्थ के अभाव में सफलताएँ कब किसको मिल सकी हैं?... साहस भरा पुरुषार्थ करने योग्य मनःस्थिति बनने के लिए प्रोत्साहन की आवश्यकता है। प्रोत्साहन दूसरों के ...
- प्रबल पुरुषार्थ के अभाव में सफलताएँ कब किसको मिल सकी हैं?... साहस भरा पुरुषार्थ करने योग्य मन:स्थिति बनने के लिए प्रोत्साहन की आवश्यकता है। प्रोत्साहन दूसरों के ...
- प्रश्न उठता है कि नारी को इस तरह सताने से नर को क्या लाभ मिला?... उसे असहाय बनाकर किसने, क्या पाया? घर-परिवार के लोगों को इससे क्या सुविधा बढ़ी? पति को उससे क्या सहयो...
- प्रश्न केवल यह नहीं कि क्रियाशील भी निठल्ले न बन जाएँ?... समस्या यह है कि हर सदस्य का खाली समय किस प्रकार रचनात्मक काम में लगाया जाए। इससे परिवार का स्तर तथा ...
- फिर भोक्ता और भोग्य का रिश्ता तो बन ही कैसे सकता है?... माता और सन्तान में कौन किसका उपभोक्ता हुआ — इसका उत्तर देना कठिन है। माता गाय या धाय नहीं है। सन्तान...
- फिर माता-पिता की, भाई-बहनों की, परिवार के अन्य असमर्थों की सहायता कैसे की जाय?... उचित मात्रा में धन कमाने की स्थिति पा लेने से पहले किसी को न तो स्वयं शादी करनी चाहिए और न इसके लिए ...
- फिर यह सब कैसे होगा?... कैसे उनके बच्चे महान बन सकेंगे? इसके लिए माता-पिता का त्याग, परिश्रम तथा अथक प्रयास व लगन के साथ बच्...
- बच्चे क्या अनुदान पा सके?... देश की अर्थ व्यवस्था और प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया? समाज को समुन्नत बनाने में वह क्य...
- बच्चे क्या सुरक्षा पा सके?... देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रगति में पिछड़ी नारी ने क्या योगदान दिया? स्वयं नारी, जीवन का क्या ...
- बिना ठोस-सुदृढ़ आधार के महल का ढह जाना क्योंकर आश्चर्य होगा?... मानसिक, बौद्धिक तथा आत्मिक पतन के कारण ही जीवन व्यवहार में जमीन-आसमान का अन्तर आ जाता है। इस पतन की ...
- भूत-बाधा और गृहयोग अशिक्षितों को परेशान कर सकते हैं, समझदार उनकी चाल में कैसे आएगा?... टोने-टोटके पर वह विश्वास करेगा जिसकी बुद्धि को लकवा मार गया होगा। विवेकशील व्यक्ति परिस्थितियों को स...
- महाराज ऋतध्वज विलासी थे, पर उनकी धर्मपत्नी मदालसा ने अपनी आध्यात्मिक तेजस्विता के कारण अपने बच्चों को जब जैसा चाहा वैसा बनाया?... हनुमान अंजनी के पुत्र थे। उन्हें इतना शक्तिशाली और भक्त बनाने का श्रेय उनकी माँ का ही है। यह सम्पूर्...
- माँ-बेटी के बीच, पिता-पुत्री के बीच परदा कैसा?... इससे तो उनके बीच विचारों का आदान-प्रदान ही रुक जाता है। कोई किसी से मन की बात कह भी नहीं पाती। परदा ...
- माता-पिता इन चित्रों को कैसे सहन करते हैं?... ये पोस्टर रास्ते में होते हैं और हर एक की आँखों पर आक्रमण करते हैं। शहरों में नागरिकों, बहनों को शर्...
- मैंने एक माताजी से पूछा—'आप अपने बच्चों को कितनी बार दूध पिलाती हैं?... ' उन्होंने उत्तर दिया—'इसका हिसाब थोड़े ही है, जब भूख लगी तभी दूध पीता है।'
एक कानूनगो साहेब की इ...
- यदि ऐसा है तो फिर यह जिम्मेदारी ही क्यों ली जाए?... यह जानने योग्य बात है बल्कि यों कहना चाहिए कि विवाह से पूर्व उम्मीदवारों को इस बात का पूरी तरह बोध क...
- यदि जेवर ही सुन्दरता का चिह्न हैं तो फिर स्त्रियाँ ही गुड़ियों की तरह क्यों सजें, पुरुषों को भी उस तरह का सुन्दर बनने का अवसर क्यों न मिले?... शृंगारिकता के विकास से हानि पूरे समाज की
कोई भी स्थिति या अवस्था प्रत्यक्ष लाभदायक तथा उपयोगी सिद्...
- यदि बच्चे को खेलने की अनुमति देते समय आपने बाद में पढ़ने को कहा तो इस बात का ध्यान रखें कि वह खेल के बाद पढ़ने बैठता है या नहीं?... यदि वह खेल के दौरान पढ़ाई वाली बात भूल गया है तो उसे इसका स्मरण दिला देना चाहिए। यदि इस पर भी वह टाल...
- यदि माता-पिता न सिखाएँ और बच्चा सिनेमा के गीत गाने लगे तो उसका क्या दोष?... उसके तोड़-फोड़ के स्वभाव को कोई रोकना भी चाहे तो रोका जाना सम्भव नहीं, उससे हानि तो होती ही है, खीझ ...
- यदि यह बाहुल्य न होता तो वह पत्नी का समर्पणपरक, माता की जान जोखिम में डालने जैसी बलिदानी प्रक्रिया, बहन और पुत्री की अन्तरात्मा को गुदगुदा देने वाली विशेषता कैसे सम्भव होती?... उसके इन दैवी गुणों ने ही उसे इस प्रकार का परमार्थपरायण तपस्वी जीवन जी सकने की क्षमता प्रदान की है।...
- यदि वहाँ की कन्याओं को विवाह जैसे मामलों में निष्पक्ष चिन्तन की छूट है तो यहीं उसे धार्मिक दृष्टि से प्रतिबन्धित क्यों माना जाना चाहिए?... बड़ी संस्था में पुरुष वर्ग की यह मान्यता है कि नारी को समान अधिकार, बराबरी का सम्मान देने तथा उसके स...
- यदि विद्यालय में सीखी बात ठीक से न समझ पाने के कारण बच्चा 'होम-वर्क' नहीं कर पा रहा है तो उसे यह कहकर झिड़क देने पर कि 'स्कूल में क्या सोते रहते हो?... ' उसके मन में कुण्ठा उत्पन्न हो जाएगी। वह 'होम वर्क' को बोझ मान लेगा, पढ़ाई के प्रति उदासीन होने लगे...
- यह उन्हें क्यों अच्छा लगने लगा?... व्यापारी को विज्ञापनबाजी के लिए भी यही रास्ता पसन्द है। नारी के यौवनोन्मत्त रूप को हर वस्तु के साथ ज...
- यह कहा जाए कि राजा बेटा आ गया, कब आए, यह तो तुमने पता ही नहीं चलने दिया—बच्चे की सुखद अनुभूतियों को कितना चेतन करता है?... स्कूली जीवन आरम्भ करने के साथ बच्चों में स्वावलम्बन की आदत डालने का प्रयास भी उसी समय किया जा सकता ह...
- यह दासता नहीं तो और क्या है?... मैं तो इसे पुरुष बर्बरता की क्रूर निशानी कहूँगा।"
अभी पिछले दिनों तक स्त्रियों की चोरी तक की जाती...
- यह देखना होगा कि वर्तमान की अस्त-व्यस्तताओं को किस प्रकार कितनी मात्रा में सुधारा जा सकता है?... यह क्रम आरम्भ तो कर ही देना चाहिए। अपनी दिनचर्या बनानी चाहिए और साथ ही परिवार के अन्य लोगों की भी दि...
- यह विचार पहले से ही कर लेना चाहिए कि यज्ञ को सार्थक बनाने वाली इस पुण्य-प्रक्रिया को किस प्रकार सम्पन्न किया जाए?... इसके लिए पूर्णाहुति के एक-दो दिन पहले ही प्रत्येक नर-नारी को गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति में भाग ल...
- यह समय नारी समाज का शोषण, असत्य प्रस्तुतीकरण नहीं तो और क्या है?... किन्तु लगता है अधिकांश नारियाँ इसके विरुद्ध आवाज बुलन्द करने का साहस नहीं करना चाहती।
क्या रूप के ...
- यहाँ कुछ थोड़े से उदाहरण प्रस्तुत हैं जिससे यह जाना जा सकता है कि किस मंत्र की कौन ऋषिकाएँ हैं?......
- यौन सम्भावनाओं का निर्बाध अवसर होते हुए भी भावनात्मक पवित्रता किस प्रकार पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रह सकती है—इसका मूर्तिमान प्रमाण बहन से बढ़कर इस धरती पर और क्या हो सकता है?... पति के प्रति स्वेच्छा से समर्पण, उसके लिए सब कुछ लुटा देने का उत्साह देखते ही बनता है।...
- लगता है कि जो विकृतियाँ समाज में इतने दिनों से घर बनाए हुए हैं, वे कैसे दूर होंगी?... नारी के अधिकारों को कौन स्वीकार करेगा? उसे समानता का स्तर देना किसे अच्छा लगेगा?
यह दोनों ही प्रका...
- लगता है जो विकृतियाँ समाज में इतने दिनों से घर बनाए हुए हैं, वे कैसे दूर होंगीं?... नारी के अधिकारों को कौन स्वीकार करेगा? उसे समानता का स्तर देना किसे अच्छा लगेगा?
यह दोनों ही प्र...
- लड़की की शादी के लिए दहेज में नकदी, जेवर, कपड़े, बरतन, फर्नीचर आदि तरह-तरह के उपहार देने तथा धूमधाम की होली जलाने के लिए हजारों की धनराशि कहाँ से जमा हो?... इसके लिए बेइमानी से पैसा कमाने के अलावा और क्या तरीका हो सकता है? ईमानदार व्यक्ति के लिए घर की सारी ...
- लेकिन आज हम स्त्रियों को वेद-मंत्रों से दूर रखने की चेष्टा करते हैं, यह कितनी विडम्बना है?... हमें भगवान के नियम का उल्लंघन नहीं करना है और नारी वर्ग को समान अधिकार प्रदान कर साथ-साथ चलने को बाध...
- लेकिन आज हम स्त्रियों को वेद-मंत्रों से दूर रखने की चेष्टा करते हैं, यह कितनी विडम्बना है?... हमें भगवान के नियम का उल्लंघन नहीं करना है और नारी वर्ग को समान अधिकार प्रदान कर साथ-साथ चलने को बाध...
- लेकिन इसमें भी स्त्री जाति अगर पिछड़ी हुई नहीं होती तो समान काम के लिए, उन्हें पुरुषों से कम स्वीकृति क्यों मिलती है?... घर के कर्ता पुरुष के मर जाने पर उसकी विधवा की और घर की दूसरी स्त्रियों की हालत कैसी होती है, इसका ख्...
- लोगों की विचारधारा किस ओर बह रही है?... वर्तमान परिस्थितियों में हमें क्या और कैसे करना चाहिए? इसका ज्ञान प्राप्त किए बिना अपनी दिशा, कार्य-...
- वर्तमान परिस्थितियों में हमें क्या और कैसे करना चाहिए?... इसका ज्ञान प्राप्त किए बिना अपनी दिशा, कार्य-पद्धति और साधनों का निर्णय नहीं किया जा सकता, जिसे अपने...
- वह किसी मंत्र फूँकने वाले के पास क्यों भटकेगी?... भूत-बाधा और गृहयोग अशिक्षितों को परेशान कर सकते हैं, समझदार उनकी चाल में कैसे आएगा? टोने-टोटके पर वह...
- वहाँ के युवक भी किसी ऐसी युवती के लिए मिले विवाह प्रस्ताव पर विचार ही नहीं करते जिसने अपने दाँत न तोड़ लिए हों, वहाँ की सरकार ने इस प्रथा को रोकने के लिए कानून भी बनाया है, पर कानून से तो अपने यहाँ भी बाल विवाह निषिद्ध हैं इससे क्या बाल विवाह रुक गए?... फिलीपीन्स में तो स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही दाँतों का प्राकृतिक रूप में होना कुरूप होना समझा जा...
- वे सब विदुषी विश्वावारा के समीप गईं और पूछने लगी-“अथ स रामभद्रः किमाचार:?... " अर्थात भद्रे ! अब रामचन्द्र क्या करते हैं?
"तेन राज्ञा राजक्रतुरश्वमेधः प्रकान्तः" अर्थात हे आर्...
- व्यर्थ में गहने क्यों पहनें?... यह हमारी सामाजिक सुव्यवस्था, राष्ट्रीय विकास तथा नैतिकता के लिए अब परमावश्यक हो गया है कि स्त्रियाँ ...
- शकुन्तला अशिक्षित रहकर भरत बना सकती थी क्या?... गार्गी ने हजारों लोगों का आध्यात्मिक मार्गदर्शन किया, मैत्रेयी ने उस समय की सैकड़ों महिलाओं को आत्मो...
- शारीरिक दृष्टि से रुग्ण, कमजोर तथा मानसिक दृष्टि से अविकसित स्त्रियाँ अपना तो निर्माण कहाँ से करेंगी?... शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ एवं निरोग बनने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन नितान्त आवश्यक है। प्रकृति ...
- श्लोक गढ़ने में उन्हें कितनी देर लगती थी?... तब से लेकर अब तक नारी चरण-दासी बनी हुई है और नर, कम से कम नारी के लिए तो सर्वशक्तिमान-कर्ता, भर्ता, ...
- संसार में कहाँ क्या हो रहा है?... लोगों की विचारधारा किस ओर बह रही है? वर्तमान परिस्थितियों में हमें क्या और कैसे करना चाहिए? इसका ज्ञ...
- समझ में नहीं आता कि इस शील च्युत आंगिक प्रदर्शन को क्या कहा जाए?... स्वच्छता और सुरुचि सम्पन्नता की बात तो समझ में आती है। शरीर को स्वच्छ रखने त्वचा और शरीर के सभी अंगो...
- समाज इसीलिए चुप है कि वैसे ही हर क्षेत्र में असन्तोष के विस्फोट हो रहे हैं, नारी समाज को उत्साहित करके एक और सिरदरद क्यों मोल लिया जाए?... राजनेता इसलिए सहमकर रह जाते हैं कि विकसित नारी अपने लिए नए कार्य और नए क्षेत्र माँगने लगेगी। कलाकारो...
- समाज को समुन्नत बनाने में वह क्या योगदान दे सकी?... स्वयं नारी, जीवन का क्या सौभाग्य पा सकी? इन प्रश्नों पर विचार करने से लगता है, नारी को पीड़ित, पददलि...
- सरदी के दिनों में मोटे कपड़े पहने जाते थे और बन्द घरों में सोया जाता था, इस प्रचलन को क्यों तोड़ें?... यह तर्क देकर कोई गरमी में भी ऊनी कपड़े पहनने और बन्द घर में सोने का आग्रह नहीं करता। बच्चे जिन कपड़ो...
- सरेआम सार्वजनिक स्थानों के साथ-साथ जब ऐसे विज्ञापन कैलेण्डर और रंगीन चित्रों के रूप में घरों में भी प्रवेश कर जाते हैं फिर तो चौबीस घण्टे पड़ने वाली उनकी छाया और प्रेरणा घर के सदस्यों के चारित्रिक संस्कारों पर अपना प्रभाव न छोड़ें, यह कैसे हो सकता है?... ऐसे विज्ञापित चित्रों को विषय शक्ति की निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा बताते हुए सन्त विनोबा ने कहा है—मै...
- सामाजिक क्षेत्र में जिसके पास अधिक धन संचित है वह भाग्यशाली होता है, यह मान्यता पहले कभी रही होगी?... अब तो उसे अनैतिकता का चिह्न माना जाता है। समान वितरण की परिपाटी जोर पकड़ती चली जा रही है। उत्पादन के...
- सिखाया, सधाया और कैद करके रखा गया सिंह, सरकस वालों के लिए लाभदायक हो सकता है पर यदि उस प्राणी से पूछा जाय कि आपको इस निश्चिन्त और सुविधा सम्पन्न स्थिति में, वन प्रदेश में रहकर पेट पालने के झंझटों में उलझे जीवन की तुलना में अच्छा लगता है या बुरा?... तो उसका उत्तर कटघरा खोलकर पूछा जा सकता है। वह मूक प्राणी अपनी आन्तरिक अभिलाषा का परिचय पिंजड़े से नि...
- सुन्दर, आकर्षक सजी-सँवरी नारी अब तक पुरुष को बाँधती-मोहती और सुरक्षा पाती रही है किन्तु अब भी वह यही सब करती रहे तो प्रगति फिर किसे कहा जाएगा?... कहने का अर्थ यह नहीं है कि गृह सज्जा और पाक विज्ञान अनावश्यक हैं। उनकी भी उपयोगिता है पर वही तो नारी...
- स्वतंत्र जीवन जीने वाले दीन दरिद्रों को जिस स्तर का जीवन यापन करना पड़ता है उसकी तुलना में वे दास-दासी सुखी थे, फिर मोटी दृष्टि से तो यह स्वतंत्रता उनके लिए हानिकारक ही हुई?... इसी तर्क के अनुसार विदेशी पराधीनता को भी कई सुविधाओं की दृष्टि से उपलब्ध स्वाधीनता की तुलना में अच्छ...
- स्वभावत: वे फैलने, फूटने का फूलने-फलने का अवसर चाहती हैं, पर इसके लिए अधिकार रहित नारी के लिए गुंजायश कहाँ?... चौबीसों घण्टे उसे मन को मारना पड़ता है और उस दुष्ट को देखो, जो मरता तो है नहीं, उल्टे विद्रोही बनकर ...
- स्वभावतः वे फैलने-फूटने, फूलने-फलने का अवसर चाहती हैं, पर इसके लिए अधिकार रहित नारी के लिए गुंजायश कहाँ?... चौबीसों घण्टे उसे मन को मारना पड़ता है और उस दुष्ट को देखो जो मरता तो है नहीं उल्टे विद्रोही बनकर ना...
- स्वयं नारी, जीवन का क्या आनन्द पा सकी?... इन प्रश्नों पर विचार करने से लगता है कि नारी को सताकर, नीचे गिराकर, बन्धनों में बाँधकर उपेक्षित रखा ...
- स्वयं नारी, जीवन का क्या सौभाग्य पा सकी?... इन प्रश्नों पर विचार करने से लगता है, नारी को पीड़ित, पददलित, प्रतिबन्धित, उपेक्षित रखा जाना किसी प्...
- स्वयं बीड़ी पीते हुए बच्चों को धूम्रपान न करने का उपदेश देना क्या भूल नहीं है?... बच्चों से जिन गुणों की आशा की जाए उन्हीं से सम्बन्धित वातावरण भी सचाई से भरा हुआ होना चाहिए। दवा पिल...
- स्वास्थ्य के नियमों का जानना तो दूर रहा, वे यह भी नहीं जानतीं कि मक्खी व मच्छरों से उनको क्या हानि होती है?... उनको तुम्हारी दुनियाँ से कोई मतलब नहीं, चाहे आबादी इससे चौगुनी हो जाए। एक बार एक महिला से पूछा गया क...
- हजारों की संख्या में कालेज जाने वाली छात्राओं को यह अहसास तो अवश्य होता है कि दुनिया कैसी है, देश कैसा है, क्या बन रहा है और क्या बनेगा?... लेकिन उसके बनाने में यह युवा पीढ़ी कितना योगदान कर सकती है, इससे वे अनभिज्ञ है। वे आधुनिकता का नकली ...
- हत भाग्य नारी स्वयं के विकास के लिए, अपने भाग्योदय के लिए प्रयास करने में समर्थ नहीं है तब वह कुशल माता कैसे बन सकती है?... यह आश्चर्य नहीं। नर के द्वारा इस अधिकार से वंचित रखने की अदूरदर्शिता के दुष्परिणाम स्वरूप सारे समाज ...
- हम यह सब पढ़ते और समझते हुए भी नारी शिक्षा से मुँह मोड़ें तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?... अन्ध श्रद्धा और अविश्वास में अधिकांश स्त्रियाँ छली और ठगी जाती हैं। इसमें दोष नारी का नहीं उस प्रवृत...
- हमने नारी के प्रति क्या-क्या अत्याचार नहीं किया है?... नारी को अबला की श्रेणी में रखकर उसका अपमान किया है। हम अपने शरीर का आधा अंग बेकार कर चुके हैं और मूर...
- हमने नारी के प्रति क्या-क्या अत्याचार नहीं किया है?... नारी को अबला की श्रेणी में रखकर उसका अपमान किया है। हम अपने शरीर का आधा अंग बेकार कर चुके हैं और मूर...
- ' इसके विपरीत कहना इस तरह चाहिए कि 'अपनी दीदी जी को बुला लाइये' 'अपने दद्दा, बड़े भाई साहब या दादाजी को आवाज दीजिए' 'जरा देखकर आइए कि आपकी माताजी क्या कर रही हैं?...? ' कहने का तात्पर्य यह है कि इस प्रकार निर्देश देने से उसमें आदर की भावना ताजी हो उठेगी और उन्हीं शब...
- ; नव निर्माण अभियान भारत के खोये वर्चस्व को स्थापित करके विश्व को सद्ज्ञान का सन्देश और सत्कर्म की प्रेरणा देना चाहता है; किन्तु जब तक यह देश स्वयं दुर्गति ग्रस्त है, तब तक दूसरों की सद्गति क्या करेगा?...? ऊपर से आदर्श, सिद्धान्तों का आवरण ओढ़े रहना काफी नहीं है। स्टेज पर मेकअप द्वारा पहलवान बनने से कार्...
- इस हृदय-द्रावक स्थिति को कब तक सहन किया जाय?...?...
- यह दयनीय दुर्दशा कब तक?...?...
- राष्ट्र की आधी जनशक्ति क्या पंगु ही पड़ी रहेगी?...?
जब हम नारी की दयनीय स्थिति पर विचार करते हैं तो हमें ऐसा लगता है कि आने वाला समय बड़ा संघर्ष का ...
- राष्ट्र की आधी शक्ति क्या पंगु ही पड़ी रहेगी?...?
२. यह दयनीय दुर्दशा कब तक?...