Search Results
- मैं क्या हूँ? - मैं क्या हूँ?
- मैं क्या हूँ? - है। मैं क्या हूँ? इसका सही उत्तर यह है कि मैं आत्मा हूँ। शरीर और आत्मा की पृथकता की बात हम
- मैं क्या हूँ? - जब वह समझ जाता है कि मैं क्या हूँ? तब उसे वास्तविक ज्ञान हो जाता है और
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - कहूँ? मित्रो! भगवान् बुद्ध के भौतिक वाले जीवन से आप क्या समझते हैं? मैं समझता हूँ कि आप हर चीज की
- तपश्चर्या के लाभ - सकता हूँ? घर से बाहर मैं कैसे शक्ल दिखा सकता हूँ? बेटा! जनसम्पर्क के लिए जाओगे क्या? नहीं गुरुजी! हम नहीं
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - क्या कहूँ? आपको तो पैसों का चमत्कार चाहिए न? इसलिए मैं पैसे की बात कह रहा हूँ। अभी मैं इमारतों की
- समस्याएँ आज की समाधान कल के — (क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला - 11) - 11) - कि मैं कौन हूँ? क्या हूँ? और क्या कर सकता हूँ? तो समझना चाहिए कि उसे क्षुद्र से महान्, नर से
- गायत्री उपासना सफल एवं सार्थक कैसे बने? - ये क्या कह रहा हूँ? बेटा, मैं मालदारी की बात कह रहा
- यज्ञ एक शिक्षण भी, उच्चस्तरीय विज्ञान भी - और क्या कह सकता हूँ? उनको चोर कहिए। नहीं बेटे! मैं चोर तो नहीं कह सकता, पर एक शब्द उनके लिए
- युग-परिवर्तन के ऐतिहासिक समय में हमारे दायित्व - परिवर्तन के ऐतिहासिक समय में हमारे दायित्व - क्या करके दिखाता हूँ? फिर मेरा चमत्कार देख लेना। फिर मैं सारे मोहल्ले वालो में से किसी को जिन्दा नहीं छोड़ूँगा
- सही अध्यात्म जीवन में आ जाए तो गजब ढा दे - तो औरों की क्या कहूँ? इसलिए इन विषम परिस्थितियों में मैं हिमालय पर रहने के लिए गया था कि वहीं पर
- आत्मिक प्रगति का ककहरा - मैं शिक्षा विरोधी हूँ? क्या मैं साक्षरता विरोधी हूँ? नहीं, मैं शिक्षा का विरोधी नहीं हूँ, परन्तु शिक्षा को अपने अन्दर
- पारिवारिक जीवन में कर्मयोग - को मैं क्या कहूँ? और उन (प्र प्र) प्रमादियों को क्या कहूँ, जो बैल की तरीके से मेहनत तो करते रहते
- समस्याएँ आज की समाधान कल के — (क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला - 11) - 11) - और समझ ले कि मैं कौन हूँ? क्या हूँ? और क्या कर सकता हूँ? तो समझना चाहिए कि उसे क्षुद्र से
- वसन्त—श्रद्धा, समर्पण व बलिदान का पर्व - मैं आपसे क्या कहूँ? वे सबके प्रति बहुत उदार हैं। मैं आपसे कह नहीं सकती कि कितने उदार हैं, पर अपने
- बाल संस्कारशाला मार्गदर्शिका - आपकी क्या सहायता कर सकती हूँ? मेरा नाम विवेकानन्द है। मैं भारत से इस सम्मेलन में भाग लेने आया हूँ। मुझे
- बाल संस्कारशाला मार्गदर्शिका-1 - 1 - आपकी क्या सहायता कर सकती हूँ? मेरा नाम विवेकानन्द है। मैं भारत से इस सम्मेलन में भाग लेने आया हूँ। मुझे
- अन्तर की हूक को ही अवतार कहते हैं - कारण कि मैं क्या कहूँ? मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई। इसे मैं भगवती सरस्वती का वरदान मानता हूँ कि मुझ ठूँठ जैसे
- दीक्षा और उसका स्वरूप - हूँ, और यदि मैं पैदा हुआ हूँ? तो मुझे अब क्या करना चाहिए?’ यह बात अगर समझ में आ जाए, तो
- गायत्री की पंचकोशी साधना - यह मैं क्या कह रहा हूँ? बेटे, यह मैं शरीर के अन्नमय
- प्रबुद्धों को आमंत्रण - बस, मैं आपसे क्या कहूँ? आप विक्षिप्त हो जाएँगे। बेटे! मैं यहाँ समुद्र की बात कह रही थी और टिटिहरी की
- विज्ञानमयकोश की साधना—करुणा का जागरण - बेटे! मैं क्या कहता हूँ? मैं हृदय वालों की बात कहता हैं,
- ध्यान क्यों करें? कैसे करें? - बेटे, मैं क्या कहता हूँ? यह कहता हूँ कि अपने सामान्य जीवन
- मन को भगवान के साथ जोड़िए - बेटे! मैं क्या कहता हूँ? यह कहता हूँ कि अपने सामान्य जीवन
- समस्याएँ आज की समाधान कल के — (क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला - 11) - 11) - कर ले और समझ ले कि मैं कौन हूँ? क्या हूँ? और क्या कर सकता हूँ? तो समझना चाहिए कि उसे
- आध्यात्मिकता के मूल सिद्धान्त - कि अब मैं आपसे क्या कहूँ? कहाँ तक कह सकता हूँ? बस अन्त में यह हुआ कि जापान के गाँधी कागावा
- संक्रान्तिकाल में परिजनों से विशेष अपेक्षाएँ - मैं क्या सेवा कर सकता हूँ? क्या सहायता कर सकता हूँ?
- परिष्कृत अध्यात्म हमारे जीवन में उतरे - बेटे! मैं क्या कह रहा हूँ? धन के संयम, अर्थसंयम की बात
- गायत्री उपासना सफल एवं सार्थक कैसे बने? - साथियो! मैं क्या कह रहा हूँ? मैं अध्यात्म की बात कह रहा
- अध्यात्म का पहला पाठ — कर्मयोग - मित्रो! मैं क्या कह रहा हूँ? मैं यह कहा कि आप कर्मकाण्ड
- आध्यात्मिकता का आधार—पारिवारिकता - मित्रो! मैं क्या कह रहा हूँ? आत्मसाधना की बात कह रहा हूँ।
- लोक-शिक्षकों के जीवन का लक्ष्य एवं उद्देश्य - शिक्षकों के जीवन का लक्ष्य एवं उद्देश्य - मित्रो! मैं क्या कह सकता हूँ? मुझे बड़ा क्लेश-होता है। हमारे यहाँ
- आत्मिक प्रगति का ककहरा - तो क्या मैं शिक्षा विरोधी हूँ? क्या मैं साक्षरता विरोधी हूँ? नहीं, मैं शिक्षा का विरोधी नहीं हूँ, परन्तु शिक्षा को
- समस्याएँ आज की समाधान कल के — (क्रान्तिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला - 11) - 11) - प्राप्त कर ले और समझ ले कि मैं कौन हूँ? क्या हूँ? और क्या कर सकता हूँ? तो समझना चाहिए कि
- गायत्री ही कामधेनु है - पाठ पढ़ाता हूँ। दूसरा पाठ क्या पढ़ाता हूँ? जब तक मैं यह कहता था कि गायत्री का अधिकार सबको है। सब
- आध्यात्मिकता के मूल सिद्धान्त - जा रहा हूँ और न जाने क्या करने जा रहा हूँ? वह अमृत जो मैंने चार दिनों में पहली बार पिया
- व्यक्तित्व का परिष्कार - आया हो, तो उसको मैं क्या कह सकता हूँ? उसको मैं बहुरूपिया कहूँगा।
- व्यक्तित्व का परिष्कार - मित्रो! इनसान को मैं क्या कह सकता हूँ? इनसान पर पिशाच और राक्षस और