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अटल से मिलना हमें है, शून्य तट पर दृष्टि कैसी?... बन्धनों से प्रीति कैसी? बन्धनों से प्रीति कैसी?दीप बन जलना हमें है, विश्वतम हरना हमें है।
ध्येय त...
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एक भी आँसू न कर बरबाद बन्दे, कौन जाने कब समन्दर माँग बैठे?... कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, कौन जाने कब स्वयं प्रभु आन बैठे?
कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, .......
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कंकड़ सा बेमोल समझकर, क्यों उसको ठुकराया?... बता कौन सुख पाया?
तुझे मिला कंचन सा जीवन॥कभी न ऊँचे आदर्शों का, दीखा तुझे सबेरा।
कभी प्यार ममता...
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करें कैसे विदा वे स्वर, तुम्हारी प्रेरणाओं के?... थकन में जो मिले तुमसे, सुखद झोंके हवाओं के॥
बिछुड़ सकते भला कैसे, हमारी कामना हो तुम॥
हृदय से दू...
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करें मान या धन की याचना क्यों?... तुम्हीं प्राण धन हो तुम्हीं को वरेंगे॥
तुम्हारे लिए हैं तुम्हारे रहेंगे,
तुम्हारे लिए हम सभी कु...
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कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, कौन जाने कब स्वयं प्रभु आन बैठे?... कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, .......चाह हो तो राह बन जाती गगन में, चाह से उत्साह भरता मन बदन में।
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क्यों नहीं परमार्थ पथ का मान रखते, क्यों नहीं इंसानियत की शान रखते?... है तुम्हें दाता विधाता ने बनाया, क्यों अरे खुद को भिखारी मान बैठे?
कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, ...
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क्यों रुके हो?...ाधना के क्षेत्र में आगे बढ़ो॥क्यों प्रगति पथ में तुम्हारे, हो रहा उत्पन्न भय?
श्रम बिना ही चाहते हो...
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चाह पूरी हो यही सब माँगते हैं, किन्तु उसका मर्म कब पहचानते हैं?... स्वर्ग भूतल पर गढ़े कैसे विधाता, नर्क में ही सुख मनुज यदि मान बैठे।...
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तुम बुलाते हो उसे यदि भावना से, कौन जाने कब निमन्त्रण मान बैठे?...र्द यदि उभरे कभी मन में तुम्हारे, खर्च मत करना बिना सोचे विचारे।...
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तू है कौन पुत्र किसका है, और कहाँ से आया?... लक्ष्य कहाँ है राह कौन है, तू यह समझ न पाया।
और यहाँ तू सपनों में ही, अब तक है भरमाया॥
अगर नहीं...
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दल-दल में बोलो, फिर कैसे, कर ले हँसा वासा रे?... हँसा भूखा प्यासा॥नीर-क्षीर का ज्ञान इसे है, पर कैसे समझाए?
सद्गुण की पहचान इसे है, पर कैसे बतलाये...
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दीप पर जलना हमें है, दाह से फिर भीति कैसी?... बन्धनों से प्रीति कैसी? बन्धनों से प्रीति कैसी?सिन्धु से मिलने चले हैं, सर्वस्व निज देने चले हैं।
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धार से जो हार जाये, वह प्रबल मल्लाह क्या?... नीचे गिरो मत, हर घड़ी ऊँचे उठो, ऊँचे चढ़ो॥
क्यों रुके हो? साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ो।
क्यों रु...
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ध्येय जब यह बन चुका है, कीर्ति में आसक्ति कैसी?... बन्धनों से प्रीति कैसी? बन्धनों से प्रीति कैसी?...
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ध्येय तिल- तिल जलन का है, कालिमा से भीति कैसी?... बन्धनों से प्रीति कैसी? बन्धनों से प्रीति कैसी?आधार ही बनना हमें है, नींव में रहना हमें है।...
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ध्येय हो अपना अटल, फिर चोट क्या है, आह क्या?... बीच में ही टूट जाये, वह प्रबल उत्साह क्या?
धार से जो हार जाये, वह प्रबल मल्लाह क्या?
नीचे गिरो ...
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पराधीन वाणी से कैसे, सबका करे खुलासा रे?... हँसा भूखा प्यासा॥मिथ्या मीठी बात बनाना, कभी न इसको भाया।
कपट भरा व्यवहार न इसने, पल भर भी अपनाया॥...
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बता कौन सुख पाया?...ृष्टा का तू बहुत लाड़ला, राजकुँवर कहलाया।
नहीं पिता के कामों में पर, तूने हाथ बँटाया॥
तुझे श्रेष्...
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बना कोयला चन्दन का यूँ, भला कौन सुख पाया?... बता कौन सुख पाया?सृष्टा का तू बहुत लाड़ला, राजकुँवर कहलाया।
नहीं पिता के कामों में पर, तूने हाथ ब...
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बन्धनों से प्रीति कैसी?...न्धनों से प्रीति कैसी?सिन्धु से मिलने चले हैं, सर्वस्व निज देने चले हैं।
अटल से मिलना हमें है, शून्...
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बीच में ही टूट जाये, वह प्रबल उत्साह क्या?... धार से जो हार जाये, वह प्रबल मल्लाह क्या?
नीचे गिरो मत, हर घड़ी ऊँचे उठो, ऊँचे चढ़ो॥
क्यों रुके ह...
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भूखा-प्यासा पड़ा पड़ोसी, तूने रोटी खाई क्या?... पहले सबसे पूछकर, भोजन को तू खाया कर॥
मन-मन्दिर में गाफिल तू, झाडू रोज लगाया कर॥
प्रेमी भर तू प्...
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माँझी भय क्या तुझे?...ले ही, आँधी या मझधार॥आज उदिध सीमा-बन्धन से, मुक्त हो रहा ले अँगड़ाई।
लहरों के विद्रोही उर में, जाग ...
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श्रम बिना ही चाहते हो, क्या सफलता पर विजय?... सोचते हो क्या? गिने क्षण ही तुम्हारे पास हैं।
हाथ में आया हुआ क्यों, खो रहे हो अब समय?
बढ़ चलो न...
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सद्गुण की पहचान इसे है, पर कैसे बतलाये?... काम-क्रोध-मद की कारा ने, बन्दी इसे बनाया।
पराधीन वाणी से कैसे, सबका करे खुलासा रे?
हँसा भूखा प्य...
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सुकोमल भावना कैसे, सरल मन से अलग होगी?... करें कैसे विदा वे स्वर, तुम्हारी प्रेरणाओं के?
थकन में जो मिले तुमसे, सुखद झोंके हवाओं के॥
बिछु...
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सोचते हो क्या?...िने क्षण ही तुम्हारे पास हैं।
हाथ में आया हुआ क्यों, खो रहे हो अब समय?
बढ़ चलो निर्द्वन्द्व, कोरी ...
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हाथ में आया हुआ क्यों, खो रहे हो अब समय?... बढ़ चलो निर्द्वन्द्व, कोरी कल्पनाएँ मत गढ़ो॥
क्यों रुके हो? साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ो।
क्यों ...
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है तुम्हें दाता विधाता ने बनाया, क्यों अरे खुद को भिखारी मान बैठे?... कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, कौन जाने कब स्वयं प्रभु आन बैठे?
कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, कौन ...
- आपदायें जो पड़ें यदि, राह में परवाह क्या?...?
ध्येय हो अपना अटल, फिर चोट क्या है, आह क्या?
बीच में ही टूट जाये, वह प्रबल उत्साह क्या?
धार ...
- करें स्वर्ग या मुक्ति की कामना क्यों?...?
करें मान या धन की याचना क्यों?
तुम्हीं प्राण धन हो तुम्हीं को वरेंगे॥
तुम्हारे लिए हैं तुम्ह...
- कोठरी मन की सदा रख साफ बन्दे, कौन जाने कब स्वयं प्रभु आन बैठे?...?
तुम बुलाते हो उसे यदि भावना से, कौन जाने कब निमन्त्रण मान बैठे?दर्द यदि उभरे कभी मन में तुम्हारे...
- क्यों प्रगति पथ में तुम्हारे, हो रहा उत्पन्न भय?...?
श्रम बिना ही चाहते हो, क्या सफलता पर विजय?
सोचते हो क्या? गिने क्षण ही तुम्हारे पास हैं।
हाथ...
- क्यों रुके हो?...? साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ो।
क्यों रुके हो? साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ो॥क्यों प्रगति पथ में त...
- क्यों रुके हो?...?...
- नीर-क्षीर का ज्ञान इसे है, पर कैसे समझाए?...?
सद्गुण की पहचान इसे है, पर कैसे बतलाये?
काम-क्रोध-मद की कारा ने, बन्दी इसे बनाया।
पराधीन वाणी...
- पास तेरे है दुखिया कोई, तूने मौज उड़ाई क्या?...?
भूखा-प्यासा पड़ा पड़ोसी, तूने रोटी खाई क्या?
पहले सबसे पूछकर, भोजन को तू खाया कर॥
मन-मन्दिर मे...
- बताओ चेतना कैसे, किसी तन से अलग होगी?...?
सुकोमल भावना कैसे, सरल मन से अलग होगी?
करें कैसे विदा वे स्वर, तुम्हारी प्रेरणाओं के?
थकन मे...
- बन्धनों से प्रीति कैसी?...?...
- मोती का अभिलाषी हँसा, कैसे पत्थर खाये?...?
मान सरोवर का वासी यह, कीचड़ में अकुलाए॥
तुमने इसे कषाय-कल्मषों, में हर समय डुबाया।
दल-दल में ...
- रोज मानव कर रहा दुःख की शिकायत, दुष्टता की कर रहा फिर क्यों हिमायत?...?
दुःख हरेंगे प्रभु स्वयं अवतार लेकर, मानवी पुरुषार्थ को पर साथ लेकर॥
सूर्य उगकर भी भला क्या हित...