मनुज देवता बने, बने यह धरती स्वर्ग समान (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
सारे के सारे ब्रह्मलोक, ब्रह्माण्ड की ध्रुव सत्ता, जैसे कि पृथ्वी का ध्रुव है- उत्तरी ध्रुव आदि सभी अन्तर्ग्रही शक्तियों को यह केन्द्र ग्रहण करता है और दक्षिण ध्रुव में से निकालकर फेंक देता है। पृथ्वी के ध्रुव तक ये चीजें नहीं जातीं। इसमें से जो भी हवा, ब्रह्माण्ड में जो कुछ भी दैवीय, भौतिक, अभौतिक तीनों तरह की क्षमताएँ हैं, हम उनको ब्रह्माण्ड में से ग्रहण कर सकते हैं। शरीर में धारण कर सकते हैं
इसी के भीतर जो सहस्रार चक्र है, वह कैलाश पर्वत कहलाता है। सारे के सारे ब्रह्मलोक, ब्रह्माण्ड की ध्रुव सत्ता, जैसे कि पृथ्वी का ध्रुव है- उत्तरी ध्रुव आदि सभी अन्तर्ग्रही शक्तियों को यह केन्द्र ग्रहण करता है और दक्षिण ध्रुव में से निकालकर फेंक देता है। पृथ्वी के ध्रुव तक ये चीजें नहीं जातीं। इसमें से जो भी हवा, ब्रह्माण्ड में जो कुछ भी दैवीय, भौतिक, अभौतिक तीनों तरह की क्षमताएँ हैं, हम उनको ब्रह्माण्ड में से ग्रहण कर सकते हैं
इसके पीछे एक ऐसा रिएक्शन है, जो यह कहता है कि अगर यह रिएक्शन हमारे हाथ में, हमारे काबू में आ गया, तो आदमी के हाथ में दैत्य की शक्ति आ जायेगी। फिर आदमी इतना बड़ा होगा कि जैसे हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष, जो बगल में पृथ्वी को दबाकर भाग गया था। अगर आदमी भी भाग जाये, तो अचम्भे की बात मत मानना। एण्टी मैटर, एण्टी यूनीवर्स, एण्टी एटम जैसे पदार्थों के बारे में कितनी चर्चा होती है

व्यक्तित्व का परिष्कार (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यह आग ठंढी होती है या गरम होती है? ठंढ-गरम कुछ नहीं, बस, आग होती है और ऐसे ही भागती फिरती है। मित्रो! यह क्या वबाल है? वहाँ की फिजिक्स अलग है और पृथ्वी की फिजिक्स अलग है। आप तो भगवान के बात बताइए? कैसे बताऊँ भगवान की बातें, ब्रह्म की बातें ऋषियों ने सही कहा है कि इसका वर्णन हम नहीं कर सकते। हम बता नहीं सकते हैं और हमें कोई जानकारी नहीं है
जब साधक का व्यक्तित्व तप की ऊर्जा से अनुप्राणित हो जाता है, तब वह परमसत्ता से मिलन के योग्य बन जाता है और इस मिलन का नाम योग है। आइए हृदयंगम करते हैं उनकी अमृतवाणी को........ नहीं है सम्भव ब्रह्म का वर्णन मित्रो! जैसे अपनी पृथ्वी के ऊपर जो पानी है, वह किससे बना है? हमारे यहाँ पानी दो गैसों से मिलकर बनता है—ऑक्सीजन और हाइड्रोजन। इन दो गैसों को जब भी हम मिला देते हैं, तो पानी बन जाता है। यह केमिस्ट्री हमारे यहाँ है और मंगल ग्रह के ऊपर है कि वहाँ अमोनिया पानी के रूप में बदल जाता है
यह कैसी फिजिक्स है, कैसी केमिस्ट्री है? बेटे! मैं फिजिक्स की क्या बताऊँ? यह फिजिक्स वहाँ काम करती है और यहाँ एटम काम करता है। अगर आप यहाँ से पृथ्वी के एटमों को काटते हुए चले जाएँ तो फिर ये एटम जर्रे जो हमारी जमीन पर पड़े हैं, वहाँ इस तरीके से पाएँगे, जैसे आग की ज्वाला है। आग की नीले रंग की ज्वालाएँ दौड़ती चली जा रही हैं। यह मेटल जा रहा है
मित्रो! यह क्या वबाल है? वहाँ की फिजिक्स अलग है और पृथ्वी की फिजिक्स अलग है। आप तो भगवान के बात बताइए? कैसे बताऊँ भगवान की बातें, ब्रह्म की बातें ऋषियों ने सही कहा है कि इसका वर्णन हम नहीं कर सकते। हम बता नहीं सकते हैं और हमें कोई जानकारी नहीं है
मित्रो! जैसे अपनी पृथ्वी के ऊपर जो पानी है, वह किससे बना है? हमारे यहाँ पानी दो गैसों से मिलकर बनता है—ऑक्सीजन और हाइड्रोजन। इन दो गैसों को जब भी हम मिला देते हैं, तो पानी बन जाता है। यह केमिस्ट्री हमारे यहाँ है और मंगल ग्रह के ऊपर है कि वहाँ अमोनिया पानी के रूप में बदल जाता है

त्याग-बलिदान की संस्कृति - देवसंस्कृति (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
ऐसे लोगों को उन्होंने एक बार मारा, दो बार मारा, तीन बार मारा, पर मारने से काम नहीं चला। दैत्यों को इक्कीस बार मारकर ये यह कोशिश करने लगे कि पृथ्वी से असुरों को हम मिटा देंगे, तो काम चल जाएगा, परन्तु काम चला नहीं। आखिर में परशुराम जी ने कुल्हाड़ा नदी में फेंक दिया और उसके स्थान पर फावड़ा उठा लिया। फावड़ा उठाया और नए-नए उद्यान लगाने लगे, बगीचे लगाने लगे

अध्यात्म का सच्चा स्वरूप (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यह आपने क्या किया? उन्होंने कहा कि पार्वती अभी देखती चलो। यह पृथ्वी अभी ऐसी विहीन नहीं हो गई है कि इसमें सब ऐसे ही होते हों
यह आपने क्या किया? उन्होंने कहा कि पार्वती अभी देखती चलो। यह पृथ्वी अभी ऐसी विहीन नहीं हो गई है कि इसमें सब ऐसे ही होते हों। शंकर जी ने कहा—"यह तो मैंने तुम्हें दिखाया है। " पार्वती ने कहा—"महाराज! वह समय कब आएगा? अभी तो मैं शरम के मारे मरी जाती हूँ

अध्यात्म का पहला पाठ — कर्मयोग (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
मित्रो! यह पृथ्वी, जिस पर आप सवार हैं, जिस पर आप निवास करते हैं, एक जगह पर इसका एक बैलेन्सिंग प्वाइंट है। इसको अगर आप तलाश कर लें और वहाँ चले जायँ। और वहाँ घूँसा मार दें
हो सकता है, आपका चौबीस घण्टे का दिन सौ घण्टे का होने लगे। यह भी हो सकता है कि उसमें सर्दी या गर्मी बेहद हो जाय और यह भी हो सकता है कि हमारी पृथ्वी दूसरे ग्रह में टक्कर मारे और चकनाचूर हो जाय, अगर एक आदमी एक घूँसा मार दे तब। पृथ्वी जड़ है और हम चेतन हैं। चेतन के संकल्प से विज्ञान की सारी प्रगति दिखाई पड़ रही है
और वहाँ घूँसा मार दें। आप जानते हैं कि इससे पृथ्वी में क्या हो सकता है? यह पृथ्वी अपनी जिस कक्षा में घूम रही है, उस कक्षा को छोड़ देगी और कहीं ऐसी जगह घूमने लगेगी। इतनी लम्बाई-चौड़ाई में घूमने लगेगी। हो सकता है, आपका चौबीस घण्टे का दिन सौ घण्टे का होने लगे
पृथ्वी दुबारा आयी और अपने बच्चों को रोते हुए, तड़पते हुए देख करके कहा-बेवकूफो! हमने तुमसे कहा था कि हराम की कमाई, बिना मशक्कत की कमाई पाने की तुम इच्छा करोगे, तो तुम मरोगे। अब भी समय है कि अपनी मशक्कत की कमाई के ऊपर निर्भर रहना सीखो। मित्रो! यही है हमारा कर्मयोग
यह भी हो सकता है कि उसमें सर्दी या गर्मी बेहद हो जाय और यह भी हो सकता है कि हमारी पृथ्वी दूसरे ग्रह में टक्कर मारे और चकनाचूर हो जाय, अगर एक आदमी एक घूँसा मार दे तब। पृथ्वी जड़ है और हम चेतन हैं। चेतन के संकल्प से विज्ञान की सारी प्रगति दिखाई पड़ रही है। कैसे? उद्यान के तरीके से, बगीचे के तरीके से, नुमाइश के तरीके से बनाकर खड़ा कर दिया
सब लाइन में खड़े हो गये। पृथ्वी माता आयीं और उन बच्चों को मना किया। उन्होंने कहा-बच्चो! हमारा कहना मानो। ये अभागिन तुमको चौपट करके जायेगी और सत्यानाश करके जायेगी
आदमी का यह संकल्प, यह विश्वास बड़ा जबरदस्त है। ’’ मित्रो! यह पृथ्वी, जिस पर आप सवार हैं, जिस पर आप निवास करते हैं, एक जगह पर इसका एक बैलेन्सिंग प्वाइंट है। इसको अगर आप तलाश कर लें और वहाँ चले जायँ। और वहाँ घूँसा मार दें
कैसे मर गये? भूख से मर गये, बीमार होकर मर गये, तड़प-तड़प कर मर गये। पृथ्वी दुबारा आयी और अपने बच्चों को रोते हुए, तड़पते हुए देख करके कहा-बेवकूफो! हमने तुमसे कहा था कि हराम की कमाई, बिना मशक्कत की कमाई पाने की तुम इच्छा करोगे, तो तुम मरोगे। अब भी समय है कि अपनी मशक्कत की कमाई के ऊपर निर्भर रहना सीखो। मित्रो! यही है हमारा कर्मयोग

समग्र जीवन के सुदृढ़ आधार—योग एवं तप (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
जिनको हम चमत्कार कह सकते हैं, जिनको हम महानता कह सकते हैं, जिनको हम शिवपन कह सकते हैं, जिनको हम पैगंबरपन कह सकते हैं, जिनको हम ब्राह्मणत्व कह सकते हैं। जिनको हम पृथ्वी तत्त्व कह सकते हैं। यह सारी-की-सारी हमारी सन्तान हैं। सन्तानें कब पैदा होती हैं? जब हमारे जीवात्मा और परमात्मा दोनों एक में शामिल हो जाते हैं

भक्ति सम्बन्धी भ्रान्तियाँ एवं उसका सच्चा विज्ञान (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
नेति-नेति मित्रो! ब्रह्म को 'नेति-नेति' कहा गया है। इस ब्रह्माण्ड के बारे में भी और भगवान के बारे में भी तथा इस पृथ्वी के बारे में भी यही बात है। उस भगवान की हम कल्पना नहीं कर सकते, जो सर्वव्यापी है। वह भगवान हमारे काबू से बाहर है
मित्रो! ब्रह्म को 'नेति-नेति' कहा गया है। इस ब्रह्माण्ड के बारे में भी और भगवान के बारे में भी तथा इस पृथ्वी के बारे में भी यही बात है। उस भगवान की हम कल्पना नहीं कर सकते, जो सर्वव्यापी है। वह भगवान हमारे काबू से बाहर है

महाकाल का शंख बज गया, समय बदलने वाला है (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
ऐसे हथियार और बम हैं। मालूम पड़ता है कि कोई पागल आदमी किसी दिन उन हथियारों पर हावी हो गया और उसने चला दिये, तो यह जरा सी पृथ्वी- नन्ही सी पृथ्वी, छोटी सी- बच्ची सी पृथ्वी को एक दैत्य- एक एटम बम खतम कर देगा। हमको मालूम पड़ता है कि अगर ऐसा कहीं हुआ, तो मनुष्य जाति लाखों वर्षों के लिए- करोड़ों वर्षों के लिए फिर वहीं चली जायेगी, जहाँ से कि अमीबा पैदा हुआ था। और जहाँ से पानी में से चीजें पैदा हुई थीं

विज्ञानमयकोश की साधना—करुणा का जागरण (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
अच्छा, देवी आप धन्य हैं। आप जैसी नारियों की वजह से पृथ्वी पर सूरज और चाँद टिके हुए हैं और जमीन टिकी हुई है। आप जैसी नारियाँ न होतीं, तो यहाँ धर्म कहाँ रह पाता? धन्य हैं आप और उनकी परिक्रमा करके कहा माता आप आज्ञा दें तो मैं कुछ सेवा कर दूँ। क्या? माँ मैं हूँ तो बड़ा गरीब और मैं चाहता हूँ कि आपके पति को अपने कन्धे पर बैठाकर गंगा जी तक मैं लेकर के चलूँ
" भगवान की आँखों में जल आ गया। उन्होंने यह प्रतिज्ञा की कि जिन लोगों ने ऋषियों की हड्डियों को जमा किया है, जिन्होंने ऋषियों को खाया है, सताया है, उनको हम—"निसिचर हीन करउँ महि" अर्थात निसिचरों को हम पृथ्वी पर रहने नहीं देंगे
" भगवान की आँखों में जल आ गया। उन्होंने यह प्रतिज्ञा की कि जिन लोगों ने ऋषियों की हड्डियों को जमा किया है, जिन्होंने ऋषियों को खाया है, सताया है, उनको हम—"निसिचर हीन करउँ महि" अर्थात निसिचरों को हम पृथ्वी पर रहने नहीं देंगे। मित्रो! यह मन्यु है और जरूरी भी है। यह आध्यात्मिकता का एक अंश है, अंग है

समझें देववाद का मर्म एवं लें उनसे शिक्षण (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
ग्लोब क्या है? ग्लोब एक रंगीन नक्शे का बना होता है, जो स्कूल में बच्चों की मेज पर रखा रहता है। शंकर भगवान का गोल- मटोल पिंड इसलिए बनाया गया है ताकि हम यह समझ सकें कि यह सारे का सारा विश्व- ब्रह्माण्ड जो गोल- मटोल है, यह पृथ्वी जो गोल- मटोल है, यह जगत जो गोल- मटोल है, यह क्या है? शंकर है, शिव है। और शालिग्राम क्या हैं? शालिग्राम भी वही हैं। शालिग्राम की मान्यता अगर हमारे जीवन में हृदयंगम हो सके, तो उसका जो प्रभाव हमारे जीवन में आयेगा, उससे हमारा जीवन धन्य हो जायेगा
यह वामन भगवान बन गया, जिसने अपने चरणों से पृथ्वी को नाम लिया। पृथ्वी को नापने वाला क्या कोई मनुष्य वामन हो सकता है? हाँ हो सकता है। कौन कर सकता है? भावनाएँ कर सकती हैं। भावनाएँ यदि निम्नकोटि की हों तो ये आदमी को घिनौना और कमीना बना करके रख देती हैं, दुखी और दरिद्र बना करके रख देती हैं
यह कौन बन गया? बेटे, यह सन्त बन गया। यह वामन भगवान बन गया, जिसने अपने चरणों से पृथ्वी को नाम लिया। पृथ्वी को नापने वाला क्या कोई मनुष्य वामन हो सकता है? हाँ हो सकता है। कौन कर सकता है? भावनाएँ कर सकती हैं

आप अपने आपको पहचान लीजिये कि आप सामान्य आदमी नहीं हैं, असामान्य हैं (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
कि यह बड़ा खराब समय है और वैसे भी दिखाई पड़ता है आपको। आपको दिखाई नहीं पड़ता जो अगर स्टार वार शुरू हो गया तो तो फिर आप समझिये मंगल और बृहस्पति के बीच में पृथ्वी से बड़ा एक गृह था वहाँ भी बड़ी विज्ञान की उन्नति हो गई थी और वहाँ विज्ञान की उन्नति को गलत इस्तेमाल किया और वह चूरा चूरा हो गये चूरा चूरा होकर वह गृह कही एक टुकड़ा कहीं जा पड़ा, एक टुकड़ा कहीं जा पड़ा एक कही चला गया एक कही चला उसका नामोनिशान खतम हो गया यह भी ऐसा मौका है कि यदि स्टार वार शुरू हो और परमाणु युद्ध शुरू हो तो हमारी और आपकी जिन्दगी की बात तो अलग, हमारे आपके जमीन जायदाद खेत, मकान, दुकान, नौकरी की बात तो अलग हम जिस जमीन पर बैठे हुये हैं इसका नाम निशान का भी पता नहीं चलेगा यह ऐसा समय है। क्यों साहब ऐसा समय नहीं ऐसा भी नहीं ऐसा भी समय है कि अगर लंका के रावण का राज्य बना रहे तो न कोई ऋषि बचेगा, न कोई मुनि बचेगा, न कोई जनता बचेगी सबको राक्षसों का वंश जो एक लख पूत सवा लख नाती यह सब मिलकर के सबको खा जायेंगे और सबका खेत छीन लेंगे सबका पैसा छीन लेंगे सबकी औरतें छीन लेंगे और हा-हाकार मचा देंगे। ऐसा भी समय है कि अगर आप थोड़ी सी हिम्मत दिखायें कम से कम इतनी दिखा दें जितनी की रीछ बन्दरों ने दिखा दी थी

सूक्ष्मीकरण की वेला में जनवरी १९८६ में प्रसारित पूज्यवर का वीडियो सन्देश (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
कौन-कौन सी समस्यायें हैं? आपकी आँखों को दिखाई नहीं पड़ेगा। आपको सूर्य का परिभ्रमण तथा पृथ्वी की परिक्रमा कहाँ दिखाई पड़ती है। हमारी आँखें आपकी अपेक्षा अधिक तेज हैं। वे कुछ ऐसी समस्यायें देख रही हैं जो कि बहुत ही मुश्किल हैं

मो को कहाँ ढूँढ़े बन्दे मैं तो तेरे पास रे (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इसी उद्देश्य से भगवान् पृथ्वी पर आने की तैयारियाँ करने लगे। लक्ष्मी जी ने कहा ‘अरे! आप तो बेकार परेशान हो रहे हैं। मनुष्य तो आपके काम का रहा नहीं
भाग जाऊँगा और इनसे दूर रहूँगा; लेकिन मैं अपने घर नहीं जाना चाहता। नारद जी! मैं ऐसी जगह तलाश करना चाहता हूँ, जहाँ मैं बना भी रहूँ, पृथ्वी पर भी रहूँ और मेरा मनुष्यों से सम्बन्ध भी बना रहे। लेकिन मैं दिखाई भी न पड़ूँ। ऐसी जगह मुझे चाहिए, जो दिखाई न पड़े, समुद्र में गया, तो वहाँ भी लोगों ने पकड़ लिया, यहाँ भी लोगों ने पकड़ लिया
मित्रो! एक बार ऐसा हुआ कि भगवान् जी की इच्छा हुई कि मेरा प्यारा मनुष्य इस पृथ्वी पर निवास करता है और उसके पास मैं चलूँ, उसके पास रहूँ और उसकी खोज- खबर लिया करूँ, उसको शिक्षा दिया करूँ। मैंने बड़ी उम्मीदों और तमन्नाओं से उसको बनाया था। मैं उसको रास्ता बताऊँगा, उसको उसके कर्तव्य बताऊँगा और उसको यह बताऊँगा कि मनुष्य का जीवन कितना महान है और मनुष्य के जीवन से क्या किया जा सकता है? भगवान् जो कार्य स्वयं करता है, उसको मानव भी स्वयं कर सकता है, मैं जा करके ऐसा शिक्षण मनुष्य को दूँगा
उन्होंने कहा- ‘‘भाइयो! घर जाते हैं तो ठिकाना नहीं और इनके पास रहते हैं, तो ठिकाना नहीं। अब क्या करना चाहिए? अपनी कोई जगह बनानी चाहिए, जहाँ हम पृथ्वी पर भी बने रहें और लक्ष्मी जी के सामने बेइज्जती भी न हो। हम जमीन पर भी बने रहें और जो अच्छे मनुष्य हमको पाना चाहें, तो आसानी से पा भी सकें। ऐसी जगह भी न चुनी जाय कि कोई अच्छा मनुष्य चाहता हो कि हमको भगवान् मिल जायँ और हम उसे मिल न सकें
’’ भगवान् जी बैकुण्ठलोक से रवाना हो गये और पृथ्वी पर आये। पृथ्वी पर निवास करने लगे। लोगों से कहा- ‘‘मनुष्यो! हमने तुमको बनाया है और एक काम के लिए बनाया है। उस काम के लिए हम आपको शिक्षा देंगे और आपके दुःखों को दूर करेंगे
मैं उसको रास्ता बताऊँगा, उसको उसके कर्तव्य बताऊँगा और उसको यह बताऊँगा कि मनुष्य का जीवन कितना महान है और मनुष्य के जीवन से क्या किया जा सकता है? भगवान् जो कार्य स्वयं करता है, उसको मानव भी स्वयं कर सकता है, मैं जा करके ऐसा शिक्षण मनुष्य को दूँगा। भगवान् आए धरती पर इसी उद्देश्य से भगवान् पृथ्वी पर आने की तैयारियाँ करने लगे। लक्ष्मी जी ने कहा ‘अरे! आप तो बेकार परेशान हो रहे हैं। मनुष्य तो आपके काम का रहा नहीं
मैं चाहता हूँ कि आपको भी गहराई तक धकेल दूँ, ताकि आप वास्तविकता को समझ सकें। मित्रो! एक बार ऐसा हुआ कि भगवान् जी की इच्छा हुई कि मेरा प्यारा मनुष्य इस पृथ्वी पर निवास करता है और उसके पास मैं चलूँ, उसके पास रहूँ और उसकी खोज- खबर लिया करूँ, उसको शिक्षा दिया करूँ। मैंने बड़ी उम्मीदों और तमन्नाओं से उसको बनाया था। मैं उसको रास्ता बताऊँगा, उसको उसके कर्तव्य बताऊँगा और उसको यह बताऊँगा कि मनुष्य का जीवन कितना महान है और मनुष्य के जीवन से क्या किया जा सकता है? भगवान् जो कार्य स्वयं करता है, उसको मानव भी स्वयं कर सकता है, मैं जा करके ऐसा शिक्षण मनुष्य को दूँगा
हम तो जायेंगे और मनुष्य के पास रहेंगे और उसको रास्ता बतायेंगे और कर्तव्य बताएँगे। ’’ भगवान् जी बैकुण्ठलोक से रवाना हो गये और पृथ्वी पर आये। पृथ्वी पर निवास करने लगे। लोगों से कहा- ‘‘मनुष्यो! हमने तुमको बनाया है और एक काम के लिए बनाया है

गायत्री ही कामधेनु है (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
मित्रो! एक बार फिर हमने भगवान जी से पूछा कि भगवान जी! आप क्या करते हैं? उन्होंने कहा कि महाराज जी! आप देखो तो सही। आपकी पृथ्वी कितनी बड़ी है। पृथ्वी के बाद फिर नवग्रह आ जाते हैं और फिर उपग्रह आ जाते हैं। इन सबकी फिजिक्स अलग- अलग है
आपकी पृथ्वी कितनी बड़ी है। पृथ्वी के बाद फिर नवग्रह आ जाते हैं और फिर उपग्रह आ जाते हैं। इन सबकी फिजिक्स अलग- अलग है। हमारे यहाँ जो एटम जिस हिसाब से बने हुए हैं, उनका जो करेक्टर है, वह दूसरे ग्रहों में नहीं है
वह भगवान जो आपको निरन्तर अपने ध्यान में बिठाये रखता है, उस विराट भगवान को आप अपने पास कैसे बिठायेंगे? मित्रो! एक बार फिर हमने भगवान जी से पूछा कि भगवान जी! आप क्या करते हैं? उन्होंने कहा कि महाराज जी! आप देखो तो सही। आपकी पृथ्वी कितनी बड़ी है। पृथ्वी के बाद फिर नवग्रह आ जाते हैं और फिर उपग्रह आ जाते हैं। इन सबकी फिजिक्स अलग- अलग है

सुर दुर्लभ है यह मनुष्य का जीवन(गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
वैज्ञानिक चंद्रमा पर गए हैं और उसका फोटो लेकर आए हैं। आसमान में उड़ते हुए जहाज और पृथ्वी पर रहने वाले अदृश्य चीजों के फोटो ले करके आते हैं। इस तरह एक-से-एक बढ़िया कैमरे हैं, पर मनुष्य की आँख जैसा बढ़िया कैमरा और कहीं नहीं है
वैज्ञानिक चंद्रमा पर गए हैं और उसका फोटो लेकर आए हैं। आसमान में उड़ते हुए जहाज और पृथ्वी पर रहने वाले अदृश्य चीजों के फोटो ले करके आते हैं। इस तरह एक-से-एक बढ़िया कैमरे हैं, पर मनुष्य की आँख जैसा बढ़िया कैमरा और कहीं नहीं है। मित्रो! मैं हिमालय से बहुत सारे फोटो खींचकर लाया हूँ

मनुष्य में देवत्व का उदय (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
क्या ख्वाब देखा था? यह देखा था कि पृथ्वी पर मानव में देवत्व का उदय होगा। उन्होंने कहा था कि जब तक पृथ्वी पर एक भी प्राणी नरक में रहता है, तब तक हमें अपने लिए उस स्वर्ग की कोई आवश्यकता नहीं है। हम तब तक स्वर्ग में नहीं जाएँगे। हम इसी पृथ्वी पर रहेंगे
गुरुजी ने और हमने एक स्वप्न देखा था, एक ख्वाब देखा था। क्या ख्वाब देखा था? यह देखा था कि पृथ्वी पर मानव में देवत्व का उदय होगा। उन्होंने कहा था कि जब तक पृथ्वी पर एक भी प्राणी नरक में रहता है, तब तक हमें अपने लिए उस स्वर्ग की कोई आवश्यकता नहीं है। हम तब तक स्वर्ग में नहीं जाएँगे
हम तब तक स्वर्ग में नहीं जाएँगे। हम इसी पृथ्वी पर रहेंगे। हमारा मानव समुदाय जो इस नरक में पड़ा है, हम उसी के साथ में रहेंगे। फिर से आना पड़ेगा तो फिर आएँगे

ऐसे होगी युग निर्माण के लक्ष्य की पूर्ति (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
मित्रो, इस तरह से ये युग निर्माण योजना का स्वरूप, जो कि पहले किसी समय में परिस्थितियों के अनुरूप धर्म से प्रारम्भ हुआ था, अब इसका क्षेत्र बढ़ता ही चला जाएगा। अभी तक बढ़ते-बढ़ते हम इस स्थिति में आ गए हैं कि कल नहीं तो परसों अपने लक्ष्य तक पहुँच ही जाएँगे, जब मनुष्य में देवत्व का उदय किया जा सकेगा और पृथ्वी पर स्वर्ग का अवतरण किया जा सकेगा। समग्र शान्ति और प्रगति इसी तरीके से आएगी। समस्याओं का हल इसी तरीके से होगा

यज्ञ का तत्त्वदर्शन (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
बुद्धि का सरक्युलेशन जारी रखना ही पड़ेगा। पृथ्वी को परिक्रमा जारी रखनी ही पड़ेगी। प्रेम की परिक्रमा जारी रखनी ही पड़ेगी। सहयोग-सहकार की भावना जारी रखनी ही पड़ेगी
दुनिया में जितना भी मैटर है, वह कभी नष्ट नहीं हुआ। जितना मैटर पृथ्वी में शुरू में था, उतना ही बना रहेगा। वह न तो एक रत्ती घटने वाला है और न बढ़ने वाला है। चीजों में परिवर्तन होते रहते हैं—सॉलिड, लिक्विड और गैस रूप में

समस्त सिद्धियों का आधार तप (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
एक हमारा सिर वाला सहस्रार चक्र उत्तरी ध्रुव है और मूलाधार दक्षिणी ध्रुव है। पृथ्वी को जो आन्तरिक ताकत मिलती है, वह उसके दोनों ध्रुवों से मिलती है। इसी तरह हमारे भीतर विद्यमान दोनों ध्रुव शक्तिशाली जेनरेटर की तरह लगे हुए हैं। उनकी शक्ति के बारे में मैं क्या कह सकता है, किन्तु ये दोनों सोए हुए पड़े हैं

सन्त के अनुयायी हैं हम (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
हम वास्तव में करके दिखाएँगे कि किस तरीके से मानव में देवत्व का उदय होता है। आपको देवता बना करके पृथ्वी पर छोड़ेंगे। आप सारे विश्व में फैल जाएँ; ताकि सारे संसार में देवत्व का उदय हो सके, यही मेरी प्रार्थना है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करूँगी

संकल्पशक्ति की महिमा एवं गरिमा (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इसके लिए न किसी अध्यापक की जरूरत है, न किसी सहायता की जरूरत है, यह तो अपनी नेचर ऐसी हो गई है। ग्रेविटी पृथ्वी में है न। ग्रेविटी क्या करती है? ऊपर की चीजों को नीचे की ओर खींचती है। न्यूटन ने देखा सेव का फल जमीन पर ऊपर से गिरा

आत्मा की भूख : उपासना (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
जैसे प्रह्लाद और ध्रुव ने अपने माँ बाप को छोड़ दिया था और उस भगवान की गोदी को याद किया था, जिसने कि हमको जन्म दिया है। जिसकी कृपा से हम पृथ्वी पर आए हैं, वही हमारी गोदी है, वही हमारा पिता है। हम उसकी गोदी में ही बैठेंगे, उसकी गोदी में बैठने से उनको क्या फायदा हुआ? भगवान की गोदी में बैठे तो आज तब उनका नाम चला आ रहा है। कहते हैं ध्रुवतारा आकाश में चमकता है

गुरुसत्ता को श्रद्धांजलि (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
आगे जब चले, तो एक और गाँव नजर आया। विश्राम करके जब जाने लगे, तो फिर उनके शिष्यों ने कहना शुरू किया कि भगवान! यहाँ जो भी व्यक्ति हैं—बड़े श्रद्धालु, भक्ति से ओत-प्रोत और सादा जीवन उच्च विचार, सेवाभावी, सहायक, दूसरों के प्रति मर-मिटने वाले, ऊँचा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते, यहाँ तो साक्षात् स्वर्ग है, ऐसा मालूम पड़ता है कि आकाश से उतरकर स्वर्ग पृथ्वी पर आ गया है। उनको बहुत प्रसन्नता हुई। प्रसन्नता हुई, तो उन्होंने चलते वक्त उनको आशीर्वाद दिया कि आप बरबाद हो जाइए
विश्राम करके जब जाने लगे, तो फिर उनके शिष्यों ने कहना शुरू किया कि भगवान! यहाँ जो भी व्यक्ति हैं—बड़े श्रद्धालु, भक्ति से ओत-प्रोत और सादा जीवन उच्च विचार, सेवाभावी, सहायक, दूसरों के प्रति मर-मिटने वाले, ऊँचा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते, यहाँ तो साक्षात् स्वर्ग है, ऐसा मालूम पड़ता है कि आकाश से उतरकर स्वर्ग पृथ्वी पर आ गया है

आध्यात्मिकता की सच्ची कसौटी (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
प्रेम हमारे मन से छलकता हुआ चला जाए और यह दुनिया ऐसी बन जाय जैसे कि स्वर्ग है। इस पृथ्वी को स्वर्ग के रूप में परिवर्तित और प्रकट करने के लिए हमको इन पत्थर जैसे दिलों में प्रेम की धारायें बहानी पड़ेंगी
प्रेम हमारे मन से छलकता हुआ चला जाए और यह दुनिया ऐसी बन जाय जैसे कि स्वर्ग है। इस पृथ्वी को स्वर्ग के रूप में परिवर्तित और प्रकट करने के लिए हमको इन पत्थर जैसे दिलों में प्रेम की धारायें बहानी पड़ेंगी। मित्रो! लोगों ने केवल प्रेम का नाम याद कर रखा है। बेटे से प्रेम, औरत से प्रेम, दौलत से प्रेम, सिनेमा से प्रेम आदि

गुरुसत्ता का मिला हमें जो प्यार है (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
जटाएँ बिखेर दीं तो उसमें से वो गंगा आती हुई, प्रवाहित होती हुई चली गईं। उन्होंने कहा कि क्या गंगा जटाओं तक सीमित हो जाएँगी? नहीं, यह तो लोक-मंगल के लिए सारी पृथ्वी पर चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगा का ताल्लुक लोक-कल्याण से है, जिससे कि मनुष्यों की मलिनताएँ निकलें। गंगा का उद्देश्य एक ही है और वह है शीतलता, गतिशीलता, प्रवाहित होना और मल-विक्षेपों को निकालना | गुरुजी ने ज्ञान की गंगा को लाने में अथक प्रयास किया
जटाएँ बिखेर दीं तो उसमें से वो गंगा आती हुई, प्रवाहित होती हुई चली गईं। उन्होंने कहा कि क्या गंगा जटाओं तक सीमित हो जाएँगी? नहीं, यह तो लोक-मंगल के लिए सारी पृथ्वी पर चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगा का ताल्लुक लोक-कल्याण से है, जिससे कि मनुष्यों की मलिनताएँ निकलें। गंगा का उद्देश्य एक ही है और वह है शीतलता, गतिशीलता, प्रवाहित होना और मल-विक्षेपों को निकालना |

गायत्री उपासना का प्रतिफल (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यदि मुक्ति मिलती है, तो हमें इसी जीवन में मिलती है, तत्काल मिलती है और कहीं यदि स्वर्ग है, तो इसी पृथ्वी पर ही स्वर्ग है। ऊपर किसने देखा है कि स्वर्ग में जाएँगे और भाई मुसलमान तो यह कहते हैं कि शराब की नहरें बहती हैं। वहाँ हूर और गुलमा रहते हैं और हिन्दुओं का कहना है कि वहाँ शेषनाग की शय्या पर पड़े रहो और क्षीरसागर में खीर खाओ
एकांगी उपासना से क्या बनेगा? मुक्ति मिलेगी? हमें तो विश्वास नहीं कि मुक्ति मिलेगी। यदि मुक्ति मिलती है, तो हमें इसी जीवन में मिलती है, तत्काल मिलती है और कहीं यदि स्वर्ग है, तो इसी पृथ्वी पर ही स्वर्ग है। ऊपर किसने देखा है कि स्वर्ग में जाएँगे और भाई मुसलमान तो यह कहते हैं कि शराब की नहरें बहती हैं। वहाँ हूर और गुलमा रहते हैं और हिन्दुओं का कहना है कि वहाँ शेषनाग की शय्या पर पड़े रहो और क्षीरसागर में खीर खाओ

जीवन साधना का मर्म है भक्ति, समझें उसका व्यापक रूप (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
मित्रो! गंगा पृथ्वी पर सम्पत्ति लायी है, समृद्धि लायी हैं। खुशहाली लायी है। सुषमा लायी है
अगर गंगा न आती तब हरिद्वार का भी यही हाल रहा होता। तीर्थ और मेले भी यहीं गंगा तट पर मित्रो! गंगा पृथ्वी पर सम्पत्ति लायी है, समृद्धि लायी हैं। खुशहाली लायी है। सुषमा लायी है

श्रद्धा के बीजारोपण की साधना (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
आप नीचे पृथ्वीलोक पर जाइए। ’’ जब भगवान पृथ्वीलोक आए, तो वहाँ जैसे ही वे आए तो पहले किसी में आस्था ही नहीं थी। थोड़ी-बहुत थी तो इतनी थी कि चलो हम उनके दर्शन कर आएँ। अब वे मथुरा पहुँचे
भगीरथ और परशुराम ने तपस्या की थी और उन्होंने वरदान पाया, अपने लिए नहीं, लोकहित के लिए माँगा। भगीरथ ने माँगा तो गंगा को पृथ्वी पर लाने में वे समर्थ हुए, जो पतितपावनी गंगा आज भी अनवरत रूप से अभी भी बह रही है। परशुराम और राम—ये दोनों एक ही समय के हैं। दोनों में कुछ झगड़ेबाजी हो गई
फिर उन्होंने कहा—‘‘देख लीजिए भगवन् ! क्या हाल है? अब आप नीचे आइए और मैं ऊपर आती हूँ। आप नीचे पृथ्वीलोक पर जाइए। ’’ जब भगवान पृथ्वीलोक आए, तो वहाँ जैसे ही वे आए तो पहले किसी में आस्था ही नहीं थी। थोड़ी-बहुत थी तो इतनी थी कि चलो हम उनके दर्शन कर आएँ
एक बार ऐसा हुआ कि भगवान और लक्ष्मी, दोनों में शर्त लग गई। उन्होंने कहा—देखो आपको कौन भजता है और कौन मेरा सम्मान करता है? तो उन्होंने लक्ष्मी से कहा कि पृथ्वी पर पहले तुम ही जाओ। वे आईं और जहाँ गईं, वहाँ धरती माँ जगमगाने लगीं, जहाँ जिसके घर पहुँच गईं, उसका घर निहाल होता हुआ चला गया। फिर उन्होंने कहा—‘‘देख लीजिए भगवन् ! क्या हाल है? अब आप नीचे आइए और मैं ऊपर आती हूँ
भगीरथ ने माँगा तो गंगा को पृथ्वी पर लाने में वे समर्थ हुए, जो पतितपावनी गंगा आज भी अनवरत रूप से अभी भी बह रही है। परशुराम और राम—ये दोनों एक ही समय के हैं। दोनों में कुछ झगड़ेबाजी हो गई
यहाँ सब गुरु जी के बेटे-बेटियाँ हैं, तो आप अपना काम स्वयं कीजिए, आप अपने में ही खोए रहिए। आप अपने में ही चिन्तन करते रहिए कि आखिर आगे चल करके हमको क्या करना है? इस पृथ्वी पर भगवान ने हमको इतनी अमानत दे करके भेजा हैं, जितना कि और किसी के साथ में देकर नहीं भेजा
एक बार ऐसा हुआ कि भगवान और लक्ष्मी, दोनों में शर्त लग गई। उन्होंने कहा—देखो आपको कौन भजता है और कौन मेरा सम्मान करता है? तो उन्होंने लक्ष्मी से कहा कि पृथ्वी पर पहले तुम ही जाओ। वे आईं और जहाँ गईं, वहाँ धरती माँ जगमगाने लगीं, जहाँ जिसके घर पहुँच गईं, उसका घर निहाल होता हुआ चला गया
यहाँ सब गुरु जी के बेटे-बेटियाँ हैं, तो आप अपना काम स्वयं कीजिए, आप अपने में ही खोए रहिए। आप अपने में ही चिन्तन करते रहिए कि आखिर आगे चल करके हमको क्या करना है? इस पृथ्वी पर भगवान ने हमको इतनी अमानत दे करके भेजा हैं, जितना कि और किसी के साथ में देकर नहीं भेजा। मनुष्य को कितना कुछ मिला भगवान ने इस माने में पक्षपात किया है। क्या पक्षपात किया है कि मनुष्य को शरीर दिया है, उसको अकल दी है
आप नीचे पृथ्वीलोक पर जाइए। ’’ जब भगवान पृथ्वीलोक आए, तो वहाँ जैसे ही वे आए तो पहले किसी में आस्था ही नहीं थी। थोड़ी-बहुत थी तो इतनी थी कि चलो हम उनके दर्शन कर आएँ

परिष्कृत अध्यात्म हमारे जीवन में उतरे (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इसलिए हमने शंकर भगवान की और शालग्राम की गोल मूर्ति बनाई थी। जिस तरह से हम ग्लोब दिखाकर अपने बच्चे को यह सिखाते हैं कि सारा विश्व पृथ्वी के ग्लोब जैसा है, गोल गेंद जैसा है। हमने भगवान का स्वरूप बताने के लिए कि सारे ब्रह्माण्ड में एक सत्ता काम करती है, एक शक्ति काम करती है, जो कण-कण में समाई है, नस-नस में समाई हुई है, हर जगह में समाई हुई है। इस सारे विश्व-ब्रह्माण्ड में संव्याप्त इस विराट को लोगों को समझाने के लिए कि ये जो सारा विश्व विराट है—"सीय राममय सब जग जानी

मानव में देवत्व ऐसे उभरेगा (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
आप ब्राह्मण बनिए, साधु बनिए। आप भूदेव बनिए, पृथ्वी के देवताओं में अपने नाम को लगा लीजिए। आप सन्त बनिए। सन्तों को भी भगवान कहते हैं, देवता कहते हैं

जीवन को धन्य बनाने का महानतम अवसर (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इस समय अपनी पृथ्वी के सन्तुलन को ठीक करने के लिए भगवान् ने अवतार लेने का निश्चय किया है। ये चौबीसवाँ अवतार अन्तिम अवतार होगा। चौबीस अक्षर गायत्री मंत्र के होते हैं
इस समय हर धर्मवेत्ता तथा हर महान भविष्यवक्ता ने एक स्वर से इस बात को स्वीकार किया है कि अगले बीस वर्ष बड़े ही उथल-पुथल के होंगे। इस समय अपनी पृथ्वी के सन्तुलन को ठीक करने के लिए भगवान् ने अवतार लेने का निश्चय किया है। ये चौबीसवाँ अवतार अन्तिम अवतार होगा। चौबीस अक्षर गायत्री मंत्र के होते हैं

अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
नहीं बेटे, वह करोड़ मील लंबा है। फिर पृथ्वी पर बैठा हुआ कोई मनुष्य या देवता—मसलन हनुमान, हैं तो पृथ्वी पर ही। हाँ साहब! और पृथ्वी से बड़े तो नहीं हैं? आदमी जब पृथ्वी पर खड़ा होगा, तो उसका गाल पृथ्वी के बराबर होगा कि छोटा होगा और सूरज तो करोड़ों गुना बड़ा है, तो फिर हनुमान जी उसे गाल में कैसे ले लेंगे? मुझे समझा तो दीजिए। सूरज की गरमी हमें यहाँ तपा देती है और अगर वही गरमी हनुमान के गाल में जाएगी, तो उनका गाल जलेगा या रह जाएगा? ‘‘सहस्र योजन जा पर भानू
फिर पृथ्वी पर बैठा हुआ कोई मनुष्य या देवता—मसलन हनुमान, हैं तो पृथ्वी पर ही। हाँ साहब! और पृथ्वी से बड़े तो नहीं हैं? आदमी जब पृथ्वी पर खड़ा होगा, तो उसका गाल पृथ्वी के बराबर होगा कि छोटा होगा और सूरज तो करोड़ों गुना बड़ा है, तो फिर हनुमान जी उसे गाल में कैसे ले लेंगे? मुझे समझा तो दीजिए। सूरज की गरमी हमें यहाँ तपा देती है और अगर वही गरमी हनुमान के गाल में जाएगी, तो उनका गाल जलेगा या रह जाएगा? ‘‘सहस्र योजन जा पर भानू। ’’ बस, हनुमान जी की चमचागिरी करेंगे और मनोकामना पूरी कराएँगे, पागल कहीं के

फिजाँ बदल देती है-अवतार की आँधी (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
भगवान् की उस प्रतिज्ञा के भगवान् कृष्ण प्रतिनिधि थे, जिसको पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी सारी जिन्दगी लगा दी। उसी प्रतिज्ञा के आधार पर उन्होंने जनसाधारण को विश्वास दिलाया है कि हम पृथ्वी को असन्तुलित नहीं रहने देंगे और सृष्टि में अनाचार को नहीं बढ़ने देंगे। भगवान् ने यह प्रतिज्ञा की हुई है-
देवियो, भाइयो! आज जन्माष्टमी का पुनीत पर्व है। आज से पाँच हजार वर्ष पूर्व इसी दिन पृथ्वी पर भगवान् की वह शक्ति अवतरित हुई, जिसने प्रतिज्ञा की थी कि हम सृष्टि का सन्तुलन कायम रखेंगे। भगवान् की उस प्रतिज्ञा के भगवान् कृष्ण प्रतिनिधि थे, जिसको पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी सारी जिन्दगी लगा दी। उसी प्रतिज्ञा के आधार पर उन्होंने जनसाधारण को विश्वास दिलाया है कि हम पृथ्वी को असन्तुलित नहीं रहने देंगे और सृष्टि में अनाचार को नहीं बढ़ने देंगे
भगवान् की उस प्रतिज्ञा के भगवान् कृष्ण प्रतिनिधि थे, जिसको पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी सारी जिन्दगी लगा दी। उसी प्रतिज्ञा के आधार पर उन्होंने जनसाधारण को विश्वास दिलाया है कि हम पृथ्वी को असन्तुलित नहीं रहने देंगे और सृष्टि में अनाचार को नहीं बढ़ने देंगे। भगवान् ने यह प्रतिज्ञा की हुई है- यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्
s देवियो, भाइयो! आज जन्माष्टमी का पुनीत पर्व है। आज से पाँच हजार वर्ष पूर्व इसी दिन पृथ्वी पर भगवान् की वह शक्ति अवतरित हुई, जिसने प्रतिज्ञा की थी कि हम सृष्टि का सन्तुलन कायम रखेंगे। भगवान् की उस प्रतिज्ञा के भगवान् कृष्ण प्रतिनिधि थे, जिसको पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी सारी जिन्दगी लगा दी। उसी प्रतिज्ञा के आधार पर उन्होंने जनसाधारण को विश्वास दिलाया है कि हम पृथ्वी को असन्तुलित नहीं रहने देंगे और सृष्टि में अनाचार को नहीं बढ़ने देंगे

यज्ञ एक शिक्षण भी, उच्चस्तरीय विज्ञान भी (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
दो वर्ल्डवार—विश्वयुद्ध हो चुके हैं—फर्स्ट वर्ल्डवार एवं सेकंड वर्ल्डवार। इन दोनों लड़ाइयों—विश्वयुद्धों में जो गोला-बारूद चलाया गया है, जो आदमी मरे हैं, जो चीत्कार हुआ, जो हाहाकार पैदा हुआ है, वह लौटकर पृथ्वी पर आया है और नई पीढ़ियाँ जो पैदा होकर आ रही हैं, वे सारी की सारी उस वातावरण से प्रभावित होकर आ रही हैं। नई पीढ़ियों को देखकर हम सोचते हैं कि यह क्या हो गया है? अच्छे घरों में पैदा हुए बच्चों को क्या हो गया है? ये खराब आदत के बच्चे कहाँ से आ गए? जब हम गहराई से देखते हैं तो पाते हैं कि यह दो महायुद्धों की वजह से जो वातावरण खराब हुआ था, उसका असर अभी भी है। यज्ञ द्वारा विषाक्तता का निवारण गुरु वसिष्ठ जी ने रामचंद्र जी से कहा था कि आपने रावण को मारकर लंका के राक्षसों को खतम करके जो पुरुषार्थ किया, अभी उससे भी एक बड़ा पुरुषार्थ करने की जरूरत है
दो वर्ल्डवार—विश्वयुद्ध हो चुके हैं—फर्स्ट वर्ल्डवार एवं सेकंड वर्ल्डवार। इन दोनों लड़ाइयों—विश्वयुद्धों में जो गोला-बारूद चलाया गया है, जो आदमी मरे हैं, जो चीत्कार हुआ, जो हाहाकार पैदा हुआ है, वह लौटकर पृथ्वी पर आया है और नई पीढ़ियाँ जो पैदा होकर आ रही हैं, वे सारी की सारी उस वातावरण से प्रभावित होकर आ रही हैं। नई पीढ़ियों को देखकर हम सोचते हैं कि यह क्या हो गया है? अच्छे घरों में पैदा हुए बच्चों को क्या हो गया है? ये खराब आदत के बच्चे कहाँ से आ गए? जब हम गहराई से देखते हैं तो पाते हैं कि यह दो महायुद्धों की वजह से जो वातावरण खराब हुआ था, उसका असर अभी भी है

बलिहारी गुरु आपकी जिन गोविंद दियो मिलाय (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
घर-घर अलख जगाने आए गुरुदेव भगवान राम को भी जन-सहयोग मिला था। भगवान राम इस पृथ्वी पर आए और रामराज्य की उन्होंने स्थापना की। भगवान बुद्ध आए और उन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की। ठीक उसी तरीके से बेटे, गुरुजी आए, "घर-घर अलख जगाएँगे, हम बदलेंगे जमाना" घर-घर अलख जगाने के लिए आए और इतना बड़ा समूह तैयार किया, आप कितने बैठे हैं
भगवान राम को भी जन-सहयोग मिला था। भगवान राम इस पृथ्वी पर आए और रामराज्य की उन्होंने स्थापना की। भगवान बुद्ध आए और उन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की। ठीक उसी तरीके से बेटे, गुरुजी आए, "घर-घर अलख जगाएँगे, हम बदलेंगे जमाना" घर-घर अलख जगाने के लिए आए और इतना बड़ा समूह तैयार किया, आप कितने बैठे हैं

परिष्कृत मनःस्थिति ही स्वर्ग है (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
ऐसे लोग जहाँ कहीं भी जाएँगे, नरक बना देंगे, घर में भी, बाहर भी वे लोग नरक बना देंगे। घर-बाहर पृथ्वी-आकाश सारी जगह नरक विद्यमान रहेगा उनके लिए। मित्रो! जो आँखें दुष्टता को देखती रहती हैं, दोष-दुर्गुणों को देखती हैं। जिनके भीतर कभी कोई सम्वेदना का भाव उत्पन्न नहीं होता
ऐसे लोग जहाँ कहीं भी जाएँगे, नरक बना देंगे, घर में भी, बाहर भी वे लोग नरक बना देंगे। घर-बाहर पृथ्वी-आकाश सारी जगह नरक विद्यमान रहेगा उनके लिए

नया समय, नया काम और नई जिम्मेदारियाँ (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
एक काम ओर बताया न कि यह दुनिया बड़ी तहस नहस हो रही है आप इसका क्या करोगे इसको हम एक धुरी पर इकट्ठी करेंगे। अगले दिनों यह राज्य उस पर चढ़ाई करेगा वह राज्य उस पर चढ़ाई करेगा सारे राज्यों का चक्रवर्ती राज्य एक राज्य बनायेंगे सारी पृथ्वी पर एक राज्य होगा। एक धर्म होगा यह इस धरम वाला है यह उस धरम वाले को मारेगा तू हमारे धरम में आ जा हम तुझे इतना पैसा देंगे तू हमारे धर्म का नहीं है तुझे हम मार डालेंगे खबर दार बेकार बात बकेगा। एक धर्म सारी दुनिया का होगा

ज्ञान और पराक्रम का पथ अध्यात्म (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
हम तो इनसे कितनी दूर रहते हैं। आपकी पृथ्वी के चक्कर काट लेते हैं और मस्त रहते हैं। हम किसी को क्या तंग करेंगे। हम तो प्रकृति के अनुकूल रहते हैं

आ रहा है युगावतार, प्रज्ञावतार (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
जो कुछ भी नाम देना चाहें, वह एक ही हो सकता है। इस समय पृथ्वी पर जो अवतार होने वाला है, उसको हम प्रज्ञावतार कह सकते हैं। प्रज्ञा किसको कहते हैं? गायत्री को। गायत्री मंत्र, जिसकी हम उपासना करते हैं और जिसका हम विस्तार करते हैं और जिसे हम फैलाना चाहते हैं

उपासना का आधार (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
वातावरण एक ऐसा कारक है कि जहाँ भी जो चीज होती है, उसी के अनुरूप ढल जाती है। जैसे यहाँ हमने आपके लिए वातावरण बनाया है, ऐसा वातावरण आपको पृथ्वी पर और कहीं भी नहीं मिलेगा। उपासनाओं से जो वातावरण यहाँ बनाया है, यहाँ कितने पुरश्चरण होते रहे हैं, यहाँ अखण्ड दीपक है। यहाँ गुरुजी की शक्ति है, हम यहाँ बैठे हैं
वातावरण एक ऐसा कारक है कि जहाँ भी जो चीज होती है, उसी के अनुरूप ढल जाती है। जैसे यहाँ हमने आपके लिए वातावरण बनाया है, ऐसा वातावरण आपको पृथ्वी पर और कहीं भी नहीं मिलेगा

विशिष्ट समय को समझें, अपनी रीति-नीति बदलें (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
चंद्रमा पर जो राकेट भेजा गया था, उसकी गति छह हजार से सात हजार मील थी। वह सारी पृथ्वी पर ढाई घण्टे में घूम जाता है। आज तो हर चीज की चाल तेज हो रही है। विनाश की भी चाल तेज हो रही है

ज्ञान की गंगा का अवतरण (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
बाहर कहाँ है शरीर, शरीर के लिए रोना आ रहा है? नहीं शरीर तो पंचतत्त्वों का बना हुआ है, वह तो नाशवान है, वह तो एक दिन जाएगा ही। जितने भी अवतार और जो भी इस पृथ्वी पर आए हैं, उन सबको एक-न-एक दिन जाना ही पड़ा। भगवान राम को जाना पड़ा था, भगवान कृष्ण को जाना पड़ा था, भगवान बुद्ध को जाना पड़ा, गाँधी जी को जाना पड़ा, ईसा को जाना पड़ा, सभी को जाना पड़ा। सभी अवतारों को जाना पड़ा है; क्योंकि यह शरीर सीमित होता है और इसकी आवश्यकता होती है
जितने भी अवतार और जो भी इस पृथ्वी पर आए हैं, उन सबको एक-न-एक दिन जाना ही पड़ा। भगवान राम को जाना पड़ा था, भगवान कृष्ण को जाना पड़ा था, भगवान बुद्ध को जाना पड़ा, गाँधी जी को जाना पड़ा, ईसा को जाना पड़ा, सभी को जाना पड़ा। सभी अवतारों को जाना पड़ा है; क्योंकि यह शरीर सीमित होता है और इसकी आवश्यकता होती है

अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इसके बाद आपको तीन आचमन करना सिखाते हैं। तीन आचमन करने के बाद में प्राणायाम सिखाते हैं, न्यास सिखाते हैं, शिखाबन्धन सिखाते हैं और आपको पृथ्वी पूजन सिखाते हैं। ये छह क्रियाएँ हैं, जिन्हें 'षट्कर्म' भी कहा गया है। आप षट्कर्म का प्राण समझिए और अध्यात्म की भूमिका में प्रवेश कीजिए और गायत्री उपासना के दरवाजे को खोलिए
इसमें पाँच क्रियाएँ पंचमुखी गायत्री की और एक क्रिया वह, जो भूमिपूजन के नाम से विख्यात है। इसको हम पृथ्वीपूजन के नाम से जानते हैं। पाँच क्रियाएँ कौन-कौन सी हैं, इसे आप जरा समझने की कोशिश करना। पहला वाला कृत्य, जो हम आपको गायत्री उपासना करने से पहले सिखाते हैं, आत्मशोधन की प्रक्रिया के भीतर कराते हैं, वह है पवित्रीकरण

इन्सान के अन्दर का भगवान् जगाएँगी प्रतिभावान विभूतियाँ (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
आपके दायीं ओर, बायीं ओर, आपके आगे और पीछे वे लोग सहायकों के रूप में साथ-साथ चलें। जिस राह पर चलते हुए हमको इन्सान के अन्दर भगवान् की स्थापना करनी है और पृथ्वी पर स्वर्ग का अवतरण करना है, उस राह के लिए आपको अकेले चलना ही काफी नहीं है। प्रतिभावान विभूति को भी साथ-साथ लेकर चलना है। आप से ऐसा है मेरा निवेदन और ऐसा है अनुरोध

सही अध्यात्म जीवन में आ जाए तो गजब ढा दे (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
छः महीने मुझे गंगोत्री में रहने का मौका मिला। जिस शिला पर बैठकर भगीरथ तप करते रहते थे और जिसके बल पर पृथ्वी पर गंगा को लाये थे, वहीं पर छः महीने तप करने के लिए मुझे आज्ञा हुई। उत्तरकाशी में, जहाँ भगवान शंकर ने परशुराम जी को कुल्हाड़ा दिया था और महर्षि जमदग्नि का आश्रम है, जहाँ परशुराम ने तप किया था, वहाँ भी छः-छः महीने निवास करने का आदेश मिला। एक कार्यक्रम बनाकर मैं चला गया और वहाँ रहने लगा

अनुदान और वरदान (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
ऐसे स्वर्ग को धिक्कार है। स्वर्ग का क्या करेंगे? बेटे! हमारा स्वर्ग इसी पृथ्वी पर है और यहीं है—हमारे दृष्टिकोण में, हमारे चिन्तन में। हम जहाँ कहीं भी जाएँगे, वहीं स्वर्ग स्थापित कर लेंगे
ऐसे स्वर्ग को धिक्कार है। स्वर्ग का क्या करेंगे? बेटे! हमारा स्वर्ग इसी पृथ्वी पर है और यहीं है—हमारे दृष्टिकोण में, हमारे चिन्तन में। हम जहाँ कहीं भी जाएँगे, वहीं स्वर्ग स्थापित कर लेंगे। बेटे! जब हम अखण्ड ज्योति कार्यालय से यहाँ आए, तो गुरुजी अज्ञातवास में चले गए, तो मैं अकेली रह गई थी

अपने भीतर के जखीरे को उभारने की कला है अध्यात्म (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
उनने हिरण्याक्ष राक्षस को, जो पृथ्वी को चुराकर ले गया था, लड़ाई में मार डाला और पृथ्वी को छुड़ा लिया। भगवान वाराह ने पृथ्वी का उद्धार कर दिया और दुनिया में शान्ति स्थापित कर दी। अब वाराह भगवान ने कहा कि अब क्या करना चाहिए? वे धरती पर घूमने लगे, फिर मन में आया कि शादी कर लेनी चाहिए, सो उनने एक सुंदर सी मोटी सुअरिया से विवाह कर लिया। फिर उससे बच्चे पैदा हुए, बच्चे के बच्चे पैदा हुए
भगवान वाराह यहीं रहने लगे। (कथा-प्रवाह अगले अंक में जारी) (क्रमशः) भगवान धरती पर ठहर गए मित्रो! वाराह भगवान को पृथ्वी पर रहते हुए बहुत दिन हो गए। उधर विष्णुलोक में खबर पड़ी कि बहुत सारी फाइलें इकट्ठी हो गई हैं। इनमें साइन नहीं हो रहे हैं, सब गड़बड़ हो रहा है
मित्रो! वाराह भगवान को पृथ्वी पर रहते हुए बहुत दिन हो गए। उधर विष्णुलोक में खबर पड़ी कि बहुत सारी फाइलें इकट्ठी हो गई हैं। इनमें साइन नहीं हो रहे हैं, सब गड़बड़ हो रहा है
वाराह अवतार धरती पर आए एक बार ऐसा हुआ कि भगवान वाराह के रूप में धरती पर आए। उनने हिरण्याक्ष राक्षस को, जो पृथ्वी को चुराकर ले गया था, लड़ाई में मार डाला और पृथ्वी को छुड़ा लिया। भगवान वाराह ने पृथ्वी का उद्धार कर दिया और दुनिया में शान्ति स्थापित कर दी। अब वाराह भगवान ने कहा कि अब क्या करना चाहिए? वे धरती पर घूमने लगे, फिर मन में आया कि शादी कर लेनी चाहिए, सो उनने एक सुंदर सी मोटी सुअरिया से विवाह कर लिया
एक बार ऐसा हुआ कि भगवान वाराह के रूप में धरती पर आए। उनने हिरण्याक्ष राक्षस को, जो पृथ्वी को चुराकर ले गया था, लड़ाई में मार डाला और पृथ्वी को छुड़ा लिया। भगवान वाराह ने पृथ्वी का उद्धार कर दिया और दुनिया में शान्ति स्थापित कर दी। अब वाराह भगवान ने कहा कि अब क्या करना चाहिए? वे धरती पर घूमने लगे, फिर मन में आया कि शादी कर लेनी चाहिए, सो उनने एक सुंदर सी मोटी सुअरिया से विवाह कर लिया

कैसे प्राणवान बने साधना? (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यह तारा नहीं होता। यह उल्का पिण्ड होता है जो भटकते हुए पृथ्वी के आकर्षण और पृथ्वी के हवा के दायरे में आ जाता है और जलने लगता है। जलने से मालूम पड़ता है कि तारा टूट गया। वस्तुतः वह तारा नहीं उल्का होती है
तब से यह चूरा ऐसे ही पड़ा हुआ है। बृहस्पति ग्रह से लेकर के बहुत बड़ी पट्टी में बराबर घूमता रहता है और इसी में से कोई कण कभी-कभी पृथ्वी के ऊपर आ जाते हैं। आपने कभी रात को आकाश में भागता हुआ तारा देखा होगा। यह तारा नहीं होता

परिवार—एक पाठशाला (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
जब तक समुद्र में डुबकी नहीं लगाएँगे, तो बहुमूल्य रत्न कैसे पा सकेंगे? केवल मन को समझाना ही रह जाएगा। बच्चे पैदा तो किए; लेकिन उनको संस्कार नहीं दिए, तो वे पृथ्वी का भार होंगे, समाज के ऊपर भार होंगे। वे कुसंस्कारी होंगे, डकैत होंगे, चोर होंगे, जुआरी होंगे, अय्याश होंगे, शराबी होंगे। क्यों होंगे? क्योंकि उन्हें संस्कार नहीं दिए गए

युग-परिवर्तन की वेला में करें इन पंचशीलों का पालन (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इस दुनिया में रहते हुए आप इतनी ताकत और इतना बल इकट्ठा कर पाएँगे कि मैं नहीं जानता कि उससे ज्यादा ताकत और इतना ज्यादा बल कोई और भी दे पाएगा क्या? बेटे! यह अकेलेपन की देन है। सूरज अकेला चलता है, चाँद अकेला चलता है, पृथ्वी अकेली चलती है। जितनी भी महत्त्वपूर्ण सत्ताएँ हैं, सभी अकेली चलती हैं। आप अकेला चलना तो सीखिए

प्रज्ञावतार की सत्ता का आश्वासन (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
जनसंख्या की बढ़ती हुई स्थिति के बारे में आप सभी को मालूम है। यदि स्थिति यही रही, तो थोड़े ही दिनों में इस पृथ्वी पर चलने-फिरने की जगह तक नहीं रहेगी। आप सभी जानते हैं कि बकरे के कटने का समय जैसे-जैसे करीब आता है, वह कुछ-कुछ सेकण्डों में थोड़ा-सा चारा खाता है। कुछ-कुछ सेकण्डों में उसमें बदलाव होता रहता है