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- 23 घण्टे हम अपने विभिन्न काम में लगाएँ, पर एक घण्टे का पसीना-एक घण्टे की मेहनत क्या हम समाज के लिए खर्च नहीं कर सकते?... हाँ, हम एक घण्टा रोज अपने समाज, देश, धर्म, जाति और संस्कृति के लिए खर्च कर सकते हैं। एक घण्टा कोई बड़...
- अकेले लड़ा था क्या?... नहीं! अकेले नहीं लड़ा, उनके साथ बहुत सारे सहयोगी भी थे। गोवर्धन पहाड़ उठाया गया था। क्या भगवान कृष्ण न...
- अगर अगली बार देगा तो तू क्या देगा?... जब समय बदल जाएगा तब हम तेरे समयदान का क्या करेंगे? फिर समयदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।...
- अगर आप कोई गलत कार्य करते हैं तो वह नाराज क्यों नहीं होगी?... अगर आप गाली देंगे तो वह गाली देगी। आप शराफत के साथ पेश आएँगे तो वह भी शराफत से पेश आएगी। अगर आप प्या...
- अगर आप विमूढ़ ही बने रहे, रोटी खाने और पैसा कमाने से लेकर बच्चे पैदा करने तक के चक्र में ही पड़े रहे तो फिर मैं क्या कह सकता हूँ?... लेकिन आपके भीतर जीवन आ गया होगा, जाग्रति आ गई होगी तो आपकी एक और आँख खुल गई होगी, जिसको त्राटक साधना...
- अगर उनका व्यक्तित्व घटिया होता तो फिर बात कैसे बनती?... गाँधी जी ने अपने आपको बनाया था तभी हजारों आदमी उनके पीछे चले। बुद्ध ने अपने आपको बनाया, हजारों आदमी ...
- अगर देश का प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति ठीक नहीं होगा तो देश कैसे ठीक चलेगा?... इसलिए आप यह प्रयत्न कीजिए कि अपनी कन्याओं को यहाँ पढ़ने के लिए भेजें। हम यहाँ वास्तविक होमसाइंस पढ़ाएँ...
- अगर पतंग ने इतनी हिम्मत और बहादुरी न दिखाई होती और बच्चे के हाथ में अपना मार्गदर्शन न सौंपा होता तो क्या पतंग उड़ सकती थी?... नहीं, जमीन पर ही पड़ी रहती। बाँसुरी ने अपने आप को किसी गायक को सौंपा। गायक के होठों से लगी और गायक के...
- अगर प्राचीनकाल की धर्म-संस्कृति के इतिहास को देखें, तो आपको पता चलेगा कि उनका स्थान कितना महान था?... नर-नारी दोनों में कोई फर्क नहीं था। अगर हम ध्यान से देखते हैं तो हमें पता चलता है कि नारियाँ सामाजिक...
- अगर यही क्रम बना रहा और जनता अपने नागरिक कर्तव्यों को नहीं समझती, नागरिक जिम्मेदारियों को नहीं समझती तो फिर यही होगा कि जो कोई व्यक्ति या पार्टी अमुक लोभ दिखाएगा, कोई पैसा दिखाएगा, कोई भय दिखाएगा, कोई जाति-बिरादरी की बातें कहेगा, कोई क्या कहेगा?... कोई क्या कहेगा? उसी को समर्थन मिलता जाएगा।...
- अगर वह नहीं होती तो हमें न जाने कहाँ जाना पड़ता और न जाने हम किस तरह से मारे-मारे फिरते होते?... मित्रो! नारी हमारी बेटी है, जो हमारे और आपके अन्दर सौजन्य एवं स्नेह भरती है। हमारी आँखों में पवित्रत...
- अगर वह मंत्री आए और आपके ऊपर प्रभाव डाले तो क्या कोई प्रभाव पड़ सकता है?... नहीं, कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता। लेकिन दक्षिण भारत के रहने वाले केरल निवासी ज़गत्गुरु शंकराचार्य केरल क...
- अगर स्वामी केशवानन्द कलेक्टर होते तो क्या वे इतने महत्त्वपूर्ण कार्य करने में समर्थ हो सकते थे?... उन्होंने साढ़े तीन सौ गाँवों में स्कूल बना दिये, सात कॉलेज बना दिये और जनता को स्वावलम्बी बना दिया। स...
- अगर हमारे पास ईमानदारी न हो और हम कर्तव्यों को समझते न हों, हमको अपने हित का ध्यान न हो, ज्ञान न हो, नागरिक कर्तव्यों-अधिकारों का अनुभव न हो, तो क्या होगा कि जब कभी भी वोट देने का वक्त आयेगा तो इस बात की जिम्मेदारी का अनुभव हम नहीं करेंगे कि कहाँ और किसको वोट देना चाहिए और किसे नहीं देना चाहिए?... तब हम क्या करेंगे? तब हम सिर्फ यही करेंगे कि जहाँ हमारा स्वार्थ प्रेरित करेगा, जो कोई आदमी जीप में ब...
- अच्छा समाज बनाने के लिए गुण्डागर्दी तथा अन्य दूसरी बुराइयों के विरुद्ध कैसे खड़े होना चाहिए?... यह शिक्षण करना हमारा और आपका काम है।गुण्डागर्दी पुलिस से नहीं रुक सकती। इसे जब कभी रोकेंगे तो हम और ...
- अतः जेवर के लिए वह दहेज माँगता है, तो क्या बुरा करता है?... दहेज को बन्द करने की यदि बात करनी चाहिए, तो जेवर को बन्द करने की बात भी करनी चाहिए। अतः आप ब्याह-शाद...
- अध्यात्म क्या है?... जीवन का शीर्षासन है। तू क्या इसे बाजीगरी समझता है कि यह कर लूँगा, वह कर लूँगा। इसमें ऐसा कुछ नहीं है...
- अपनी अटैची और होल-डाल लेकर किस तरीके से स्टेशन से घर तक पहुँचा सकते हैं?... यह बहुत मुश्किल है हमारे लिए। हमारे बुजुर्ग कैसे थे? मैंने अपने नाना जी को आँख से देखा था जब वे चाली...
- अपने पड़ोसी कैसे तंग करते हैं?... रिश्तेदार, खानदान वाले कैसे तंग करते हैं? २४ साल के इस अन्तराल में हमने उसे जाना।...
- अब हम आपसे पूछते हैं कि आपकी स्त्री चौकीदारिन है कि नहीं?... हाँ साहब है तो, क्योंकि हम तो सुबह ऑफिस चले जाते हैं, दुकान चले जाते हैं और शाम को कभी-कभी ज्यादा का...
- अब हम लोग क्या करें?... जो कोई उपाय होगा, वह किया भी जाएगा। जनता करेगी, गवर्नमेन्ट करेगी, समाज से भी किया जाएगा। जो कुछ भी उ...
- अब है कोई राजा?... पच्चीस साल में सब तबाह हो गए। जागीरदार और जमींदार देखे हैं आपने, न देखे हों तो राजस्थान चले जाइए। वह...
- अभी इस साल कितनी महँगाई है, आपको मालूम है?... महँगाई के मारे सामान्य आदमी का सौ में से निन्यानवे आदमियों का कचूमर निकल रहा है। यह एक मुसीबत इस समय...
- अभी भी लोग हमसे बार-बार पूछते हैं कि आप राजसत्ता से दूर क्यों हैं?... बेटे राजसत्ता से राजतंत्र से उसके घपलों से हमारा कोई ताल्लुक नहीं है। हम उन लोगों में से हैं, जो यह ...
- अलख जगाने के बाद में क्या उन्होंने राजसत्ता को अच्छा नहीं बनाया था?... हाँ, अशोक से लेकर हर्षवर्धन तक सैकड़ों के सैकड़ों जनता को उन्होंने अच्छा बना दिया था। धर्मसत्ता को लेक...
- आँखों का फर्क है जो आपको दिखाई नहीं देता कि क्या हो रहा है?... गूलर के फूल के बीच में बन्द रहने वाले भिनुगे को कुछ पता नहीं है कि कब रात हुई, कब दिन। धूप है या बरस...
- आँवलखेड़ा छोड़ने के बाद भगवान की कृ पा से न जाने क्या-क्या होता चला गया?... हमने चौबीस सौ गायत्री शक्तिपीठें बनायी हैं। इसमें कितनी लागत लगी है, इसका आप अनुमान कर लेवें। यह कहा...
- आज आदमी कितना संकीर्ण, कितना स्वार्थी हो गया है?... उसे दूसरों के बारे में कोई चिन्ता नहीं, केवल अपनी ही चिन्ता है। यह कौन होता है? केवल अपनी ही चिन्ता ...
- आज का दिन कितना शुभ है?... भगवान् महावीर राजकुमार थे। उन्होंने सोचा कि राजकुमार होने की अपेक्षा सन्त होना अच्छा है, अतः हमें सन्त...
- आज का दिन वह है, जिसमें हमें विचार करना होगा कि पिछले दिनों हमसे क्या-क्या भूलें हुई हैं?... कहाँ हमने गलतियाँ की हैं? उन्हें सुधारने की आवश्यकता है। यह धर्म-चक्र का दिन है, प्रातःकालीन उदीयमान...
- आज के इस विज्ञान की प्रगति के क्या कहने?... उसने टेलीविजन से लेकर न जाने क्या-क्या बना लिया है? एक जमाना था जब तीर-कमान से लड़ाइयाँ लड़ी जाती थीं...
- आज जरा विचार करके देखें कि किसी के यहाँ अगर दो औरतें होती हैं तो खून-खच्चर नहीं होगा तो क्या होगा?... इसी कारण उन्हें बन्धनों में रखा जाता था ताकि वे बगावत न करें, कहीं जहर न दे दें और अपने द्वेष एवं अह...
- आज तो इसमें फूल आ रहे हैं और न जाने क्या-क्या चीजें आ रही हैं, उन संकल्पों के कारण, कामना को भावना के रूप में बदल देने के कारण कि मैं क्या कहूँ?... मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई। इसे मैं भगवती सरस्वती का वरदान मानता हूँ कि मुझ ठूँठ जैसे व्यक्ति में भी पल्...
- आज सोने का कितना मँहगा भाव है?... इसमें अगर मान लो कोई आदमी पचास ग्राम का भी जेवर बनवाना चाहे तो उसको कितना रुपया चाहिए? यह कहाँ से आए...
- आज स्त्री-पुरुष के बीच की बुराइयाँ किस कदर बढ़ रही हैं?... पचास प्रतिशत जनसंख्या लकवा से पीड़ित है। हम भारत में साठ करोड़ हिन्दू हैं, फिर भी तीस करोड़ महिलाएँ बंग...
- आज हम जब उसकी स्थिति देखते हैं तो हमें रोना आता है कि हे भगवान उसका रूप क्या हो गया?... नारी के दयनीय रूप को आज हम देखते हैं तो हमें बड़ा दुःख, बड़ा क्लेश होता है। आजकल यह सब उनके अभ्यास में...
- आज हम जुलाब की गोली खा रहे हैं तो कल क्या हो सकता है?... यह क्या है? यह समझदारी की निशानी है, जिसमें कि आदमी को अपने बाबत और दुनिया की बाबत आगे की बात दिखाई ...
- आज हमारी जिम्मेदारी क्या है?... और आज हमको करना क्या चाहिए? इसके लिए आदमी को उठा करके, झकझोर करके, चैतन्य करके तैयार कर दें। प्रज्ञा...
- आज हमारी संख्या-हम पण्डितों की, सन्तों की, बाबाजियों की संख्या छप्पन लाख है और गाँव कितने हैं?... सात लाख। हर गाँव पीछे आठ सन्त आते है। यदि हम उस धर्म के मूल स्वरूप को लेकर हर गाँव में चले जाएँ तो क्...
- आजादी प्राप्त की थी, लेकिन क्या आजादी ऐसे ही प्राप्त हो गयी थी?... नहीं; हजारों आदमी उसमें सहयोगी थे। इसी तरीके से हमारी तपश्चर्या चल रही है, क्या हमारे अकेले की चल रह...
- आतंकवाद को आप देख रहे हैं न?... कहीं बम फट रहे हैं, कहीं गोलियाँ चल रही हैं, कहीं कुछ और हो रहा है। ये सारी की सारी मुसीबतें-पाँचों ...
- आदमी की सेहत को कैसे अच्छा बनाया जाए?... लेकिन आपको ये भुलाना नहीं चाहिए कि अन्तरंग जीवन अगर सुव्यवस्थित न हो सका तो हमारे स्वास्थ्य की समस्य...
- आदमी के अन्दर स्वयं की कमजोरी, माँ-बाप की कमजोरी, मित्रों की कमजोरी, वातावरण की कमजोरी और न जाने कितनी कमजोरियाँ होती हैं?... उसे चीरता हुआ जो आगे बढ़े मछली की तरह से उसे हिम्मती कहते हैं। वास्तव में ऐसे व्यक्ति को ही शक्तिपात ...
- आधी दुनिया कैदखाने में पड़ी रहे तो बाकी दुनिया किस तरीके से उठेगी?... गरीबी उन्मूलन के लिए हमको बड़ा काम करना है। हमारे यहाँ अधिकांश लोग केवल खेती पर निर्भर हैं और खेतिहर ...
- आप अकेले दहेज को बन्द करना चाहें और ये चाहें कि हमारी लड़की पर जेवर जरूर चढ़ाये, तो बेचारा बेटे वाला कहाँ से लायेगा जेवर के लिए सोना?... आज सोने का कितना मँहगा भाव है? इसमें अगर मान लो कोई आदमी पचास ग्राम का भी जेवर बनवाना चाहे तो उसको क...
- आप अखण्ड-ज्योति के सब पाठक हैं और जानते हैं कि प्रज्ञावतार ने क्या माँगा है?... प्रज्ञावतार ने यह माँगा है कि हम लोगों के दिमागों की सफाई करें, विचारों की सफाई करें। प्रज्ञा इसी का...
- आप अपने भीतर से ही बीज क्यों नहीं बनाएँ?... मित्रो! जिन लोगों ने अपने आपको बनाया है, उनको यह पूछने की जरूरत नहीं पड़ी कि क्या करेंगे? उनकी प्रत्य...
- आप आइए जरा हमारी आँखों में आँखें डालिए, फिर देखिए क्या हो रहा है?... जमाना बेहद तरीके से बदल रहा है। यह कौन बदल रहा है? भगवान् बदल रहा है। भगवान के अवतार जब कभी भी दुनिय...
- आप उसमें शामिल क्यों नहीं हो जाते?... आप हमारी कम्पनी में बीमा कर लीजिए। हमारा बड़ी कम्पनी में बीमा है। इसलिए हमने आपसे यह कहा था कि आप हमा...
- आप कहीं भी जाएँ, हम आपसे यह नहीं पूछेंगे कि इनमें कितनी सफलता मिली?... सफलता मिले या न मिले, पर प्रयास कितना किया, यह समयदानियों से हमारा मूल प्रश्न रहेगा।इस युग की सबसे ब...
- आप छोटे हैं तो क्या हुआ?... आपको अपने हिस्से का काम करना है।क्या करना है? इस बार बारह वर्ष के लिए भगवान की यह प्रेरणा आई है कि इ...
- आप जन-जागरण के लिए खड़े हो जाइए, कार्यक्रम क्या करने पड़ेंगे?... कार्यक्रम तो बहुत सरल हैं और हमने सबको बता दिये हैं। इस वक्त के लिए बस चार कार्यक्रम रखे हैं।नारी जा...
- आप देना नहीं चाहते क्या?... आप दीजिए, अपना श्रम दीजिए, समय दीजिए, भावना दीजिए, यही है आपके सामने आज के प्रज्ञावतार की अपील, युग ...
- आप नहीं करेंगे तब?... रानी मक्खी शहद के छत्ते में बच्चे दिया करती है, लेकिन वह अकेले ही सब काम थोड़े ही कर लेती है? बाकी मक...
- आप यहाँ आइए और देखिये कि सन्त किसे कहते हैं?... ब्रह्मचारी किसे कहते हैं—जिन्होंने अपने घर को त्याग करके, हजारों रुपयों की नौकरी को ठोकर मारकर यहाँ ...
- आप यहाँ देखिये कि गायत्री माता और अन्य देवी- देवताओं सम्बन्धी तथ्य किस प्रकार व्यक्त हैं और कैसे विद्यमान हैं?... आप यहाँ आइए और देखिये कि सन्त किसे कहते हैं? ब्रह्मचारी किसे कहते हैं—जिन्होंने अपने घर को त्याग करक...
- आप यहाँ देखिये कि नौ कुण्ड का हवन किस तरीके से होता है?... आप यहाँ देखिये कि सारे हिमालय का केन्द्रीभूत करके मन्दिर कैसे बनाया गया है? आप यहाँ देखिये कि गायत्र...
- आप यहाँ देखिये कि सारे हिमालय का केन्द्रीभूत करके मन्दिर कैसे बनाया गया है?... आप यहाँ देखिये कि गायत्री माता और अन्य देवी- देवताओं सम्बन्धी तथ्य किस प्रकार व्यक्त हैं और कैसे विद...
- आप ये बहानेबाज़ी मत बनाइये कि हमारा गुजारा कैसे होगा, घर का क्या होगा?... हमारी जिम्मेदारियाँ कौन पूरी करेगा? आप नहीं भी रहेंगे, मर जाएँगे, तो भी आपके बच्चों का, घरवालों का प...
- आप लोग यह नहीं सोचें कि हमारा पेट कैसे भरेगा?... हमारी औलाद का क्या होगा? हम आपको पूर्ण विश्वास दिलाते हैं कि आपका पेट भी भरेगा तथा आपकी औलाद भी ठीक ...
- आप समझते हैं कि गायत्री माता का अनुष्ठान २४ हजार जप में हो जाता है?... तो यह इतने से पूरा नहीं होता। गायत्री ब्राह्मण की कामधेनु है। अतः जप करने से पहले ब्राह्मण बन। नहीं ...
- आप समझते हैं न हमने क्या गँवाया?... कुछ भी नहीं गँवाया हमने। आप हमारे गाँव चले जाइये, देखिए सारे साथ पैदा हुए लोग, दूसरे लोग कोई दुकान क...
- आप सोच सकते हैं कि इस परिस्थिति में वहाँ बगावत पैदा हो सकती थी या नहीं?... इन लोगों ने उन स्त्रियों पर लगाम लगाकर, चेहरे पर नकाब, बुर्का लगाकर बहुत ही कन्ट्रोल में रखा। आपको म...
- आप हमसे पैसा क्यों माँगते हैं?... आपके घर में सफाई का काम, खाना बनाने का काम, बच्चा पैदा करने का काम, चौकीदारिन का काम करेगी तथा आपसे ...
- आप हमारा ब्रह्मवर्चस शोध- संस्थान देख करके जाइए कि यहाँ कितना बड़ा रिसर्च हो रहा है?... आप यहाँ देखिये कि नौ कुण्ड का हवन किस तरीके से होता है? आप यहाँ देखिये कि सारे हिमालय का केन्द्रीभूत...
- आप हमारी दुकान में साझेदार-हिस्सेदार क्यों नहीं बन जाते?... अन्धे और पंगे का योग क्यों नहीं बना लेते। हमारे गुरु और हमने साझेदारी की है। शंकराचार्य और मान्धाता ...
- आप हमारे प्रश्नों का उत्तर दीजिए, चुप क्यों हो गये?... मित्रो, हम कहना यह चाहते हैं कि गार्गी भी उसी प्रकार की विद्वान एवं विदुषी महिला थीं, जिस प्रकार याज...
- आपके अन्दर वह योग्यता है क्या?... इनसान की खुराक अनाज नहीं, रोटी नहीं, दूध नहीं, ये सिर्फ जिस्म की खुराक है। आदमी जिस्म नहीं है। आदमी ...
- आपके पास है क्या जिससे पूजन करेंगे?... आपके पास तो बची हुई एक हविश है, जिसको पूरा करने के लिए आप हर एक को निगलना चाहते हैं। आपकी ख्वाहिशें ...
- आपको दिखाई न पड़ता हो तो देखिए कि हिन्दुस्तान का ही पिछले बीस-तीस साल में क्या हो गया?... कभी यहाँ राजा छाए हुए थे। तीन-चौथाई हुकूमत राजाओं की थी। अब है कोई राजा? पच्चीस साल में सब तबाह हो ग...
- आपको दिखायी नहीं पड़ता?... आज स्त्री-पुरुष के बीच की बुराइयाँ किस कदर बढ़ रही हैं? पचास प्रतिशत जनसंख्या लकवा से पीड़ित है। हम भा...
- आपको भगवान का चौबीसवाँ अवतार होता हुआ दिखाई पड़ता है क्या?... दुनिया का कायाकल्प होता हुआ दिखाई पड़ता है क्या कि किस बुरी तरीके से गलाई-ढलाई हो रही है। आपको दिखाई ...
- आपको भी कुछ करना चाहिए?... आप नहीं करेंगे तब? रानी मक्खी शहद के छत्ते में बच्चे दिया करती है, लेकिन वह अकेले ही सब काम थोड़े ही ...
- आपको यह कथा मालूम है न?... ठीक यही कथा, मनुष्य जाति के सामने इस समय भी उपस्थित हुई है। मनुष्य जाति को आप गज के तरीके से मान सकत...
- आपको यह सोचना है कि आप अपना समय, श्रम, अकल, कितना इस कार्य में लगा सकते हैं?... दूसरा आपने ब्रह्मवर्चस की यज्ञशाला में पूजन किया, एक फूल चढ़ाया। हम चाहते हैं कि आप तपस्वी बनें, नेक ...
- आपत्तिकाल की बात कह रहे हैं?... आपत्तिकाल की कीमत जो समझते हैं, उनको यह भी ध्यान है कि आपत्तिकाल के लिए आपत्तिकालीन व्यवस्थाएँ बनाई ...
- आपने देखा नहीं?... उसके साथ ढेरों के ढेरों आदमी जुड़े थे। उनके परिव्राजक नालन्दा और तक्षशिला के विश्वविद्यालय में शिक्षण...
- इक्कीसवीं सदी में क्या-क्या चीजें समाप्त होने जा रही हैं तथा क्या-क्या होने वाला है?... इस पर एक पुस्तक लिखी जा रही है, जिसे आप देखकर सब बातें समझ सकते हैं।मित्रो! यहाँ पर हम इक्कीसवीं सदी...
- इतना कर सकना यदि हमारे लिए सम्भव हो जाए तो समझना चाहिए कि आपका यह सवाल पूरा हो गया कि हम क्या करें?... क्या न करें? आप अच्छे बने। समाज-सेवा करने से पहले यह आवश्यक है कि हम समाज-सेवा के लायक हथियार तो अपन...
- इतने समय में क्या सभी काम पूरे हो गये?... कदापि नहीं। अभी तो भारतीय संस्कृति की जानकारी केवल भारत के लोगों को मिली है, बाकी विदेश के लोगों को ...
- इन पाँच बच्चों का क्या होगा?... वह मायके जाती है, तो उससे कहा जाता है वापस वहीं जाओ और देवर-जेठ के जूठे बर्तन साफ करो। ये उन स्त्रिय...
- इन्द्रियाँ हमसे जाने क्या-क्या करा लेती हैं?... मन न जाने क्या-क्या करने के लिए कहता रहता है। हम असहाय एवं गुलामों के तरीके से इन्हीं का कहना मानते ...
- इम्तहान रोज-रोज कहाँ होते हैं?... भक्तों के भी इम्तहान हमेशा नहीं होते, बहुत दिनों बाद होते हैं। जिसमें आपको बुलाया गया है, उसमें नवरा...
- इलाज की सामग्री ढूँढ़ी जानी चाहिए, रिसर्च की जानी चाहिए कि दवाइयों के द्वारा बीमारियों से छुटकारा कैसे पाया जाए?... आदमी की सेहत को कैसे अच्छा बनाया जाए? लेकिन आपको ये भुलाना नहीं चाहिए कि अन्तरंग जीवन अगर सुव्यवस्थि...
- इस तरीके से क्या होता जाएगा कि जिस आदमी के अन्दर देश-भक्ति और नागरिक कर्तव्यों का उदय नहीं हुआ और उसे इस बात की जिम्मेदारी एवं जानकारी भी नहीं है कि वोट के नाम पर राष्ट्र की हुकूमत हमारे हाथ में सौंप दी गयी है, वह अपनी जिम्मेदारियों को कैसे निभा सकता है?... अच्छी राजनीति चलाने और अच्छी गवर्नमेण्ट बनाने के लिए शासन-सत्ता में अच्छे व्यक्ति पहुँचने चाहिए। अच्...
- इस फर्क का क्या कारण है?... हम बच्चे हैं तो एक जैसा खाना क्यों नहीं देतीं? माँ ने कहा—बेटे ये मेरी पड़ोसिन का बच्चा है, इसलिए ये ...
- इस बात पर कभी तो आपको सोचना चाहिए कि यह क्या है?... मित्रो! यह अनीति है, भ्रष्टाचार और अन्याय है, दुष्टता है, अत्याचार है। जिस दिन ये चीजें समाज का अंग ...
- इस समय आपको क्या-क्या करना होगा?... कौन-कौन से काम करने होंगे? इक्कीसवीं सदी में क्या-क्या चीजें समाप्त होने जा रही हैं तथा क्या-क्या हो...
- इस स्थिति में गाड़ी आगे कैसे चलेगी?... गाड़ी आगे चल नहीं सकती है। हमने-आपने कई बार यह सुना है कि अमुक रोड पर मोटर, ठेलागाड़ी पलट गयी। अगर हम ...
- इसकी एक उपासना-पद्धति है जिसे मैं फिर कभी समझा दूँगा कि दोनों उपासनाएँ एक प्रातःकाल की और दूसरी रात्रि को सोते समय कैसी करनी चाहिए?... दूसरा है महापुरश्चरण, जिसमें सामूहिक उपासना मुख्य है। सामूहिक उपासना में बड़ी शक्ति है। एक समय पर एक ...
- इसके बाद क्या होना है?... इसके बाद आप देखेंगे कि जिसे हम इक्कीसवीं सदी कहते हैं, उसमें विशाल भारत, जो महाभारत काल में बना था, ...
- इसके लिए क्या करना चाहिए?... आप सब लोगों को इसके लिए ये प्रतिज्ञाएँ करनी चाहिए, अभिभावकों को ये प्रतिज्ञाएँ करनी चाहिए कि ‘‘हम अप...
- इसके लिये क्या करना पड़ता है?... बेटे! इसके लिये तप करना पड़ता है। पार्वती जी ने तप किया था। भगीरथ, ध्रुव, प्रहलाद को तप करना पड़ा था, ...
- इसमें अगर मान लो कोई आदमी पचास ग्राम का भी जेवर बनवाना चाहे तो उसको कितना रुपया चाहिए?... यह कहाँ से आएगा? अतः जेवर के लिए वह दहेज माँगता है, तो क्या बुरा करता है? दहेज को बन्द करने की यदि ब...
- इसमें क्या फर्क है, इसमें क्या सोचना है?... परन्तु यह कहने की बात नहीं है। यह भेद आपको तब मालूम पड़ सकता है, जब आपको स्त्री बना दिया जाए। आपके ऊप...
- इसलिए मित्रो, हमारा लोगों को यही जवाब है कि हम क्यों राजनीति में नहीं जाते हैं?... और राजनीति को छोड़कर धर्मसत्ता में क्यों आ गये? भगवान महावीर और भगवान भक्त हनुमान जो दोनों ही आज के द...
- इससे अधिक सन्तोष कहाँ मिल सकता है?... सिनेमा में क्या है, जिसे देखकर चैन और खुशी प्राप्त हो सके।...
- इससे कम की जरूरत पड़ेगी?... नहीं। कभी गाँधी जी ने कहा था—सौ आदमी मिल जाएँ, तो हमारा काम चल जाएगा। हमारा काम नहीं चलेगा, क्योंकि ...
- इससे क्या हो सकता है?... जिस गाँव में चार सौ घर हैं तो क्या उस गाँव के प्रत्येक घर से एक-एक व्यक्ति एक-एक घण्टा समय समाज, देश...
- इसी तरह आपको जमाना बदलता हुआ दिखता है क्या?... नहीं दिखाई पड़ता। आपको भगवान का चौबीसवाँ अवतार होता हुआ दिखाई पड़ता है क्या? दुनिया का कायाकल्प होता ह...
- इसी तरह किसी मर्द को यकीन नहीं होता कि छह महीने बाद हमारे गृहस्थ जीवन का क्या होगा?... लम्बे-चौड़े प्रेम-पत्रों को लिखे जाने के बावजूद हर मनुष्य इतना अशान्त होता हुआ चला जा रहा है।अमेरिका ...
- इसी तरह के मौके कितने सारे आये?... चाणक्य ने भी ऐसा ही किया था। वे चन्द्रगुप्त को तलाशते उसके घर जा पहुँचे थे और कहने लगे—बेटा, हमारा ब...
- इसी तरीके से हमारी तपश्चर्या चल रही है, क्या हमारे अकेले की चल रही है?... नहीं! अकेले की नहीं। हमारे कुटुम्बियों को, हमारे भाइयों को, हमारे भतीजों को, हमारे बच्चों को, हमारे ...
- इसे अगर आप हमारी आँखों से देख पाएँ तो आप देख सकते हैं कि कैसे तूफान आ रहे हैं, कैसी आँधियाँ आ रही हैं?... आपको अपनी आँखों से दिखाई नहीं पड़ सकता, क्योंकि आप सामने की चीजें देखते हैं। आपको केवल वही चीज दिखाई ...
- इसे आपको समझना पड़ेगा, इस पर विचार करना पड़ेगा कि ऐसा आखिर क्यों है?... मित्रो! आप लोगों के ऊपर, नई पीढ़ी के ऊपर वो जिम्मेदारियाँ आ रही हैं, आयेंगी और आनी चाहिए। आप लोगों को...
- इसे कौन बदल रहा है?... बीसवीं सदी का अवतार, जिसे हम प्रज्ञावतार कहते हैं। आदमी की अकल बहुत ही वाहियात है। इस अकल ने सारी ...
- ईसामसीह से एक आदमी ने पूछा आपने भगवान देखा है?... उन्होंने कहा—हाँ, तो दिखाइये। ईसा एक छोटा बच्चा उठाकर ले आये और बोले—यही भगवान है। इसका मन निर्मल, भ...
- उन चौबीस लाख आदमियों में से एक- एक का एक- एक दिन, एक- एक व्यक्ति का जन्म- दिन मना लिया जाए तो चौबीस लाख यज्ञ हो सकते हैं और चौबीस आदमी पीछे एक यज्ञ कर लें तो?... तो एक लाख यज्ञ हो जाते हैं। यज्ञों से हमारा मतलब यह नहीं है कि बड़ा भारी धूम- धड़ाका होगा और बड़ा भारी ...
- उनका कुधान्य खाकर हम कितने दिन जिएँगे?... इसलिए देवताओं ने मना कर दिया था और रीछ-बन्दरों के घरों में पैदा हुए थे।आज की आवश्यकताएँ सूक्ष्म हैं।...
- उनकी क्या विशेषता थी?... एक तो यह कि उन्होंने समय को पहचान लिया कि यह सही समय है। सीताजी वापस आ जाती तब कोई हनुमान कहता कि हम...
- उन्हें यह भी बतलाएँगे कि घर की संस्था का विकास कैसे करना चाहिए?... आप एक बात का ध्यान रखें कि योग्य कन्याएँ और महिलाएँ ही यहाँ भेजें। बेकार की गूँगी, बहरी, बच्चे वाली,...
- उन्होंने अपने आप को अनुशासन में ढालने का प्रयत्न किया था, पर जब उनके गुरु यह तलाश करने लगे कि कौन-से शिष्य को अपना उत्तराधिकारी बनाया जाए?... सारे विद्वानों की अपेक्षा, नेता और दूसरे गुण वालों की अपेक्षा उन्होंने अर्जुन देव को चुना और यह कहा ...
- उन्होंने कहा-इस काम के लिए तो ढेरों आदमी विद्यमान हैं, लेकिन जो मुश्किल का काम है, कठिनाई का काम है, कष्ट का काम है, त्याग का काम है, बलिदान का काम है, वह कौन करेगा?... हनुमान जी ने सेवा को सबसे बड़ा काम समझा, सत्ता को नहीं और शुरू से अन्त तक उसी में निमग्न रहे।...
- उपार्जन और व्यय कैसे करना चाहिए?... यह जीवन की एक शैली है, एक क्रम है और एक आधार है।अध्यात्म एक साइंस है जिसमें जीवन का क्रम बदलना पड़ता ...
- उस जमाने में पण्डित लोग भी कहीं-कहीं ऐसे उदाहरण दे दिया करते थे कि जब भगवान श्रीकृष्ण के सोलह हजार छह सौ आठ पत्नियाँ हो सकती हैं तो आप क्यों नहीं रख सकते?... आप कम से कम सोलह सौ तो रख ही सकते हैं। ऐसी विडम्बना मध्यकाल में पण्डों-पुरोहितों ने फैलाकर नारी समाज...
- उस तरंग का नाम क्या है?... उसका नाम हमारा गुरु है, जो प्रकाश के रूप में वसन्त के दिन हमारे पास आये और हमें निहाल कर गये। कोई गुर...
- उस पर भी अर्जुन नहीं उठे तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नपुंसक तक कह डाला और बोले—अगर तुम्हें श्रेय नहीं लेना तो दूसरे ले लेंगे, परन्तु तू मुझे यह बता कि युद्ध में श्रेय लेने में तुझे क्या आपत्ति है?... मित्रो! ऐसे अवसर कभी-कभी ही आते हैं, जब लोगों को श्रेय मिलता है। पिछले दिनों आजादी की लड़ाई के बाद जो...
- उस विद्यालय में क्या होगा?... वह प्रचारक विद्यालय होगा। वह संगीत भी सिखायेगा और व्याख्यान देना भी सिखायेगा, यज्ञ करना भी सिखायेगा।...
- उस समय छोटे-छोटे आदमी ग्वाल-बाल कह सकते थे कि हमें क्यों गोवर्धन उठाएँगे?... क्यों जोखिम उठाएँगे? परन्तु अवतार कहता था कि आपको करना चाहिए। उन छोटे-छोटे लोगों में उमंगें थी। उन्ह...
- उसका क्या शानदार परिणाम हुआ?... ऐसा शानदार परिणाम हुआ कि महर्षि दधीचि धन्य हो गये। राजा इन्द्र धन्य हो गये और वृत्तासुर जैसी मुसीबत ...
- उसका परिणाम क्या होगा?... जिन लोगों के लिए आप करना चाहते हैं, वे आपके साथ-साथ चमकेंगे और चलेंगे। सूरज के साथ में नौ ग्रह और बत...
- उसके बिना तो काम नहीं चलेगा न?... ऋषि नहीं लड़ेगा तो दूसरे तो लड़ेंगे।दशरथ जी के मन में पहले तो यह आया कि हमारे बच्चे हैं, हमारे पास रहे...
- उसने टेलीविजन से लेकर न जाने क्या-क्या बना लिया है?... एक जमाना था जब तीर-कमान से लड़ाइयाँ लड़ी जाती थीं और जब आदमी के शरीर में तीर चुभ जाता था तो उसे निकाल...
- उसमें भी तो हम यही देखने जाते हैं कि हमारा दाम्पत्य जीवन खुशहाल कैसे हो?... मेरी कर्तव्यपरायणता देखकर जब उसकी आँखों में से आँसू की बूँदें ढुलक पड़ती हैं तो मैं तो ये समझता हूँ क...
- उसे बार-बार विचार करना पड़ता है कि हमसे गलतियाँ कहाँ हुईं, क्या हुईं?... इस प्रकार के विचार करते रहने से आदमी का बहाव ठीक रहता है। आज का दिन वह है, जिसमें हमें विचार करना हो...
- उसे मैं कैसे स्थिर कर दूँ?... सारे का सारा अन्न जिसे तू खाता है, उसमें तमोगुण ही तमोगुण भरा हुआ है, रजोगुण की सीमा में भी नहीं। पू...
- उसे विवेकशील कैसा होना चाहिए?... उसे विवेकशील ऐसा होना चाहिए जैसा जापान का गाँधी कागावा था, जिसने परीक्षा पास करने के बाद नौकरी नहीं ...
- उसे हम कैसे भूल सकते हैं?... वास्तव में हम नारी को माँ, पत्नी, बहिन, बेटी कि सी भी रूप में देखें। हर रूप में वह त्याग, तपस्या, क्...
- एक बार द्रोणाचार्य से लोगों ने पूछा—आप अपनी पीठ पर तीर-धनुष क्यों रखते हैं?... आप तो सन्त हैं, ब्राह्मण हैं। उन्होंने कहा— अग्रे चतुरो वेदाः पृष्ठे सशरोधनुः।
इदं ब्राह्मम् इदं क...
- एक शराबी को नशे की हालत में न जाने क्या-क्या दिखलाई पड़ता है?... मेरी दुनिया भी नई दिखलाई पड़ने लगी। मेरे अन्दर नया उत्साह एवं उमंग आ गई।शक्तिपात के बारे में लोग यह स...
- ऐसा क्या कारण हो सकता है, जो उनकी पराजय का कारण बना?... उत्तर मिला—फ्रान्सीसियों के दिमाग पर ऐय्याशी और विलासिता छायी थी।अमीरी से राष्ट्र मजबूत नहीं होते, म...
- ऐसी स्थिति से हमको वहाँ क्यों जाना चाहिए?... हमको वहाँ क्यों नहीं जाना चाहिए जहाँ पूरा का पूरा डिब्बा खाली पड़ा है। धर्म का क्षेत्र खाली पड़ा हुआ ह...
- और आज हमको करना क्या चाहिए?... इसके लिए आदमी को उठा करके, झकझोर करके, चैतन्य करके तैयार कर दें। प्रज्ञा प्रशिक्षण विद्यालय के बारे ...
- और राजनीति को छोड़कर धर्मसत्ता में क्यों आ गये?... भगवान महावीर और भगवान भक्त हनुमान जो दोनों ही आज के दिन पैदा हुए थे, उनके जीवन से भी हमको यही जवाब म...
- कदम से कदम मिलाया तो क्या आप समझ सकते हैं कि किसी महत्त्वपूर्ण शक्ति के साथ कन्धा मिलाने की क्या कीमत हो सकती है?... क्या फायदा हो सकता है? आप तो अन्दाज नहीं लगा पा रहे हैं, लेकिन हनुमान ने लगा लिया था वह हिम्मत दिखाई...
- कपड़े की क्रीज कैसे खराब हो जाती है?... कैसे ठीक रखी जा सकती है, ये सभ्यता और शिष्टाचार सीख सकते हैं, पर उनका भावात्मक विकास नहीं हो सकता? क...
- करुणा किसे कहते हैं?... जिससे दूसरे व्यक्ति के दुःख तकलीफ को देखकर द्रवित हो जाए। उसे विवेकशील कैसा होना चाहिए? उसे विवेकशील...
- कहते हैं तू कौन होती है?... ये मेरे भाई की कमाई है, इसमें मेरा हक है। इन पाँच बच्चों का क्या होगा? वह मायके जाती है, तो उससे कहा...
- कहाँ हमने गलतियाँ की हैं?... उन्हें सुधारने की आवश्यकता है। यह धर्म-चक्र का दिन है, प्रातःकालीन उदीयमान सूर्य का दिन है, अन्धकार ...
- कहीं क्या होता है तो कहीं क्या?... इस तरह से नेचर हमसे नाराज हो गयी है। वातावरण भी ऐसा हो गया है कि जो नई पीढ़ियाँ पैदा होती हैं, नये बच...
- कामनाएँ किसे कहते हैं?... कामनाएँ उसे कहते हैं, जिसके बारे में हम कह रहे थे। यह दो हैं। एक है पेट की भूख, जो पेण्डुलम की घड़ी क...
- कितने आदमी आ गये इन फूलों को देखकर कि मैं क्या बताऊँ?... बच्चों ने ललचाई आँखों से फूल को देखा, फलों को देखा। हर एक ने इसे देखा और पसन्द किया। यह मैं अपने जीव...
- कितने उदाहरण दूँ आपको?... भगवान के अवतारों के साथ में जिन्होंने थोड़े-से भी अहसान कर दिए, वे धन्य हो गए। भगवान तो क्या महापुरुष...
- कितने प्रसन्नचित्त रहते हैं?... कितना आपको सन्तोष मिलता है, सम्मान मिलता है, कितना आपको भगवान का अनुग्रह मिलता है। यही तो परीक्षा का...
- कितने बच्चे है आपके?... ? तीन बच्चे हैं। आपको २५०० रुपए देना चाहिए। आपकी बात भी ठीक हो सकती है, परन्तु अगर हमारे अन्दर सुसंस...
- किस-किस को कहें, शानदार शक्तियों का साथ देने वाले न जाने कहाँ से कहाँ पहुँच गए और क्या से क्या हो गए?... इसलिए इस शिविर में हमने आपको खासतौर से यह दावत देने के लिए बुलाया है कि अगर आपका मन बड़े फायदे उठाने ...
- किसलिए बता रहा था?... इसलिए कि जिस समय में हम और आप रह रहे हैं, वह ऐसा शानदार समय है कि आपकी जिन्दगी में और इतिहास में फिर...
- किसी को अपनी मौत कहाँ दिखाई देती है?... इसी तरह आपको जमाना बदलता हुआ दिखता है क्या? नहीं दिखाई पड़ता। आपको भगवान का चौबीसवाँ अवतार होता हुआ द...
- किसी तरीके से अपना गुजारा करते थे, लेकिन जब रामचन्द्रजी के पुकारने पर चले गये, मौके को उन्होंने पहचान लिया तो क्या परिणाम हुआ?... फिर वे ऐसे बड़े हो गये जैसे सारी जिन्दगी में कभी नहीं हुए थे। उन्होंने पहाड़ को उखाड़ा, समुद्र को लाँघा...
- कुण्डलिनी किसे कहते हैं?... विवेकशीलता को। आप समझते नहीं हैं। हमारा गुरु हमारी कुण्डलिनी जगा गया। उसके द्वारा हमारा विवेक जाग्रत...
- केवट न क्या काम किया था?... नाव में बिठाकर के रामचन्द्र जी को पार लगा दिया था बिना कुछ कीमत लिए। तो गुरुजी चलिए, हम भी आपको कार ...
- कैसा कीमती समय है?... ये ऐसा कीमती समय है जैसे—एक बार रामचन्द्रजी के ऊपर मुसीबत आयी। उन्होंने बन्दरों से कहा, हनुमान जी से...
- कैसे और कब?... जैसे जटायु ने सीता जी को रावण के चंगुल से छुड़ाकर उदाहरण प्रस्तुत किया था। उसने देखा कि कोई बदमाश एक ...
- कैसे ठीक रखी जा सकती है, ये सभ्यता और शिष्टाचार सीख सकते हैं, पर उनका भावात्मक विकास नहीं हो सकता?... क्योंकि जिन माँ-बाप के मनों में परिवार के प्रति, एक-दूसरे के प्रति प्यार-मुहब्बत और आदर्श-कर्तव्यन...
- कैसे दिखाई पड़ता है?... आप समुद्र के किनारे बैठ जाइए। आपको आने वाले जहाजों के मस्तूल दिखाई दे रहा है, थोड़ी देर में पूरा जहाज...
- कैसे हो सकता है?... ऊँचे उद्देश्यों के लिए, खासतौर से उस समय जबकि भगवान अवतार लिया करते हैं, तब जो आदमी उनके कन्धे से अप...
- कोई काम नहीं था, लेकिन भगवान के अवतार के साथ, उनकी क्रिया-पद्धति के साथ जुड़ जाने की वजह से वे रीछ-बन्दर भी न जाने क्या से क्या हो गए?... हम उनकी जय-जयकार करते हैं रीछ-बन्दरों की। उनकी क्या विशेषता थी? एक तो यह कि उन्होंने समय को पहचान लि...
- कोई बूढ़ा- बीमार व्यक्ति भेज देंगे, तो वह क्या सीखेगा?... न चला जाता है, न दिखाई देता है—ऐसे व्यक्ति का हम क्या करेंगे? मुस्तैद आदमी वहाँ से युग- शिल्पी शिविर...
- कोयल में देखते हैं, भौंरों में देखते हैं, दूसरे प्राणी में देखते हैं, थिरकन और पुलकन किस प्रकार दिखाई पड़ता है?... वसन्त के दिनों में हर प्राणी में एक उल्लास एवं उमंग दिखाई पड़ती है। सृष्टि का सृजनक्रम इन दिनों ज्याद...
- कोयले और हीरे में रासायनिक दृष्टि से कोई फर्क नहीं?... कोयले का ही परिष्कृत रूप हीरा है। खनिज में से जो धातुएँ निकलती हैं, कच्ची होती हैं, लेकिन जब पकाकर क...
- कौन-कौन घटनाएँ सुनेंगे आप?... चलिए आपको सुनाता हूँ। रामदास ने एक लड़के को पकड़ लिया। वह इधर-उधर घूम रहा था। उससे कहा—बेटा, तुझे छत्र...
- कौन-कौन सी चीजें आ गई?... बहुत-सी चीजें आ गईं। कोयल आ गई बौर देखकर। भौंरे आ गये गीत गाने, खिले हुए फूलों को देखकर। कितने आदमी ...
- कौन-कौन से काम करने होंगे?... इक्कीसवीं सदी में क्या-क्या चीजें समाप्त होने जा रही हैं तथा क्या-क्या होने वाला है? इस पर एक पुस्तक...
- क्या आप भगवान की सहायता कर सकते हैं?... हम इसीलिए बुलाते हैं और हर एक आदमी से बार-बार यही सवाल पूछते रहते हैं कि क्या आप इन शानदार समय को पह...
- क्या आप मुसीबत में जहाँ के तहाँ हृदयहीन बने बैठे रहेंगे?... मदद नहीं करेंगे? जाग्रत आत्माओं को आपत्तिकाल ने पुकारा है कि आप राहत-कार्यों के लिए मदद कीजिए। राहत-...
- क्या आप समय को पहचानते हैं?... क्या आप भगवान की सहायता कर सकते हैं? हम इसीलिए बुलाते हैं और हर एक आदमी से बार-बार यही सवाल पूछते रह...
- क्या आप हमारे काम नहीं आएँगे?... आप हमारे काम आइए और हम आपके काम आएँगे। अब हमारा हर एक कार्यक्रम में जाना नहीं हो सकेगा, लेकिन आपमें ...
- क्या आपकी अकल इतनी मदद करेगी कि आप इन शानदार समय को पहचान लें?... अगर आपकी अकल इतनी सहायता कर दे और यह बता दे कि यह बहुत ही शानदार समय है, तो फिर हम आपको एक और सलाह ...
- क्या इसे सरकार बन्द कर सकती है?... नहीं, सरकार नए-नए कायदे-कानून और नीतियाँ बनाती चली जाएगी और लोग अपने बचाव के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर...
- क्या उन्होंने रघुवंशियों से लेकर अनेकों राजाओं की राजसत्ता को अच्छा नहीं बना दिया था?... हाँ, उन्होंने बना दिया था। सारे महामानव धर्मसत्ता को लेकर चले थे। चाणक्य ने क्या चन्द्रगुप्त को अच्छ...
- क्या उन्होंने शिवाजी और दूसरे लोगों को अच्छा नहीं बना दिया?... हाँ, बना दिया था। हम भी सरकारों को अच्छा बना देंगे, जनता को अच्छा बना देंगे। जनता को अच्छा बनाने के ...
- क्या करना चाहिए?... करने को तो ढेरों के ढेरों काम पड़े हैं, पर हमने इन तीन महीनों में जो आपको याद दिलाया है, वह यह कि हमक...
- क्या करना पड़ेगा?... करना हमको वह पड़ेगा और वही महत्त्वपूर्ण काम है, जो स्वामी केशवानन्द करने में समर्थ हुए थे। अगर स्वामी...
- क्या कहते हैं?... जो सौभाग्यशाली हैं, उनके सौभाग्य को चमका देने के लिए, निष्ठावानों को, अपने भक्तों के सिर और माथे पर ...
- क्या काम करना पड़ेगा?... यह हमारा पचहत्तरवाँ वर्ष है। हीरक जयन्ती वर्ष है। इस हीरक जयन्ती वर्ष में हमने अपने प्रत्येक कार्यकर...
- क्या काम करेंगे?... हमने एक बहुत ही शानदार भवानी तलवार निकाली है। ऐसी शानदार योजना दुनिया में आज तक नहीं बनीं। क्या बनी ...
- क्या चीजें आती हैं?... हूक आती है, उमंगें आती हैं प्रकृति में और ढेरों के ढेरों आदमी उसमें लग जाते हैं। नेतृत्व कौन करता है...
- क्या तैयारी करनी चाहिए?... आपको मालूम होना चाहिए कि बड़ी शक्तियाँ, दैवी शक्तियाँ इस कार्य हेतु अपने ढंग से काम करेंगी, परन्तु आप...
- क्या न करें?... आप अच्छे बने। समाज-सेवा करने से पहले यह आवश्यक है कि हम समाज-सेवा के लायक हथियार तो अपने आप को बना ल...
- क्या फायदा हो सकता है?... आप तो अन्दाज नहीं लगा पा रहे हैं, लेकिन हनुमान ने लगा लिया था वह हिम्मत दिखाई थी, जो आदर्शों को जीवन...
- क्या बनी है?... हमने हर दिन हर पढ़े-लिखे को नियमित रूप से बिना मूल्य युगसाहित्य पढ़ाने की योजना बनाई है। आप पढ़े-लिखे ल...
- क्या भगवान कृष्ण ने अकेले ही उठाया लिया था?... नहीं; अकेले नहीं उठाया था, गोप- ग्वाल सबने अपनी- अपनी लाठी का सहयोग किया था। भगवान बुद्ध ने जो धर्म-...
- क्या भगवान बुद्ध ने दुनिया पलट दी थी?... आपने देखा नहीं? उसके साथ ढेरों के ढेरों आदमी जुड़े थे। उनके परिव्राजक नालन्दा और तक्षशिला के विश्वविद...
- क्या भगवान व्यक्ति के रूप में आते हैं?... नहीं? भगवान व्यक्ति के रूप में नहीं आते, व्यक्ति उन्हें धारण करते हैं। क्या चीजें आती हैं? हूक आती ह...
- क्या मतलब है इसका?... यह ‘‘आश्वत्थम् प्राहुरव्ययम्’’ अर्थात पीपल का पेड़ है जिसकी टाँगें ऊपर हैं, जड़ें ऊपर हैं और उसकी शाखा...
- क्या माँगने के लिए आये?... बच्चे माँगने के लिए आये। उन्होंने कहा— यज्ञ की रक्षा के लिए हमको इनकी बड़ी आवश्यकता है। स्वयं विश्वाम...
- क्या वजह है इसकी?... इसकी एक ही वजह है कि हमने यह पहचान लिया है कि भगवान का अवतार होता हुआ चला आ रहा है। अवतार के साथ कन्...
- क्या वहाँ लोग जीवन नहीं जी रहे?... अपने देश में लोगों को यह शंका है कि यहाँ की नारी आगे बढ़ जाएगी तो हमारा जीवन गुजारना मुश्किल हो जाएगा...
- क्या हुआ था?... हमारा जन्म हुआ था। नए युग का जन्म होने जा रहा है। दो बातें होनी हैं—एक युग निर्माण की, दूसरा निर्माण...
- क्या होना चाहिए?... बालकों को गुब्बारे के अलावा टॉफी और चाकलेट के अलावा कुछ नहीं मालूम। उनसे कुछ काम नहीं होने वाला। वे ...
- क्या- क्या काम सुपुर्द किये हैं?... पहला काम तो हमने नालन्दा विश्वविद्यालय के तरीके से, तक्षशिला विश्वविद्यालय के तरीके से एक लाख धर्म प...
- क्यों आने वाले हैं?... इसलिए आने वाले हैं कि जनसंख्या बेहद बढ़ती चली जा रही है। जनसंख्या का पृथ्वी पर बढ़ना एक बहुत बड़ा जुर्म...
- क्यों आये मालूम है न?... माँगने के लिए आये। क्या माँगने के लिए आये? बच्चे माँगने के लिए आये। उन्होंने कहा— यज्ञ की रक्षा के ल...
- क्यों जोखिम उठाएँगे?... परन्तु अवतार कहता था कि आपको करना चाहिए। उन छोटे-छोटे लोगों में उमंगें थी। उन्होंने वैसा किया। इसी प...
- क्यों माँगता है?... क्योंकि उससे जेवर माँगा जाएगा। लड़की वाला माँगता है जेवर और लड़के वाला माँगता है दहेज। ये दोनों ही बात...
- क्यों साहब पैसे की जरूरत पड़ी?... नहीं भाईसाहब, पैसों की जरूरत नहीं पड़ती है।शकुन्तला जब कण्व ऋषि के आश्रम में पाली-पोसी गई थी। तो कण्व...
- क्यों साहब, यह हो सकता है?... हाँ यह हो सकता है। कैसे हो सकता है? ऊँचे उद्देश्यों के लिए, खासतौर से उस समय जबकि भगवान अवतार लिया क...
- क्यों साहब, हम भी बूढ़े हो जाएँ और ऐसा कुछ करें?... नहीं भाई साहब, अब वह वक्त चला गया, आप समय को तो पहचानते नहीं। भगवान कभी-कभी हाथ पसारता है। आदमी तो भ...
- क्यों हम ऋषि के यहाँ भेजें?... पीछे उनके गुरु वशिष्ठ ने उनको सलाह दी। उनकी समझदारी ने कहा—नहीं इस समय विश्वामित्र माँगने के लिए आये...
- क्यों होती हैं?... क्योंकि हमने अवतार के साथ में कन्धे से कन्धा मिलाकर हनुमान के तरीके से काम करने का निश्चय कर लिया है...
- क्यों, साहब, यह कोई बड़ा काम था क्या, बताइए?... कोई काम नहीं था, लेकिन भगवान के अवतार के साथ, उनकी क्रिया-पद्धति के साथ जुड़ जाने की वजह से वे रीछ-बन...
- गन्दे नाले में गंगाजल डाल देगा तो क्या सारा का सारा गन्दा नाला शुद्ध हो जाएगा?... गन्दा नाला शुद्ध नहीं होगा, वरन् वह गंगाजी भी गन्दा नाला हो जाएगी। तू मोटी बातें भी समझता क्यों नहीं...
- गवर्नमेण्ट कहाँ तक सहायता कर सकती है?... हम हर गाँव में जाएँगे, हर घर में जाएँगे और लोगों से यह कहेंगे कि समाज को ऊँचा उठाने के लिए आप सरकार ...
- गवर्नमेण्ट हमारे रिश्तों को अच्छा कर देगी?... नहीं कर सकती। हमारी सेहत को गवर्नमेण्ट अच्छा नहीं कर सकती। हमारा खान-पान ठीक नहीं है, ब्रह्मचर्य के ...
- गाँधी जी की?... नहीं, गाँधी जी की नहीं, जनता की रही। हुकूमत की शक्ति जब-जब होगी, जनता की होगी। किन्तु हमारे कर्तव्य ...
- गार्गी ने कहा—बस हो गया, क्या आपका ज्ञान केवल सिर काटने वाली बात तक ही सीमित है?... अरे ऋषिवर! आप हमारे प्रश्नों का उत्तर दीजिए, चुप क्यों हो गये? मित्रो, हम कहना यह चाहते हैं कि गार्ग...
- गिलहरियाँ ऐसे ही घूमती रहती हैं, बालू में बैठी रहती हैं और बालू भर जाती है फिर क्या खास बात थी उसमें?... यह थी कि उसने समय को पहचान लिया था कि अब भगवान की जरूरत में, आवश्यकता में मदद करनी चाहिए। यह गिलहरी ...
- चाणक्य ने क्या चन्द्रगुप्त को अच्छा नहीं बना दिया था?... हाँ बना दिया था। समर्थ गुरू रामदास धर्मसत्ता को लेकर चले थे। क्या उन्होंने शिवाजी और दूसरे लोगों को ...
- चिड़िया के सामने, हाथी के सामने पेट भरने की कोई समस्या नहीं है, फिर इनसान के सामने क्या आयेगी?... आप ये बहानेबाज़ी मत बनाइये कि हमारा गुजारा कैसे होगा, घर का क्या होगा? हमारी जिम्मेदारियाँ कौन पूरी ...
- चींटी के पंख कब उगते हैं?... जब उसके मरने के दिन नजदीक आते हैं। जब आदमी मरने को होता है तो बहुत जोर से साँस लेता है और चेहरे पर च...
- चीन में न जाने क्या से क्या हो गया?... कभी चीन में बौद्ध धर्म इतना फैला हुआ था कि हिन्दुस्तान से भी अधिक बौद्ध लोग चाइना में रहते थे। वहाँ ...
- जनक ने पूछा कि कोई खराब वस्तु हो और हम यज्ञ न कर पाएँ, तो कैसे हवन करें?... तब याज्ञवल्क्य जी ने कहा—‘‘यज्ञ करना तो आवश्यक है। वह तो करना ही चाहिए। गायत्री और यज्ञ तो हमारी भार...
- जनता का सहयोग कौन जगाएगा?... जनता का सहयोग सरकार जगा नहीं सकती, इसे हम जगाएँगे। जिस तरह पक्षी के दो पंख होते हैं उसी तरह एक पंख र...
- जनता के मन में यदि एक जाग्रति का भाव आ जाए कि हमें अपने प्रति, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाना है तो फिर क्या कुछ नहीं हो सकता?... हर बात के लिए गवर्नमेण्ट से शिकायत करना या और किसी का मुख देखना मुनासिब नहीं है। कुछ काम ऐसे है जिन्...
- जनता को कैसे बहकाया जा सकता है, कैसे पैसा लिया जा सकता है और किस तरीके से उलटी पट्टी पढ़ाई जा सकती है?... ने वह सब कुछ होता रहेगा। यदि जनता समझदार और जागरूक है तो फिर इन चालाकियों की बारीकी को वह समझ जाएगी ...
- जब बच्चा पैदा होता है और पेट में से निकलकर बाहर आता है, तो कितनी पीड़ा होती है?... पुराना युग जा रहा है और नया युग चला आ रहा है। ऐसे समय में दो काम होते हैं—एक निर्माण होता है और दूसर...
- जब बेटे तेरी सारी शक्ति इसी में खर्च हो जाएगी तब फिर तेरा सहस्रार-चक्र कहाँ से जागेगा?... सहस्रार-चक्र में लगने वाली सारी शक्ति इसी में लय कर देंगे, तब फिर वह जागेगा कैसे? सहस्रार को जाग्रत ...
- जब मात्र पेट ही भरना है तो गन्दे तरीके से क्यों, श्रेष्ठ तरीके से क्यों न भरें?... पेट भरने के अलावा जो कार्य कर सकते हैं, उसे क्यों न करें?...
- जब लोगों को खाली उद्देश्य समझाये जाते है कि मरने के बाद हम कौन-से लोक में चले जाते हैं और वह लोक किस तरह के है?... स्वर्ग कहाँ है? स्वर्ग की लम्बाई, चौड़ाई कितनी है? हमको नहीं मालूम। हमको तो जिन्दगी की जानकारी है, ज...
- जब समय बदल जाएगा तब हम तेरे समयदान का क्या करेंगे?... फिर समयदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।...
- जवाहर लाल नेहरू को क्या कमी थी?... वे मोतीलाल नेहरू के बेटे थे, आनन्द भवन में आनन्द एवं मौज का जीवन जी रहे थे। उन्होंने जब महसूस कि या ...
- जहाँ एक-दूसरे के प्रति निष्ठा और विश्वास का क्या कहना?... रामायण में एक प्रसंग आता है, जब लव-कुश ने देखा कि हनुमान जी और लक्ष्मण जी अश्वमेध के घोड़े को लिए चले...
- जापान के गाँधी ने विचार किया कि जब हमें समाज की सेवा करते हुए रोटी, कपड़ा मिल सकता है तो मेरे लिए क्या नुकसान है?... उन्होंने सहर्ष इस कार्य को अपनाया तथा जन-सेवा में लग गये।मित्रो! यह बात मैं विवेकशीलता की कर रहा हूँ...
- जिएँगे तो देखना और नोट करना कि हमारी सफलताएँ कितनी शानदार होती हैं?... क्यों होती हैं? क्योंकि हमने अवतार के साथ में कन्धे से कन्धा मिलाकर हनुमान के तरीके से काम करने का न...
- जिन घरों में स्वयंभू मनु और शतरूपा रानी की परम्पराएँ नहीं हैं, उन घरों में हम कैसे जिएँगे?... उनका कुधान्य खाकर हम कितने दिन जिएँगे? इसलिए देवताओं ने मना कर दिया था और रीछ-बन्दरों के घरों में पै...
- जिन बच्चों ने स्नेह पाया ही नहीं, उनका विकास कैसे होगा?... हम शिकायत करते हैं बच्चे अनुशासनहीन हैं, कहना नहीं मानते, बुजुर्ग की इज्जत नहीं करते और मास्टरों को ...
- जिन लोगों ने अपने आपको बनाया है, उनको यह पूछने की जरूरत नहीं पड़ी कि क्या करेंगे?... उनकी प्रत्येक क्रिया इस लायक बन गई कि उनकी क्रिया ही सब कुछ करा सकने में समर्थ हो गई। उनका व्यक्तित्...
- जिनके लिए वही रोटी खाना, पैसा कमाना, बच्चे पैदा करना, इसके अतिरिक्त और कोई समस्या नहीं है, उन्हें मूढ़ के सिवाय और क्या कहा जाए?... जिनके पास न अकल है, न दूरदृष्टि है और न ही जिन्हें कर्तव्यों का भान है, उनके लिए मैं कुछ नहीं कह सक...
- जिस गाँव में चार सौ घर हैं तो क्या उस गाँव के प्रत्येक घर से एक-एक व्यक्ति एक-एक घण्टा समय समाज, देश और संस्कृति के लिए नहीं निकाल सकते?... चार सौ घण्टे का मतलब साठ आदमियों की पूरी मेहनत। साठ आदमी एक साथ मिलकर बाग लगाने के लिए, सफाई के लिए,...
- जिस दिन से गाँधी जी ने नमक बनाया, मेरे अन्दर हिम्मत आ गयी कि हम भी गाँधी जी के साथ नमक बनाएँगे, उनके सत्याग्रह में भाग लेंगे और न जाने क्या-क्या करेंगे?... इस बात को जानकर हमारे घर के हर आदमी नाराज हो गये। तब हमारी १६ वर्ष की उम्र थी। हमें एक कमरे में बन्द...
- जिस प्रकार के बन्धन जानवर बर्दाश्त नहीं कर पाते, वे बन्धन इनसान पर लगा दिये जाएँगे तो वह कैसे बर्दाश्त करेगा?... जानवर मुँह खोलकर सड़क पर चल सकते हैं, परन्तु यह क्या तुक है कि हमारी पत्नी मुँह नहीं खोल सकती। हमारे ...
- जिसका साम्राज्य सात समुद्रों तक फैला था, उसका शासन कैसे समाप्त हो गया तथा भारत कैसे स्वतन्त्र हो गया?... यह प्रश्न सोचने-विचारने योग्य है। इसके पीछे भगवान की शक्ति काम करती रही है। चाहे यह काम गाँधी ने किय...
- जीभ पर जो दिमाग हुकूमत करता है, उसे चलायमान करता है, उस पर हुकूमत कर सकते हो?... हमने कहा—हाँ, हम जीभ और दिमाग दोनों पर हुकूमत कर सकते हैं।हमने दिमाग पर नियन्त्रण किया। जिन लोगों को...
- जीभ पर हुकूमत कर सकते हो?... हमने कहा—हाँ! जीभ पर जो दिमाग हुकूमत करता है, उसे चलायमान करता है, उस पर हुकूमत कर सकते हो? हमने कहा...
- जेल जाने का भी समय था, अब वह समय कहाँ है?... अब आपत्तिकालीन समय है यह। युग बदल रहा है। आज का समय देना हीरे के बराबर, मोती के बराबर है। अगर अगली ब...
- जो इसका फायदा उठा लेंगे उनकी, घर-परिवार की सराहना होती रहेगी, समाज में, इतिहास में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा और जो सनक में बैठे रहेंगे, भूल में बैठे रहेंगे वे स्वयं पछताते रहेंगे और बाद में उनकी पीढ़ियाँ पछताती रहेंगी और कहेंगी कि ऐसे शानदार समय में हमारे बाप-दादों ने क्यों मुनासिब कदम नहीं उठाए?... यह कैसा शानदार समय है। चलिए मैं इसके कुछ आपको उदाहरण देना चाहता हूँ, जिससे कि आप समझ सकें कि यह कैसा...
- ठीक समय पर अगर किसी ठीक काम के लिए अपने बच्चे तक देने पड़ें तो हर्ज की क्या बात है?... ऐसा राजा दशरथ ने गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से किया, फिर गुरु निहाल हो गये, दशरथ जी निहाल हो गये, विश्वामि...
- ठीक है, परिणाम नहीं मिला तो हम क्या कर सकते हैं?... बहुत-सी बातें परिस्थितियों पर निर्भर रहती हैं। परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल नहीं रहीं तो हम क्या कर सकत...
- तब आपको किस आधार पर व्यक्ति का निर्माण, समाज का निर्माण, राष्ट्र का निर्माण और आज की उलझी हुई समस्याओं को हल करने के लिए क्या करना होगा?... इसके लिए एक फार्मूला यह है कि व्यक्ति को अपने अन्तःकरण में प्रवेश करना पड़ेगा। समस्याओं के हल बाहर नह...
- तब परिणाम क्या होता है?... वही जो आग-लकड़ी का होता है। दो कौड़ी की नाचीज लकड़ी जब आग के साथ मिल जाती है तो उसकी कीमत आग के बराबर ह...
- तब बेटे, इससे क्या हो जाएगा?... गन्दे नाले में गंगाजल डाल देगा तो क्या सारा का सारा गन्दा नाला शुद्ध हो जाएगा? गन्दा नाला शुद्ध नहीं...
- तब हम क्या करेंगे?... तब हम सिर्फ यही करेंगे कि जहाँ हमारा स्वार्थ प्रेरित करेगा, जो कोई आदमी जीप में बैठाकर ले जाएगा, जो ...
- तबाही क्यों आएगी?... क्योंकि अवांछनीय तत्त्व जहाँ कहीं भी हैं, वे सब घटेंगे। घटने के लिए विनाश होगा और विकास के लिए नए नि...
- तीसरी वाली आँख क्या होती है?... वह जो हम त्राटक से जाग्रत कराते हैं। तीसरी आँख खोलने के लिए प्रकाश का ध्यान कराते हैं। तीसरी आँख कहत...
- तुम तो दुकान खोलकर भी अपना गुजारा कर लोगे, पर हम कैसे गुजारा कर लेंगे?... हमें तो भारत को महाभारत बनाना है। छोटे-से भारत को विशाल भारत के रूप में परिणत करना है। उसमें तुम्हार...
- तू कहता है कि गुरुजी आप हमारे बीबी को अच्छा कर दीजिए और हम आपके शाखा का काम करेंगे?... बेटे! यह तो डॉक्टर एवं मरीज की बात हो गई। डॉक्टर के पास मरीज जाता है, वह दवा देता है तथा मरीज उसके ए...
- तो आग कैसे हो गईं आप?... हमने एक ही हिम्मत की है कि अपने आपको आग के साथ घुला दिया है, मिला दिया है। अगर आप भी ऐसा कर सकते हों...
- तो कण्व ऋषि के पास कितना पैसा था?... नहीं भाईसाहब, कुछ नहीं था। शकुन्तला को सुसंस्कार का वातावरण मिला था, जिसके द्वारा उसने अपने बच्चे को...
- तो क्या महत्त्वाकाँक्षाएँ खत्म कर देने से आदमी का वर्चस् खत्म हो जाएगा?... नहीं बेटे, उसके प्वाइंट बढ़ा दें, दिशाएँ बदल दें। जीवन को बड़प्पन की अपेक्षा महानता की दिशा में मोड़ दे...
- तो क्या राजनीति की कोई सेवा नहीं की हनुमान जी ने?... भला हनुमान जी से बढ़कर राजनीति की सेवा और कौन कर सकता था? रावण को उखाड़ करके विभीषण की स्थापना करने की...
- तो क्या रामचन्द्र जी रावण को मार सकते थे?... बिल्कुल मार सकते थे। रामचन्द्र जी में इतनी शक्ति थी कि रावण सहित एक-एक राक्षस को मार डालते और अकेले ...
- तो क्या हनुमान जी कमजोर थे?... न होते तब बालि के साथ लड़ाई की होती और अपने बॉस की बीवी को नहीं छिनने दिया होता और अपनी जायदाद नहीं छ...
- तो फिर कैसे हवन करेंगे?... ’’ तो याज्ञवल्क्य जी ने कहा—‘‘आप लकड़ियों की समिधाओं से भी हवन कर सकते हैं।’’ कहने का आशय है कि कम से...
- तो फिर क्या करते हैं?... वे ऐसी भावनाएँ और हूक को लेकर आते हैं जो ऊँचे स्तर के लोगों में, भावनाशीलों में दिखाई देती है।आप क्य...
- तो भगवान को किस तरीके से पुकारा?... भगवान को पुकारने के लिए अनेकों उपाय हैं। कहीं कीर्तन किये जाते हैं, कहीं यज्ञ किये जाते हैं, कहीं अन...
- तो मैं आपसे एक निवेदन करके जाना चाहता हूँ कि चाहे आप अस्पताल खुलवाना, मेडिकल साइंस पर रिसर्च कराना, पर ये मत भूलना कि आदमी के स्वास्थ्य का मूलभूत आधार संयम ही होता है?... जिसको हमने कई बार आध्यात्मिकता कहा है और पुराने लोग पुकारते थे—संयमशीलता! संयमशीलता लोगों को सिखायी ...
- तो हम क्या करें गुरुजी?... बेटे, आप वही करें जो हम अपने गुरु का करते हैं। आपके लिए सबसे बेहतरीन, सबसे अच्छा, सबसे नफे का सौदा य...
- दक्षिण भारत का मुख्यमंत्री कौन है जरा बताइये?... अगर वह मंत्री आए और आपके ऊपर प्रभाव डाले तो क्या कोई प्रभाव पड़ सकता है? नहीं, कोई प्रभाव नहीं पड़ सकत...
- दुनिया अपने साथ न चलने वाले का कैसा मजाक उड़ाती है, कैसा बेवकूफ बनाती है, उपहास करती है, यह भी मैंने देखा, परन्तु मैं क्या कर सकता था?... कुटुम्बियों से लोहा लिया, मुहल्ले वालों से लिया, मंच के साथ लोहा लिया, इन्द्रियों के साथ लोहा लिया, ...
- दुनिया बदल रही है—सुधर रही है, ऐसे में हम कैसे बच सकते हैं?... हमको महत्त्वाकाँक्षाएँ नहीं, महानताएँ जगानी चाहिए। आज आदमी के भीतर महत्त्वाकाँक्षाएँ भड़क गयी हैं। हर...
- दूसरा क्या कारण था?... उसके अन्दर करुणा थी। करुणा किसे कहते हैं? कुण्डलिनी को कहते हैं। कुण्डलिनी एक ऐसी चीज है, जो आदमी के...
- दूसरी ओर क्या होता अगर वह शादी कर लेता तो?... बच्चे हो जाते और कुछ भी नहीं होता। ताऊ जी, पापा जी को सब नोंचते कि लाओ रोटी, लाओ कपड़ा। ताऊ जी का कचू...
- देखते नहीं गुण्डागर्दी कैसे बढ़ती चली जाती है, दूसरे अपराध कैसे बढ़ते चले जाते हैं?... इस तरह के राहत-कार्यों में आपकी हर जगह जरूरत है। आपको निर्माण-कार्यों के लिए एक नहीं लाखों कार्य करन...
- देव किसे कहते हैं?... शराफत को कहते हैं, भलमनसाहत को कहते हैं। देवता कहाँ रहते हैं? आसमान में रहते हैं। नहीं देवता एक सभ्य...
- देव-दक्षिणा हर घर के यज्ञ में भी होनी चाहिए और क्या-क्या होना चाहिए?... कुछ खास बातें हैं जो जरूर करनी चाहिए। प्रथम तो यह कि प्रातःकाल सुर्योदय के समय पर भगवान का स्मरण करन...
- देवता कहाँ रहते हैं?... आसमान में रहते हैं। नहीं देवता एक सभ्यता का नाम है, संस्कृति का नाम है। इसी तरह दैत्य सभ्यता का नाम ...
- दो कार्यक्रम समझ में आ गए न आपके?... पहला काम तो यह कि आपको प्रज्ञा प्रशिक्षण आयोजन के लिए सबसे ज्यादा जोर देना है। अपने यहाँ झोला पुस्तक...
- दोनों एक-दूसरे को उपहार देने के इच्छुक थे, पर साधन कैसे जुटाएँ?... पति के दिमाग में बहुत दिनों से ख्वाब था कि अपनी स्त्री के सुनहरे रेशम जैसे बालों के लिए सोने की क्लि...
- धन के साथ में हमने अपनी अकल, बुद्धि, चिन्तन, वाणी, लेखनी सभी कुछ केवल भगवान के लिए लगाया, तो आपने देखा न कि हमारी बुद्धि, लेखनी का कितना विकास हुआ?... यह सारा भगवान को सौंपने के कारण हुआ है। हमने तो एक साधारण परिवार में जन्म लिया, परन्तु भगवान ने हमें...
- धरती बिना आबादी के रह गई है और क्या बुरे दिन नजदीक मालूम पड़ते हैं?... सांख्यिकी के जानकारों से जब हम पूछते हैं कि क्या ख्याल है तो वे भी लगभग यही बात कहते हैं कि अगले दिन...
- धर्म अगर हमारे पास होता, भक्ति हमारे पास होती तो अविद्या और अशिक्षा क्यों आती?... आपके लिए नहीं कहता, मैं अपने लिए कहता हूँ। आज हमारी संख्या-हम पण्डितों की, सन्तों की, बाबाजियों की संख...
- न चला जाता है, न दिखाई देता है—ऐसे व्यक्ति का हम क्या करेंगे?... मुस्तैद आदमी वहाँ से युग- शिल्पी शिविर में भेजने के लिए आप लोगों से प्रार्थना की है और आप लोगों से य...
- नशेबाजी और दहेज जैसी प्रथाओं में कितना पैसा बर्बाद होता है?... फैशन-परस्ती में लोग कितना पैसा लगा देते हैं? ये ऐसी मुसीबतें हैं जिनसे हमें स्वयं निकलना पड़ेगा और जन...
- नहीं राई भर बालू से क्या होता है?... उन्होंने सिद्धान्तों के प्रति उसकी हिम्मत के लिए, निष्ठा के लिए, उसकी जुर्रत के लिए उसको प्यार किया।...
- नहीं, तो फिर कैसे हो गया?... ऊँचे उद्देश्यों के लिए भगवान के कन्धे से कन्धा मिलाकर वे चल पड़े थे और निहाल हो गए। इससे बड़ी कोई तपस्...
- नहीं, यह बिल्कुल ठण्डी नहीं हुई?... विवाद एक जगह ठण्डा नहीं होने पाता कि कहीं और तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। यह साम्प्रदायिक उपद्रव कृष्...
- नेतृत्व कौन करता है?... मैं नहीं जानता। श्रेय किसे मिलता है? यह मैं नहीं जानता। एक हवा आती है, जो एक आदमी को अवतार बनने का श...
- पर पिता का मन सन्देह से भरा हुआ पड़ा है कि हमारे पाँच बच्चे हैं, लेकिन बड़े होने पर न जाने क्या होगा?... हमारा सामाजिक जीवन, राष्ट्रीय जीवन, हमारा आर्थिक जीवन कितना जटिल और कितना जकड़ा हुआ बनता चला जा रहा ह...
- पर बताइये कौन-से कानून से कौन-सा पाप रुक गया?... भ्रष्टाचार रुक गया? रिश्वतखोरी रुक गयी? मिलावट रुक गया। बताइये एक भी पाप रुक गया हो तो जबकि सारे के ...
- परन्तु जहाँ से हमें मिला है वह हमारा सौभाग्य है, जिससे हम कहाँ से कहाँ पहुँच गये?... यह हमारे गुरु का शक्तिपात है। कुण्डलिनी क्या होती है? जिसे हम करुणा मिश्रित विवेकशीलता कहते हैं। करु...
- परन्तु हमारा सौभाग्य है कि हमारे गुरु ने हमें कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया?... हम आज महामानव हैं, हम बता नहीं सकते कि हम कौन हैं? परन्तु जहाँ से हमें मिला है वह हमारा सौभाग्य है, ...
- परन्तु हमारे व्यवहार में यह कहाँ आ रहा है?... आज भी स्त्री तो हमारे गले का पत्थर बनी हुई है, वह भार बनी हुई है। आज वह हमारे लिए सहायक नहीं है। उसक...
- परशुरामजी नाराज हुए थे कि हमारे गुरुजी का धनुष किसने तोड़ दिया?... सीताजी के साथ रामचन्द्रजी का विवाह हुआ। लंका का विनाश करने में, सारी असुरता का निवारण करने में रामचन...
- परिवर्तन की इस सन्धिवेला में बिगाड़ क्या होने वाले हैं?... बिगाड़ वे होने वाले हैं जिनके बारे में बाइबिल में कहा गया है—‘‘सेवन टाइम आयेगा और दुनिया तबाह हो जाएग...
- परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल नहीं रहीं तो हम क्या कर सकते हैं?... हमने अपना कर्तव्य पूरा किया, हमारे लिए इतना बहुत है। इस दृष्टि से अगर आप जिएँगे तो आपकी खुशी को कोई ...
- पहला काम हमारा यही है कि नालन्दा विश्वविद्यालय, तक्षशिला विश्वविद्यालय के तरीके से एक लाख प्रचारक हम तैयार करें और इन प्रचारकों से हम प्रत्येक गाँव में इस तरह का वातावरण बनाएँ, जिससे हर आदमी को मालूम पड़े कि आज हमारे कर्तव्य क्या हैं?... आज हमारी जिम्मेदारी क्या है? और आज हमको करना क्या चाहिए? इसके लिए आदमी को उठा करके, झकझोर करके, चैतन...
- पहले आदमी सूखी रोटी खाकर के सुख-चैन की साँस लिया करता था और विश्वास दिलाया करता था कि हम सुखी लोगों में से हैं, पर अब हमारा दाम्पत्य जीवन न जाने कैसा है?... हमारे गार्हस्थ्य जीवन में न जाने कैसी लग गई आग? हमारे बच्चे अभिभावकों के प्रति जैसे निष्ठावान होने च...
- पहले वहाँ अराजक तत्त्व, अवांछनीय तत्त्व कहाँ रहते थे, पर देखिए सारी खुराफातें कहाँ से जन्म ले रही हैं?... आपको बदलता हुआ जमाना दिखाई नहीं पड़ता, आजकल बहुत हेर-फेर हो रहा है। इस अकल ने दुनिया को हैरान कर दिय...
- पाँच आदमी बारात के आ जाएँ; वे हमारे मेहमान की तरह खाना खा जाएँगे तो हमारा क्या बिगड़ जाएगा?... इसलिए इस तरह के विवाहों का, मेरी समझ से ये ज्यादा है कि इस रिवाज को फैलाने के लिए आप स्थानीय स्तर मे...
- पूजा की थी, अनुष्ठान किया था, जप-तप किया था?... नहीं, तो फिर कैसे हो गया? ऊँचे उद्देश्यों के लिए भगवान के कन्धे से कन्धा मिलाकर वे चल पड़े थे और निहा...
- पेट भरने के अलावा जो कार्य कर सकते हैं, उसे क्यों न करें?... जब यह प्रश्न आपके सामने ज्वलन्त रूप में आ खड़ा होगा, तब यह आवश्यकता आपको अनुभव होगी कि हम अपनी मनःस्थ...
- प्रत्येक आदमी को अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति कैसे रहना चाहिए?... अच्छा समाज बनाने के लिए गुण्डागर्दी तथा अन्य दूसरी बुराइयों के विरुद्ध कैसे खड़े होना चाहिए? यह शिक्ष...
- पड़ोस वाले देशों के नागरिक बोले—फ्रान्स के ये नागरिक जो अमीर कहलाते थे, पेरिस दुनिया का स्वर्ग कहा जाता था किसी जमाने में, आज उस पेरिस के नागरिक अपनी देश की रक्षा करने के लिए पूरी हिम्मत और जोश से—ताकत से क्यों नहीं लड़े?... जबकि रूस वालों ने, ब्रिटेनवासियों ने एक-एक इंच की लड़ाई लड़ी। ऐसा क्या कारण हो सकता है, जो उनकी पराजय ...
- फिर आपको इस तरह के मौके क्यों मिलते चले जा रहे हैं?... क्या वजह है इसकी? इसकी एक ही वजह है कि हमने यह पहचान लिया है कि भगवान का अवतार होता हुआ चला आ रहा है...
- फिर इस साल का पूरा समय कैसे कटेगा?... हम आपको इस बात की ठीक जानकारी दे करके डराना नहीं चाहते, हैरान नहीं करना चाहते, पर यह जरूर कहेंगे कि ...
- फिर कौन आने वाला है?... अब देव का युग, सहृदयता का युग, सादगी, सज्जनता और सद्भावना का युग आने वाला है। ‘जाइंट’ जो जाने वाला ह...
- फिर क्या काम करें?... ढेरों के ढेरों काम करने के लिए पड़े हैं। आप जहाँ रहते हैं, वहाँ पेट भरने के लिए काम करने के अतिरिक्त ...
- फिर क्या हुआ उनका?... वे बेचारे वैसे के वैसे जानवर के जानवर ही रह गये, पर जो अपनी जान हथेली पर रखकर उसमें शामिल हो गये, वे...
- फिर देखिये आप कितने मजे में और कितने खुशहाल रहते हैं?... कितने प्रसन्नचित्त रहते हैं? कितना आपको सन्तोष मिलता है, सम्मान मिलता है, कितना आपको भगवान का अनुग्र...
- फिर बाग किस तरीके से बनेगा?... यह काम केवल धर्मतंत्र कर सकता है। असली शक्ति-क्षमता धर्मतंत्र के हाथों में है। राजतंत्र केवल कानून ब...
- फिर भी हमने स्त्रियों को इससे वंचित क्यों किया?... यह एक मूल प्रश्न हम सबके सामने हैं। हम पूछते हैं कि आप क्या लड़की का कन्यादान करेंगे? क्यों? यह कोई ब...
- फिर स्त्री और पुरुष में भेद क्यों?... शरीर के दोनों अंगों की भाँति वे समान हैं। इसलिए दोनों को साथ-साथ पाँव से पाँव मिलाकर, कन्धे से कंधा म...
- फैशन-परस्ती में लोग कितना पैसा लगा देते हैं?... ये ऐसी मुसीबतें हैं जिनसे हमें स्वयं निकलना पड़ेगा और जनता को निकालना पड़ेगा। सरकार मदद करेगी, ठीक है।...
- बच्चों को आगे बढ़ाने तथा पढ़ाने के लिए पैसों की जरूर पड़ती है?... नहीं, पैसों की नहीं, सुसंस्कारों की आवश्यकता पड़ती है, जिसका नाम भावना है। अगर सुसंस्कार हो, तो कोई म...
- बताइए क्या है?... बेटे, एक युग वह है जिस समय हम एक पेट में बैठे हुए थे। पेट में से बैठकर के जब हमारा परिवर्तन हुआ, तो ...
- बस उस गरीब को और क्या चाहिए?... मित्रो! क्या होना चाहिए? बालकों को गुब्बारे के अलावा टॉफी और चाकलेट के अलावा कुछ नहीं मालूम। उनसे कु...
- बहुत खर्चीला है, बहुत पण्डित आयेंगे, बहुत दक्षिणा लेंगे?... नहीं, कोई दक्षिणा नहीं लेगा। आप सब मिल- जुलकर श्लोक बोलेंगे। मिल- जुल करके बाँसों का पण्डाल बना लेंग...
- बहुत-से आदमी ऐसे हो सकते हैं जिनके पास शिक्षा न हों और ऐसे आदमी शिक्षित हो भी सकते हैं, जिनकी अकल का तो कहना ही क्या?... इसके बारे में कल भी कह चुका हूँ कि मालाबार हिल के ऊपर एक वकील रहता था, जिसने हिन्दुस्तान और पाकिस्ता...
- बाकी आदमी इस कोशिश में लगे रहे कि हम दूसरों से क्या कराएँ और स्वयं क्या करें?... जबकि होना यह चाहिए था कि जिस तरीके से अर्जुन देव ने न कुछ किया था और न कराया था, केवल अपने आपको बना ...
- बादलों ने पूछा—क्या आपके पास अच्छी वाली जमीन है?... उसने कहा—नहीं हमारे पास तो केवल चट्टानों से भरी जमीन है। बादलों ने कहा—तब तो यह बेकार है। इसमें तो क...
- बार-बार जो लोग हमसे पूछते हैं कि आप राजनीति में क्यों नहीं जाते?... उनसे हमारा यही कहना है कि किसी जमाने में हम राजनीति में थे। उस जमाने में राजनीति में बहुत बड़ी जिम्मे...
- बेटे हमें ही यह सोचना होगा कि हमारी भी कोई जिम्मेदारी है या नहीं?... हम तो कपड़े और चार रोटी के टुकड़े फेंककर निश्चिन्त हो जाते हैं। आप बी.ए. पास हैं तथा आपकी पत्नी मैट्रि...
- ब्रह्मवर्चस क्या है?... बेटे! ब्रह्मवर्चस एक फिलॉसफी है, एक दर्शन है, एक सिद्धान्त है। आदमी के भीतर कुछ सोया हुआ है। आदमी के ...
- ब्रह्मवर्चस में क्या गतिविधियाँ चलती हैं?... उन्हें देखकर के आना।...
- ब्लडप्रेशर, हार्टडिसीज, डायविटिज न जाने क्या-क्या बीमारियाँ घेरे रहती हैं?... खाने की चीजों का ठिकाना नहीं। मेरा एक मित्र है, वहाँ इन्जीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाता है, कहता है—हम पान...
- बढ़ता शोर-कोलाहल आदमी के मस्तिष्क को पागल बनाने के लिए काफी है, जिस तरह से कुपोषण के कारण छोटे बच्चे मौत के मुँह में चले जाते हैं, उसी तरीके से इन कुप्रभावों से आदमी की शारीरिक और मानसिक सेहत अब खराब होने वाली है?... मौसम के जानकारों का कहना है कि अगले दिन हमारे लिए मुसीबत के होंगे, क्योंकि तापमान इस कदर बढ़ता जा रहा...
- भगवान न करे कहीं आपको लड़की बना दिया जाए और आपकी बहिन को लड़का बना दिया जाए तथा घर में भैंस का दूध आये और आपको न दिया जाए तो आपकी क्या मनःस्थिति होगी?... जरा सोचने का प्रयास करें कि अगर आपकी मम्मी यह कहें कि लड़कियाँ दूध नहीं पीती हैं, अगर वे दूध पी लेंगी...
- भगवान बुद्ध ने जो धर्म- प्रवर्तन चलाया था, सो अकेले ही चला लिया था क्या?... नहीं! अकेले नहीं, बौद्ध- भिक्षु सबने मिलकर चलाया था। गाँधीजी ने सत्याग्रह किया था और स्वराज्य को यहा...
- भगवान बुद्ध से जब पूछा गया कि क्या आप स्वर्ग जाएँगे?... उन्होंने कहा नहीं, मुझे स्वर्ग जाने की जरूरत नहीं है। स्वर्ग में जो आनन्द है, उससे हजार गुना आनन्द व...
- भगवान राम को हम श्रेय देते हैं, परन्तु क्या अकेले राम की बात थी?... केवट, भील से लेकर गिलहरी तक, गीध से लेकर रीछ, वानरों तक—सबके भीतर एक उमंग थी कि हम सृष्टि का सन्तुलन ...
- भगवान् बुद्ध का जन्मस्थान था तिब्बत जहाँ से पैदा होने के बाद बुद्धावतार न जाने कहाँ से कहाँ चला गया?... चीन में न जाने क्या से क्या हो गया? कभी चीन में बौद्ध धर्म इतना फैला हुआ था कि हिन्दुस्तान से भी अधि...
- भगीरथ ने तपस्या की तो क्या हुआ?... गंगा स्वर्गलोक में रहती थीं। उनकी तपश्चर्या से जमीन पर आयीं। गंगा जब जमीन पर बहीं तो तमाम जगह हरियाल...
- भला हनुमान जी से बढ़कर राजनीति की सेवा और कौन कर सकता था?... रावण को उखाड़ करके विभीषण की स्थापना करने की भूमिका किसने निभाई? हनुमान ने, नल-नील, अंगद और जामवन्त न...
- भीख माँगने वालों को कहाँ किसने कितना दिया है?... लोग थोड़ा-सा ही दे पाते हैं। आप हमारी दुकान में साझेदार-हिस्सेदार क्यों नहीं बन जाते? अन्धे और पंगे क...
- भ्रष्टाचार रुक गया?... रिश्वतखोरी रुक गयी? मिलावट रुक गया। बताइये एक भी पाप रुक गया हो तो जबकि सारे के सारे कानून बने हुए ह...
- मगर वह समय कौन-सा होता है?... वह असामान्य समय होता है जब भगवान पुकारता है और सामान्य समय वह होता है, जब मनुष्य भगवान को पुकारता है...
- मछलियों ने कहा कि आपके घर में तालाब या नदी है क्या?... नहीं तो हम नहीं जा सकते हैं, हमारा गुजारा बिना पानी के नहीं हो सकता है। इसी तरह एक दिन स्वाति नक्षत्...
- मजबूरी में आदमी न जाने क्या-क्या कर देता है?... बेटे, आज ये परिस्थितियाँ हमारे सामने अस्वाभाविक हैं। इनका समापन होने की, सुधार होने की आवश्यकता है। ...
- मदद नहीं करेंगे?... जाग्रत आत्माओं को आपत्तिकाल ने पुकारा है कि आप राहत-कार्यों के लिए मदद कीजिए। राहत-कार्य केवल बाढ़ और...
- मनुष्य का आध्यात्मिक विकास इस बात में नहीं कि उसके पास धन कितना है, ऐय्याशी और विलासिता के साधन कितने हैं?... ये मनुष्य की महानताएँ या प्रगति की निशानियाँ आदमी के अन्दर की हिम्मत और जीवट है, जिसके आधार पर आदमी ...
- मनुष्य यह कैसे हो गया?... यह उसकी बुद्धि का चमत्कार, विचारों का चमत्कार का प्रतिफल है।कैसा वह सौभाग्य का दिन रहा होगा, जब अन्य...
- महान किसे कहते हैं?... जो सिद्धान्तों के लिए काम करते हैं, आदर्शों के लिए काम करते हैं। इस दिशा में महत्त्वाकाँक्षाओं को जि...
- माँ ने पूछा कि मैं क्या करूँ?... माँ! शंकर भगवान कहते हैं कि अगर तू हमें शंकर भगवान को सौंप दे तो हमें छोड़ सकता है। माँ चिल्लायीं कि ...
- मारकाट से भी कर रहे हैं, बीमारियाँ भी कर रही हैं, बाढ़ें भी कर रही हैं और जाने कौन-कौन कर रहा है?... जहाँ कहीं भी देखिए हर जगह सूखे के साथ गीला भी जल रहा है। सब जगह तबाही ही तबाही मची है।बेटे! यह आपत्त...
- मित्रों ने कहा—आप सिनेमा नहीं जाते?... उसने कहा—हमारी बीबी बीमार है और मैं उसकी सेवा वफादारी से करता हूँ। इससे अधिक सन्तोष कहाँ मिल सकता है...
- मुझे क्या अधिकार मिलने से—राज्य मिलने से?... ’’ लेकिन भगवान ने कहा—नहीं हमको आवश्यकता है। तुम्हें आवश्यकता नहीं है तो न सही। तुम तो दुकान खोलकर भ...
- मुन्नी के लिये क्या विवाह छोटी उम्र में सम्भव है?... कदापि नहीं। परन्तु वही मुन्नी जब बड़ी हो जाती है तो विवाह की बात होती है तो वह चुपचाप उठकर चली जाती ह...
- मुहूर्त की बात मत सोचिए?... आप कभी भी ले आइये। यहाँ हमेशा ब्याह हो जाता है, क्योंकि यहाँ शुभ वातावरण है, शुभ भूमि है, शुभ एवं पु...
- मेरा अन्तःकरण बोल उठा कि जब तुम्हें पेट ही भरना है तो इसके लिये इतना बेचैन क्यों?... इससे अच्छा तो यह है कि समाज की सेवा की जाए। मच्छर, मक्खी को भी जब भोजन मिल जाता है तो हमें क्यों नही...
- मेरी कर्तव्यपरायणता देखकर जब उसकी आँखों में से आँसू की बूँदें ढुलक पड़ती हैं तो मैं तो ये समझता हूँ कि ये हीरे-मोती से ज्यादा बड़े उपहार हैं और जब उसकी हालत देखकर मेरी आँखों से मुहब्बत के आँसू छलक उठते हैं, तो वह समझती है कि स्वर्ग उस पर न्यौछावर हो गया?... साथियो! पारिवारिक जीवन की सुख-शान्ति शक्ल-सुरत पर नहीं टिकी है, ये तो आदमी की सीरत पर टिकी हुई है। म...
- मैं आपको कौन-कौन सी घटनाएँ बताऊँ?... जिन्होंने सही समय पर सही काम किया। एक थे रामकृष्ण परमहंस। वे एक लड़के के पास गये। वह उनके यहाँ आया कर...
- मैं उनमें से हर एक से कहता हूँ कि यह मत पूछिए, बल्कि यह पूछिए कि क्या बनें?... अगर आप कुछ बन जाते हैं तो करने से भी ज्यादा कीमती है वह। फिर जो कुछ भी आप कर रहे होंंगे, वह सब सही ह...
- मैं क्या कह रहा था?... मैं यही कह रहा था कि आज भी वह बादल जो मेरे ऊपर बरसा एवं हमारा शक्तिपात कर दिया, हमारी कुण्डलिनी जाग्...
- मैं तो एक बूढ़ा आदमी हूँ, जो न जाने कब किनारे लग जाए?... पर मैं आपको एक छोटा-सा फार्मूला बताकर जा रहा हूँ। इसे आपको याद रखना चाहिए कि विश्व की हर समस्या का स...
- मोहल्ले में फलाने का इतना बड़ा ब्याह हुआ था, आपको क्यों नहीं करना चाहिए?......
- यज्ञ की वस्तुएँ कम किये जाने में कोई बुराई है?... नहीं, कोई बुराई नहीं है। यहाँ याज्ञवल्क्य-जनक का संवाद कुछ ऐसा ही है। जनक ने पूछा कि कोई खराब वस्तु ...
- यज्ञ के सम्पन्न होने पर—वर्षा न होने पर जनता क्या कहेगी आपको?... आपका उपहास होगा और यज्ञ का अपमान होगा, हमारा अपमान—जिन्होंने स्कीम बनायी है। इसलिए यज्ञों को तो हर ए...
- यदि इस बात को वह अपने भाई से, बाप से कह दे तो, आप उसे भला-बुरा कहते हैं कि तूने हमारी शिकायत क्यों की?... बेटे! बात-बात पर हम यह कहते हैं कि हम मर्द हैं और तू औरत है। इसलिए हमारी बात को तुझे अपने भाई से नही...
- यदि यह राष्ट्र के निर्माता का काम करें, आध्यात्मिकता का काम करें तो यह अपने देश को न जाने कहाँ से कहाँ ले जा सकते हैं?... आध्यात्मिकता के इस सूत्र को मैं सेवा-सहायता कहता हूँ, कर्तव्यपरायणता कहता हूँ। हमारे जीवन में यदि यह...
- यदि हम उस धर्म के मूल स्वरूप को लेकर हर गाँव में चले जाएँ तो क्या हम लोग देश की समस्या को हल नहीं कर सकते?... जब अकेले एक स्वामी केशवानन्द साढ़े तीन सौ गाँवों की अशिक्षा की समस्या को हल कर सकते थे तो हमारी संख्य...
- यह कहाँ से आ गया?... हमने जो बोया है, उसे काटा है। धन के साथ में हमने अपनी अकल, बुद्धि, चिन्तन, वाणी, लेखनी सभी कुछ केवल...
- यह कहाँ से आएगा?... अतः जेवर के लिए वह दहेज माँगता है, तो क्या बुरा करता है? दहेज को बन्द करने की यदि बात करनी चाहिए, तो...
- यह काम होगा?... हाँ बेटे, होगा। अभी भी हो रहा है। मारकाट से भी कर रहे हैं, बीमारियाँ भी कर रही हैं, बाढ़ें भी कर रही ...
- यह कैसी विडम्बना है हमारे समाज की?... इतना ही नहीं लड़के की शादी होती है तो पैसा लिया जाता है और जब लड़की की शादी होती है तो समाज के लोग यह ...
- यह कौन कहता था?... अवतार कहता था। अवतार, शरीरधारी को—व्यक्ति को नहीं कहते। अवतार एक उमंग को कहते हैं, एक तरंग को कहते ह...
- यह कौन बदल रहा है?... भगवान् बदल रहा है। भगवान के अवतार जब कभी भी दुनियाँ में हुए हैं, तब भक्तजनों को अपना सौभाग्य चमकाने ...
- यह कौन होता है?... केवल अपनी ही चिन्ता करने वाले को दैत्य कहते हैं। दैत्य मनोवृत्ति के रूप में भी आता है और व्यक्ति के ...
- यह क्या कह रहे हैं?... आपत्तिकाल की बात कह रहे हैं? आपत्तिकाल की कीमत जो समझते हैं, उनको यह भी ध्यान है कि आपत्तिकाल के लिए...
- यह क्या चीज थी?... भावना थी। किसने दी? हमारे गुरुदेव ने दी। इसको मैं वसन्त कहता हूँ। जब से होश सँभाला तब से अब तक ५५ वस...
- यह क्या था?... धर्म के चक्र को प्रवर्तित कर देना, धर्म के चक्र को घुमा देना। भगवान बुद्ध ने इसका शुभारम्भ किया और सम...
- यह क्या हुआ?... पारस को छू जाना हुआ। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं पारस को छू गया। मैं कौन? लोहा। वसन्त मेरे जीवन में आ ...
- यह क्या है?... उज्ज्वल भविष्य की सम्भावनाएँ हैं—शिलान्यास के रूप में, अंकुर पैदा होने के रूप में, बच्चा पैदा होने क...
- यह क्या है?... मित्रो! यह अनीति है, भ्रष्टाचार और अन्याय है, दुष्टता है, अत्याचार है। जिस दिन ये चीजें समाज का अंग ...
- यह क्या है?... मित्रो! यह है चेतना जो हर चीज में काम करती है।प्राणियों में भी यही बात है। वसन्त से होली तक के ४० दिन...
- यह क्या है?... आँखों का फर्क है जो आपको दिखाई नहीं देता कि क्या हो रहा है? गूलर के फूल के बीच में बन्द रहने वाले भि...
- यह क्या होता है?... जो मनुष्य अपनी जिन्दगी एवं जिन्दगी की कमाई को लोकमंगल में अर्पित कर देता है, वह नरमेध यज्ञ कर लेता ह...
- यह तो स्वयं ही समझना है कि हमें क्या करना चाहिए, क्या खाना चाहिए और कैसे रहना चाहिए?... अगर यह बातें समझ में आ जाएँगी तब हमारे स्वास्थ्य की समस्या का समाधान हो जाएगा। जनता के मन में यदि एक...
- यह देखकर आना कि जो आदमी कई हजार रुपया महीना कमाते थे, उन्होंने नौकरी को ठोकर मार दी और औसत भारतीय स्तर का कैसा ब्राह्मणोचित जीवनयापन कर रहे हैं?... साधू- बाबाजी तो ऐसे होते हैं, जो कभी भीख माँग लेते हैं, कभी यह कहकर लेते हैं, कभी वह कहकर लेते हैं प...
- यह सारे कठिन एवं असम्भव कार्य वे कैसे कर पाए?... यह सभी कार्य केवल भगवान को समर्पण करने के कारण ही वे कर पाये अन्यथा किसी भी हालत में एड़ी-चोटी एक करन...
- यह हुआ पहला काम?... दूसरा काम? दूसरा काम हमने यह तय किया है कि एक लाख यज्ञ होने चाहिए। लाख? हाँ, लाख होने चाहिए। कैसे हो...
- यहाँ हमारे शान्तिकुञ्ज में आप आये होंगे तो आपने देखा होगा कि हमने जड़ी- बूटियों का कितना बड़ा उद्यान लगाया हुआ है और इस उद्यान में से कितने आदमी फायदा उठाते हैं?... आप भी घरेलू जड़ी- बूटी पैदा करके लोगों को दे सकते हैं, इलाज कर सकते हैं। चिकित्सक बनकर लोगों की बीमार...
- यही है हमारे लोगों को जवाब, जो हमारे इतने बड़े संगठन और कार्यक्रमों की स्थिति को देखकर बराबर कहते रहते हैं कि आप अपने आदमी चुनाव में खड़े क्यों नहीं करते?... आप राजनीति में क्यों नहीं आते? हम बार-बार यही कहते रहते हैं कि राजनीति का क्षेत्र बहुत छोटा, बहुत क...
- युग-सन्धि क्या है?... युग-सन्धि उसे कहते हैं, जबकि दो महत्त्वपूर्ण चीजें आपस में बदलती हैं, जैसे संध्या का समय। एक संध्या ...
- युगसंध्या किसे कहते हैं?... इसका एक नमूना मैं आपको बता सकता हूँ। बताइए क्या है? बेटे, एक युग वह है जिस समय हम एक पेट में बैठे हु...
- युगसन्धि के बारे में कई तरह के विचार हैं, कितनी ही तरह की मान्यताएँ हैं?... उसमें एक यह कि एक पक्ष नष्ट होने वाला है और एक पक्ष जीवित होने वाला है। ऐसे समय को ‘प्रसव पीड़ा’ कहते...
- ये कैसे सम्भव हुआ?... यह इसलिए कि ठीक समय पर, ठीक वस्तु का, ठीक पात्र के हाथ में समर्पण हुआ।आज इसी की माँग है। युग बदल रहा...
- ये तुम्हारे पिता के भाई हैं और तुम्हारे पिता के प्रति मेरी कितनी गहन निष्ठा है, तुम नहीं जानते मुझे वनवास में किसलिए छोड़ा गया?... संसार के इतिहास में दाम्पत्य जीवन के आदर्श उपस्थित करने के लिए। तुम्हारे लिए यह मुनासिब नहीं कि अपने...
- ये मेरे पास आते रहते हैं और मैं उनसे यही पूछता रहता हूँ कि बेटे, बता क्या बात है?... क्या तकलीफ है, हारी-बीमारी से लेकर बेटे-बेटी की शादी-ब्याह, नौकरी पदोन्नति तक की बातें करते हैं और म...
- ये सब कैसे हुआ?... अगर राम राजकुमार रहे होते तो शायद इतना न हो पाता। विश्वामित्र की शक्ति और दशरथ की बुद्धिमानी से ही स...
- ये सुनकर जिज्ञासा भरे स्वर में सैण्डो ने कहा—पिताजी बताइये हमको पहलवान बनने, मजबूत बनने के लिए क्या करना चाहिए?... उन्होंने कहा—बेटे मजबूती के सारे आधार, दीर्घजीवन के सारे आधार मनुष्य के भीतर सन्निहित हैं, पर आदमी इ...
- राजसत्ता का सुख, वैभव, मजा और लोभ--प्रलोभन क्या है?... इससे उन्होंने अपने आपको सदैव दूर ही रखा। तो क्या राजनीति की कोई सेवा नहीं की हनुमान जी ने? भला हनुमा...
- राजसत्ता की शक्ति कितनी बड़ी है और वह क्या कर सकती है?... इसे देखना हो तो जर्मनी में पिछले दिनों हिटलर की शासन सत्ता को देख सकते हैं। उसने सारी की सारी शिक्षा...
- रानी मक्खी शहद के छत्ते में बच्चे दिया करती है, लेकिन वह अकेले ही सब काम थोड़े ही कर लेती है?... बाकी मक्खियाँ जाती हैं और जहाँ- तहाँ से फूलों का रस इकट्ठा करके ले आती हैं। सेनापति होते हैं, लड़ाई ल...
- रामायण में एक प्रसंग आता है, जब लव-कुश ने देखा कि हनुमान जी और लक्ष्मण जी अश्वमेध के घोड़े को लिए चले जा रहे हैं तो उन्होंने पूछा आप लोग कौन हैं?... उत्तर मिला—मैं लक्ष्मण हूँ और मैं हनुमान हूँ। उन्होंने कहा—आप वही लोग हैं, जिन्होंने हमारी माँ को जं...
- रावण को उखाड़ करके विभीषण की स्थापना करने की भूमिका किसने निभाई?... हनुमान ने, नल-नील, अंगद और जामवन्त ने निभाई। यदि वे इस बात का झगड़ा करते कि हमको मिनिस्टर बना दीजिये,...
- रिश्तेदार, खानदान वाले कैसे तंग करते हैं?... २४ साल के इस अन्तराल में हमने उसे जाना। दुनिया अपने साथ न चलने वाले का कैसा मजाक उड़ाती है, कैसा बेवक...
- रिश्वतखोरी रुक गयी?... मिलावट रुक गया। बताइये एक भी पाप रुक गया हो तो जबकि सारे के सारे कानून बने हुए हैं। कानून इनसान के ऊ...
- लेकिन क्या हो गया?... चाइना से बौद्ध धर्म का सफाया हो गया। वहाँ अब कोई धर्म नहीं है--न हिन्दू धर्म है, न मुसलमान धर्म है, ...
- लोग हमसे बार-बार यही पूछते हैं कि आप राजनीति में क्यों नहीं जाते?... मित्रो! हम राजनीति से अलग नहीं है, किन्तु हमारी राजनीति वह राजनीति नहीं है जो सत्ता हथियाने वाली होत...
- वह कौन-सी है?... वह यह है कि पुराने-जमाने में जब अकाल पड़ते थे और खाने-पीने की चीजों का अभाव होता था, तो लोग भीख माँगन...
- वह क्या कर सकती है?... हमारी नौकरी क्लर्क की है। हमें ढाई सौ या तीन सौ रुपये मासिक वेतन मिलता है। हम उस परिस्थिति में मर जा...
- वह क्या है?... जो कुछ भी हम कमाते हैं वह सब पैंदे के छेद में से होकर निकल जाता है। फूटे हुए घड़े में पानी चाहे जितना...
- वह पूज्य है, जिसका भारतीय संस्कृति एवं धर्म में कितना महत्त्वपूर्ण स्थान था?... परन्तु हाय रे भगवान! आज हम जब उसकी स्थिति देखते हैं तो हमें रोना आता है कि हे भगवान उसका रूप क्या हो...
- वह बागी हो जाता है और क्या करता है?... चरम-सीमा पर जा पहुँचता है। दैत्य भी इन दिनों चरम-सीमा पर जा पहुँचेगा। अब वह समय निकट आ गया, जिसमें द...
- वहाँ क्या-क्या सुविधाएँ थीं-आप बता सकते हैं?... नहीं, कोई सुविधा नहीं थी। इनसान को विकसित करने के लिए भावना की जरूरत है। शरीर को पोषण देने, सुन्दर ब...
- वहाँ पहलवानों की तस्वीरें देखकर पूछा—पिताजी क्या मैं भी पहलवान बन सकता हूँ?... पिता ने कहा—हाँ! ये सुनकर जिज्ञासा भरे स्वर में सैण्डो ने कहा—पिताजी बताइये हमको पहलवान बनने, मजबूत ...
- वातावरण में कितना मिल गया है जहर?... हवा में, पानी में कितना जहर मिल गया है। हर जगह जहर ही जहर है। इस जहर का समाधान करने के लिए या तो यज्...
- वानप्रस्थी बन करके आप समाज में जाना, लोगों के पास जाना और उन्हें उनके कर्तव्यों को सिखाना, फर्जों को सिखाना, लोगों को उनके नागरिक अधिकार समझाना और यह बताना कि भला आदमी शरीफ आदमी कैसा होना चाहिए?... प्रत्येक आदमी को अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति कैसे रहना चाहिए? अच्छा समाज बनाने के लिए गुण्...
- विवाह का दिन आया तो पति ने पत्नी से कहा—‘‘हम आपके लिए सोने की क्लिप लाये हैं पर आपने सिर पर रूमाल क्यों बाँध रखा है?... इसे खोलिए हम आपके बालों में क्लिप लगाएँगे।’’ पत्नी बोली—हम आपके लिए घड़ी चेन लाये हैं लेकिन आज आपके ह...
- विवेकशीलता किसे कहते हैं?... बेटे कुण्डलिनी को। कुण्डलिनी किसे कहते हैं? विवेकशीलता को। आप समझते नहीं हैं। हमारा गुरु हमारी कुण्ड...
- वे उछलकर कहाँ से कहाँ चले गये?... लोगों ने उनको रोकना चाहा परन्तु वे रुके नहीं। उनको लोगों ने भला-बुरा कहा, परन्तु उन्होंने किसी की भी...
- वे क्यों लड़ाई लड़ना चाहते थे?... ये लड़ाई बिना सिर-पैर की थीं। इसमें न कोई इन्साफ की, न इनसानियत की और न ही आजादी की लड़ाई थी, यह तो के...
- वोट देने का यदि हमारा यही क्रम रहा तो मैं यह पूछता हूँ कि फिर हमको अच्छी गवर्नमेण्ट सरकार कैसे मिल सकती है?... अच्छी सरकार कभी नहीं मिल सकती।...
- शंकराचार्य ने कहा कि माँ हमें बचाओ नहीं तो अब मैं मरा?... माँ ने पूछा कि मैं क्या करूँ? माँ! शंकर भगवान कहते हैं कि अगर तू हमें शंकर भगवान को सौंप दे तो हमें ...
- शक्ति किसकी रही?... गाँधी जी की? नहीं, गाँधी जी की नहीं, जनता की रही। हुकूमत की शक्ति जब-जब होगी, जनता की होगी। किन्तु ह...
- शक्तिपात किसे कहते हैं?... हम सिद्धान्तों एवं आदर्शों का जीवन हिम्मत के साथ जियेंगे, यही शक्तिपात कहलाता है। यह सिद्धान्तों के ...
- शब्दों से क्या होता है?... मुझे उसको अध्यात्म कहने दीजिए। जुबान का संयम, इन्द्रियों का संयम, मस्तिष्क की विचारधाराओं का संयम, उ...
- शहरों की गन्दगी कहाँ डालते हैं?... नदियों में, परिणामस्वरूप सारी की सारी नदियाँ विषैली होती चली जा रही हैं। अब गंगा तट का पानी न नहाने ...
- शान्तिकुञ्ज में हम रहेंगे?... हाँ, शान्तिकुञ्ज में हम बराबर बने रहेंगे। अभी जब तक युगसंधि का समय है, तब तक हम यहाँ बराबर बने रहेंगे।...
- श्रेय किसे मिलता है?... यह मैं नहीं जानता। एक हवा आती है, जो एक आदमी को अवतार बनने का श्रेय भले दे दे, वास्तव में वह असंख्यो...
- सन्तोष करने के बाद में यह देखें कि हमारे पास कितना ज्यादा समय है?... उस समय का सदुपयोग कहीं भी आप कर सकते हैं। वास्तव में परिव्राजक एक संकल्प है, एक व्रत है, एक नियम है,...
- समय को आप नहीं जानते क्या?... समय को आप नहीं पहचान सकते क्या?मित्रो! भगवान जब भी आते हैं तो उसके कई मकसद होते हैं। एक तो आपने पहले...
- समय को आप नहीं पहचान सकते क्या?... मित्रो! भगवान जब भी आते हैं तो उसके कई मकसद होते हैं। एक तो आपने पहले ही सुन रखा है कि वह धर्म की स्...
- समय पर वर्षा न होने की वजह से क्या-क्या मुसीबतें आ रही हैं, आपको मालूम है न?... खेती सूख रही है, कुओं का पानी नीचा होता चला जा रहा है, डैम और नदियों का पानी पहले की अपेक्षा घटता चल...
- समय-समय पर जब कभी भगवान हाथ पसारते हैं और जो कोई उस समय को, मौके को पहचान लेते हैं और भगवान के पसारे हुए उस हाथ पर कुछ रख देते हैं, वे न जाने क्या से क्या हो जाते हैं?... भगवान् के और किस्से सुनाऊँ आपको? वक्त बहुत चला गया, इसलिए और भगवान की तो मैं नहीं कहता, पर एक भगवान ...
- सवारी अगर हमारे पास न हो तो हम किस तरीके से चल सकते हैं?... अपनी अटैची और होल-डाल लेकर किस तरीके से स्टेशन से घर तक पहुँचा सकते हैं? यह बहुत मुश्किल है हमारे लि...
- सहस्रार को जाग्रत करने वाला जो प्रकाश है, वह तो आपके आँखों के रास्ते सारा का सारा वाइब्रेशंस—तरंगों में से नष्ट हो जाएगा, फिर आप कहेंगे कि गुरुजी हमारा सहस्रार जगा दीजिए, तो कैसे जगाएँ हम?... इसके अन्दर जो गर्मी थी, ऊर्जा थी वह तो तूने खत्म कर दी। इसी तरह आहार के आधार पर जो तेरा रक्त बनता है...
- सहस्रार-चक्र में लगने वाली सारी शक्ति इसी में लय कर देंगे, तब फिर वह जागेगा कैसे?... सहस्रार को जाग्रत करने वाला जो प्रकाश है, वह तो आपके आँखों के रास्ते सारा का सारा वाइब्रेशंस—तरंगों ...
- साग-भाजी उगाने की तो हम कह नहीं सकते, क्योंकि जब वर्षा का अभाव होगा तो आप साग-भाजी कहाँ से उगा पाएँगे?... साग-भाजी मनुष्य के जीवन के लिए उतनी ही आवश्यक है—जितना अनाज। अनाज से कम आवश्यक नहीं है। आप साग-भाजी ...
- साठ आदमी एक साथ मिलकर बाग लगाने के लिए, सफाई के लिए, स्कूल चलाने के लिए खड़े हो जाएँ तो फिर आप देखिये कि साल भर में क्या हो सकता है?... जनता की इस शक्ति को हमें जगाना पड़ेगा। जनता के पास कर्तव्यों का उद्बोधन करने के लिए हमको जाना पड़ेगा। ...
- सामाजिक अत्याचार की बात हम क्या कहें?... हमारे पिताजी की जब मृत्यु हुई तो हमें याद है कि हमारे घर में महाब्राह्मण आये थे। उन्होंने भोजन किया,...
- सायंकाल का कार्यक्रम क्या है?... वह कार्यक्रम यह है कि सायंकाल को कीर्तन किया जाए। पुराने कीर्तनों और हमारे कीर्तनों में थोड़ा फर्क है...
- साहब आप पैसा क्यों माँगते हैं?... जिस लड़की को योग्य बनाया, जो बी.ए., एम.ए. पास है। आप उसके पिता से पैसा माँगते हैं, लानत है आपको।...
- स्वर्ग कहाँ है?... स्वर्ग की लम्बाई, चौड़ाई कितनी है? हमको नहीं मालूम। हमको तो जिन्दगी की जानकारी है, जमीन की जानकारी ह...
- स्वर्ग की लम्बाई, चौड़ाई कितनी है?... हमको नहीं मालूम। हमको तो जिन्दगी की जानकारी है, जमीन की जानकारी है। हमको जमीन की जिम्मेदारी जाननी ...
- स्वाधीनता संग्राम में जिन-जिन लोगों ने भाग लिया, उन स्वतन्त्रता सेनानियों को आप जानते ही हैं कि वे कौन-कौन हैं?... उन्हें स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी होने का सर्टीफिकेट मिला है; उन्हें पेंशन मिलती है। उनको सम्मान मिल...
- हनुमान कौन थे?... सुग्रीव के वफादार नौकर का नाम था हनुमान। सुग्रीव को जब उसके भाई ने मार-पीट कर भगा दिया, बीवी-बच्चे छ...
- हम अपनी मान्यताएँ, अपना दृष्टिकोण बदलें अन्यथा ऐसी स्थिति में मनुष्य का जीवन कैसे चल सकता है?... हमने अपनी जिन्दगी में ही अपने बीबी-बच्चों को अनाथ कर दिया। उनके भविष्य में गुजारे का भी कोई प्रबन्ध ...
- हम अभ्यास की बाबत क्या कह सकते हैं?... रोम में कैदियों को एक ऐसे बन्द कमरे में रखा जाता था, जहाँ रोशनी भी नहीं पहुँचती थी। जब उन्हें रिहा क...
- हम आज महामानव हैं, हम बता नहीं सकते कि हम कौन हैं?... परन्तु जहाँ से हमें मिला है वह हमारा सौभाग्य है, जिससे हम कहाँ से कहाँ पहुँच गये? यह हमारे गुरु का श...
- हम इनको कब तक सिखायेंगे, कितना सिखाएँगे, इनको सिखाने में कितना समय लगेगा?... हमारे पास समय बहुत कम है। हमको आदमियों की जरूरत है, अगर आप स्वयं उन आदमियों में शामिल होना चाहते हों...
- हम इसके द्वारा दुनिया को बताना चाहते हैं कि भावी जीवन में स्वर्ग कैसा होगा?... अगर आपके उद्देश्य ऊँचे होंगे तो मैं यह कहता हूँ कि आपको कभी अभाव नहीं होगा।मित्रो! मंगता भिखारी कभी ...
- हम इसीलिए बुलाते हैं और हर एक आदमी से बार-बार यही सवाल पूछते रहते हैं कि क्या आप इन शानदार समय को पहचान सकते हैं?... क्या आपकी अकल इतनी मदद करेगी कि आप इन शानदार समय को पहचान लें? अगर आपकी अकल इतनी सहायता कर दे और य...
- हम उन लोगों में से हैं, जो यह जानते हैं कि मनुष्य के जीवन में राजनीति का क्या स्थान है?... राजनीति और आदमी अब जुड़ गया है। तिब्बत के दलाई लामा को राजनीति के कारण तिब्बत छोड़कर भाग जाना पडा़।...
- हम ऋषियों के तरीके से, सन्तों के तरीके से कुटुम्ब का पालन करते हुए बड़ी आसानी से जी सकते हैं लेकिन हम क्या करें?... ? एक हविश हमारे ऊपर ऐसी हावी हो गयी है, जिसको हम एक तरह का ‘नशा’ कह सकते हैं। हम नशे में धुत्त आदमी ...
- हम कौन हैं?... टक्कर मारने वाले हैं। हम हमेशा विरोध करते रहे, संघर्ष करते रहे हैं। हम ब्राह्मण हैं? नहीं, हम तो राज...
- हम क्या कदम उठाते हैं?... हम यह कदम उठाते हैं कि आस्तिकता का वातावरण सारे विश्व में बढ़ता हुआ चला जाए। हमारा आस्तिकता से मतलब न...
- हम क्या कह सकते हैं?... अगर प्राचीनकाल की धर्म-संस्कृति के इतिहास को देखें, तो आपको पता चलेगा कि उनका स्थान कितना महान था? न...
- हम पूछते हैं कि आप क्या लड़की का कन्यादान करेंगे?... क्यों? यह कोई बेचने का सामान है, जो आप बुड्ढे से मोल-तोल करके बेच रहे हैं। यह सम्पत्ति नहीं है, इनसा...
- हम बच्चे हैं तो एक जैसा खाना क्यों नहीं देतीं?... माँ ने कहा—बेटे ये मेरी पड़ोसिन का बच्चा है, इसलिए ये भगवान का बच्चा है। तू मेरा बच्चा और तेरे साथ मे...
- हम ब्राह्मण हैं?... नहीं, हम तो राजपूत हैं। हमारे अन्दर परशुराम जी के तरह से शौर्य, साहस, पराक्रम करने की उमंग उठती रहती...
- हम शिकायत करते हैं बच्चे अनुशासनहीन हैं, कहना नहीं मानते, बुजुर्ग की इज्जत नहीं करते और मास्टरों को धमकाते हैं, यूनिवर्सिटी के शीशे फोड़ देते हैं और यह नहीं करेंगे तो और क्या करेंगे बेचारे?... छोटेपन से यही देखा और सीखा है। इसे रोकने की जिम्मेदारी मास्टरों, अध्यापकों की नहीं, वरन् उन लोगों की...
- हमने अपने अन्दर को खोलकर आपको दिखाया ताकि आप देख सकें कि हमारे अन्दर कितनी प्रसन्नता है, कितनी शान्ति है, कितनी प्रगति है?... अगर आपको भी हिम्मत है, तो आप अपने गुरु का अनुग्रह खरीदकर ले आएँ। हमने भी अपने गुरु का अनुग्रह खरीदकर...
- हमने अपने जिम्मे क्या लिया है?... हम एक उस तरह की तपश्चर्या कर रहे हैं, जिस तरह की भगीरथ ने की थी। भगीरथ ने तपस्या की तो क्या हुआ? गंग...
- हमने अपने शरीर भगवान् के काम में लगाया और भगवान ने हमारे भीतर अपना शरीर लगा दिया और क्या हुआ?... हमने जो बोया वह हजार गुना हो गया। हमने अपना सारा का सारा जीवन भगवान के लिए लगा दिया है। जहाँ हमारा ज...
- हमने एक बार समर्थ गुरु रामदास के बारे में पता लगाया कि उन्हें जो उछाल आया था, उमंग आयी थी, वह कौन-सा महीना था?... वह था वसन्त का महीना। ऐसा उनमें उछाल आया जैसा कि तूफान आता है। बगल में पत्नी बैठी थी। उसने देखा कि बच...
- हमने कहा कि आप क्यों नहीं कर सकते हैं?... उन्होंने कहा कि हम नहीं कर सकते हैं, यह काम आपको करना होगा। हमारा गुरु हमारी जीभ है और हम उसकी नाक ह...
- हमने क्या किया है?... आप क्या समझते हैं कि हमने किताबें लिखी हैं, लेख लिखे हैं, लेक्चर देते हैं, पूजा करते हैं। अरे भाईसाह...
- हमने क्या पाया?... क्या खोया? आप समझते हैं न हमने क्या गँवाया? कुछ भी नहीं गँवाया हमने। आप हमारे गाँव चले जाइये, देखिए ...
- हमने तो एक साधारण परिवार में जन्म लिया, परन्तु भगवान ने हमें न जाने कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया?... आज संसार भर में लोग हमें एक महापुरुष के रूप में, एक महान व्यक्ति के रूप में जानते हैं। हमारे विचार अ...
- हमने दिमाग से कहा—आप हमारे हैं या हम आपके हैं?... दिमाग ने कहा—हम तो आपके हैं। हमने कहा—तब तो आपको हमारी बातें, हमारा कहना मानना चाहिए। उसे समझा दिया—...
- हमने पूछा कि क्या मुसीबत है आपको?... उन्होंने बतलाया कि यह दुनिया बहुत खराब हो गई है। इस दुनिया को बदलना है, उसमें आप सहयोग कीजिये तथा हम...
- हमने पूछा—आप क्या सहायता करेंगे?... उन्होंने कहा—हम एक ही सहायता करेंगे, तुम्हारी कामनाओं को भावनाओं में बदल देंगे। कामनाएँ किसे कहते है...
- हमने यह कभी नहीं सोचा कि इससे समाज की क्या स्थिति होगी?... हर संस्था वालों ने, सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि हर आदमी अपने मौलिक अधिकारों का उपभोग करने के ...
- हमने सुना है देवता कृपा करते हैं?... देवता कृपा नहीं करते, भौतिक जीवन में योग्यताएँ काम करती हैं, पुरुषार्थ काम करता है। जापानियों से पूछ...
- हमसे तो यह पूछिये कि असली धर्म क्या है?... बेटे, असली धर्म उस चीज का नाम है, जो मनुष्य की जिम्मेदारी को प्रभावित करता है और कर्तव्य ज्ञान कराता...
- हमारा जीवन जो आज वसन्त पंचमी के दिन आप लोगों के सामने आया, इसकी क्या विशेषता है?... इसकी कोई विशेषता नहीं है। मात्र एक विशेषता है— ‘करिष्ये वचनं तव’ की। एक ऐसी सर्वशक्तिमान सत्ता ने हम...
- हमारा मन कह रहा है कि हम क्या-क्या काम कर डालें?... हम चाहते हैं कि आपके अन्दर भी इस वसन्त पर्व के अन्तर्गत ऐसी ही उमंग उठे। आप भी ऐसा ही सम्पत्तिवान तथा...
- हमारा सामाजिक जीवन, राष्ट्रीय जीवन, हमारा आर्थिक जीवन कितना जटिल और कितना जकड़ा हुआ बनता चला जा रहा है?... विज्ञान की प्रगति के बावजूद, धन की प्रगति के बावजूद इनसान के लिए एक अजीब समस्या उत्पन्न होती चली जा ...
- हमारी आज्ञा के बिना कैसे करेंगी?... इस तरीके से इन्द्रियों के ऊपर हुकूमत अगर हम कर पाएँ तो हम गुलामी के बन्धन से मुक्त हो जाएँ। जिसके लिए...
- हमारी औलाद का क्या होगा?... हम आपको पूर्ण विश्वास दिलाते हैं कि आपका पेट भी भरेगा तथा आपकी औलाद भी ठीक रहेगी। हमारा पेट भी भर रह...
- हमारी जिम्मेदारियाँ कौन पूरी करेगा?... आप नहीं भी रहेंगे, मर जाएँगे, तो भी आपके बच्चों का, घरवालों का पालन-पोषण होगा। आपके बिना कोई भूखा नह...
- हमारे कार्यकर्ता जाएँगे, उनको दक्षिणा देनी पड़ेगी?... नहीं, बिलकुल नहीं! माइक—लाउडस्पीकर, यज्ञशाला—पाण्डाल, टेप आदि जितनी भी जरूरत की चीजें है, हर चीज हम ...
- हमारे गार्हस्थ्य जीवन में न जाने कैसी लग गई आग?... हमारे बच्चे अभिभावकों के प्रति जैसे निष्ठावान होने चाहिए थे, नहीं हैं। अब श्रवणकुमार की सिर्फ कहानिय...
- हमारे जीवन में यदि यह आ जाए तो हमारा राष्ट्र न जाने कहाँ से कहाँ पहुँच जाए?... आपको कभी ऐसा काम करना पड़े तो कृपा करके ध्यान रखिये।अगर आपको कभी धर्म का—अध्यात्म का काम सौंपा जाए तो...
- हमारे पास क्या था?... कुछ भी नहीं था। समय था खाली, सो समय को हमने उनके चरणों पर रख दिया और ये कहा— ‘‘हम आपके साथ-साथ चलेंग...
- हमारे बुजुर्ग कैसे थे?... मैंने अपने नाना जी को आँख से देखा था जब वे चालीस मील तक सफर करते थे और पूर्णमासी के दिन गंगाजी नहाने...
- हमारे मकसद बड़े हैं और वे यह हैं कि आप ऐसे सौभाग्य वाले समय में क्या कुछ लाभ उठा सकते हैं?... क्या आप समय को पहचानते हैं? क्या आप भगवान की सहायता कर सकते हैं? हम इसीलिए बुलाते हैं और हर एक आदमी ...
- हमारे मारने-डाँटने पर वह कुछ न कहे तथा घर में चिल्लाये भी नहीं, यह कैसे हो सकता है?... अरे अगर वह चिल्लाएगी तो हमारे पड़ोसी इकट्ठे हो जाएँगे तथा हमारी बेइज्जती हो जाएगी। यदि इस बात को वह अ...
- हमें दवा खाने की जरूरत नहीं है?... उन्होंने कहा—नहीं बेटा दवाएँ तो सिर्फ बीमारियों को ठीक करने के लिए हैं। ये अस्थाई एनर्जी दे सकती हैं...
- हर वक्त लम्बी-चौड़ी प्रेम की चिट्ठी लिखी जाती रहती है और लम्बे-चौड़े आश्वासन दिये जाते रहते हैं; लेकिन यकीन नहीं होता किसी स्त्री को कि छह महीने बाद हमारे गृहस्थ जीवन का क्या होगा?... इसी तरह किसी मर्द को यकीन नहीं होता कि छह महीने बाद हमारे गृहस्थ जीवन का क्या होगा? लम्बे-चौड़े प्रेम...
- हविश का राक्षस इस तरीके से उछलता और उबलता रहता है कि अच्छे कार्यों के लिए, भजन-पूजन के लिए कुछ नहीं बचता हमारे पास, फिर सेवा के लिए, परमार्थ के लिए, देवपूजन के लिए कहाँ बचेगा?... आपके पास है क्या जिससे पूजन करेंगे? आपके पास तो बची हुई एक हविश है, जिसको पूरा करने के लिए आप हर एक ...
- हुंकार दिखाती और न जाने क्या-क्या दिखाती है?... बेटे, एल. एस. डी. नामक एक दवा आती है। उसकी एक बूँद तेरे जीभ में डाल दूँ तो तुझे बड़ी से बड़ी चीज दिखला...
- ‘लाइफ’ कहाँ से आ गई धरती पर?... सूरज से। कीड़े-मकोड़े, जीव-जन्तु, इनसान सभी इन्हीं दोनों के ‘काम्बिनेशन’ से पैदा हुए हैं। पृथ्वी और सू...
- ‘‘नया मन्दिर बनेगा, खण्डहरी दीवार तोड़ो तुम’’—यह गीत लड़कियाँ गाती रहती हैं, आपने सुना नहीं है?... भगवान के जब अवतार होते हैं तब एक ही काम नहीं करते, मात्र धर्म की स्थापना करते हुए नहीं आते, वरन् अनी...
- अब आप क्या करना चाहते हैं?...? अब हम एक और काम करना चाहते हैं कि हमारा छोटा-सा समूह, छोटा-सा समुदाय क्रमबद्ध, एक प्लानिंग करके चले...
- अब क्या आने वाला है?...? देव आने वाला है। देव किसे कहते हैं? शराफत को कहते हैं, भलमनसाहत को कहते हैं। देवता कहाँ रहते हैं? आ...
- अमेरिका जैसे सम्पन्न देश में जहाँ हमारे बच्चे भाग करके वहाँ न जाने क्या-क्या सीखने जाते हैं?...? वहाँ कि जितनी प्रशंसा की जाए कम है। लेकिन वहाँ का दाम्पत्य जीवन व गृहस्थ जीवन इतना जटिल और घटिया हो...
- आप क्या कहना चाहते हैं?...? मैं यही कहना चाहता हूँ कि इस युगसन्धि की वेला में आप कुछ महत्त्वपूर्ण काम कर पाएँ तो आपके लिए शान क...
- आप राजनीति में क्यों नहीं आते?...? हम बार-बार यही कहते रहते हैं कि राजनीति का क्षेत्र बहुत छोटा, बहुत कम है और धर्म का क्षेत्र बहुत बड़...
- आपको इसका आभास कैसे मिलता है?...? हम कई आदमियों से मालूम करते हैं, कई फैकल्टीज से मालूम करते हैं, कई विचारकों से मालूम करते हैं तो नत...
- इसी तरह गिलहरी ने क्या किया था?...? अपने बालों में बालू भरकर लाती और समुद्र में पटक देती थी। बालों में बालू भर लेना कोई मुश्किल और बड़ा ...
- एक कुण्डीय यज्ञ का आप मतलब तो समझ ही गये हैं न?...? एक थाली में पाँच धूपबत्तियाँ और पाँच दीपक रखें। थाली को हल्दी, रोली अथवा आटे द्वारा सजा भी सकते हैं...
- एक बार किसी ने बरसात के बादलों से कहा कि आप हमारे घर में, खेत में क्यों नहीं बरसते हैं तथा वहाँ हरियाली क्यों नहीं लाते हैं?...? बादलों ने पूछा—क्या आपके पास अच्छी वाली जमीन है? उसने कहा—नहीं हमारे पास तो केवल चट्टानों से भरी जम...
- एक बार फिर सुन लीजिए कि आपको क्या- क्या करना है?...? पहली बात यह कि आपको यहाँ के लिए एक आदमी, एक युगशिल्पी भेजना है, जो यहाँ से महीने भर में सीख करके जा...
- और किन-किन ने समय को पहचाना और भगवान का काम किया?...? रीछ-वानरों की घटनाएँ तो आपको याद ही हैं। गाँधीजी की कल-परसों की बात है। स्वाधीनता संग्राम में जिन-ज...
- और कुछ कहना है आपसे?...? बस एक ही बात कहनी है कि आप अपने समय का थोड़ा हिस्सा अपने लिए रखिए और ज्यादा हिस्सा समाज के लिए, देश ...
- और कौन क्या कह रहा था?...? जो ग्रह-नक्षत्र विद्या के जानकार हैं, वे कह रहे थे कि पृथ्वी का खाविन्द सुर्य है। ये दोनों मियाँ-बी...
- और कौन-कौन सी घटनाएँ हैं?...? मैं ढेरों घटनाएँ, ढेरों कहानियाँ सुना सकता हूँ। कौन-कौन घटनाएँ सुनेंगे आप? चलिए आपको सुनाता हूँ। रा...
- किन-किन ने समय को पहचाना और समय की माँग के अनुरूप अपने को समर्पित किया?...? हनुमान जी की मूर्तियाँ आपने देखी हैं। उन हनुमान जी ने समय की माँग को देखा तथा राम के कार्य के लिए स...
- कुण्डलिनी क्या होती है?...? जिसे हम करुणा मिश्रित विवेकशीलता कहते हैं। करुणा किसे कहते हैं? जिससे दूसरे व्यक्ति के दुःख तकलीफ ...
- कैसे होगा समन्वय, विज्ञान और अध्यात्म का?...?
गायत्री मंत्र हमारे साथ-साथ—
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य...
- कोरिया के एक किसान यांग का नाम सुना है आपने?...? जिस तरह हमारे यहाँ गाँधी जी की तस्वीरें घरों में टँगी रहती हैं, दक्षिण कोरिया में यांग की तस्वीर टँ...
- क्या करना है?...? इस बार बारह वर्ष के लिए भगवान की यह प्रेरणा आई है कि इन बारह वर्षों में हम सबों को ज्यादा से ज्यादा...
- क्या माँगें हैं भगवान की?...? आप अखण्ड-ज्योति के सब पाठक हैं और जानते हैं कि प्रज्ञावतार ने क्या माँगा है? प्रज्ञावतार ने यह माँग...
- क्या साम्प्रदायिकता कुछ ठण्डी हुई है?...? नहीं, यह बिल्कुल ठण्डी नहीं हुई? विवाद एक जगह ठण्डा नहीं होने पाता कि कहीं और तैयारियाँ शुरू हो जात...
- क्यों साहब, क्या बात थी कि हनुमान जी में इतनी ताकत कहाँ से आ गई?...? यह वहाँ से आ गई जहाँ से उन्होंने अध्यात्म को अपने जीवन में उतार लिया था। अध्यात्म जीभ की नोक तक, पू...
- गवर्नमेण्ट बनाने की जिम्मेदारी किसकी है?...? आपकी और हमारी। पाँच वर्ष बाद हमको यह अधिकार मिलता है कि हम किस तरीके से हुकूमत बदल सकते हैं और कैसे...
- तो गुरुजी क्या यही अध्यात्म है?...? हाँ बेटे, यही अध्यात्म है और यही धर्म है। यही भगवान् की भक्ति है। हमको और आपको भगवान् की यही भक्ति...
- दूसरी मुसीबत इस समय की क्या है?...? प्रकृति हमसे नाराज हो गयी है और उसने नाराज होकर वर्षा के ऊपर अपना प्रभाव डाला है। समय पर वर्षा न हो...
- देश के ऊपर जब कोई दुश्मन हमला कर देता है तो क्या करना पड़ता है?...? दुश्मन बनना पड़ता है। सैनिकों की छुट्टियाँ बन्द कर दी जाती हैं। नहीं साहब, हमारा ब्याह है, मुहूर्त भ...
- दैत्य कहाँ रहते हैं?...? कहाँ बतावें आपको। अपना मुँह शीशे में तो आपको दिखाई पड़ेगा कि दैत्य, राक्षस, जाइंट आपके भीतर बैठा हुआ...
- धर्मतंत्र की गरिमा एवं महत्ता (हम राजनीति में क्यों नहीं आते?...? )
गायत्री मंत्र हमारे साथ-साथ—
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस...
- नागरिक कर्तव्यों, जिम्मेदारियों को समझाना, प्रत्येक नागरिक को उसके अधिकारों का बोध कराना, दूसरों के कष्ट-कठिनाइयों में भागीदार बनाना और उन्हें राष्ट्रीय दायित्वों को समझाने की जिम्मेदारी किसकी है?...? साथियो, यह धर्म की जिम्मेदारी है, यह हमारी जिम्मेदारी है और आपकी जिम्मेदारी है कि हम हर आदमी को वह ...
- परिणाम क्या हुआ?...? परिणाम ये हुआ कि विश्वामित्र के साथ जाने के बाद दोनों का भला हुआ। ऋषि ने उन्हें अनेकों विद्याएँ सिख...
- भगवान् के और किस्से सुनाऊँ आपको?...? वक्त बहुत चला गया, इसलिए और भगवान की तो मैं नहीं कहता, पर एक भगवान को जो कल-परसों हो चुका है, उसकी ...
- यह तो हमारे जिम्मे का काम है और आपके जिम्मे का क्या है?...? आपको भी कुछ करना चाहिए? आप नहीं करेंगे तब? रानी मक्खी शहद के छत्ते में बच्चे दिया करती है, लेकिन वह...
- वनवास क्या होता है?...? वनवास वह होता है जिसमें व्यक्ति को मात्र अपना लक्ष्य याद रहता है और बाकी चीजें गौण हो जाती हैं। राम...
- वे कौन-से यज्ञ हैं?...? वे दीपयज्ञ हैं। दीपयज्ञ में एक थाली में पाँच दीपक रखे जाते हैं। यह यज्ञ का सामान हुआ। थाली अपने घर ...
- साथियो, हृदय-हृदय पर शासन किसका होता है?...? हृदय-हृदय पर शासन धर्मतंत्र का था, है और रहेगा। भौतिक वस्तुओं पर शासन सरकार का रहेगा और सरकार का था...
- साधकों में से कई व्यक्ति हमसे यह पूछते रहते हैं कि हम क्या करें?...? मैं उनमें से हर एक से कहता हूँ कि यह मत पूछिए, बल्कि यह पूछिए कि क्या बनें? अगर आप कुछ बन जाते हैं ...
- सिद्धान्तों का पालन करने में अपनी कमजोरियाँ कैसे तंग करती हैं?...? अपने पड़ोसी कैसे तंग करते हैं? रिश्तेदार, खानदान वाले कैसे तंग करते हैं? २४ साल के इस अन्तराल में हम...
- हनुमान जी जिनका कि आज जन्मदिन है, क्या वे मिनिस्टर नहीं बन सकते थे?...? हाँ, वे भगवान राम की हुकूमत में मिनिस्टर बन सकते थे, उनके मंत्री बन सकते थे, लेकिन वे मिनिस्टर नहीं...
- हमने एक बार यह चिन्तन किया कि जरा हम यह पता लगाएँ कि इस धरती पर महान लोगों को कब शक्ति मिली होगी, प्रेरणा मिली होगी?...? हमने यह पाया कि यह समय वसन्त का ही रहा है। हमने एक बार समर्थ गुरु रामदास के बारे में पता लगाया कि उन...
- ’’ तब राजा जनक ने पूछा—‘‘क्या वस्तुएँ कम कर सकते हैं?...? ’’ उन्होंने कहा—‘‘घी अगर आपके पास न हो, तो केवल हवन-सामग्री से जो वनस्पतियों से बनती है, उससे ही आप...
- ’’ पत्नी बोली—हम आपके लिए घड़ी चेन लाये हैं लेकिन आज आपके हाथ पर ये रूमाल कैसे बँधा है?...? दोनों ने एक-दूसरे के रूमाल खोले तो देखा कि बाल कटे हुए हैं और कलाई खाली। एक के हाथ में क्लिप और दूस...