राष्ट्र को धर्म ही बना सकता है - जहाँ व्यक्ति संगठित होकर रहते हैं—वहीं यज्ञ है। अश्वमेध क्या है? अश्व जैसी पाशविक प्रवृत्तियाँ—जो लगाम लगाने पर भी नहीं रुकतीं,
राष्ट्र को धर्म ही बना सकता है - है, जहाँ व्यक्ति संगठित होकर रहते हैं—वहीं यज्ञ है। अश्वमेध क्या है? अश्व जैसी पाशविक प्रवृत्तियाँ—जो लगाम लगाने पर भी नहीं
राष्ट्र को धर्म ही बना सकता है - ठीक है, जहाँ व्यक्ति संगठित होकर रहते हैं—वहीं यज्ञ है। अश्वमेध क्या है? अश्व जैसी पाशविक प्रवृत्तियाँ—जो लगाम लगाने पर भी