जीवन का महत्त्व एवं जिम्मेदारी समझें

जीवन - आपका सबसे बड़ा सौभाग्य। आपको क्या सौभाग्य (इस जीवन) इस समय मिला हुआ है, इस पर आप कभी गौर करें तो आप इस बात पर विचार मत कीजिए - आप किस बिरादरी में पैदा हुए हैं, आपका घर (का) मकान है कि नहीं, आप कहाँ तक पढ़े हुए हैं, आपके पास (कितना) कुटुम्बी हैं, (आप) आपको सफलता मिली कि नहीं मिली, आप कैसा डिवीजन लाए, वगैरह, वगैरह - जो आपके पास सामान हैं, (इस) पे विचार मत कीजिए। क्या करें? एक ऐसी बड़ी चीज़ आपको मिली हुई है, जिस नियामत के ऊपर आप बराबर गर्व (अन) अनुभव कर सकते हैं। वो क्या है? वो है इन्सानी जिन्दगी। आदमी का जन्म इतना बड़ा सौभाग्य है कि आप इसकी कल्पना नहीं कर सकते। चूँकि आपको मिला हुआ है, इसीलिए आप उसकी वकत नहीं समझते। आँखें आपको मिली हुई हैं इसीलिए वकत नहीं समझते। अगर आँखें आपसे छिन जाए तब, तब आपको ये अनुभव होगा कि आँखें कितनी जरूरी और कितनी अच्छी चीजें हैं।

आदमी को जब मिला होता है, आमतौर से आदमी समझ नहीं पाता। जब हाथ से छिन जाता है, उसके बाद जब नहीं मिला हुआ होता है तो उसके लिए तरसते रहते हैं। शादी आमतौर से भारी मालूम पड़ती है। साहब बीवी आ गई है, कितना खर्चा बढ़ गया है, झगड़ालू स्वभाव की है, ये दिक्कत वो दिक्कत। लेकिन जब बीवी छिन जाती है और आप अकेले खाना पकाते हैं और बच्चों को पालना आपको अपने कन्धे पर आता है, तब आप समझते हैं कि बीवी का कितना महत्त्व था। आपको जिन्दगी छिन जाए, उस समय आपको ये पता चले कि हमको कितनी बड़ी नियामत मिली हुई थी, इसकी अपेक्षा ये ज्यादा अच्छा है कि आप समय रहते इस बात का अन्दाज लगा लें कि हमको बहुमूल्य ऐसा उपहार मिला हुआ है जिसके लिए सारे संसार के प्रत्येक प्राणी को तरसना पड़ता है, तरसना पड़ता है। आदमी को बोलने वाली जिन्दगी, सोचने वाली जिन्दगी, पढ़ने-लिखने वाली जिन्दगी, जीविका के लिए कोई एक निश्चित (इस) कोई सूत्र, खाने-पीने का नियत समय, वस्तुओं के लिए सुव्यवस्था, सोने-जागने का क्रम, पहनने के लिए वस्त्र, रहने के लिए मित्र मण्डली, काम जीविका उपार्जन करने के लिए कोई नियत स्थान, वगैरह-वगैरह, इसके हिसाब से अगर आप देखें, तो ये मालुम पड़ेगा कि आप दूसरे प्राणियों की तुलना में, (में) (आपका) और दूसरे प्राणियों के बीच में जमीन-आसमान जैसा फर्क है।

आपको ये सुविधा मिली है और कहाँ मिली है? दूसरा प्राणी बताइए न मनुष्य के अलावा। कौन सा मिला हुआ है? कपड़े कौन पहनता है? शादी-विवाह किसके होते हैं? कुटुम्ब बना करके कौन रहता है? दवा-दारू का इन्तजाम किसके लिए है? बोलना किसको आता है? किताबें कौन पढ़ सकता है? अगर आपको इतनी सुविधाएँ मिली हुई हैं आप कभी एकान्त में बैठ कर के विचार करें तो मालुम पड़ेगा कि भगवान के पास जो कुछ भी सबसे कीमती चीज़ थी, आपके सुपुर्द कर दिया। भगवान के खजाने को आप जा करके कभी देखें और ये तलाश लें कि सबसे बेहतरीन चीज प्राणियों को देने के लिए इसके पास क्या हो सकती थी? तो आपको एक ही बात का पता चलेगा कि भगवान के पास सबसे कीमती दौलत, सबसे कीमती नियामत, सबसे कीमती सम्पदा, अगर कोई है तो मनुष्य की जिन्दगी।

मनुष्य की जिन्दगी अगर जिस (आ) (जिसको) आदमी को मिल गई, समझना चाहिए भगवान का अनुग्रह पूर्ण हो गया। इससे ज्यादा भगवान के पास देने के लिए कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जो किसी प्राणी को दे और उसको निहाल कर दे। आप निहाल हो गए हैं। इस जिन्दगी को आप समझिए। फिर एक बार समझिए, फिर एक बार समझिए। कल्पना कीजिए मौत आई और आपके हाथ से जिन्दगी छीन ली गई। ये जिन्दगी छीन ली गई। छीनी हुई जिन्दगी को आप पीछे तक कीजिए गौर। कितनी कीमती थी और जबकि आपको नहीं मिलने वाली है, दूसरी योनियों में जाना है, गधे में जाना है, घोड़े में जाना है, बन्दर में जाना है, कबूतर में जाना है, चिड़िया, मेढक में जाना है। तब आप जरा अन्दाज लगाइए, आपके हाथ में कितना मौका मिला हुआ था। और आपने कभी ये कोशिश नहीं की कि इसका महत्त्व समझें, और महत्त्व समझने के साथ-साथ में आप इसको ठीक तरीके से इस्तमाल करने के लिए तैयारियाँ करें। आप इसकी तैयारी कीजिए, महत्त्व समझिए। इसके ठीक तरीके से उपयोग करने का तैयारी कीजिए।

इसके लिए क्या तैयारी करनी होंगी? एक तैयारी ये करनी पड़ेगी कि आपको (अपने) नए ढंग से जिन्दगी के ऊपर विचार करना शुरू करना होगा। क्या शुरू करें? आप ये मान के चलिए - जिन्दगी एक बहुत लम्बी कड़ी है, एक लम्बी वाली शृंखला है। बहुत लम्बी शृंखला, बहुत लम्बी शृंखला। इसमें कि आपको लाखों जन्मों तक जिन्दा रहना था। एक ही मौका आपका ऐसा है जो मनुष्य के जीवन में मिला हुआ है। आप जिस मनुष्य की जिन्दगी में मिले हुए हैं, आप उसके साथ में अपनी भावी जीवन के, भावी जीवन के सम्भावनाओं का विचार कीजिए। आज हर आदमी जो काम करता है कल का विचार करके ही करता है। आज जो आप काम कर रहे हैं कल के ख्याल से कर रहे हैं। कल क्या करना पड़ेगा। आज जो आपने नौकरी, खेती-बाड़ी की उसका मतलब तो ये ही तो है। आपको कल का दिन गुजारा करने के लिए ठीक मिलेगा। मकान आप किसलिए बनाते हैं? आज तो आप धर्मशाला में भी रह सकते थे, होटल में भी रह सकते थे। पर यही तो विचार करते हैं] कल हम रहेंगे तो कहाँ रहेंगे? बुढ़ापे में जाएँगे तो कहाँ रहेंगे? हमारा कुटुम्ब कहाँ रहेगा? इसीलिए विचार करते हैं। कल की सम्भावनाओं के लिए (आज का) आज की व्यवस्था बनाना हर एक आदमी का काम, हर समझदार आदमी का काम है।

आप एक लम्बी वाली जिन्दगी जी रहे हैं। अगर आप लम्बी वाली जिन्दगी जिएँ, तो आपको ये विचार करना पड़ेगा - आपका कल शानदार किस तरीके से हो? कल (की) शानदार होने के लिए आज आपको क्या करना होगा? एक ही बात करनी पड़ेगी - आप अपने प्रत्येक क्रियाकलाप में इस बात का समावेश करें, कि हमारा कल, भविष्य किस तरीके से उज्ज्वल हो जाए। हम और आप में से अधिकांश लोगों में गलती ये है। आज की बात को विचार करते हैं, कल की बात को विचार नहीं करते। कल क्या परिणाम निकलेगा, इसको हम भूल जाते हैं। आज हमको किन बात में फायदा है बस इतनी ही बात पर हमारी दृष्टि सीमित रहती है और जो आज हमको फायदेमन्द मालूम पड़ता है उसी को करने पर आमादा हो जाते हैं, उससे भली से हमारा कल खराब होता हो। करना क्या चाहिए? करना ये चाहिए - कल के परिणामों पे हम ज्यादा विचार करें, और आज (के) अपनी गतिविधियों का निर्धारण इस तरीके से करें, जिससे हमारा कल बहुत अच्छा बनता हो। शानदार बनता हो, अच्छा बनता हो, उसके के लिए हम कोशिश करें, कि हम ऐसी एक रीति-नीति को अपनाने में समर्थ बन सकते हैं, जो हमारे लिए हर तरीके से सुखदायक और शान्तिदायक बन सकती है।

आपको दूसरों से गौर करना चाहिए। जो आदमी तुरन्त फायदा उठाने के लिए कोशिश करते हैं वो, आपने देखे नहीं किस तरीके से हैरान होते हैं और किस तरीके से आपनी जिन्दगी को तबाह कर लेते हैं। अपराधियों को आप जानते हैं न, शराबियों को आप जानते हैं न, आलसियों को आप जानते हैं न, फिजूलखर्चों को आप जानते हैं न। ये कौन हैं? ये सब वो आदमी हैं जो आज की, आज की सुविधाओं पर ध्यान देते हैं और ये भूल जाते हैं कि हमारा भविष्य क्या होना है। शराबी इस समय के मजे को देखता है, और ये देखता है इस समय हमको कैसा जायका आ रहा है, कैसा आनन्द आ रहा है। ये भूल जाता है, कल हमारा लिवर खराब होने वाला है, दिमाग खराब होने वाला है, जिन्दगी में कमी होने वाली है, हमारी अकल खराब होने वाली है, हमारे कुटुम्ब की तबाही होने वाली है, हमारी बदनामी होने वाली है। कल तो होगी न, कल का कोई ख्याल नहीं। कल का ख्याल नहीं आता तब, उसको शराब पीने में कोई एतराज नहीं। लेकिन जिसको कल का ख्याल है, अपने शरीर का भी ख्याल है, अपनी बदनामी का ख्याल है, अपनी आमदनी का ख्याल है, अपनी घर गृहस्थी की जिम्मेदारी का ख्याल है, जैसे ही ये ख्याल आयेगा फिर वो शराब पीने से एतराज करने लगेगा और छोड़ देगा।

दूरदर्शिता की कमी, दूरदर्शिता की कमी जिस आदमी में है वो सिर्फ आज की बात विचार करता है। अपराधियों के बारे में भी यही बात है, शराबियों के बारे में, जुआरी को आपने देखा है न, चोरों को देखा है न, इस समय हम फायदा उठा लेते हैं। अरे भई इस समय तो फायदा उठा लेते हो, पर भविष्य तुम्हारा क्या बनेगा? दूसरा आदमी कौन सहयोग करेगा? दूसरा आदमी कौन अपने पास बैठने देगा? जहाँ कहीं भी किसी का सहयोग माँगने जाएँगे, वो ये ही ख्याल करेगा न चोर और उचक्का है, हमारे पास रहेगा, हमको हैरान करेगा, किसी न किसी तरीके से तंग करेगा, इसलिए अच्छा होते हुए भी, कुटुम्बी होते हुए भी, मित्र होते हुए भी अपने खानदान का और अपने परिवार का होते हुए भी हर आदमी चाहता है कि ये किसी तरीके से काला मुँह करे और हमसे दूर चला जाए। क्यों, क्या वजह हुई? क्राइम, क्राइम आदमी के व्यक्तित्व को खतम कर देता है। आमदनी क्या मिली, क्या नहीं मिली मैं नहीं कहता आपसे। आपने जेब काट के क्या कमा लिया, चोरी-बेईमानी से क्या कमा लिया, ये आपकी मर्जी के ऊपर है, पर आपने अपना भविष्य खराब कर लिया। अब आपको सहयोग की गुंजाइश नहीं है। जब लोगों को ये मालुम तो पड़ेगा ही, छिपता तो नहीं है, कि आप बुरे काम करने वालों में से हैं, तब फिर आप विश्वास रखिए, न आपके पास अच्छे ग्राहक आ सकते हैं, न कोई आपको उधार देने को रजामन्द हो सकता है, न आपका कोई मुसीबत में सहकारी हो सकता है।

अपराध का रास्ता इफ्तार करने के बाद में आपने कमाया होगा मैं नहीं कहता, लेकिन भविष्य अपना कितना खराब बना लिया। तब, तब यही बात इसकी है। आप किसान को जानते हैं न, विद्यार्थी को जानते हैं न, माली को जानते हैं न, कलाकार को जानते हैं न, ये सब आदमी वो हैं जिनको कल का ख्याल रहता है। आज इनको नुकसान पड़ता है तो खुशी-खुशी इस नुकसान को उठाने के लिए तैयार रहते हैं। किसान नुकसान उठाने को तैयार रहता है। आज बीज बो रहा है न, आज मेहनत कर रहा है न, आज खाद-पानी सिर पे ढो कर के खेत में लगा रहा है न, नुकसान के अलावा क्या है, आप जरा बताइए तो सही। लेकिन उसको ख्याल है कि (इसका) कल (से) हमको अच्छी फसल मिल सकती है और हम अच्छा फायदा उठाएँगे इसीलिए आज की तबाही, आज का नुकसान, आज की मेहनत भली से इसका कोई मुनासिब फायदा न मिलता हो, तो भी बराबर करने के लिए तैयार रहता है। आप ऐसा नहीं कर पाएँगे क्या, आपको करना चाहिए।

विद्यार्थी को आपने देखा है न, विद्यार्थी किस तरीके से किताब पढ़ने में लगा रहता है, रात को जगता रहता है, फीस भी दाखिल करता है, स्कूल भी टाइम पर जा पहुँचता है और आप उस आदमी को देखिए बच्चे को, जो लावारिस के तरीके से घूमता रहता है, घर से पैसे ले जाता है फीस दाखिल करने के लिए, घर से किताब ले जाता है पैसा, किताबें खरीदने के लिए। न किताबें खरीदता है, न फीस दाखिल करता है, आवारागर्दी में इधर का उधर घूमता रहता है। आज का जायका उठा लिया न, हाँ। लेकिन आज का जायका उठा करके क्या फायदा किया? कल का भविष्य खराब कर लिया न। कल बिचारे का क्या होने वाला है। बिना पढ़ा रह जाएगा, हर साल फेल होता रहेगा, बच्चों में बुद्धू और बेवकूफ समझा जाता रहेगा, सारे घर वाले उसको हिकारत की दृष्टि से देखते रहेंगे, अन्ततः अपनी खराब जिन्दगी को लेकर के किसी ऐसे बुरे लोगों की सोहबत में जा फँसेगा जहाँ पर उसका भविष्य अन्धकारमय होता हो। ये कैसे हो गया? अदूरदर्शिता के कारण से। दूरदर्शिता अगर उस बच्चे में रही होती, तो उसने ऐसे कदम न उठाए। तब उसने समझदार बच्चों के तरीके से दिन-रात मेहनत की होती, अच्छा डिवीजन ले आया होता, अच्छा डिवीजन ला करके छात्रवृत्ति प्राप्त कर ली होती, और छात्रवृत्ति प्राप्त करने के अलावा कोई ऐसा पद प्राप्त कर लिया होता जिससे कि सारी जिन्दगी खुशहाली से बीत जाती।

अदूरदर्शिता ही है न, जिसकी वजह से बच्चे की जिन्दगी खराब हो गई। अदूरदर्शिता ही तो है न, जिसकी वजह से शराबी तबाह हो गया। अदूरदर्शिता ही है न, जिसकी वजह से अपराधी ऐसा हो गया। वो दूरदर्शिता ही है जिसकी वजह से पहलवान, पहलवान बन गया; जिसकी वजह से विद्वान, विद्वान बन गया; जिसकी वजह से धनवान, धनवान बन गया। उन लोगों ने आज अपने आपको, मन को मारा, अपने आप को रोका, अपने आप को एक खास मकसद में लगाये रखा, और पूरी तरीके से, जिम्मेदारी के साथ में अपने आप को किसी खास काम में घुला दिया। घुला देने वाले, घुला देने वाले वो आदमी जो भविष्य के बारे में विचार करते हैं बहुत समझदार मालूम पड़ते हैं। आपको भविष्य के बारे में विचार करना चाहिए। आपको इस जिन्दगी का, आपका बुढ़ापा किस तरीके से शानदार बीते, इसके लिए आपको जवानी की किफायत करनी चाहिए। आपके घर की आर्थिक स्थिति भविष्य में डगमगाने न पाये इसलिए आज से आपको अपनी खिफायतसारी पर गौर करना चाहिए, और अपने घर के रहन-सहन के बारे में, घर की व्यवस्था के बारे में ठीक रखना चाहिए। बच्चे आपके भविष्य में इज्जत करें इसलिए आज आपको अपने तौर-तरीके ऐसे बना के रखने चाहिए जिससे कि बड़े होने पर जब आप कमजोर और असमर्थ हो जाएँगे, बुड्ढे हो जाएँगे तब आपके ये बच्चे जो आज आपको वो ही काम करते हुए देखते हैं तब आपके ऊपर धिक्कारने न पायें, न लानत पटकने न पाएँ। इसलिए आप अपने ढाँचे को अभी से क्यों न बदल लें।

सबसे बड़ी बात ये है कि आपको भगवान के दरबार में पेश होना पड़ेगा। इस काम से आपका बचाव नहीं हो सकता। भगवान ने, आप (जिस) जिस दिन जन्मे थे, बहुत कीमती शरीर दिया था, और इस उम्मीद से दिया था कि आप इसका ठीक इस्तेमाल करेंगे, और अपने आप का भविष्य उज्ज्वल बना देंगे, और उसकी इस शानदार दुनिया के लिए कोई सेवा करने में समर्थ हो सकेंगे। आप उसके इस विश्व उद्यान को सुरम्य और (सु) सुसंस्कृत बनाने में हिस्सा बटाएँगे। भगवान ने आपको दिया है, आप भगवान की दुनिया को देंगे। इस ख्याल से आपको जन्म दिया था। लेकिन जब आप धीरे-धीरे मौत के नजदीक जा रहे हैं और भगवान के दरबार में आपको पेश होने का मौका मिलने वाला है, तब आप जरा विचार तो कीजिए, आप क्या जबाव देंगे? आप ये मत विचार कीजिए कि भगवान जी आपसे ये पूछने वाले हैं कि आपने कितने माला का जप किया था, किन-किन तीर्थों में यात्रा की थी, क्या-क्या कर्मकाण्ड कराए थे, क्या कथा सुनी थी और क्या कही थी - ये आपकी मर्जी के ऊपर है, ये आपके अपनी मन की हिफाजत के लिए और मन को ठीक रखने के लिए है - भगवान से इनका कोई ताल्लुक नहीं है। भगवान ने तो सिर्फ एक चीज अमानत में दी थी वो जिन्दगी, और सिर्फ जिन्दगी के बारे में आपको सवाल करने वाला है।

जब आप जाएँगे तो एक प्रश्न का उत्तर आपको देना पड़ेगा, एक ही प्रश्न पूछा जाएगा। आपको जो बेशकीमती जिन्दगी मिली वो आपने कहाँ खर्च कर डाली? किन-किन कामों में खर्च कर डाली? आपको अभी से इसका जबाव तैयार कीजिए। आपके ये, ये जबाव माकूल नहीं है, कि हमारे पास पेट के कमाने के लिए इतना काम था, कुटुम्ब को बढ़ाने के लिए इतना काम था इसीलिए हम सारी जिन्दगी इस काम में लगे रहे (ऐसा) ऐसा मत कहिए। आपके हाथ बहुत बड़े हैं और आपकी अकल बहुत बड़ी है, और आपको कमाने के लिए, कमाने के लिए बहुत से साधन समाज में मिले हुए हैं। आपकी आवश्यकताएँ क्या हैं, जरा बताना। मुट्ठी भर आवश्यकता। चार रोटी आप खाते हैं - चार रोटी तो आप दो घण्टे की कमाई में पूरा कर सकते हैं। आप तीन गज कपड़ा पहनते हैं न - इसकी कितनी कीमत होती है? महीने भर में, महीने भर में कितना खर्च करते हैं? आपके व्यक्तिगत खर्च और आवश्यकताएँ बहुत कम हैं, आप फिजूलखर्चियों से बढ़ा डालें, तो इसके लिए कोई क्या कर सकता है। फिजूलखर्चियों के लिए तो कोई रास्ता है? कोई सीमा है? कोई मर्यादा है? आप चाहें जितना खर्च कर डालिए। लेकिन आपकी वास्तविक आवश्यकताएँ बहुत कम हैं।

और कुटुम्ब, कुटुम्ब का जुगाड़ करना पड़ा, कुटुम्ब को अगर (आप) अपने स्वावलम्बी बनाने और संस्कारी बनाने तक का अपना उद्देश्य सीमित रखा हो, तो (आपका) कुटुम्ब पालन करने में ज़रा भी दिक्कत नहीं पड़नी चाहिए। कुटुम्ब में से अपने ढेरों आदमी ऐसे होते हैं, जो अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। ये आपको करना चाहिए, करना चाहिए। मसलन आपकी धर्मपत्नी है। अच्छी खासी है न, स्वास्थ्य उनका अच्छा है। स्वास्थ्य अच्छा उनका है तो खाना पकाने में क्यों सारा दिन लगाये रखें? थोड़े समय तक आप सब मिल कर खाना पका सकते हैं। बाकी समय में आप इस तरीके से (उनको) शिक्षा और संस्कारिता पैदा कर सकते हैं, जिससे कि वो अपने पैरों पे खड़ी हो सकें। घर के लिए कुछ आर्थिक कमाई न कर सकतीं हों तो बचत कर सकें। खाना पकाना भी तो (ए का) एक आमदनी है, कपड़े धोना और सीना भी तो एक आमदनी है, आपके घर में साग-भाजी उगा देना भी तो आमदनी है - स्वावलम्बन हुआ न। स्वावलम्बन की दृष्टि से आप घर के कई मैम्बरों को इस लायक बना दें। बुड्ढों से भी कुछ काम करने की बात कहें, औरों से भी कुछ काम करने की बात कहें। हर आदमी एक आदमी कमाए, सब बैठ के खाएँ - ये बुरी बात है। हर आदमी को आप (स्वावलम्बी क्यों नहीं सि) स्वावलम्बन क्यों नहीं सिखा सकते? अगर आप इस तरीके से स्वावलम्बन सिखाएँ तब, तब आपके ऊपर वो बातें खतम हो जाती हैं।

आपको तो परिवार का पोषण इसलिए भारी पड़ रहा है कि आप अकेले कमा करके और सब को बैठ के खिलाना चाहते हैं, सबको निकम्मा बनाना चाहते हैं। अगर सारे कुटुम्बियों को जो छोटे बच्चों को छोड़ कर जो समर्थ व्यक्ति हैं, किसी न किसी तरीके से किसी काम में लगाये रखने की बात पर विचार कर लें, तो आपको कुटुम्ब पालने में क्या दिक्कत पड़ सकती है? कुटुम्ब परिवार आपका भारी क्यों पड़ना चाहिए? आपको पेट भरने में दिक्कत क्यों होनी चाहिए? आप औसत नागरिक, भारतीय की तरीके से अगर जिन्दगी जिएँ, और किफायतशारी से रहें, तो आप यकीन रखिए, आप थोड़े में बहुत गुजारा कर सकते हैं, और आपको सारी मुसीबतों से बड़ी आसानी के साथ में बचाव होना सम्भव है।

भगवान के काम करने के लिए तो आपको ढेरों के ढेरों समय मिलना चाहिए। आपको अगर कोई पुरानी स्थाई आमदनी नहीं है तो आठ घण्टे की मेहनत और मसक्कत करने के बाद में आपका गुजारा भली तरीके से हो जाना चाहिए। काम करने के घण्टे आठ घण्टे से ज्यादा नहीं होने चाहिए। आठ घण्टा अन्तर्राष्ट्रीय शारीरिक श्रम आजीविका के लिए निर्धारण है। अगर आदमी मेहनत और ईमानदारी के साथ काम करे, आठ घण्टे में गुजारा कर सकता है। फिर, इसके बाद में सात घण्टे सोने को मान लीजिए। सात घण्टे से ज्यादा सोने को बच्चों को भी जरूरत नहीं पड़ती, सात घण्टे फिर आपके लिए तो काफी होने चाहिए। अगर समय खराब न करें तब, सात घण्टा सोने के लिए और सात घण्टा सोने के लिए और आठ घण्टा काम करने के लिए पन्द्रह घण्टे हुए। पाँच घण्टे आप फालतू कामों के लिए रखिए। शौच, स्नान और खाने में क्या देर लगती है। एक घण्टा मानिए सवेरे का एक शाम का मान लीजिए। ये तो काम, दैनिक जरूरतों में और कौन सी हैं जरा बताना। दो ही तीन तो काम हैं। टट्टी जाना, नहाना, रोटी खाना - और कौन सा काम है बताइए। ये इन कामों में एक-एक घण्टा दो बार के लिए मान लें, दो घण्टे हो गये, तीन घण्टे और फालतू कामों के लिये रख लीजिए। कभी क्या, कभी क्या, कभी क्या। इस तरीके से पाँच घण्टे आप दैनिक कार्यों में लगाने के बाद में आपको कुल मिला करके बीस घण्टे अपने दैनिक कामों में और पारिवारिक कामों में खर्च करने के लिए काफी होने चाहिए। इसके बाद में जो आपके पास चार घण्टे बचते हैं, आप भगवान के कामों को कर सकते हैं, जिससे कि आपकी जिन्दगी सार्थक मानी जा सके। जिससे आप भगवान के दरबार में जब कभी जाएँ तो सीना तान के ये कह सकें - हमने अपनी आत्मा का कल्याण करने के लिए, और अपने परिवार का स्तर बढ़ाने के लिए, और समाज में सत्प्रवृत्तियों का सम्वर्धन करने के लिए, कोई मूल्यवान काम किए।

आप ऐसे कीजिए, भगवान के दरबार में जाने की तैयारी कीजिए। अगर आप उनको सही जबाव देने में समर्थ हो गये, तो आप विश्वास रखिए - अभी तो आपको सामान्य प्राणियों से मनुष्य का दर्जा मिला है, कल आपको महामानव का मिल सकता है, ॠषियों का दर्जा मिल सकता है, देवात्माओं का दर्जा मिल सकता है। आप स्वर्गीय जिन्दगी अभी तो मानवीय गरिमा से लाभान्वित हुए हैं, भविष्य में आपको स्वर्गीय जिन्दगी जीने का मौका मिल सकता है, आप जीवन मुक्तों (के) में गिने जा सकते हैं। आप सारे विश्व में भगवान के उत्तराधिकारी और युवराज कहलाने की परिस्थिति में पहुँच सकते हैं। ये कब पहुँच सकते हैं आप जीवन का ठीक उपयोग करना सीख पायें तब। जिन्दगी के साथ खिलवाड़ मत कीजिए, जिन्दगी को महत्त्वहीन मत मानिए, जिन्दगी को खण्डित मत कीजिए, जिन्दगी में आज का ही लाभों पे विचार मत कीजिए। भविष्य के लिए विचार कीजिए और ऐसी नीति अख्तियार कीजिए, जिससे कि आपका न केवल आज का दिन (शा) शानदार बन सके, बल्कि भविष्य (का) उज्ज्वल बनाने के लिए भी एक अच्छा-खासा द्वार खुल सके। आप ऐसा कीजिए, जीवन का महत्त्व समझिए, जीवन का सदुपयोग कीजिए। समाप्त ॥

॥ॐ शान्तिः॥