Search Results
- सही अध्यात्म जीवन में आ जाए तो गजब ढा दे - मनुष्य क्या है? भगवान् का और देवताओं का सम्मिश्रण है। देवता
- आत्मिक प्रगति का ककहरा - हैं और उसका नाम रखा है, ‘‘मनुष्य।’’ मनुष्य क्या है? मनुष्य भगवान् की नकल है। हम इसी से अंदाज लगा सकते
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 91-100 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - पत्रक 91-100 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - मनुष्य क्या है? जीवन का स्वरूप एवं लक्ष्य क्या है? जीवन
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 161-170 (गायत्री परिवार - Gayatri
Pariwar) - पत्रक 161-170 (गायत्री परिवार - Gayatri
Pariwar) - मनुष्य क्या है? इसके उत्तर में एक ही शब्द कहा जा
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 241-250 (गायत्री परिवार - Gayatri
Pariwar) - पत्रक 241-250 (गायत्री परिवार - Gayatri
Pariwar) - मनुष्य मूलतः क्या है? उसकी मूलभूत जन्मजात प्रवृत्तियाँ क्या हैं। इस
- आत्मबोध और तत्त्वबोध की साधना - मनुष्य के जीवन से बढ़ के और क्या हो सकता है? आप दूसरे प्राणियों पर नजर डालिये न। सब बिचारे किस
- शक्तिपात एवं कुण्डलिनी जागरण का तत्त्वदर्शन - मनुष्य की आकृति दिखायी पड़ी। मैं तो डर गया कि क्या बात है? भूत-प्रेत है क्या कोई? काँपते देखकर उस प्रकाश
- आध्यात्मिकता के मूल सिद्धान्त - मनुष्य के जीवन का उपयोग करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? विचार करने पर एक ही बात समझ में आई
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 111-120 (गायत्री परिवार - Gayatri
Pariwar) - पत्रक 111-120 (गायत्री परिवार - Gayatri
Pariwar) - मनुष्य के साथ आदान-प्रदान चल पड़ने पर किस पक्ष का क्या हित-अहित हो सकता है? यह विषय भी शोध प्रयोजन में
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 51-60 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - पत्रक 51-60 (गायत्री परिवार -Gayatri
Pariwar) - मनुष्यों में से समर्थों के दो-दो हाथों का उपयोग करना क्या बुरा है? इनमें से आधे हाथ ही आधा अधूरा काम
- आराधना क्यों और कैसे? - मनुष्य से बहुत ज्यादा है, आदमी का पुरुषार्थ का शरीर, क्या पुरुषार्थ है? हाथी से बड़ा पुरुषार्थ? विवेक से बड़ा पुरुषार्थ?
- विधा को समझें, विधि में न उलझें - मनुष्य होता है? कोई मनुष्य नहीं है भगवान। ये क्या है? श्रेष्ठ वृत्तियों के लिए, सत्कर्मों के लिए, सत् प्रयोजनों के
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - जो मनुष्य अनीति का प्रतिरोध नहीं कर सकता क्या वह मनुष्य कहलाने के काबिल है? (४) हमें मनुष्यता के उत्तरदायित्व का
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - (२) मनुष्य जीवन की स्थिरता एवं प्रगति का आधार क्या है? तथा उसको भुला देने से क्या हानियाँ हो सकती हैं।
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-2 - 2 - (१) मनुष्य की अल्पायु एवं अस्वस्थता का मूल कारण क्या है? (२) सम्पदायें एवं विभूतियाँ कैसे उपलब्ध होती हैं? (३) श्रम
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - (२) मनुष्य में विचारों एवं आकांक्षाओं का सृजन कैसे होता है? (३) मानवीय विकास की आधारभूत आवश्यकता क्या है? (४) प्राचीनकाल
- युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त - (२) मनुष्य में विचारों एवं आकांक्षाओं का सृजन कैसे होता है? (३) मानवीय विकास की आधारभूत आवश्यकता क्या है? (४) प्राचीनकाल
- आत्मबोध और तत्त्वबोध की साधना - रखें—मनुष्य के जीवन से बढ़ के और क्या हो सकता है?
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - सके। मनुष्य गिरता तो है ही, गिरने में क्या दिक्कत है? मन की बनावट ही ऐसी है। इसके अन्दर जन्म-जन्मान्तरों के
- अध्यात्म की तीन शिक्षाएँ - आदमी मनुष्य मात्र में भगवान का रूप देख सकता है, क्या वह धोखेबाजी कर सकता है? क्या वह जालसाजी करेगा? क्या
- मो को कहाँ ढूँढ़े बन्दे मैं तो तेरे पास रे - है और मनुष्य के जीवन से क्या किया जा सकता है? भगवान् जो कार्य स्वयं करता है, उसको मानव भी स्वयं
- भावी महाभारत - तीनों मोर्चे खुले - तीनों मोर्चे खुले - लाखों मनुष्यों का न जाने क्या से क्या हो जाता है? उससे सारे समाज में विशृंखलता पैदा हो जाती हैं। लाभ
- अध्यात्म का पहला पाठ — कर्मयोग - यह है मनुष्य का संकल्प और मनुष्य का परिश्रम। तो क्या संकल्प और परिश्रम में, विश्वास में भगवान मदद करता है?
- धर्मतंत्र की गरिमा एवं महत्ता - (हम राजनीति में क्यों नहीं जाते?) - (हम राजनीति में क्यों नहीं जाते?) - हैं कि मनुष्य के जीवन में राजनीति का क्या स्थान है?
- धर्मतंत्र की गरिमा एवं महत्ता (हम राजनीति में क्यों नहीं आते?) - हैं कि मनुष्य के जीवन में राजनीति का क्या स्थान है?
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - साधारण मनुष्य से राष्ट्रपति बने इस सफलता का रहस्य क्या है? लिंकन बोले मैं अपने जीवन की पग-पग पर परीक्षा की
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-2 - 2 - —— (१) मनुष्य की अल्पायु एवं अस्वस्थता का मूल कारण क्या है? (२) सम्पदायें एवं विभूतियाँ कैसे उपलब्ध होती हैं? (३)
- हर दिन नया जन्म, हर दिन नई मौत - मित्रो! मनुष्य के जीवन में बढ़कर और क्या हो सकता है? आप
- व्यक्तित्व का परिष्कार - जाता है। मनुष्य जब भगवान से जुड़ जाता है, तो क्या हो जाता है? वह भगवान हो जाता है। आदमी अगर
- धन का सदुपयोग - रहेगा और मनुष्य दीर्घ जीवी रहेगा। ये निपुणतादायक पदार्थ क्या है? अच्छा पौष्टिक भोजन, जिसमें अन्न, फल, दूध, तरकारियाँ, घृत इत्यादि
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - पाते? (२) मनुष्य जीवन की स्थिरता एवं प्रगति का आधार क्या है? तथा उसको भुला देने से क्या हानियाँ हो सकती
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - आप साधारण मनुष्य से राष्ट्रपति बने इस सफलता का रहस्य क्या है? लिंकन बोले मैं अपने जीवन की पग-पग पर परीक्षा
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-2 - 2 - चाहिए? (४) मनुष्यता एवं देश भक्ति का सहज प्रमाण क्या है? (५) मतभेद सुलझाने का सही तरीका क्या है? (६) उदात्त
- विधा को समझें, विधि में न उलझें - है? मनुष्य होता है? कोई मनुष्य नहीं है भगवान। ये क्या है? श्रेष्ठ वृत्तियों के लिए, सत्कर्मों के लिए, सत् प्रयोजनों
- अपने भीतर के जखीरे को उभारने की कला है अध्यात्म - क्या मनुष्य का जीवन बेहतरीन कामों के लिए नहीं मिला है? एक छोटा सा विद्यार्थी जिसके माँ-बाप दोनों मर चुके थे,
- बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 41-50 - पत्रक 41-50 - क्या मनुष्य के लिए भी प्रकृति यही न्याय नीति बरतने वाली है?
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - हैं? (३) जो मनुष्य अनीति का प्रतिरोध नहीं कर सकता क्या वह मनुष्य कहलाने के काबिल है? (४) हमें मनुष्यता के
- आत्मिक उन्नति का राजमार्ग—विद्या - देवियो,भाइयो! मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता क्या है? ज्ञान। ज्ञान न हो