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- अगर जो आदमी साफ कपड़ा नहीं पहन सकता, मानना चाहिए सभ्य नहीं है, और जिसका मकान साफ नहीं है वह सभ्य नहीं है, उसको भी किताबों को यथा स्थान नहीं रखता, जिस घर में चप्पलें दूसरी चीजें, बर्तन साफ-साफ नहीं रखे जाते वह सभ्य नहीं है, यह मानना चाहिए?... सभ्यता का शिक्षण उनको सफाई से शुरू करना चाहिए, और सफाई से शुरू करके गाँव में ऐसे व्यवस्था बनानी चाहि...
- अगर ये सब न हों, तो कोई लड़की कैसे ब्याह करने को तैयार हो जाएगी?... दीक्षा को एक तरह का आध्यात्मिक विवाह ही कहते हैं। आध्यात्मिक विवाह करना हर आदमी के वश की बात नहीं है...
- अध्यापन हो तो क्या?... मजदूरी हो तो क्या? कोई भी काम क्यों न हो, अगर मनुष्य ऊँचे दृष्टिकोण से करे, अच्छे दृष्टिकोण से करे, ...
- अपनी रोटी कमा ले, इससे क्या बना?... अपनी रोटी तो कोई भी कमा सकता है। अपनी रोटी तो भेड़िया भी कमा लेता है। अपनी रोटी तो कुत्ता भी कमा लेता...
- अपनी रोटी कोई ज्यादा कमा ले और पैसे खा ले और ज्यादा खुराक इकट्ठी कर ले और ज्यादा मौज-मजा से रह ले, यह क्या जीवन का लाभ हुआ और क्या समाज के लिए इसका अनुदान मिला?... सिर्फ एक आदमी की बढ़ोत्तरी का कुछ मतलब नहीं निकलता। राई बराबर भी उससे फायदा नहीं होता।सारा समाज गरीब ...
- अपने पेट को ही खिला देगा क्या?... क्या समाज का हक कुछ भी नहीं है? समाज का हक है आदमी की आमदनी के ऊपर। सरकार टैक्स लेती है वो भी समाज क...
- अमीर आदमी रेशमी कपड़े पहन सकता है और गरीब आदमी मोटे-झोटे कपड़े पहन सकता है और कौन खास बात है?... आदमी के स्तर पर कुछ फर्क नहीं जाता है। एक कानी कौड़ी के बराबर भी। मनुष्य का स्तर जब आदमी का बढ़ता है, ...
- अमीर हो तो क्या?... गरीबी से क्या बनता-बिगड़ता है? अमीरी में गेहूँ की रोटी खा सकता है, गरीबी में मक्का की रोटी खा सकता है...
- आदमी अपने को कैसा भूला हुआ है?... अपने आप को शरीर समझता है, आत्मा अपने आप को नहीं समझता। उसकी याद दिलाने के लिए ये सब कुछ है और इसमें ...
- आदमी एक शरीर से क्यों जुड़ा हुआ रहेगा?... सभी शरीरों में अपनी आत्मा को समाया हुआ क्यों नहीं देखे। सारे समाज को एक कुटुम्ब क्यों नहीं माने? चन्...
- आदमी का सिर काट डालने से क्या आदमी बदल जाएगा?... मरने के बाद भूत हो जाएगा, पलीत हो जाएगा और फिर तंग करेगा, मक्कारी करेगा। इस तरीके से मार डालने से क्...
- आदमी की मेहनत क्या रही?... न कोई मेहनत, परिश्रम करके फोकट में ही पैसा मिल जाता है, तो फिर परिश्रम को साथ-साथ में क्यों जोड़ा जाए...
- आप चाहें कि हम अपनी बीवी को डराएँ, धमकाएँ तो ये कैसे हो सकता हैं?... इंसाफ को मानेंगे, आपको कतई नहीं मानेंगे। ये संघर्ष माता के विरुद्ध भी होना चाहिए और पिता के विरुद्ध ...
- आपने मजदूरी करने के लिए प्रतिज्ञा की है, पूरी मजदूरी क्यों नहीं करें?... पूरी मजदूरी का अर्थ है—पसीने की कमाई खानी चाहिए और हराम का पैसा नहीं ही खाना चाहिए। आज कल जुआ खेलने ...
- इतना भी नहीं देगा क्या समाज के लिए?... सब बेटे को ही खिला देगा क्या? अपने पेट को ही खिला देगा क्या? क्या समाज का हक कुछ भी नहीं है? समाज का...
- इनका काम भी जीवन में कितना आता है?... जरा सा काम आता है, उतनी जानकारियाँ एक-दो घण्टे में रोज दे देते थे और पढ़ाई चलती थी। बाकी पढ़ाई उस वक्त...
- इस तरह के वाहियात खेल जो जुआरी के तरीके से, जो केवल मनोरंजन के लिए किए जाते हैं, उनसे क्या फायदा?... इसी तरीके से जो आजकल रेडियो और ट्रांजिस्टर इतने सस्ते और सुलभ हो गये हैं, ये बच्चों को बहुत आकर्षित ...
- इस तरीके से बेअकली और बेवकूफी का कोई अन्त है क्या?... कुछ अन्त नहीं है।...
- इस तरीके से बेअकली और बेवकूफी हमारे रोम-रोम में इस बुरी तरीके से छा गई है कि मनुष्यों को मैं क्या कहूँ?... मैं उसको जानवर ही कह सकता हूँ।मनुष्य को जरूरत है समझदारी कीआज मनुष्य एक ऐसा जानवर हो गया है, जिसको स...
- इस तरीके से मार डालने से क्या हो सकता है?... फिर सिर और दिमागों को बदलने की बात मेरी समझ में आई कि आलंकारिक रूप परशुराम भगवान का अवतार हुआ था। इस...
- इसका मूल्यांकन बहुत दिन पीछे होगा, जबकि लोग समझेंगे कि गलत दिशा में जाने वाले जनसमूह को सही दिशा में लाने के लिए जो मोड़ दिया गया, उस मोड़ को देने का श्रेय किसका है और किसने ऐसा मोड़ दिया?... यह मोड़ मानव जाति की महती सेवा है, ऐतिहासिक सेवा है।युगनिर्माण योजना द्वारा अपने ज्ञानयज्ञ के माध्यम ...
- इसका शिक्षण किया जाए?... यह शिक्षण करना मानव जाति की, समाज की सबसे बड़ी सेवा है।साथियो! अपने युगनिर्माण योजना अपने युग-परिवर्त...
- इसके लिए ये कार्य का शिक्षण करने के लिए जिन संस्थाओं की आवश्यकता है, उन संस्थाओं का नाम व्यायामशाला नहीं हो सकता क्या?... हाँ हो सकता है।सर्वोपयोगी व्यायामशालाव्यायामशाला, इसमें जरूरी नहीं है कि दण्ड बैठक ही लगाया जाय अनेक...
- इसमें कौन लाभ मिलता है?... गेंद खेली जाय समझ में आता है, क्रिकेट खेल लिया, फुटबॉल खेल लिया समझ में आता है। इससे व्यायाम होता है...
- इससे क्या बनने वाला है?... चलता-फिरता पुस्तकालयमित्रो! आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि लोकरुचि ज्ञान की ओर से जो अस्त-व्यस्त हो गई...
- इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है?... सन्तान नहीं है, तो आप अकेले हैं। मियाँ-बीबी दो आदमी रहिए और अपना बचा हुआ पैसा समाज के लिए लगाइए। खुश...
- इसी तरीके से नैतिक चीजों के बारे में बेअकली का अन्त है क्या?... नैतिक मूल्य गिरे हैंसामाजिक कुरीतियों को कहाँ तक वहन किया जाए और सामाजिक कुरीतियों को वहन करने के च...
- इसी तरीके से बच्चों को किस तरीके से बनाया जाना है?... उनको सुयोग्य बनाया जाना है या बुरा। उनको सुसंस्कृत बनाया जाना है या कुसंस्कारी। इसके लिए केवल वाणी क...
- उनकी बात माना जाए क्या?... सफेद बाल वाला कोई समझदार होता है क्या? भेड़ के बाल सफेद होते हैं तो कोई भेड़ बूढ़ी होती है क्या, बुजुर्...
- उनके अन्दर ये गुणों की विशेषता नहीं है क्या?... हम अपने देश की हिफाजत नहीं कर सके, अपनी आजादी की रक्षा नहीं कर सके। वो सात समुद्र पार करके आये।...
- उनमें सरसता के भाव रखे, तो इसमें क्या बुरा है?... काम वासना की बात सोचे, ये क्या बात है? स्त्री है, इसका मतलब कि ये सिर्फ काम-वासना के ही लिए है क्या?...
- उनसे निपटा कैसे जाए?... समझाते हैं उनको तो हमसे भी ज्यादा वो दूसरों को समझाते हैं। ऐसे लोगों को समझाने से क्या बात बनेगी? ऐस...
- उन्नति का पथ कैसे खुलने वाला है?... इसीलिए विद्या इसलिए नहीं है कि हम पास हो जायें, डिवीजन ले आयें और खेलकूद पर प्रभुत्व बना लें, बल्कि ...
- उस घर में आदमी जिएँगे कैसे?... जिस तरीके से शरीर की भूख होती है, उसी तरीके से मन की भी भूख होती है और आत्मा की भी भूख होती है। मन औ...
- उसका रहन-सहन क्या होता है?... उसको कैसे सुधारा जाय? वहाँ पढ़ाई का मूल उद्देश्य यही था। और जो मामूली ज्ञान है, उसको तो लोग वैसे ही प...
- उसका सोचने का तरीका कितना उत्कृष्ट हो सकता है कि मैं उससे क्या कहूँ?... आदमी का प्रभाव इतना ज्यादा हो सकता है और आदमी के अन्तरंग में इतनी शान्ति हो सकती है कि उस शान्ति को ...
- उसके विचार करने का क्रम क्या है?... काम करने की शैली क्या है? उसका रहन-सहन क्या होता है? उसको कैसे सुधारा जाय? वहाँ पढ़ाई का मूल उद्देश्य...
- उसको कैसे सुधारा जाय?... वहाँ पढ़ाई का मूल उद्देश्य यही था। और जो मामूली ज्ञान है, उसको तो लोग वैसे ही पढ़ा देते थे। एक-दो घण्ट...
- उसे आदमी की प्रशंसा से क्या मतलब?... निन्दा से क्या मतलब? पूजा से क्या मतलब है? गाली देने से क्या मतलब है? लेकिन जब मैंने ये विचार किया क...
- उसे क्यों खर्च करना चाहिए?... पुलिस के पास या फौज के पास बहुत सारी बन्दूकें और कारतूसें होती हैं वे इसलिए थोड़े ही उसके पास होती है...
- ऐसा न होता, तो जो अन्य कीड़े और मकोड़ों को, जीव और जन्तुओं को सुख-सुविधाएँ दी थीं, उससे ज्यादा मनुष्यों को क्यों दी होतीं?... मनुष्यों को बहुत सुविधाएँ दी गयी हैं। मनुष्यों को बोलना आता है, मनुष्यों को पढ़ना आता है, लिखना आता ह...
- ऐसा सन्त कहाँ से आए जो सबको ठीक कर दे?... ऋषियों ने बहुतों को समझाया, परन्तु उनमें से कुछ ही समझ सके। बाकी दुष्टों-दुराचारियों को तो उनके हिसा...
- ऐसे लोगों को समझाने से क्या बात बनेगी?... ऐसे जड़ लोग बातों से समझ नहीं सकते।अनीति का प्रतिरोध जरूरीफिर किस तरीके से क्या किया जाए? रचनात्मक का...
- ऐसे-वैसे कहने से क्या काम चलेगा?... हमको जो कुछ भी बालकों को बनाना है, घर का वातावरण ठीक वैसा ही बनाया जाना चाहिए। इसके लिए अपने आपको ढा...
- और ईश्वर का भजन क्या हो सकता है?... आत्म चिन्तन? आत्म चिन्तन और आत्मशोधन और आत्म-निर्माण और आत्म विकास के लिए आदमी एकान्त में बैठता है। ...
- और जो गोबर, जानवरों का गोबर, ऐसे ही फेंक दिया जाता है, धूप में डाल दिया जाता है, कण्डे बनाकर जला दिये जाते है, राष्ट्र के सोने और हीरे जैसे कीमती चीज को नष्ट कर दिया जाता है, इसके लिए समझाया जाना चाहिए, छोटे-छोटे गढ्ढे बनाये जायें, गढ्ढों में जानवरों का गोबर जमा किया जाय, उसके ऊपर कम्पोष्ट की विधि से बढ़िया खाद बनायी जाय, जो सोने के बराबर है और सोना उगा सकता है, हमारे खेतों में गोबर जहाँ का तहाँ पड़ा रहता है, गली-गली, मुहल्ले-मुहल्ले दरवाजे-दरवाजे पर कीचड़ फैलाता रहता है, वहाँ एक स्थान बनाया जाये, क्या यह सेवा नहीं है?... हाँ, यह सेवा है और मनुष्य जो अपनी टट्टी जहाँ-तहाँ फेंकते रहते हैं, और जहाँ-तहाँ गन्दगी करते रहते हैं...
- और जो पाप अब तक हम करते रहे हैं?... उनमें से एक पाप को छोड़ ही देना चाहिए।शारीरिक पापों में मैं हमेशा ऐसे तीन पापों को प्रमुखता देता रहा ...
- और ये उसे सिखाया जाना चाहिए कि जीवन श्रेष्ठ तरीके से कैसे जीया जा सकता है, और समाज को सुव्यवस्थित कैसे बनाया जा सकता है?... समाज अर्थात भगवान। भगवान की पूजा कैसे की जा सकती है इसका एक समग्र शिक्षण करने के लिए ज्ञान-यज्ञ किया...
- कई बार मैं विचार करता था कि सिर काट डालने का क्या मतलब है?... आदमी का सिर काट डालने से क्या आदमी बदल जाएगा? मरने के बाद भूत हो जाएगा, पलीत हो जाएगा और फिर तंग करे...
- कत्ल करने के लिए धर्म से क्या ताल्लुक है?... ये तो घोर नृशंस पाप है, पिशाचपन है?ये पिशाचपन हमारे हिन्दू समाज में जहाँ-तहाँ फैला हुआ पड़ा है। हमको ...
- कर्म कैसे बने?... उसके विचार करने का क्रम क्या है? काम करने की शैली क्या है? उसका रहन-सहन क्या होता है? उसको कैसे सुधा...
- कर्म से क्यों नहीं?... कर्म से आदमी ब्राह्मण होना चाहिए, कर्म से शूद्र होना चाहिए। लेकिन लोग जन्म से मानने लगे हैं। ये कैसी...
- काम करने की शैली क्या है?... उसका रहन-सहन क्या होता है? उसको कैसे सुधारा जाय? वहाँ पढ़ाई का मूल उद्देश्य यही था। और जो मामूली ज्ञा...
- काम वासना की बात सोचे, ये क्या बात है?... स्त्री है, इसका मतलब कि ये सिर्फ काम-वासना के ही लिए है क्या? हमारी माँ भी तो स्त्री है, बहिन भी तो ...
- किताब में से एक-एक पन्ना पढ़ लिया और गैस पेपर खरीद कर ले आये, उसमें से थोड़े-से सवाल यहाँ से सीख लिए, थोड़े-से सवाल वहाँ से सीख लिए और जब काम पड़ेगा तब?... जब किसी ऑफिस का इंचार्ज बनना पड़ेगा, और जब कोई बड़ा काम हाथ में आयेगा और जब अच्छे अनुवाद करने पड़ेंगे, ...
- किसी को कम क्यों देगा?... कोई न्यायशील पिता—सामान्य मनुष्य तक ऐसा नहीं कर सकता, तो भगवान् किस तरीके से ऐसा कर सकता है? विशेष अ...
- किसी को ज्यादा क्यों देगा?... किसी को कम क्यों देगा? कोई न्यायशील पिता—सामान्य मनुष्य तक ऐसा नहीं कर सकता, तो भगवान् किस तरीके से ...
- किसी भी जीव के साथ में पक्षपात करे और किसी से न करे, ये कैसे हो सकता है?... सारी की सारी योनियाँ और सभी जीव भगवान् को समान रूप से प्यारे थे। क्या कीड़े-मकोड़े क्या मनुष्य? सभी तो...
- कुलदेवी कहाँ रहती है तुम्हारी?... २००० मील दूर रहती है। वहाँ २००० मील दूर क्या करोगे? बच्चे का मुण्डन कराने ले जाएँगे। फिर क्या हो जाए...
- कोई चीज है इसमें?... कोई बात है? हमारी कुलदेवी है और कुलदेवी पर हमारे बच्चे का मुण्डन होगा। कुलदेवी कहाँ रहती है तुम्हारी...
- कोई न्यायशील पिता—सामान्य मनुष्य तक ऐसा नहीं कर सकता, तो भगवान् किस तरीके से ऐसा कर सकता है?... विशेष अनुदान, विशेष दायित्व भगवान् ने मनुष्य के साथ ऐसा कोई पक्षपात नहीं किया है, बल्कि उसे अमानत के...
- कोई पिता अपने बालकों के साथ क्यों पक्षपात करेगा?... किसी को ज्यादा क्यों देगा? किसी को कम क्यों देगा? कोई न्यायशील पिता—सामान्य मनुष्य तक ऐसा नहीं कर सक...
- कोई बात है?... कोई चीज है इसमें? कोई बात है? हमारी कुलदेवी है और कुलदेवी पर हमारे बच्चे का मुण्डन होगा। कुलदेवी कहा...
- कोई सामान्य मनुष्य महेश कैसे हो सकता है?... इतनी जो महत्ता और महिमा बताई गई है, वह अन्तरंग में बैठे हुए उस भगवान् के लिए है। सद्गुरु शब्द केवल भ...
- कोई सामान्य मनुष्य विष्णु कैसे हो सकता है?... कोई सामान्य मनुष्य महेश कैसे हो सकता है? इतनी जो महत्ता और महिमा बताई गई है, वह अन्तरंग में बैठे हुए...
- क्या करेगी देवी?... बालों को खाएगी? रोटी नहीं खाती? नहीं, बाल खाती है। बाल नहीं खिलाया तो? ये देवी बीमार कर देगी और बच्च...
- क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं किया जाना चाहिए, कौन सी दिशा गलत है और कौन सही है?... इसका शिक्षण किया जाए? यह शिक्षण करना मानव जाति की, समाज की सबसे बड़ी सेवा है।साथियो! अपने युगनिर्माण ...
- क्या किया, क्या नहीं किया?... लोग इसे कोई जादू कहते हैं और चमत्कार, देवता की सिद्धि कहते हैं, मैं कहता हूँ कोई सिद्धि नहीं है।...
- क्या कीड़े-मकोड़े क्या मनुष्य?... सभी तो उसके बालक हैं।...
- क्या मतलब होता है देवी के लिए काटने का?... धर्म होता है? देवी खून पीती है? देवी कभी खून नहीं पी सकती। जो देवी खून पीती हैं वो देवी कैसे हो सकती...
- क्या शर्म की बात है?... अमीर आदमी रेशमी कपड़े पहन सकता है और गरीब आदमी मोटे-झोटे कपड़े पहन सकता है और कौन खास बात है? आदमी के ...
- क्या समाज का हक कुछ भी नहीं है?... समाज का हक है आदमी की आमदनी के ऊपर। सरकार टैक्स लेती है वो भी समाज का हक है। हर मनुष्य अपनी स्वेच्छा...
- क्या हम काम-वासना के भाव रखते हैं?... स्त्री-पुरुष के बीच एक काम-वासना का ही रिश्ता है क्या? नहीं, ये बहुत बुरी बात है। दिमाग में काम-वासन...
- खजाने में अगर लाखों रुपये रखे हों, तो खजांची उन्हें कैसे खर्च कर सकता है?... उसे क्यों खर्च करना चाहिए? पुलिस के पास या फौज के पास बहुत सारी बन्दूकें और कारतूसें होती हैं वे इसल...
- खून पीने को क्या स्थान है?... कत्ल करने के लिए धर्म से क्या ताल्लुक है? ये तो घोर नृशंस पाप है, पिशाचपन है?ये पिशाचपन हमारे हिन्दू...
- खेलकूद हम खेलें बेशक स्वास्थ्य की दृष्टि से, लेकिन ऐसे खेलकूद नहीं होने चाहिए, जो समय की बरबादी करते हों—जैसे ताश खेलना, शतरंज खेलना, चौपड़ खेलना, इससे क्या मिलता है?... इसमें कौन लाभ मिलता है? गेंद खेली जाय समझ में आता है, क्रिकेट खेल लिया, फुटबॉल खेल लिया समझ में आता ...
- गरीब रहने से और कम खर्च मिलने से हमको कर्तव्य को छोड़ देना चाहिए, ये क्या बात?... । कर्तव्य! कर्तव्य को पूरा करना अलग बात है। वह हमारी आध्यात्मिक, नैतिक, राष्ट्रीय और नागरिक जिम्मेदा...
- गरीब हो तो क्या?... अमीर हो तो क्या? गरीबी से क्या बनता-बिगड़ता है? अमीरी में गेहूँ की रोटी खा सकता है, गरीबी में मक्का क...
- गरीबी से क्या बनता-बिगड़ता है?... अमीरी में गेहूँ की रोटी खा सकता है, गरीबी में मक्का की रोटी खा सकता है। क्या शर्म की बात है? अमीर आद...
- गाली देने से क्या मतलब है?... लेकिन जब मैंने ये विचार किया कि पूजा-पाठ से लेकर धर्म और अध्यात्म तक का सारा खाँचा और ढाँचा किस वजह ...
- चन्द आदमियों को ही कुटुम्ब क्यों माने?... इस तरीके से ये संकीर्णता की भावना को मोह कहते हैं और ये काम, क्रोध, लोभ और मोह मानसिक विकार हैं और य...
- चाहे जहाँ इकट्ठे बैठे हों, उनसे प्रार्थना करनी चाहिए कि आपके पास दो-चार मिनट का समय हो, तो एक बात आपको सुना दूँ क्या?... अगर वे कहें कि सुनाइए। तो एक विज्ञप्ति सुना दीजिए। दस मिनट में यह खत्म हो जाती है। यह विज्ञप्तियाँ ब...
- चौबीस घण्टे रास्ता कैसे बता सकता है कोई गुरु?... ॐ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णुः, गुरुरेव महेश्वरः ......... में जो बात बताई है, वह मनुष्यों के ऊपर कै...
- जब आपने जिम्मेदारी उठाई है, कसम खाई है, शपथ ली है और आपने जिम्मेदारी वहन की है, तो फिर आप गड़बड़ क्यों फैलाते हैं?... गड़बड़ नहीं फैलाई जानी चाहिए। किसी वर्ग को नहीं फैलानी चाहिए, खास तौर से अध्यापकों को। क्योंकि माँ और ...
- जब मनुष्य इस जिम्मेदारी को समझ ले और ये समझ ले कि ‘मैं क्यों पैदा हुआ हूँ, और यदि मैं पैदा हुआ हूँ?... तो मुझे अब क्या करना चाहिए?’ यह बात अगर समझ में आ जाए, तो समझना चाहिए कि इस आदमी का नाम मनुष्य है और...
- जाने क्या से क्या खा जाती हैं?... बस इधर से उधर, उधर से इधर मारे-मारे लोग डोलते हैं यहाँ से वहाँ। न उसमें अकल, न कोई विवेक। हम देखते ...
- जिन दिनों में बौद्ध धर्म का बहुत विस्तार था जापान में और बौद्ध धर्म के प्रति बहुत निष्ठा थी, तब एक बाहर के आने वाले व्यक्ति ने बौद्ध बालक से ये पूछा कि अगर तुम्हारे देश पर बुद्ध भगवान हमला करें और हिन्दुस्तान से हिन्दुस्तानियों को लेकर के जापान के ऊपर चढ़ाई करें; तो आप क्या करेंगे?... तो उन्होंने कहा हम बुद्ध हैं हम बौद्ध हैं, धर्म के सिद्धान्तों को मानते हैं, हम बौद्ध धर्म को मानते ...
- जिस कन्या को पिता दे रहा है, उससे बड़ा अनुदान और क्या हो सकता है?... नहीं साहब, उसके साथ कुछ और लाइए। क्यों लायें? बेटी हम दे रहे हैं, तुम लाओ। बेटे वाले को बेटी वालों क...
- जिस घर में चौका न हो, रोटी का इन्तजाम न हो, आटा न हो, दाल न हो, वह कैसा घर?... उस घर में आदमी जिएँगे कैसे? जिस तरीके से शरीर की भूख होती है, उसी तरीके से मन की भी भूख होती है और आ...
- जो देवी खून पीती हैं वो देवी कैसे हो सकती हैं?... वो देवी नहीं कही जा सकती। वो पिशाचिन और चुड़ैल ही कही जा सकती हैं और चुड़ैल और पिशाचिन को धर्म में क...
- ज्ञान अगर न हो, विचार न हो तो आगे वाले कदम कैसे उठाएँ जा सकते हैं?... इसलिए पहला ज्ञानयज्ञ का परिचय बताया जा चुका।...
- तो फिर आपने क्यों की थी नौकरी?... पहले ही देख लेते कि यह काम कम वेतन का है तो हम दूसरा काम करेंगे। जब आपने जिम्मेदारी उठाई है, कसम खाई...
- तो मुझे अब क्या करना चाहिए?... ’ यह बात अगर समझ में आ जाए, तो समझना चाहिए कि इस आदमी का नाम मनुष्य है और इसके भीतर मनुष्यता का उदय ...
- दुबारा जन्म क्या है?... नर-पशु के जीवन से नर-नारायण के जीवन की भूमिका में प्रवेश करना। यही तो दूसरा जन्म है और ये दूसरा जन्म...
- दूसरे शौक-मौज करने के लिए क्या यही वक्त रह गया है?... यह नींव, नींव डालने का यह वक्त है। जीवन की फाउण्डेशन मजबूत करने का यह वक्त है—विद्यार्थी जीवन। विद्य...
- देवी खून पीती है?... देवी कभी खून नहीं पी सकती। जो देवी खून पीती हैं वो देवी कैसे हो सकती हैं? वो देवी नहीं कही जा सकती। ...
- धर्म होता है?... देवी खून पीती है? देवी कभी खून नहीं पी सकती। जो देवी खून पीती हैं वो देवी कैसे हो सकती हैं? वो देवी ...
- न कोई मेहनत, परिश्रम करके फोकट में ही पैसा मिल जाता है, तो फिर परिश्रम को साथ-साथ में क्यों जोड़ा जाए?... परिश्रम का मतलब ही तो पैसा होता है और पैसा किसे कहते हैं? आदमी की शारीरिक और मानसिक मेहनत का नाम पैस...
- निन्दा से क्या मतलब?... पूजा से क्या मतलब है? गाली देने से क्या मतलब है? लेकिन जब मैंने ये विचार किया कि पूजा-पाठ से लेकर धर...
- पता नहीं किताबी आदमी क्या होने वाला है?... कुछ भी तो होने वाला नहीं है। उन्नति का पथ कैसे खुलने वाला है?इसीलिए विद्या इसलिए नहीं है कि हम पास ह...
- पर हम क्या कर सकते हैं?... हमारे यहाँ तो ऐसा ही होता रहा है।...
- परिश्रम का मतलब ही तो पैसा होता है और पैसा किसे कहते हैं?... आदमी की शारीरिक और मानसिक मेहनत का नाम पैसा है। बात ठीक है, यहाँ तक अर्थ सिद्धान्त सही है। लेकिन जो ...
- पहले जमाना अलग था, उस जमाने में अध्यापक जितना ध्यान पढ़ाई-लिखाई पर देते थे, उससे सौ गुना ध्यान इस पर देते थे कि जो बच्चे हमारे यहाँ पढ़ने के लिए आते हैं, उन पढ़ने वाले बालकों का संस्कार कैसे बने?... स्वभाव कैसे बने? कर्म कैसे बने? उसके विचार करने का क्रम क्या है? काम करने की शैली क्या है? उसका रहन-...
- पुरुष हैं तो क्या?... इनसान तो हैं। इनसान, इनसान के प्रति अच्छे भाव रखे। उनमें सरसता के भाव रखे, तो इसमें क्या बुरा है? का...
- पुरुषों को क्यों पर्दे में नहीं रहना चाहिए?... नहीं, स्त्रियों के सिर की रक्षा की जानी चाहिए। फिर पुरुषों के सिर की रक्षा क्यों नहीं की जानी चाहिए?...
- पूजा से क्या मतलब है?... गाली देने से क्या मतलब है? लेकिन जब मैंने ये विचार किया कि पूजा-पाठ से लेकर धर्म और अध्यात्म तक का स...
- पैसा है तो इसका क्या करें?... समाज के सामने ढेर लगी समस्याओं का हल किस तरीके से करें, कुछ समझ में नहीं आता। ऐसी बेअकली की अवस्था क...
- प्रकृति का मुकाबला करने तक की शक्ति नहीं है और प्रकृति को अपने वश में करने की शक्ति कहाँ?... ऐसा चिन्तन और ऐसा मन, ऐसी विशेषताएँ और ऐसी विभूतियाँ और ऐसी सिद्धियाँ जो मनुष्यों को मिली हैं, उसे म...
- प्रत्येक बच्चे को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमको अपने शरीर की रक्षा कैसे करनी चाहिए और बुरी आदतों से कैसे बचना चाहिए?... सारे का सारा समय और मनोयोग हमको अध्ययन में लगाना चाहिए, पढ़ने में लगाना चाहिए।...
- पढ़े आदमी रहे होते तो अकल नहीं होती क्या?... जिन्दगी के बारे में कुछ समझ नहीं होती क्या, जिन्दगी के बारे में जरा भी समझ नहीं है इनको। बिना पढ़ा-लि...
- फला-फूला नहीं तो बोने का लाभ क्या रह गया?... हमको जो अच्छे विचार और श्रेष्ठ विचार और जीवन को ऊँचा उठाने वाले विचार लोगों में विस्तृत करने चाहिए औ...
- फिर आदमी की परिश्रम की कीमत क्या रही?... आदमी की मेहनत क्या रही? न कोई मेहनत, परिश्रम करके फोकट में ही पैसा मिल जाता है, तो फिर परिश्रम को सा...
- फिर क्या हुआ?... भगवान ने अवतार लिया था और वह परशुराम जी का अवतार था। परशुराम जी के अवतार ने हाथ में एक कुल्हाड़ा लिया...
- फिर क्या हो जाएगा?... देवी को बालों को चढ़ा देंगे। क्या करेगी देवी? बालों को खाएगी? रोटी नहीं खाती? नहीं, बाल खाती है। बाल ...
- फिर पुरुषों के सिर की रक्षा क्यों नहीं की जानी चाहिए?... पुरुषों के सिर की रक्षा की जानी चाहिए। उनको भी घूँघटों में बन्द किया जाना चाहिए। उनको भी घर में बन्...
- फिर हमारा क्यों करेंगे ये लोग समर्थन?... यही बात पण्डावाद ने भी कोशिश की, कि लोग समझदार न होने पाएँ।...
- बताइए, इसमें क्या हर्ज की बात है?... नहीं साहब! हमारे बच्चा नहीं होता, हम तो दुखी हैं। हमारी मनोकामना पूर्ण हो जाए तो अच्छा है। हमारे बच्...
- बन्दूक किसी के पास हो और बारूद न हो, कारतूस न हो, तो क्या काम चलेगा?... हमारे घरों में घरेलू पुस्तकालय होना ही चाहिए। यह बहुत बड़ी सम्पत्ति के बराबर है। किसी घर में जेवर है ...
- बात-बात में गुस्से की क्या बात है?... काम, क्रोध, लोभ और केवल एक कुटुम्ब से, एक घर से, एक शरीर से अपनापन जोड़ लेना, इसको मोह कहते हैं। आदमी...
- बाल नहीं खिलाया तो?... ये देवी बीमार कर देगी और बच्चे को मार डालेगी। देवी है कि चुड़ैल बैठी है।...
- बालों को खाएगी?... रोटी नहीं खाती? नहीं, बाल खाती है। बाल नहीं खिलाया तो? ये देवी बीमार कर देगी और बच्चे को मार डालेगी।...
- बिना परिश्रम किये आप क्यों खायें?... आपने मजदूरी करने के लिए प्रतिज्ञा की है, पूरी मजदूरी क्यों नहीं करें? पूरी मजदूरी का अर्थ है—पसीने क...
- बीबी का पालन करना, बच्चे पैदा करना और बीबी की रखवाली करना हरेक का काम है क्या?... नहीं, हरेक का काम नहीं है।व्यक्तिगत रूप से (गुरु बनकर) दीक्षा देना भी सम्भव है लेकिन वह हर आदमी का क...
- बेहोश हो गये तब उसकी जेब में जो दो हजार रुपये के नोट थे, तब शराबखाने के मालिक ने उस पैसे को गिना और सँभाल कर रखा और सँभालकर रखने के बाद में जितने पैसे की शराब पी थी, ठीक बिलकुल नये काने-कौड़ी का फर्क नहीं किया, उतना ही बिल उसकी जेब में डाल दिया और बाकी पैसा जेब में से काट करके बाकी पैसों समेत टैक्सी मँगाई और टैक्सी किराये करके उसे भेज दिया, क्या मजाल कि एक कानी कौड़ी का फर्क पड़े?... इस तरह की नैतिकता की शिक्षा जिन देशों में होती है, वास्तव में वही देश इस लायक होते हैं, जो अपने भीतर...
- भगवान् पर विश्वास कर लिये होते, तो बात-बात में रोते-चिल्लाते, डरते और कमजोर होते क्यों?... हानि जरा-सी हो जाती और आपे से बाहर हो जाते हैं, ये क्यों होता? भगवान् पर विश्वास करने वाला ऐसा नहीं ...
- भगवान् पर विश्वास करते, तब उनको पाप करने की इच्छा क्यों होती?... भगवान् पर विश्वास कर लिये होते, तो बात-बात में रोते-चिल्लाते, डरते और कमजोर होते क्यों? हानि जरा-सी ...
- भेड़ के बाल सफेद होते हैं तो कोई भेड़ बूढ़ी होती है क्या, बुजुर्ग होती है क्या, कोई गुरु होती है क्या?... सफेद बाल वाले बुड्ढे ऐसे बेवकूफ और अहमक पाए गये हैं, जिनको दुनिया का जरा भी ज्ञान नहीं है। वे उलटी ब...
- मजदूरी हो तो क्या?... कोई भी काम क्यों न हो, अगर मनुष्य ऊँचे दृष्टिकोण से करे, अच्छे दृष्टिकोण से करे, तो वह छोटा सा काम—छ...
- मनुष्य की जिम्मेदारियाँ क्या हैं?... मनुष्य की वे जिम्मेदारियाँ जो जीवात्मा की जिम्मेदारी है। भगवान् के उद्देश्यों को लेकर के मनुष्य को प...
- मनुष्य ने उस पर विश्वास किया कि नहीं, जो सुना था?... जो सुना था, उस पर विश्वास किया तो उसके लिए कुछ त्याग करने के लिए, कुछ कष्ट सहने के लिए, कुछ आगे कदम ...
- मनुष्य में उसकी सम्वेदना उत्पन्न हुई कि नहीं?... मनुष्य ने उस पर विश्वास किया कि नहीं, जो सुना था? जो सुना था, उस पर विश्वास किया तो उसके लिए कुछ त्य...
- मनुष्य शूद्रता की सीमा से निकल करके जिस दिन ये प्रतिज्ञा लेता है, व्रत लेता है कि मैं आज से मनुष्य होकर के जिऊँगा; उस दिन का समारोह?... आत्मा और परमात्मा के साथ मिलने का विवाह जैसा समारोह होता है। उस दिन को मनुष्य जीवन में प्रवेश करने व...
- मामूली-सा आदमी क्यों न हो, लेकिन उसकी भी वाणी इतनी प्रभावशाली हो सकती है कि मैं क्या कह सकता हूँ?... उसका सोचने का तरीका कितना उत्कृष्ट हो सकता है कि मैं उससे क्या कहूँ? आदमी का प्रभाव इतना ज्यादा हो स...
- मीरा बाई अब जीवित नहीं है, तो क्या उनके कविताओं का कवित्त हमारे लिए जीवित नहीं है?... सूरदास से लेकर तुलसीदास तक और रैदास से लेकर कबीर दास जी तक, और सुकरात से लेकर अफलातून तक, ईसा मसीह स...
- में जो बात बताई है, वह मनुष्यों के ऊपर कैसे लागू हो जायेगी?... कोई सामान्य मनुष्य ब्रह्मा कैसे हो सकता है? कोई सामान्य मनुष्य विष्णु कैसे हो सकता है? कोई सामान्य म...
- यज्ञोपवीत संस्कार कराने के बाद यज्ञोपवीतधारी जिन्होंने यज्ञोपवीत लिये हैं, ये सिखाया जाना चाहिए कि यज्ञोपवीत के उद्देश्य क्या हैं और कर्तव्य क्या हैं?... उद्देश्य—यज्ञोपवीत के दो उद्देश्य हैं—पहला उद्देश्य ये है कि भगवान् का प्रतीक और प्रतिनिधि यज्ञोपवीत...
- यदि सारा देश गरीब रहता है और वो आदमी बैठकर इस तरीके से रोटियाँ खाता है, तो वह ऐसा कमीना आदमी है, उसको कमीना न कहा जाये तो क्या कहा जायेगा?... ये कमीने आदमी मालदार भी हों तो क्या, अमीर भी हो जायें तो क्या? अमीर और मालदार और ज्यादा खाने वाले और...
- यह इस युग की महती सेवा है कि आदमी को क्रमबद्ध रूप से सामाजिक, नैतिक, बौद्धिक, आर्थिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के बारे में स्वतंत्र चिन्तन करना कैसे सिखाया जाए?... यह प्रयास अन्यत्र नहीं शुरू हुआ था, आज अपनी संस्था के द्वारा शुरू हुआ है। इसके द्वारा कितना साहित्य ...
- यह भी कोई जीवन है क्या?... ये तो कोई जीवन नहीं है। ये तो बहुत घटिया और पशुओं जैसा नारकीय जीवन है।मानवीय चेतना—विचारणा ही है विश...
- ये कमीने आदमी मालदार भी हों तो क्या, अमीर भी हो जायें तो क्या?... अमीर और मालदार और ज्यादा खाने वाले और ज्यादा पहनने वाले लोग अगर देश में पैदा किए जायें, तो उससे देश ...
- ये कैसी ये अन्धविश्वास की बात है?... और कैसी अन्धविश्वास की बात है कि स्त्रियों के ऊपर ऐसे बन्धन लगाये जाते हैं, उनको पर्दे में रहना चाहि...
- ये कोई बात है?... ख्वामखाह के पागल आदमी!इस तरीके से बेवकूफ और वाहियात लोगों की बातों को मान कर के हम किस तरह से न्याय ...
- ये कोई साहित्य है क्या?... जो आदमी को अधःपतन की ओर ले जाता है, गिरावट की ओर ले जाता है। जो कुछ भी हम देखते हैं ज्ञानवर्द्धन का ...
- ये कौन नहीं कहता?... लेकिन दूसरों की गलतियों को प्रेम से सुधारा जाना चाहिए, उनको बताया जाना चाहिए, उसको सन्तुलित होकर के ठ...
- ये क्या जन्म से क्यों?... कर्म से क्यों नहीं? कर्म से आदमी ब्राह्मण होना चाहिए, कर्म से शूद्र होना चाहिए। लेकिन लोग जन्म से मा...
- ये क्या बात हुई?... इस तरीके से अगर पर्चा देकर पास भी हो जाय आदमी तो उसके अन्दर वो विशेषताएँ कहाँ से आयेंगी, जो कि जीवन ...
- ये क्या बात हुई?... फिर आदमी की परिश्रम की कीमत क्या रही? आदमी की मेहनत क्या रही? न कोई मेहनत, परिश्रम करके फोकट में ही ...
- ये क्या वाहियात है?... घर में जिसकी मृत्यु हो गई है तो सहायता की जानी चाहिए, उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाना चाहिए, उ...
- ये तो घोर नृशंस पाप है, पिशाचपन है?... ये पिशाचपन हमारे हिन्दू समाज में जहाँ-तहाँ फैला हुआ पड़ा है। हमको लोगों के अन्दर विवेक उत्पन्न करना च...
- रवीन्द्रनाथ टैगोर अब नहीं हैं, और उनकी कविताओं का कवित्त हमारे लिए सुरक्षित नहीं है?... मीरा बाई अब जीवित नहीं है, तो क्या उनके कविताओं का कवित्त हमारे लिए जीवित नहीं है? सूरदास से लेकर तु...
- राजनैतिक गुलामी दूर हो गई तो क्या?... बौद्धिक गुलामी जहाँ की तहाँ है। बौद्धिक गुलामी जहाँ की तहाँ है। अकल की दृष्टि से हम बेहद बुरी तरीके ...
- राम का नाम लेने और समाज की सोचने से क्या फायदा?... यही कहता था उसका बाप। बेटा कहता था कि नहीं पिताजी सोना की जरूरत नहीं है। जब अपने देश में गरीब और दुख...
- रोटी नहीं खाती?... नहीं, बाल खाती है। बाल नहीं खिलाया तो? ये देवी बीमार कर देगी और बच्चे को मार डालेगी। देवी है कि चुड़ै...
- लाखों मनुष्य मार डाले जाते हैं, लाखों मनुष्यों की हत्या हो जाती है, और लाखों मनुष्यों का न जाने क्या से क्या हो जाता है?... उससे सारे समाज में विशृंखलता पैदा हो जाती हैं। लाभ नहीं होता है। इसलिए भावी युद्ध तो होगा ही लेकिन त...
- लेकिन इससे चाणक्य की महानता पर फर्क क्या आया?... चाणक्य नालन्दा विश्वविद्यालय की अनेक फैकल्टियों का डीन और उस तरह का जिसकी शिक्षा का कोई ठिकाना नहीं।...
- लेकिन ईश्वर की खुशामद करना, और बहुत सारे आवरण लाद देना, क्या मतलब है?... ईश्वर व्यक्ति नहीं है, ईश्वरवृत्ति है। और भावनाओं का परिपोषण करने के लिए आदमी को विश्व मानव की सेवा ...
- लेकिन एक दिन की आमदनी न खर्च कर सके समाज के लिए, ये क्या बात?... एक दिन तो आदमी को अपनी आजीविका का खर्च करना ही चाहिए।अगर आदमी 100 रू. रोज कमाता है, तो तीन रुपये उसक...
- लेकिन जब मैंने ये विचार किया कि पूजा-पाठ से लेकर धर्म और अध्यात्म तक का सारा खाँचा और ढाँचा किस वजह से खड़ा किया गया है और इसका मतलब क्या है?... इसका मतलब सिर्फ एक है और कुछ नहीं है, वह यह है कि इन सारे के सारे कलेवरों के बन्धनों में जकड़ा हुआ मन...
- लेकिन जो निहित स्वार्थ रोड़े की तरह खड़े हुए हैं, उनका क्या किया जाए?... इसके लिए और कोई तरीका नहीं है। एक ही तरीका है कि उनका संघर्ष किया जाए, उनको धमकाया जाए, उनको हटाया, ...
- लेकिन हम आपकी बात क्यों माने?... स्त्रियों की बात भी ऐसी रहती है और बच्चों की बात ऐसी रहती है, सारा का सारा इतिहास इस तरह से भरा हुआ ...
- लोकरुचि नहीं जगाई जा सकती, तो साहित्य की क्या कीमत, लाइब्रेरी की क्या कीमत?... कुछ कीमत नहीं है। वह कूड़े के बराबर है। पुस्तकें छापकर रखते चले जाइए या कोई आदमी खरीद लाए और एक लाइब्...
- वजह क्या थी?... पन्द्रह सौ लोग, पन्द्रह सौ मुसलमान हिन्दुस्तान के ऊपर आए और एक हजार वर्ष तक इस बुरी तरीके से हुकूमत ...
- वहाँ २००० मील दूर क्या करोगे?... बच्चे का मुण्डन कराने ले जाएँगे। फिर क्या हो जाएगा? देवी को बालों को चढ़ा देंगे। क्या करेगी देवी? बाल...
- विचार करने का क्रम आदमी का किसका कैसा है?... बस असल में वही उसका स्वरूप है। छोटा आदमी लम्बाई-चौड़ाई के हिसाब से नहीं होता है।...
- विवेकशीलता के आधार पर क्या बात सोची जानी चाहिए और क्या बात नहीं सोची जानी चाहिए?... क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं किया जाना चाहिए, कौन सी दिशा गलत है और कौन सही है? इसका शिक्षण किय...
- वो स्वयं भी इसको सीखने के लिए इच्छुक न हों, सीखना नहीं चाहें, अध्यापक और अभिभावकों के कार्य में सहयोग नहीं करें, उच्छृंखलता ही बरतें, मनमानी ही बरतें, किसी की सुनें ही नहीं और मनमर्जी का व्यवहार करें, तो बेचारे अध्यापक भी क्या कर सकते हैं?... ये तीनों वर्गों में बँटा हुआ है— व्यक्तित्व का निर्माण शिक्षा की व्यवस्था, भावी जीवन का उन्नयन और अप...
- व्यक्ति अपने आपमें स्वर्ग में रहता हुआ अनुभव करेगा और सारे समाज में शान्ति आएगी, अगर व्यक्ति का स्तर ऊँचा हो जाए तब?... विचार शैली बदलेइसलिए हमारे लिए सबसे बड़ा काम मनुष्य जाति की सेवा का यह है कि आदमी की विचार करने की शै...
- व्यापार हो तो क्या?... अध्यापन हो तो क्या? मजदूरी हो तो क्या? कोई भी काम क्यों न हो, अगर मनुष्य ऊँचे दृष्टिकोण से करे, अच्छ...
- संस्कार कराने की विधि तो कोई सामान्य आदमी भी पूरा कर सकता है, ये कोई बड़ी बात है क्या?... विवाह स्त्री-पुरुषों का होता है। पण्डित जी पगड़ी बाँध के आ बैठते हैं, उनको दक्षिणा दे देते हैं, वे श्...
- सफेद बाल वाला कोई समझदार होता है क्या?... भेड़ के बाल सफेद होते हैं तो कोई भेड़ बूढ़ी होती है क्या, बुजुर्ग होती है क्या, कोई गुरु होती है क्या? ...
- सब बेटे को ही खिला देगा क्या?... अपने पेट को ही खिला देगा क्या? क्या समाज का हक कुछ भी नहीं है? समाज का हक है आदमी की आमदनी के ऊपर। स...
- समाज की सेवा के अलावा मैं पूछता हूँ कि ईश्वर की सेवा और क्या हो सकती है?... कोई सेवा नहीं। और ईश्वर का भजन क्या हो सकता है? आत्म चिन्तन? आत्म चिन्तन और आत्मशोधन और आत्म-निर्माण...
- साधन-सामग्री के बिना उनको क्या सिखाया जाए, क्या पढ़ाया जाए, क्या सुनाया जाए?... इस तरीके से उस साधन-सामग्री को घर की एक सम्पदा के रूप में, एक तिजोरी के रूप में, एक जेवर के रूप में,...
- सामने वाला भी घायल हो जाये और अपने को चोट नहीं आयेगी ये कैसे हो सकता है?... अपने आपको भी चोट आ सकती है, ये मानकर लड़ाई के मैदान में आना चाहिए। संघर्ष के मोर्चे पर सिर्फ उसी को आ...
- सारे समाज को एक कुटुम्ब क्यों नहीं माने?... चन्द आदमियों को ही कुटुम्ब क्यों माने? इस तरीके से ये संकीर्णता की भावना को मोह कहते हैं और ये काम, ...
- स्त्रियाँ हैं तो क्या?... पुरुष हैं तो क्या? इनसान तो हैं। इनसान, इनसान के प्रति अच्छे भाव रखे। उनमें सरसता के भाव रखे, तो इसम...
- स्त्री है, इसका मतलब कि ये सिर्फ काम-वासना के ही लिए है क्या?... हमारी माँ भी तो स्त्री है, बहिन भी तो स्त्री है, हमारी बेटी भी तो स्त्री ही है। क्या हम काम-वासना के...
- स्त्री-पुरुष के बीच एक काम-वासना का ही रिश्ता है क्या?... नहीं, ये बहुत बुरी बात है। दिमाग में काम-वासना के विचारों को रखे रहना और क्रोध का आचार, बात-बात में ...
- स्वभाव कैसे बने?... कर्म कैसे बने? उसके विचार करने का क्रम क्या है? काम करने की शैली क्या है? उसका रहन-सहन क्या होता है?...
- हत्या के लिए धर्म में क्या स्थान है?... खून पीने को क्या स्थान है? कत्ल करने के लिए धर्म से क्या ताल्लुक है? ये तो घोर नृशंस पाप है, पिशाचपन...
- हम अपने सारी जिन्दगी धन कमाने के लिए क्यों लगायें?... हमको अच्छे काम क्यों नहीं करने चाहिए और भगवान की आज्ञा के अनुसार विश्व में शान्ति लाने के लिए कोशिश ...
- हमको अच्छे काम क्यों नहीं करने चाहिए और भगवान की आज्ञा के अनुसार विश्व में शान्ति लाने के लिए कोशिश क्यों नहीं करनी चाहिए?... बाप नाराज हुआ, बोला—नहीं मेरा कहना मान। प्रह्लाद ने कहा नहीं, मैं कहना नहीं मानूँगा। उनने कहना नहीं ...
- हमको देखना चाहिए कि हमारी बिरादरी, हमारी कौम और हमारे समाज में क्या-क्या सामाजिक बुराइयाँ हैं?... उनमें से कोई न कोई छोड़ी ही जानी चाहिए।इसी तरह से कोई एकाध अच्छाई इसी दीक्षा के समय में सीख लेनी चाहि...
- हमने क्या ली शपथ?... दीक्षा के दिन हमने ये शपथ ली कि हम मनुष्य का जीवन जियेंगे और मनुष्य के सिद्धान्त और मनुष्य के आदर्शो...
- हमारे पास विद्या है तो हम इसका क्या करें?... पैसा है तो इसका क्या करें? समाज के सामने ढेर लगी समस्याओं का हल किस तरीके से करें, कुछ समझ में नहीं ...
- हानि जरा-सी हो जाती और आपे से बाहर हो जाते हैं, ये क्यों होता?... भगवान् पर विश्वास करने वाला ऐसा नहीं कर सकता है। बड़ा धीर, वीर और गम्भीर होता है। भगवान् पर विश्वास त...
- अध्यापक राष्ट्र के निर्माण करने में कितना योगदान दे सकते हैं?...? इसका अगर किसी को इतिहास जानना हो, तो भारत वर्ष के इतिहास को देखकर के वे जान सकते हैं। प्राचीन काल क...
- इन पिछले दिनों में जब विचारों की विकृति चारों ओर से फैला दी गई है, क्या धर्म, क्या समाज, क्या राजनीति?...? हर क्षेत्र में मनुष्य को दिग्भ्रान्त करने की कोशिश की गयी है। उसके विचारों को सुलझाने की अपेक्षा और...
- इस तरीके से बेवकूफ और वाहियात लोगों की बातों को मान कर के हम किस तरह से न्याय और इंसाफ की हत्या कर सकते हैं?...? हमें इनके विरुद्ध बगावतें खड़ी करनी पड़ेंगीं। और आगे चलकर हमको उन अवांछनीय तत्त्वों के विरुद्ध जिन्ह...
- इस तरीके से रूढ़िवादियों से लेकर के जिनके स्वार्थ जुड़े हैं, जागीरदारों से लेकर के ताल्लुकेदारों तक और पण्डे-पुजारियों से लेकर के दूसरे अवांछनीय तत्त्वों तक जिनके दाढ़ में हराम के पैसों का, हराम की आमदनी का, बेकार की बातों का चस्का लग गया है, रिश्वतखोरी का चस्का लग गया, वो सीधे तरीके से मान जाएँगें क्या?...? नहीं। हम जब समझाएगें, हाँ, हाँ, हाँ करेंगे। कहेंगे कि आपने बिलकुल सही कहा, ऐसा ही होना चाहिए। फिर भ...
- ईश्वर के बारे में जितना ज्यादा लिखा गया है और कहा गया है, ये बारीकी से देखा और ये सोचा कि पूजा-पाठ से लेकर के ईश्वर की चर्चा-लीला कहने से सबका क्या प्रयोजन है?...? यह एक ही प्रयोजन दिखाई पड़ा कि ईश्वर एक परब्रह्म, अपार है। और वह एक नियामक शक्ति है, आदमी के काम को ...
- कोई सामान्य मनुष्य ब्रह्मा कैसे हो सकता है?...? कोई सामान्य मनुष्य विष्णु कैसे हो सकता है? कोई सामान्य मनुष्य महेश कैसे हो सकता है? इतनी जो महत्ता ...
- चाणक्य, चाणक्य को कौन वेतन देता था?...? केवल फटे-पुराने कपड़े पहनते थे और जंगलों में रहते थे और फूस की झोंपड़ी में रहते थे। उनकी आवश्यकता कम ...
- जानवर देवी के लिए काटते हैं?...? क्या मतलब होता है देवी के लिए काटने का? धर्म होता है? देवी खून पीती है? देवी कभी खून नहीं पी सकती। ...
- जीवात्मा को सुखी और समुन्नत कैसे बनाया जा सकता है?...? यह कई बार बताया जा चुका है और हजार बार बताया जाना चाहिए। उसके सिर्फ दो ही रास्ते हैं। एक रास्ता यह ...
- ज्ञान ने मनुष्य के जीवन को प्रभावित किया कि नहीं?...? मनुष्य में उसकी सम्वेदना उत्पन्न हुई कि नहीं? मनुष्य ने उस पर विश्वास किया कि नहीं, जो सुना था? जो ...
- दक्षिणा संकल्प—इसके बाद में दाहिने हाथ पर चावल, फूल और जल लेकर के जो संस्कार कराने वाले व्यक्ति हों, वे संकल्प बोलें, संकल्प बोलने के पीछे जो प्रतिज्ञा है, उसकी घोषणा की जाए अथवा लिख करके या छपे हुए पर्चे पर दोनों प्रतिज्ञा हमने क्या छोड़ा और क्या नहीं छोड़ा?...? वह दक्षिणा-पत्रक के रूप में लाकर के लाल मशाल के सामने—गायत्री माता के सामने प्रस्तुत कर देना चाहिए ...
- फिर किस तरीके से क्या किया जाए?...? रचनात्मक कार्य करने में लोगों का श्रम करने की, रचना करने की और सेवा करने की वृत्ति का विकास तो होता...
- बिना मेहनत-मशक्कत की कमाई क्यों खायें?...? लॉटरी २० रुपये की लगायी और पाँच लाख रुपये मिल जाए।...
- यदि इतना न हो, तो उसको क्या कहा जाए?...? उसके लिए सिर्फ एक ही शब्द काम में लाया जा सकता है, उसका नाम है नर-पशु। नर-पशु कई तरह के हैं और नर-प...
- यदि कोई बुरा आदमी सज्जनता की बाना पहने हैं, एक सियार-शेर का चमड़ा ओढ़कर रहता है और उसके बारे में लोगों की आँखें खुल जाएगी, तो क्या हर्ज की बात है?...? हमको सही कहना, अच्छे को अच्छा कहना, बुरे को बुरा कहना सीखना चाहिए और हमको गलत आदमियों का असहयोग करन...
- सभ्यता कहाँ से शुरू होती है?...? सफाई से शुरू होती है।...
- सामाजिक कुरीतियों को देखिये न; कोई तुक है इसमें?...? कोई बात है? कोई चीज है इसमें? कोई बात है? हमारी कुलदेवी है और कुलदेवी पर हमारे बच्चे का मुण्डन होगा...
- स्त्रियों के विरुद्ध घरेलू संघर्ष नहीं हुए हैं क्या?...? हाँ, शंकराचार्य अपनी माता को छोड़कर चले गये थे। उन्होंने कहा—हमें आप कहती हैं कि हमको घर-गृहस्थी में...
- १-पाप घटाएँ—विचार करना चाहिए कि हमारे शारीरिक-मानसिक और आध्यात्मिक पाप क्या-क्या हैं?...? और जो पाप अब तक हम करते रहे हैं? उनमें से एक पाप को छोड़ ही देना चाहिए।शारीरिक पापों में मैं हमेशा ऐ...