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मनुष्य की महत्ता ही नहीं, सत्ता पर प्रश्नचिह्न?...यह स्पष्ट है कि इन दिनों विभिन्न क्षेत्रों में जो प्रगति हुई वह असाधारण एवं
अभूतपूर्व है। विकास विस...
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सर्वोत्तम यन्त्र, यज्ञ-व्यवस्था का उदाहरण?......
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सर्वोत्तम समाधान कौन दे सकता?...— माँ, पिता, गुरु और चिकित्सक
सर्वोत्तम यन्त्र, यज्ञ-व्यवस्था का उदाहरण?...
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हमारी पू०गुरुसत्ता कौन?...गायत्री (ज्ञान-विद्या) और सावित्री (भौतिक विज्ञान) के सिद्ध साधक।हिमालय की ऋषि-सत्ताओं के साक्षात प्र...
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हमें पूर्वजों क्या मिला?...हमने अपने बच्चों को क्या दिया?—
प्रदूषण, युद्धोन्माद, खाद्य-संकट, अपराधों की वृद्धि आदि समस्याएँ सम...
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हमने अपने बच्चों को क्या दिया?... 6E's – Empathy > Energy > Ecology >
Environment > Epidemics > Economy crises
5. आ...
- अस्वस्थता, दुर्बलता, कलह, विग्रह, छल-प्रपञ्च जैसे दोष,
व्यवहार तथा चिन्तन को धुआँधार विकृतियों से भरते क्यों चले जा रहे हैं?... निकट भविष्य
के सम्बन्ध में मूर्द्धन्य विचारक यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि स्थिति यही रही,
रेल इसी...
- इस एक पक्ष की बढ़ोत्तरी ने अधिकांश लोगों का बड़ी मात्रा
में दोहन किस प्रकार किया है, इसे देखते हुए विवेकवानों को उस असमंजस में डूबना
पड़ता है कि दृष्टिगोचर होने वाली प्रगति क्या वास्तविक प्रगति है?... इसके पीछे अधिकांश
को पीड़ित शोषित, अभावग्रस्त रखने वाला कुचक्र तो काम नहीं कर रहा है। .......भौतिक...
- इसे
कौन करा रहा है?... आखिर वह चतुराई कैसे चुक गई, जो बहुत कुछ पाने का सरंजाम जुटाकर
अलादीन का नया चिराग जलाने चली थी। पह...
- और उसका समाधान कहाँ ढूँढ़ा जाए?... इस सन्दर्भ में मोटे तौर
से एक ही बात कही जा सकती है कि प्रत्यक्षवाद की पृष्ठभूमि पर जन्मे भौतिकवाद...
- और उसका समाधान खोजने का क्या मतलब?... पर जब मानवी गरिमा की गहराई तक उतरने की स्थिति बन पड़े तो फिर माता जैसा वात्सल्य
हर आत्मा में उभर स...
- कम से कम इतना तो करें?... — सूर्योदय के समय वैयक्तिक और सामूहिक गायत्री-मंत्र जप, ध्यान, यज्ञ और प्राणायाम,
सूर्याघ्य, दीप-य...
- कल-कारखानों का पर्वताकार उत्पादन, सर्जरी-अङ्ग प्रत्यारोपण जैसी
सुविधाएँ भूतकाल में कहाँ थीं?... कहा जा सकता है कि विज्ञान ने पौराणिक विश्वकर्मा
को कहीं पीछे छोड़ दिया है।बुद्धिवाद की प्रगति भी क...
- कोई लेखक, विद्वान, वक्ता, नेता समझते
हैं पर किसने हमारा अन्तःकरण खोलकर पढ़ा, समझा है?... कोई उसे देख सका होता, तो उसे
मानवीय व्यथा-वेदना की अनुभूतियों की करुण कराह से हाहाकार करती एक उद्व...
- जन साधारण की समस्याओं के
सामाधान में यदि अध्यात्म का प्रयोग नहीं होगा, तो श्रेष्ठता कैसे पनपेगी और दुष्टता
कैसे निरस्त होगी?... फिर भगवान् का उद्यान सूखता, कुम्हलाता और नष्ट-भ्रष्ट होता
ही दीख पड़ेगा।.....वह शक्ति इन दिनों पर्...
- जब
होश-हवास ही दुरुस्त नहीं, तो समस्या क्या?... और उसका समाधान खोजने का क्या मतलब?
पर जब मानवी गरिमा की गहराई तक उतरने की स्थिति बन पड़े तो फिर मा...
- जब हनुमान्, अंगद,
नल-नील जैसे रीछ-वानर मिलकर राम को जिताने का श्रेय ले सकते हैं, तो कोई कारण नहीं
कि नवसृजन के कार्यक्षेत्र में जुझारू योद्धाओं की सहायता के लिए अदृश्य सत्ता,
दृश्य घटनाक्रमों के रूप में सहायता करने के लिए दौड़ती चली न आए?... ....नि:सन्देह
कठिनाई बड़ी है और उसे पार करना भी दुरूह है। पर हमें उस परम सत्ता के सहयोग पर
विश्व...
- फिर इन दिनों समस्त संसार पर छाई हुई विपन्नता
की वेला में उसके परिवर्तन, प्रयास गतिशील क्यों न होंगे?... ... अदृश्य जगत में संव्याप्त
दैवी चेतना का अनुपात वर्तमान परिस्थितियों की प्राणचेतना के आधार पर अस...
- फिर भी एक प्रश्न
सर्वथा अनसुलझा ही रह जाता है कि यह तथाकथित प्रगति, अपने साथ दुर्गति के असंख्यों
बवण्डर क्यों और कैसे घसीटती, बटोरती चली जा रही है?...
मनुष्य जाति आज जिस दिशा में चल पड़ी है, उससे उसकी महत्ता ही नहीं, सत्ता का भी
समापन होते दीखता...
- वर्तमान प्रगति की वस्तुस्थिति खुली आँखों से— हमें पूर्वजों से क्या मिला?... हमने अपने बच्चों को क्या दिया?— 6E's – Empathy > Energy > Ecology >
Environment > Epid...
- वर्तमान प्रगति पर एक प्रश्न— महत्ता ही नहीं सत्ता पर प्रश्नचिह्न?...
4. वर्तमान प्रगति की वस्तुस्थिति खुली आँखों से— हमें पूर्वजों से क्या मिला?
हमने अपने बच्चों को ...
- वर्तमान प्रगति— सच्चाई नकारें कैसे?...
3. वर्तमान प्रगति पर एक प्रश्न— महत्ता ही नहीं सत्ता पर प्रश्नचिह्न?
4. वर्तमान प्रगति की वस्तुस्...
- हम एक व्यक्ति हैं?... नहीं हैं। हम कोई व्यक्ति नहीं हैं। हम एक सिद्धान्त हैं,
आदर्श हैं, हम एक दिशा हैं, हम एक प्रेरणा ह...
- आश्चर्य इस बात का है कि आखिर यह सब हो क्यों रहा है एवं कैसे हो रहा है?...? इसे
कौन करा रहा है? आखिर वह चतुराई कैसे चुक गई, जो बहुत कुछ पाने का सरंजाम जुटाकर
अलादीन का नया...
- इन दिनों हर क्षेत्र में प्रवेश किए हुए समस्याओं, अवांछनीयताओं, विडम्बनाओं के
लिए दोष किसे दिया जाए?...? और उसका समाधान कहाँ ढूँढ़ा जाए? इस सन्दर्भ में मोटे तौर
से एक ही बात कही जा सकती है कि प्रत्यक्षव...
- विज्ञान आगे भी अनर्थ पैदा करता रह सकेगा; ऐसी आशंकाएँ किसी को भी नहीं करनी चाहिए;
क्योंकि खनिज तेल, विद्युत उत्पादन जैसे स्रोत ही सूख जाएँगे, तब विज्ञान जीवित
कैसे रह सकेगा?...? लोगों को लौटकर फिर प्राकृतिक जीवन अपनाना पड़ेगा, जिसमें विकृतियों
के अभिवर्धन की कोई गुंजायश ही न...