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- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं नरक की मान्यतायें सही है? (४) सूक्ष्म व
- बन्धनों से मुक्ति - है, मन से मुक्ति क्या है?बन्धनों से मुक्ति, बन्धनों से मुक्ति क्या? बन्धनों से मुक्ति ये कि (हम) जिस तरीके से
- कैसे करें कायाकल्प? - कि मोह से मुक्ति क्या है? बन्धनों से मुक्ति क्या है?
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं नरक की मान्यतायें सही है? (४)
- कैसे करें कायाकल्प? - सोचिए कि मोह से मुक्ति क्या है? बन्धनों से मुक्ति क्या है?
- कैसे करें कायाकल्प? - बात सोचिए कि मोह से मुक्ति क्या है? बन्धनों से मुक्ति क्या है?
- कैसे करें कायाकल्प? - अच्छा, अब उसकी बात सोचिए कि मोह से मुक्ति क्या है? बन्धनों से मुक्ति क्या है?
- कैसे करें कायाकल्प? - न? अच्छा, अब उसकी बात सोचिए कि मोह से मुक्ति क्या है? बन्धनों से मुक्ति क्या है?
- बन्धनों से मुक्ति - मुक्ति, मन से मुक्ति कुछ और है, मन से मुक्ति क्या है?बन्धनों से मुक्ति, बन्धनों से मुक्ति क्या? बन्धनों से मुक्ति
- बन्धनों से मुक्ति - से मुक्ति, मन से मुक्ति कुछ और है, मन से मुक्ति क्या है?बन्धनों से मुक्ति, बन्धनों से मुक्ति क्या? बन्धनों से
- कैसे करें कायाकल्प? - होंगे न? अच्छा, अब उसकी बात सोचिए कि मोह से मुक्ति क्या है? बन्धनों से मुक्ति क्या है?
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग एवं
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या स्वर्ग
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - —— (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने प्रकार की होती है? (३) क्या
- बन्धनों से मुक्ति - मुक्ति कुछ और होती है, मन से मुक्ति, मन से मुक्ति कुछ और है, मन से मुक्ति क्या है?बन्धनों से मुक्ति,
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - इसी जीवन में सम्भव है प्रश्न —— (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह कितने
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - आनन्द इसी जीवन में सम्भव है प्रश्न —— (१) स्वर्ग क्या है? उसका वास्तविक अर्थ बताओ। (२) मुक्ति क्या है? वह
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - मालूम है? नहीं मालूम है, इसलिए मैं आपसे क्या कहूँ। मुक्ति किसे कहते हैं, आप बता सकते हैं? आप तो मुक्ति
- बन्धनों से मुक्ति - क्या है?बन्धनों से मुक्ति, बन्धनों से मुक्ति क्या? बन्धनों से मुक्ति ये कि (हम) जिस तरीके से हमारी विचारणाएँ, भावनाएँ, और
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - है, आपको मालूम है? नहीं मालूम है, इसलिए मैं आपसे क्या कहूँ। मुक्ति किसे कहते हैं, आप बता सकते हैं? आप
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - की मान्यतायें सही है? (४) सूक्ष्म व स्थूल शरीर में क्या भेद है। (५) क्या मुक्ति आत्मा नाश का ही दूसरा
- ऋषि युग्म की झलक-झाँकी - भाग-2 - झाँकी - भाग-2 - ने पूछा क्या काम है? वे बोले, ‘‘मुझे मुक्ति चाहिए।’’ मुक्ति जीजी बोलीं, ‘‘मेरा ही नाम मुक्ति है। कहिये।’’ सुनकर वे
- ऋषि युग्म की झलक-झाँकी - भाग-2 - झाँकी - भाग-2 - मुक्ति जीजी ने पूछा क्या काम है? वे बोले, ‘‘मुझे मुक्ति चाहिए।’’ मुक्ति जीजी बोलीं, ‘‘मेरा ही नाम मुक्ति है। कहिये।’’
- बन्धनों से मुक्ति - हैं। बच्चों जैसी कल्पना में क्या लाभ हो सकता है? मुक्ति का महात्म ये आध्यात्म शास्त्र में सिखाया है, ये बताया
- अध्यात्म की वास्तविक सम्पदाएँ - आपकी जानकारी नहीं है। स्वर्ग कैसा होता है, आपको मालूम है? नहीं मालूम है, इसलिए मैं आपसे क्या कहूँ। मुक्ति किसे
- कैसे करें कायाकल्प? - पुरुषार्थ एक ही बताया गया है। वह क्या बताया गया है? वह है-बन्धनों से मुक्ति’। बन्धनों से अगर मुक्ति मिल जाए,
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - क्या कर रही हो? अरे साहब! इससे आपको क्या मतलब है? हम इसको वैकुंठ ले जाने वाले हैं और इसे मुक्ति
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - से भगवान का और मुक्ति का क्या ताल्लुक हो सकता है? आप यह विचार दिमाग से निकाल दीजिए। नहीं साहब! हम
- युग निर्माण की शिक्षण प्रक्रिया-1 - 1 - (५) क्या मुक्ति आत्मा नाश का ही दूसरा नाम नहीं है? (६) चिरस्थाई आनन्द किसे कहते हैं? वह कैसे मिलता है।
- बन्धनों से मुक्ति - कल्पनाएँ हैं। बच्चों जैसी कल्पना में क्या लाभ हो सकता है? मुक्ति का महात्म ये आध्यात्म शास्त्र में सिखाया है, ये
- ऋषि युग्म की झलक-झाँकी - भाग-2 - झाँकी - भाग-2 - मुझे यहाँ भेजा है।’’ मुक्ति जीजी ने पूछा क्या काम है? वे बोले, ‘‘मुझे मुक्ति चाहिए।’’ मुक्ति जीजी बोलीं, ‘‘मेरा ही
- कैसे करें कायाकल्प? - लिए सबसे बड़ा पुरुषार्थ एक ही बताया गया है। वह क्या बताया गया है? वह है-बन्धनों से मुक्ति’। बन्धनों से अगर
- परिष्कृत मनःस्थिति ही स्वर्ग है - क्या? क्या उनके ऋणों से मुक्ति नहीं पायी जा सकती है? मनुष्य के मन में जिस दिन ये भाव उत्पन्न होते
- ऋषि युग्म की झलक-झाँकी - भाग-2 - झाँकी - भाग-2 - ‘‘गुरुजी ने मुझे यहाँ भेजा है।’’ मुक्ति जीजी ने पूछा क्या काम है? वे बोले, ‘‘मुझे मुक्ति चाहिए।’’ मुक्ति जीजी बोलीं,
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - पर्यटन करने और घूमने से भगवान का और मुक्ति का क्या ताल्लुक हो सकता है? आप यह विचार दिमाग से निकाल
- बन्धनों से मुक्ति - ये कल्पनाएँ बच्चों जैसी कल्पनाएँ हैं। बच्चों जैसी कल्पना में क्या लाभ हो सकता है? मुक्ति का महात्म ये आध्यात्म शास्त्र
- अध्यात्म और कुछ नहीं, भावनाओं का खेल है - है, पर पर्यटन करने और घूमने से भगवान का और मुक्ति का क्या ताल्लुक हो सकता है? आप यह विचार दिमाग
- परिष्कृत मनःस्थिति ही स्वर्ग है - हमारा कोई फर्ज नहीं है क्या? क्या उनके ऋणों से मुक्ति नहीं पायी जा सकती है? मनुष्य के मन में जिस