Search Results
- अगर आप अपनी हविश को कम नहीं कर सकते और अपनी भौतिक खर्च की महत्त्वाकांक्षा को और बड़प्पन की महत्त्वाकांक्षा को काबू में नहीं कर सकते, फिर आत्मा की बात कहाँ चलती है?... आत्मा की उन्नति की बात का सवाल कहाँ उठता है? आत्मा को भी मान्यता दीजिए। शरीर ही सब कुछ नहीं है। शरीर...
- अगर आप उसका निर्माण नहीं कर सकते, सारे के सारे आपके घर वाले कमीने, उजड्ड, मूर्ख, दुष्ट बनकर रहेंगे तो फिर आपकी शान्ति कैसे स्थिर रहेगी, फिर आप भजन कैसे कर लेंगे, फिर आप अच्छी जिन्दगी कैसे जी लेंगे, फिर आप मीठे वचन का अभ्यास कैसे कर लेंगे?... जब हर आदमी हैरान होगा तो आपको गुस्सा क्यों नहीं आयेगा? इसीलिये क्या करना चाहिए कि अपना व्यक्तिगत जीव...
- अगर उनका व्यक्तित्व घटिया होता तो फिर बात कैसे बनती?... गाँधीजी ने अपने आपको बनाया, हजारों आदमी उनके पीछे चले। बुद्ध ने अपने आपको बनाया, हजारों आदमी उनके पी...
- अध्यात्म के नाम पर अज्ञान?... अध्यात्म तो अज्ञान के निवारण करने के लिये बनाया गया था। ये क्या आफत आ गई, ये क्या हो गया? उलटा अज्ञा...
- अध्यात्म क्या है?... अध्यात्म ये है कि भगवान् की मर्जी के मुताबिक़ हमको ढलने के लिये कोशिश करनी चाहिए।...
- अपनी अकल का उपयोग किस तरीके से कर पायेगा?... ये सब जानकारियों के लिये शिक्षा तो आवश्यक है। शरीर के लिए, जीवन के लिये, भौतिक जीवन को ठीक बनाये रखन...
- अपनी हर मनोवृत्ति के ऊपर कसौटी लगाता चला गया और मैं यह देखता हुआ चला गया कि मैं कहाँ खोटा सिक्का हूँ, कहाँ खरा?... जहाँ खोटा था, अपने आपको सँभालता रहा; जहाँ खरापन था, वहाँ सुधारता रहा। मेरी उपासना का क्रम पूजा-उपासन...
- अपने भीतर से ही क्यों न बीज बनायें?... मित्रो! जिन लोगों ने अपने आपको बनाया है, उनको ये पूछने की जरूरत न पड़ी ‘क्या करेंगे?’, उनकी प्रत्येक ...
- अभी मैं जा रहा हूँ क्या?... हाँ। अभी मैं बैखरी वाणी को बन्द कर रहा हूँ और परा, पश्यन्ति और मध्यमा वाणी को फिर काम में ला रहा हूँ...
- अरे, आप क्या बड़े आदमी हैं?... मन आपका बड़ा नहीं है, व्यक्तित्व आपका बड़ा नहीं है, संस्कार आपके बड़े नहीं हैं तो बड़प्पन का स्थायित्व क...
- अर्थ का चिन्तन कितने धीमे से होता है?... जप के साथ चिन्तन नहीं हो सकता। गलत कहा है—गलत या तो गलत लिखा है या आपने गलत समझा है। गलत क्या बात है...
- अर्थशास्त्र क्या है?... वगैरह। लोक व्यवहार में प्रवीण बनने के सम्बन्ध में एक। जीविकोपार्जन के सम्बन्ध में दो। जो जानकारियाँ ...
- अस्वस्थता, दुर्बलता, कलह, विग्रह, छल-प्रपञ्च जैसे दोष, व्यवहार तथा चिन्तन को धुआँधार विकृतियों से भरते क्यों चले जा रहे हैं?... निकट भविष्य के सम्बन्ध में मूर्द्धन्य विचारक यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि स्थिति यही रही, रेल इसी पटर...
- अस्वस्थता, दुर्बलता, कलह, विग्रह, छल-प्रपञ्च जैसे दोष, व्यवहार तथा चिन्तन को धुआँधार विकृतियों से भरते क्यों चले जा रहे हैं?... निकट भविष्य के सम्बन्ध में मूर्द्धन्य विचारक यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि स्थिति यही रही, रेल इसी पटर...
- अस्वस्थता, दुर्बलता, कलह, विग्रह, छल-प्रपञ्च जैसे दोष, व्यवहार तथा चिन्तन को धुआँधार विकृतियों से भरते क्यों चले जा रहे हैं?... निकट भविष्य के सम्बन्ध में मूर्द्धन्य विचारक यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि स्थिति यही रही, रेल इसी पटर...
- अस्वस्थता, दुर्बलता, कलह, विग्रह, छल-प्रपञ्च जैसे दोष, व्यवहार तथा चिन्तन को धुआँधार विकृतियों से भरते क्यों चले जा रहे हैं?... निकट भविष्य के सम्बन्ध में मूर्द्धन्य विचारक यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि स्थिति यही रही, रेल इसी पटर...
- आँखों में चमक से क्या है?... आँखों में चमक तो तस्वीरें भी पैदा कर लेती हैं, मूर्तियाँ भी पैदा कर लेती हैं। बीमार आदमी को सजाकर बि...
- आकृति कैसे बदली जा सकती है?... आकृति नहीं बदली जा सकती है। आपके शरीर की बनावट नहीं बदली जा सकती। आपका स्वभाव बदला जा सकता है। अब तक...
- आज का दिन आप किस तरीके से बेहतरीन बना सकते हैं?... अगर ये विचार आपके जी में आ जाये तो फिर मैं आपको यह कहूँगा कि आप स्वर्ग में निवास करने वाले आदमी हैं।...
- आत्म विकास का क्या मतलब?... आत्म विकास का मतलब ये है कि अपने आपका, अपने अहं के दायरे को बढ़ा देना। लोगों का दायरा बहुत छोटा है कू...
- आत्मवत् सर्वभूतेषु क्या है?... एक ही है, आप दूसरों की मुसीबतों में हिस्सेदार हो जाइये—एक ओर अपनी सुविधाओं को बाँट दीजिए। हो गया आत्...
- आत्मा की उन्नति की बात का सवाल कहाँ उठता है?... आत्मा को भी मान्यता दीजिए। शरीर ही सब कुछ नहीं है। शरीर की आकांक्षाएँ ही सब कुछ नहीं हैं। इन्द्रियाँ...
- आदमी विद्यावान् कम हैं क्या दुनिया में, कलाकार कम हैं क्या दुनिया में, चतुर आदमी दुनियाँ में कम हैं क्या?... क्रिया कुशल लोगों की कमी है क्या? आप बताइए न, जेलखानों में पड़े हुए लोगों को आपने नहीं देखा है। एक से...
- आप अपने शरीर का इस्तेमाल किस तरीके से करें?... साधनों का इस्तेमाल कैसे करें? परिस्थितियों का उपयोग किस तरीके से करें? अपने पास जो साधन और सामान मिल...
- आप अलग किस तरीके से करेंगे?... आपकी विवेकशीलता के माध्यम से यह सम्भव है कि आप दोनों को अलग कर दें। राजहंस के बारे में ये बताया गया ...
- आप इन पर खुशी नहीं मना सकते?... आप प्रसन्न नहीं हो सकते? आपके चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आ सकती? कि जो हमारी वर्तमान परिस्थितियाँ हैं,...
- आप ऐसे कीजिए कि मन्त्र के साथ-साथ में आपने पढ़ा होगा— योगशास्त्र में लिखा है—क्या लिखा है?... मन्त्र को अर्थ समेत जपना चाहिए। अर्थ समेत आप कहाँ जपते हैं? ये गलत बात है। गायत्री मन्त्र की जिस प्र...
- आप क्यों ऐसी जिन्दगी जीयेंगे?... भगवान् ने तो आपको राजकुमार बनाया है न, आपको बुद्धि दी है न, आपको वाणी दी है न, आपको हाथ-पाँव दिये है...
- आप जरूरत को क्यों भूल जाते हैं?... खाद की जरूरत नहीं है? पानी की जरूरत नहीं है उनकी। रखवाली की जरूरत नहीं है उनकी। आप रखवाली नहीं करेंग...
- आप तो सिर्फ ये विचार किया कीजिए, हम पिछले दिनों क्या भूल करते रहे?... रास्ता भटक तो नहीं गये, भूल तो नहीं गये, इसीलिये जन्म मिला था क्या? जिस काम के लिये जन्म मिला था, वह...
- आप प्रकृति के मालिक हैं क्या?... बुढ़ापे को जवानी में बदल सकते हैं क्या? न, मौत को जिन्दगी में बदल सकते हैं क्या, न। आदमी की सीमा है औ...
- आप प्रसन्न नहीं हो सकते?... आपके चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आ सकती? कि जो हमारी वर्तमान परिस्थितियाँ हैं, उसमें हमको प्रसन्न रहने ...
- आप बुराइयों को बरदाश्त करें?... नहीं, यह तो मैं नहीं कहता कि बुराइयों को बरदाश्त करें। आप बुराइयों से संघर्ष जरूर कीजिए। फिर! संघर्ष...
- आप भगवान् के बॉस हैं?... आप भगवान् पर हुकुम चलाना चाहते हैं? आप भगवान् को अपनी मर्जी पर चलाना चाहते हैं? क्योंकि आप हनुमान् च...
- आप भगवान् को अपनी मर्जी पर चलाना चाहते हैं?... क्योंकि आप हनुमान् चालीसा का पाठ करते हैं और आप धूप बत्ती दिखाते हैं। इसीलिये आप चाहते हैं कि भगवान्...
- आप भगवान् पर हुकुम चलाना चाहते हैं?... आप भगवान् को अपनी मर्जी पर चलाना चाहते हैं? क्योंकि आप हनुमान् चालीसा का पाठ करते हैं और आप धूप बत्त...
- आप भी निहाल हो जायेंगे, धन्य हो जायेंगे और क्या कहूँ मैं आपसे?... बस। आज की बात समाप्त।...
- आप मैट्रिक पास रह गये तो क्या आफत आ गई?... नहीं साहब, हमारा ये हो जायेगा, हमारा वो हो जायेगा, ऐसे विचार करते रहेंगे तो मैं आपको नर्कगामी कहूँगा...
- आप ये चाहते हैं?... भगवान् पूरा करे आपकी मर्जी। आप इसी लायक हैं, कि आपकी मर्जी भगवान् को पूरा करनी चाहिए। आप धूप बत्ती ख...
- आप रखवाली नहीं करेंगे, खाद-पानी न देंगे तो पेड़ों से और पौधों से आप क्या आशा रखेंगे?... इसी तरीके से जीवात्मा का पेड़ और वृक्ष तो है, पर अपनी खुराक माँगता है। और खुराक क्या माँगता है? मैंने...
- आप सच्चाई की वजह से, ईमानदारी की वजह से और दानतदारी की वजह से अगर मुसीबत उठा लें तो क्या हर्ज की बात है?... सच्चाई की थोड़ी सी झलक और बेईमानी का अधिक से अधिक माद्दा, यही तो लोक व्यवहार है। दुनिया यही तो है। आप...
- आप हुकुम चलाते हैं?... आप भगवान् के बॉस हैं? आप भगवान् पर हुकुम चलाना चाहते हैं? आप भगवान् को अपनी मर्जी पर चलाना चाहते हैं...
- आपकी बुद्धि का विकास कैसे होगा?... इसीलिये यहाँ आत्म निर्माण के लिये भी ढेरों काम करने हैं। स्वास्थ्य आपका कमजोर है, इसी से तो काम नहीं...
- आपके चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आ सकती?... कि जो हमारी वर्तमान परिस्थितियाँ हैं, उसमें हमको प्रसन्न रहने का हक है। आप तो हमेशा अभावों को सोचते ...
- आपके ज्ञान का दायरा कैसे बढ़ेगा?... आपकी बुद्धि का विकास कैसे होगा? इसीलिये यहाँ आत्म निर्माण के लिये भी ढेरों काम करने हैं। स्वास्थ्य आ...
- आपके पास कितना धन है?... हमारे पास कुछ भी नहीं है। तो फिर, तो आप तो नुकसान में रहे। अरे! आप नुकसान की बात कहते हो। हमारे गाँव...
- आपको वर्तमान में क्या करना चाहिए?... आज का दिन आप किस तरीके से बेहतरीन बना सकते हैं? अगर ये विचार आपके जी में आ जाये तो फिर मैं आपको यह क...
- आपने कोई अच्छे काम कर लिये तो बार-बार प्रशंसा करने की जरूरत क्या है, आपके साथ में किसी ने कोई बुराई कर ली या दुःख भुगत लिया तो बार-बार कहने की जरूरत क्या है?... भूत सो भूत, गया सो गया। आप भूत पर मत विचार कीजिए। भूत से आप अनुभव तो इकट्ठा कर सकते हैं, लेकिन चिन्त...
- इतना कर सकना, अगर हमारे लिये सम्भव हो जाये तो समझना चाहिए आपका ये सवाल पूरा हो गया, अब हम क्या करें?... नहीं ये करें कि हम अच्छे बनें। समाज सेवा भी करना, पर समाज सेवा करने से पहले आवश्यक है कि समाज सेवा क...
- इन दो कामों के अलावा और आपने क्या काम कर दिया?... चलिये, तीसरा एक और काम भी किया होगा आपने। अपने अहंकार की पूर्ति के लिये, ठाठ-बाट बनाने के लिये, लोगो...
- इन सबका खाने का, पीने का, कपड़े का, रोटी का जो खर्चा निकलता है, ये कहाँ से आ जाता है?... जाने कहाँ से आ जाता है। धन हमारे पास कुछ कम नहीं पड़ता। जरूरत होती है, तो भगवान् की तरफ इशारा कर देते...
- इन सबकी तुलना में आपको कितना मिला हुआ है?... आप इन पर खुशी नहीं मना सकते? आप प्रसन्न नहीं हो सकते? आपके चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आ सकती? कि जो हम...
- इनमें तो आपका जीवन खर्च हो गया और किस काम में खर्च हुआ?... अब कृपा कीजिए। सादा जीवन-उच्च विचार के सिद्धान्तों का परिपालन कीजिए। सादगी, सादगी, सादगी, किफायतसारी...
- इन्सान, इन्सान नहीं रहा होता, देवता हो गया होता और जमीन का वातावरण स्वर्ग जैसा हो गया होता; पर विचारशीलता कहाँ है, समझदारी कहाँ है?... हमको समझदारी आदमी के अन्दर बढ़ानी चाहिए। अगर समझदारी बढ़ेगी, तो आदमी के अन्दर ईमानदारी बढ़ेगी। ईमानदारी...
- इसके लिये आदमी को थोड़ा ऊँचे स्तर पे बैठ करके विचार करना होता है और यह देखना पड़ता है कि इन्सान की गरिमा और इन्सान की महत्ता की सुरक्षा किस तरीके से की जाय?... इसके लिये क्या करना चाहिए, बस इसी का नाम विद्या है। अगर विद्या किसी को मिल जाये तब, तब फिर वे धन्य ह...
- इसको हम क्या करें?... खा लीजिए। ये तो मुश्किल है, छह चावल तो हमारी दाढ़ी में चिपके रह जाएँगे। पेट कैसे भरेगा? और गणेश जी का...
- इसमें तो नुकसान पड़ेगा हमारा?... नहीं, मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि नुकसान नहीं पड़ेगा।...
- उनको यह मालूम पड़े कि संसार की बनावट क्या है, भूगोल क्या है, इतिहास क्या है, दुनियाँ में इनसानों के चाल-चलन क्या रहे हैं?... दुनिया में किस तरीके से उतार-चढ़ाव आते रहे हैं? पेड़ कैसे पैदा होते हैं? यह सृष्टि क्या है? राजनीति क्...
- उन्होंने अपने आपको गुरु के अनुशासन में ढालने का प्रयत्न किया था और जब उनके गुरु तलाश करने लगे कि कौन-से शिष्य को उत्तराधिकारी बनाया जाय?... सारे विद्वानों की अपेक्षा, सारे नेता और दूसरे गुण वालों की अपेक्षा उन्होंने अर्जुनदेव को चुना। उनके ...
- उन्होंने यह कहा कि मुनासिब क्या है?... जो मुनासिब था, वह इन लोगों से कहा। यज्ञों में हिंसा होती है, ना। हम हिंसा नहीं करेंगे। यज्ञ की बात व...
- उसका परिणाम क्या होगा?... जिन लोगों के लिये आप करना चाहते हैं वो आपके साथ-साथ चलेंगे और चमकेंगे। सूरज के साथ में नवग्रह और बत्...
- उसको काहे में खर्च किया?... उसको जहाँ हमारा जन्म हुआ है, उस गाँव में हमने एक हायर सेकन्डरी स्कूल बना दिया। कभी आप जायें तो देखना...
- उसमें कमियाँ कम हैं क्या, बुराइयाँ कम हैं क्या?... एक से एक दुष्ट, एक से एक बेईमान दुनिया में भरे पड़े हैं। तो क्या करें फिर! दूसरों के प्रति द्वेष? द्व...
- एक आदमी अपनी ख्वाहिशों को पूरा नहीं कर सकता?... लेकिन एक आदमी इतने ज्यादा मनुष्यों के, इतने ज्यादा किस्म की सहायता करने में समर्थ है। हाँ! मैं कहता ...
- एक कण जरा सा निकाल दें, क्या इकाई है बिचारे की?... संयुक्त होने पर ही बात बनती है। इसीलिये अपने आपके दायरे को सीमित मत कीजिए। आप संकीर्ण स्वार्थपरता से...
- एक नागरिक कर्तव्य क्या है?... जीविका उपार्जन कैसे करनी चाहिए? अर्थशास्त्र क्या है? वगैरह। लोक व्यवहार में प्रवीण बनने के सम्बन्ध म...
- और खुराक क्या माँगता है?... मैंने निवेदन किया न, व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण के लिये आपकी गतिविधियाँ चलनी चा...
- और गणेश जी का?... गणेश जी को ‘अक्षतं समर्पयामि’, गणेश जी को अक्षत चढ़ाता ही जा रहा है। समझता नहीं कि क्या चक्कर है? समझ...
- और चावल कितना चावल लाए हैं?... गणेश जी पर चढ़ा रहे थे—अक्षतान् समर्पयामि। दिखाइये चावल जरा। ये रहे छह दाने। छह दानों से क्या होगा? ग...
- और जिन लोगों को जिस चीज की जरूरत नहीं थी, उनको प्रसन्न करने के लिये उपहार रूप में लादते रहे क्या?... क्यों? वजह क्या है? ये सब गलतियाँ हैं। इसी तरीके से अपने स्वास्थ्य के लिये जो खान-पान, आहार-विहार जै...
- और पैसा देकर के आप क्या भला करेंगे आदमी का?... आप दूसरों को प्यार दीजिए न, आप दूसरों को सम्मान दीजिए न। देखिए सम्मान की दुनियाँ कितनी प्यासी है। लो...
- और सन्त किसे कहते हैं?... परोपकारियों को कहते हैं, लोकहित में लगे हुए आदमियों को कहते हैं। सत्प्रवृत्तियों में अपने आपको खपा द...
- और हमको तो ढाई सौ रुपये मिलते हैं, साढ़े चार सौ रुपये की तरक्की कहाँ हुई?... और हमारे पास अस्सी बीघा खेत है, सवा सौ बीघा खेत कहाँ है? हम भगवान् से शिकायत करते चले जाते हैं कि हम...
- और हमारे पास अस्सी बीघा खेत है, सवा सौ बीघा खेत कहाँ है?... हम भगवान् से शिकायत करते चले जाते हैं कि हमको नहीं दिया गया और भगवान् कहता रहता है, हमको नहीं दिया ग...
- कंस से लड़े बिना काम चला?... लड़ाई मोहब्बत की है अथवा कैसी है, हिंसा की है, अहिंसा की है, ये मैं इस वक्त बात नहीं कह रहा हूँ।...
- करते रहते हैं और ये विचार तक नहीं करते कि क्यों करते रहते हैं?... वेदान्त का, फिलॉसफी का पहला वाला सूत्र है, क्या सूत्र है? ब्रह्म-जिज्ञासा। पहला काम ये है कि आप जानि...
- का अर्थ मैं आपको समझा चुका, पास बैठ जाना, किसके पास बैठ जाना?... जिसके हम पास हम बैठ जाते हैं, उसके रंग में हम रंग जाते हैं। खराब लोगों की संगति में हम बैठते हैं, खर...
- किस काम के लिये खर्च करना चाहिए?... आपको इस काम के लिये खर्च करना चाहिए कि लोगों के दिमाग और लोगों के विचारों को आप ठीक कर सकें। अगर विच...
- किसलिए जा रहा हूँ, जलने के लिये?... मुझे जलना है, इसीलिये जलना है कि लोगों के अन्दर वो आग और वो गरमी पैदा कर सकूँ, जो लोगों के अन्दर आग ...
- कुटुम्ब की जितनी जिम्मेदारियाँ पूरी करनी चाहिए थी, उसको पूरा करने के स्थान पर अनावश्यक संख्या में लोड बढ़ाते रहे क्या?... और जिन लोगों को जिस चीज की जरूरत नहीं थी, उनको प्रसन्न करने के लिये उपहार रूप में लादते रहे क्या? क्...
- के माध्यम से जो आपको अपने जीवन में हेर-फेर करने चाहिए, विचारों में परिवर्तन करने चाहिए, उस परिवर्तन के लिए आप विचारमग्न हों, और विचार करें कि आखिर ये क्यों किया जाए?... आप तो कर्मकाण्ड करते रहते हैं और ये विचार तक नहीं करते कि क्यों करते रहते हैं? वेदान्त का, फिलॉसफी क...
- केवल मात्र पेट ही भरना रहा तो गन्दे तरीके से हम क्यों भरें?... शेष तरीके से हम क्यों न भरें? हम जो बाकी पेट भरने के अलावा कार्य कर सकते हैं, वह क्यों न करें?...
- कैसे खा लूँ?... पकाए हैं ना? नहीं साहब! पकाने की क्या जरूरत है इसमें? थाली में रखकर ला। नहीं साहब! थाली में भी क्या ...
- को आप देख नहीं रहे क्या?... ऐसी-ऐसी चीजें बनती हुई चली जा रही हैं। एक किरण-एक्स रे के तरीके से, एक्स-रे की किरण फेंकी जाती है। क...
- कोई नहीं कह सकता; बाढ़ कब आ जायेगी?... इसका कोई ठिकाना नहीं है। नेचर हमसे बिलकुल नाराज हो गई है इसलिये उसने अपना ठीक तरीके से काम करना बन्द...
- कौन ड्यू माँग रहा है, कौन अन्ड्यू माँग रहा है?... अब बताइये। हमारी मनोकामना पूरी करके पड़ोसी को मारेगा कि पड़ोसी की मनोकामना पूरी करके हमको मारेगा। क्या...
- कौन रोकता है आपको?... लेकिन अगर आप चाहें तो समाज के लिये, गिरी हुई परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिये, समय को ऊँचा उठाने...
- कौन से वक्त में मैं लिखा करता हूँ, आपको मालूम है क्या?... मेरे पास पूरा समय है, आठ घण्टे का। मैं आठ घण्टे लिखता हूँ बराबर। आठ घण्टे मेरे गुरु को दिये जाते हैं...
- क्या आप ऐसा नहीं कर सकते?... आप हमारे साथ शामिल हो जायें और हम और आप मिलकर के बड़ा काम करें। उसमें से जो मुनाफा आये, वो बाँट लें। ...
- क्या आप भावना शून्य हो गये हैं?... क्या आपका हृदय पत्थर का और लोहे का हो गया है? नहीं, मेरा ख्याल है कि सब आदमियों का ऐसा नहीं हुआ होगा...
- क्या आपका हृदय पत्थर का और लोहे का हो गया है?... नहीं, मेरा ख्याल है कि सब आदमियों का ऐसा नहीं हुआ होगा। ज्यादातर लोगों का तो ऐसा ही हो गया है कि ये ...
- क्या आपके अन्दर भावनाएँ नहीं हैं?... क्या आप भावना शून्य हो गये हैं? क्या आपका हृदय पत्थर का और लोहे का हो गया है? नहीं, मेरा ख्याल है कि...
- क्या आपके लिये कोई कर्तव्य नहीं हैं?... क्या आपके अन्दर भावनाएँ नहीं हैं? क्या आप भावना शून्य हो गये हैं? क्या आपका हृदय पत्थर का और लोहे का...
- क्या उल्टी कोशिश?... जैसे कि हम और आप करते हैं। हमारा कमीनापन, हमारा घटियापन, भगवान् पर हावी जो जाए। जैसा हम चाहते हैं, व...
- क्या करना चाहिए आपको?... एक और काम करना चाहिए। कौन-सा? खिलाड़ी की जिन्दगी जीनी चाहिए। खिलाड़ी की जिन्दगी आप जीयें। खिलाड़ी हारते...
- क्या करना चाहिए?... अगर आपको ऊँचा उठना है तो आपको भीतर से हिम्मत इकट्ठी करनी चाहिए। क्या हिम्मत करें? ये हिम्मत करें कि ...
- क्या करना पड़ेगा?... आपको ये करना पड़ेगा कि क्रिया के साथ-साथ में शिक्षाएँ और प्रेरणाएँ आपको समझनी चाहिए और समझनी ही नहीं ...
- क्या करेगा हनुमान्?... बताइये आप। परेशान करते हैं हनुमान् को आप? ऐसा नहीं हो सकता। मनोकामना के लिये पूजा नहीं, बेटे। अगर मन...
- क्या काम शामिल करें?... व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण। एक काम आपका है—व्यक्ति निर्माण। अपने आपके निर्माण क...
- क्या तुम जलते हुए इन्सान नहीं बन सकते?... क्या भगवान् की लौ में समाने के लिये, लोगों के अन्दर लौ की आग, ज्ञान की आग पैदा नहीं कर सकते। न जाने ...
- क्या तू अपने जीवन को दीपक जैसा नहीं बना सकता?... ’’ अखण्ड दीपक मेरा जलता रहा। केवल मैं घी जलाने वाले लोगों में से नहीं हूँ। मैं तेल जलाने वाले लोगों ...
- क्या नुकसान में रहे?... आप बताइये न। किसी एक का नाम बताइए। गाँधी जी ने वकालत की होती तो वकालत में कितना कमा लेते? लेकिन जब उ...
- क्या पता चलाना पड़ेगा कि इसके पीछे प्रेरणा क्या है?... शिक्षा क्या है? स्थूल शरीर से आप प्रतीकों का पूजन करेंगे, चावल चढ़ाएँ, हाथ जोड़ें, नमस्कार करें, माला ...
- क्या बदल दें?... बूढ़े से जवान हो जायें? नहीं, ये आपके हाथ की बात नहीं। ये शरीर प्रकृति का बनाया हुआ है और प्रकृति उसक...
- क्या बनायें उनको?... एक ही बात बनाइये। उनके अन्दर भलमनसाहत पैदा कीजिए, चरित्र निष्ठा पैदा कीजिए। आदर्श पैदा कीजिए, सत्प्र...
- क्या भगवान् का प्यार पायेगा?... क्या भगवान् के सामने उसकी इज्जत रह जायेगी? कोई नहीं रह जायेगी। मैं एक इज्जतदार आदमी हूँ अपने भगवान् ...
- क्या भगवान् के सामने उसकी इज्जत रह जायेगी?... कोई नहीं रह जायेगी। मैं एक इज्जतदार आदमी हूँ अपने भगवान् के सामने। और उसने मेरी इज्जत को रखा है और म...
- क्या स्वभाव है?... देते रहते हैं। देते रहते हैं, क्या मतलब। देते रहने का मतलब है, अगर उनके पास कोई चीज है तो लोगों को ब...
- क्या हम करेंगे?... अपने आप में जो कच्चाइयाँ आयेंगी, जब आपको कच्चाइयाँ यह मजबूर करेंगी कि जो करते रहे हैं, वही ढर्रा चलत...
- क्या हिम्मत करें?... ये हिम्मत करें कि ऊँचे उठने वाले जिस तरीके से संकल्प बल का सहारा लेते रहे और हिम्मत से काम लेते रहे,...
- क्या-क्या बता दिए हैं?... मैंने तो आपको बी0ए0, एम0ए0 तक की पढ़ाई बता दी है; पर मान लीजिए बी0ए0, एम0ए0 तक की न आती हो, पहले दर्ज...
- क्यों आपकी सहायता करेगा?... आस बिरानी जो करै, जीयत ही मर जाये। यह इतिहास की कहावत है। अब ठीक है, वक्त मिल जायेगा तो सहायता मिल भ...
- क्यों करूँ मैं भगवान् की खुशामद?... नाक मैं किसी के सामने भी नहीं रगड़ सकता। भगवान् के सामने भी नहीं। भगवान् अपने घर के हैं, तो मैं अपने ...
- क्यों मान ली?... वो संकल्पवान् था। संकल्पवान् नहीं होता, तब ऐसे ही व्याख्यान करता फिरता, ‘‘साहब! पेड़ लगाइये, हरियाली ...
- क्यों, क्यों खाया उसने बेर?... उन्होंने कहा—शबरी मैं बेर नहीं खाता, मैं मोहब्बत खाता रहता हूँ, मैं आत्मा खाता रहता हूँ, मैं ईमान खा...
- क्रिया कुशल लोगों की कमी है क्या?... आप बताइए न, जेलखानों में पड़े हुए लोगों को आपने नहीं देखा है। एक से एक होशियार आदमी। एक से एक समझदार ...
- खराब आदमी है, उसको मार डालेंगे, उसकी हत्या कर डालेंगे, यह क्यों सोचते हैं?... यह मत सोचिए। आप दृष्टिकोण को बदलिये न। जो कुछ भी आपके पास मिला हुआ है, वह कम नहीं है। बहुत मिला हुआ ...
- खराब आदमी है, उसको हम अच्छा बनायेंगे, सज्जन बनायेंगे, यह क्यों नहीं सोचते?... खराब आदमी है, उसको मार डालेंगे, उसकी हत्या कर डालेंगे, यह क्यों सोचते हैं? यह मत सोचिए। आप दृष्टिकोण...
- खाद की जरूरत नहीं है?... पानी की जरूरत नहीं है उनकी। रखवाली की जरूरत नहीं है उनकी। आप रखवाली नहीं करेंगे, खाद-पानी न देंगे तो...
- गणेश जी का पेट तो इतना बड़ा है?... थैली भर चावल पकाकर लाइये। अगर आप यही मानते हैं कि चावल चढ़ाना है, तो मखौल मत कीजिए। मक्खनबाजी मत कीजि...
- गणेश जी मरेंगे कि जिएँगे कच्चा चावल खाने से?... कच्चा चावल खाएँगे। कच्चा चावल नहीं खा सकते गणेश जी। गणेश जी को चावल खिलाना है, तो पकाकर लाइए। पका कर...
- गलत क्या बात है?... इसका अर्थ ये है—कोई आप कृत्य करते हैं। प्रत्येक कृत्य के पीछे पता चलाना पड़ेगा। क्या पता चलाना पड़ेगा ...
- गलतियाँ समझ में नहीं आयेंगी तो आप सुधारेंगे क्यों?... इसीलिये समीक्षा जरूरी है, नाड़ी परीक्षा, अपने आपकी कीजिए, भूतकाल के सम्बन्ध में। पाप क्राइम को ही नही...
- गलती सुधारने से क्या मतलब?... गलती को सुधारिए और अपनी योग्यताओं को, अपनी क्षमताओं को और अपनी भावनाओं को विकसित कीजिए। आत्म निर्माण...
- गाँधी जी ने वकालत की होती तो वकालत में कितना कमा लेते?... लेकिन जब उन्होंने अपना समय सेवा में लगा दिया। सेवा के कार्यों में अपना खर्च करने लगे तो आप बताइये क्...
- गिरने में क्या देर लगेगी?... अन्तरिक्ष में उल्काएँ अपने आप गिरती रहती हैं। जब जमीन से रॉकेट अन्तरिक्ष की ओर फेंकने पड़ते हैं, तब क...
- गृह-कलह हुआ और सारे परिवार के लोग मारे गये, अन्ततः उनको अपना जो राज-पाट बड़ी मेहनत से जमाया था, सुदामा जी के हवाले करना पड़ा, तो बताइए आपकी परिस्थितियाँ अनुकूल हो सकती हैं?... भगवान् की परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं हुईं तो अगर आप ये सपना देखते हैं कि हमारी मनोकामना पूरी हो जायेगी...
- चमक पैदा करना भी कुछ काम है क्या?... उसमें अपने सिवाय अहंकार की पूर्ति के दूसरा कुछ है ही नहीं। हम बड़े आदमी हैं, बड़े आदमी हैं। अरे, आप क्...
- चिन्तन की शैली में जिस तरीके की शालीनता का समावेश होना चाहिए था, वो रखा गया क्या?... ना। न हमने अपने शरीर के प्रति कर्तव्यों का पालन किया, न अपने मस्तिष्क के प्रति अपने कर्तव्यों का पाल...
- छह दानों से क्या होगा?... गणेश जी का पेट तो इतना बड़ा है? थैली भर चावल पकाकर लाइये। अगर आप यही मानते हैं कि चावल चढ़ाना है, तो म...
- जन सम्पर्क बढ़ायेंगे नहीं?... सेवा के लिये कदम बढ़ायेंगे नहीं? जो काम करने हैं, करेंगे नहीं। नहीं साहब! हमने गलती सुधार ली। गलती सु...
- जब हर आदमी हैरान होगा तो आपको गुस्सा क्यों नहीं आयेगा?... इसीलिये क्या करना चाहिए कि अपना व्यक्तिगत जीवन सुख और शान्तिमय बनाने के लिये अपने कुटुम्ब और परिवार ...
- जिन लोगों ने अपने आपको बनाया है, उनको ये पूछने की जरूरत न पड़ी ‘क्या करेंगे?... ’, उनकी प्रत्येक क्रिया इस लायक बन गई, कि वो सब कुछ कर सकने में समर्थ हो गई। उनका व्यक्तित्व ही इतना...
- जिस काम के लिये जन्म मिला था, वही किया क्या?... पेट के लिये जितनी जरूरत थी, उससे ज्यादा कमाते रहे, क्या? कुटुम्ब की जितनी जिम्मेदारियाँ पूरी करनी चा...
- जिस चीज का मूल्य समझ में न आए, भला उसके सदुपयोग का सवाल कहाँ उत्पन्न होता है?... जीवन को हम निरर्थक वस्तु मानते हैं और ये मानते रहते हैं, ये कोई भार हमारे ऊपर टँगा हुआ है, और हमको भ...
- जिस दिन आप प्यार पैदा करेंगे, उस दिन आपके मन में से एक ही उमंग और ऐसी हिलोरें उत्पन्न होंगी, कि हमको कैसे दूसरों की सहायता करनी चाहिए?... जब दूसरों की सहायता करने के लिये आमादा होंगे तो आपको अपने में से कटौती करनी पड़ेगी, फिर साधु और ब्राह...
- जिस दिन आप सबको अपना मानने लगेंगे और अपने को सबका मानने लगेंगे, तब फिर आप जरा देखना तो सही कैसा मजा आता है, कैसा आनन्द आता है?... जीवन में, गतिविधियों में कैसा हेर-फेर होता है और आपकी प्रसन्नता किस तरीके से जमीन से आसमान तक छूने ल...
- जीवन में, गतिविधियों में कैसा हेर-फेर होता है और आपकी प्रसन्नता किस तरीके से जमीन से आसमान तक छूने लगती है?... ऐसी शक्ति पैदा कीजिए। बस, यही कहना था, आज आपसे।...
- जीविका उपार्जन कैसे करनी चाहिए?... अर्थशास्त्र क्या है? वगैरह। लोक व्यवहार में प्रवीण बनने के सम्बन्ध में एक। जीविकोपार्जन के सम्बन्ध म...
- जो चालाक ये समझें और कहें, क्यों ऐसा अनिवार्य नियम बनाया गया?... ऐसा अनिवार्य नियम इसीलिये बनाया गया है कि आदमी को एक भावनात्मक वातावरण में, एक उत्साहवर्धक वातावरण म...
- ज्यादा हम कहाँ तक दे पायेंगे?... भीख माँगने वाले को कहाँ, किसी ने क्या, कितना दिया है? थोड़ा सा ही दे पाते हैं। लेकिन आप हिस्सेदार क्य...
- ज्वालामुखी कब फटने लगेंगे?... कोई नहीं कह सकता; बाढ़ कब आ जायेगी? इसका कोई ठिकाना नहीं है। नेचर हमसे बिलकुल नाराज हो गई है इसलिये उ...
- ठीक है, परिणाम नहीं मिला तो हम क्या कर सकते हैं?... बहुत सी बातें परिस्थितियों पर निर्भर रहती है। परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल नहीं रहीं तो हम क्या कर सकते...
- तुम मुझे देख नहीं पाओगे क्या?... तुम मुझे केवल गुरुजी, आशीर्वाद देने वाले ही मानते रहोगे क्या? मैं जलता हुआ इन्सान हूँ और मैं सही इन्...
- तो क्या करना चाहिए?... आपको यही करना पड़ेगा कि चौरासी लाख योनियों में भटकते हुए जो कुसंस्कार ढेरों के ढेरों इकट्ठे कर लिये ह...
- तो क्या होना चाहिए?... मित्रो! पानी बरसता है, हर चीज मुलायम हो जाती है और गीली हो जाती है, तो मैं ये पूछता हूँ कि चट्टान गी...
- थाली में भी क्या करेंगे आप?... क्या करेंगे? यहीं पटक देंगे, ये छह चावल के दाने। बेटे! इसको हम क्या करें? खा लीजिए। ये तो मुश्किल है...
- दुनिया में किस तरीके से उतार-चढ़ाव आते रहे हैं?... पेड़ कैसे पैदा होते हैं? यह सृष्टि क्या है? राजनीति क्या है? समाज क्या है? एक नागरिक कर्तव्य क्या है?...
- दुर्योधन से लड़े बिना काम चला?... कंस से लड़े बिना काम चला? लड़ाई मोहब्बत की है अथवा कैसी है, हिंसा की है, अहिंसा की है, ये मैं इस वक्त ...
- दूसरों के प्रति द्वेष?... द्वेष करेंगे तो भी आप ही जल जायेंगे। ईर्ष्या? ईर्ष्या से भी आप जल जायेंगे। प्रतिशोध? प्रतिशोध से भी ...
- दे चुका हूँ और करोड़ों मनुष्यों के दिल और दिमाग के ऊपर सारे विश्व भर में छाया हुआ हूँ, ये चमत्कार नहीं है, क्या?... हाँ, मुझ जैसा साधनहीन व्यक्ति जिसके पास कोई पैसे की सहायता करने वाला नहीं, जिसको कोई समर्थन देने वाल...
- देने के लिये कुछ कम है क्या?... आप मेहनत दे दीजिए, आप लोगों के लिये सहानुभूति दे दीजिए। देने के लिये कुछ भी कम नहीं है। आपके पास देन...
- न जाने मैं क्या से क्या कहता रहा हूँ?... मेरी चारों वाणियाँ (परा, पश्यन्ति, मध्यमा और बैखरी) बोलती रही हैं। आपके हृदय से मैं बोलता रहा हूँ। आ...
- नहीं साहब, नहीं होता और चट्टान में से पत्ता पैदा होता है?... नहीं होता। उनको पानी से फायदा उठाने के लिये अपने आपको अनुकूल बनाना पड़ेगा। ये सिद्धान्त अगर समझ में आ...
- नहीं हुए तो बात बिगड़ जायेगी, क्या बात बिगड़ जायेगी?... दुनिया में बिना पढ़े-लिखे लोग भी तो हैं। आप मैट्रिक पास रह गये तो क्या आफत आ गई? नहीं साहब, हमारा ये ...
- नाम नहीं लेंगे तो बात कैसे बनेगी?... जिस तक पहुँचना है उसका नाम तो लेना ही पड़ेगा। स्टेशन का नाम बताए बिना तो उसका टिकट भी नहीं मिलता।......
- निर्माण में क्या?... निर्माण उसे कहते हैं कि जो चीजें आपके पास नहीं हैं, चाहे जो स्वभाव, गुण और कर्म में जो बातें शामिल न...
- पका कर लाए हैं?... हाँ साहब! और चावल कितना चावल लाए हैं? गणेश जी पर चढ़ा रहे थे—अक्षतान् समर्पयामि। दिखाइये चावल जरा। ये...
- पकाए हैं ना?... नहीं साहब! पकाने की क्या जरूरत है इसमें? थाली में रखकर ला। नहीं साहब! थाली में भी क्या करेंगे आप? क्...
- पकाने की क्या जरूरत है इसमें?... थाली में रखकर ला। नहीं साहब! थाली में भी क्या करेंगे आप? क्या करेंगे? यहीं पटक देंगे, ये छह चावल के ...
- परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल नहीं रहीं तो हम क्या कर सकते थे?... कर्तव्य हमने हमारा पूरा किया, बहुत है, हमारे लिये बहुत है; इस दृष्टि से आप जीयेंगे तो आपकी खुशी को क...
- परिस्थितियों का उपयोग किस तरीके से करें?... अपने पास जो साधन और सामान मिला हुआ है या मिल सकता है, आप उसका ठीक तरीके से इस्तेमाल किस तरीके से कर ...
- परेशान करते हैं हनुमान् को आप?... ऐसा नहीं हो सकता। मनोकामना के लिये पूजा नहीं, बेटे। अगर मनोकामना के लिये पूजा है तो बन्द कीजिए। मित्...
- पानी इनके पास कहाँ?... बृज की छोकरियों ने एक कटोरी भर छाछ पिलाया और उसको (कृष्ण को) सारे आँगन में नाच नचाकर के दिखाया। मित्...
- पानी बरसता है, हर चीज मुलायम हो जाती है और गीली हो जाती है, तो मैं ये पूछता हूँ कि चट्टान गीला होता है कि नहीं होता?... नहीं साहब, नहीं होता और चट्टान में से पत्ता पैदा होता है? नहीं होता। उनको पानी से फायदा उठाने के लिय...
- पूरा नहीं करेंगे?... विद्या को आप नहीं पढ़ेंगे? स्वास्थ्य को सुधारेंगे नहीं? जन सम्पर्क बढ़ायेंगे नहीं? सेवा के लिये कदम बढ़...
- पेट के लिये जितनी जरूरत थी, उससे ज्यादा कमाते रहे, क्या?... कुटुम्ब की जितनी जिम्मेदारियाँ पूरी करनी चाहिए थी, उसको पूरा करने के स्थान पर अनावश्यक संख्या में लो...
- पेट कैसे भरेगा?... और गणेश जी का? गणेश जी को ‘अक्षतं समर्पयामि’, गणेश जी को अक्षत चढ़ाता ही जा रहा है। समझता नहीं कि क्य...
- पेड़ कैसे पैदा होते हैं?... यह सृष्टि क्या है? राजनीति क्या है? समाज क्या है? एक नागरिक कर्तव्य क्या है? जीविका उपार्जन कैसे करन...
- फिर आपको क्या करना चाहिए?... अगर आपको ऊँचा उठना है तो आपको भीतर से हिम्मत इकट्ठी करनी चाहिए। क्या हिम्मत करें? ये हिम्मत करें कि ...
- फिर क्या करना चाहिए?... आदमी को ये करना चाहिए कि प्रत्येक कर्मकाण्ड के पीछे की विचारणाएँ, प्रेरणाएँ समझें। विचारणाएँ क्या है...
- फिर क्या होगा?... खान-पान का जो लाभ होगा तो होगा ही, खान-पान के लाभों को मैं इतना महत्त्व देता नहीं, जितना कि इस बात क...
- फिर, उनको क्यों हम घटिया दर्जे का मानते हैं?... उनकी एक ही कमी है कि उनको ज्ञान की कमी है। मनुष्य ज्ञान का देवता माना गया है। ज्ञान की वजह से, मननशी...
- बाहर से भी पिसेंगे और भीतर से भी पिसेंगे तो आप मरेंगे नहीं?... आप ऐसे मत कीजिए। आप क्या करें? आप बुराइयों को बरदाश्त करें? नहीं, यह तो मैं नहीं कहता कि बुराइयों को...
- बुढ़ापे को जवानी में बदल सकते हैं क्या?... न, मौत को जिन्दगी में बदल सकते हैं क्या, न। आदमी की सीमा है और जिस सीमा से आप बँधे हुए हैं, आप उसी स...
- बूढ़े से जवान हो जायें?... नहीं, ये आपके हाथ की बात नहीं। ये शरीर प्रकृति का बनाया हुआ है और प्रकृति उसकी मालिक है। वो जब चाहती...
- भगवान् एक ओर से पूछता चला आता है ‘‘तैंने मुझे क्या दिया?... ’’ और हम भगवान् से तकाजा करते हुए चले जाते हैं।...
- भगवान् की कैसी संगति?... भगवान् की ऐसी संगति कि भगवान् की विशेषताएँ, हमारे जीवन में आयें। भगवान् की अगर विशेषताएँ हमारे जीवन ...
- भगवान् बुद्ध में क्या विशेषता हुई, भगवान् से क्या वरदान मिला, इनको क्या विशेष सम्पदा मिली?... आप उनके जीवन को पढ़िए। बोधि वृक्ष के नीचे, एक पेड़ के नीचे, जिसके नीचे उन्होंने तप किया था, उनको एक खा...
- भटकता क्यों है?... मुझे गिड़गिड़ाना होगा, तो वहाँ गिड़गिड़ाऊँगा। मुझे गिड़गिड़ाना होगा तो मेरी आत्मा के सामने गिड़गिड़ाऊँगा और ...
- भला ये भी कोई समझदारी है?... आप हवा में उड़ते हुए पत्तों के तरीके से उड़ते हुए चले जायें, भला ये भी कोई समझदारी हुई। आपको वजनदार हो...
- भीख माँगने वाले को कहाँ, किसी ने क्या, कितना दिया है?... थोड़ा सा ही दे पाते हैं। लेकिन आप हिस्सेदार क्यों नहीं बन जाते हमारी दुकान में? अन्धे और पंगे का योग ...
- भूकम्प कब आ जायेंगे?... कोई नहीं कह सकता। ज्वालामुखी कब फटने लगेंगे? कोई नहीं कह सकता; बाढ़ कब आ जायेगी? इसका कोई ठिकाना नहीं...
- भोजन जैसा भी हो, खराब है तो खराब से क्या करें?... खराब से ही काम चलायें, लेकिन नहीं साहब! जायका अच्छा नहीं लगता, वहाँ कचौड़ी खायेंगे। मत कीजिए ऐसा। तरह...
- मन आपका बड़ा नहीं है, व्यक्तित्व आपका बड़ा नहीं है, संस्कार आपके बड़े नहीं हैं तो बड़प्पन का स्थायित्व कैसे रह पायेगा?... सारी जिन्दगी आपकी इन कामों में खतम हो गई है। अब आप कृपा कीजिए। अपनी जिन्दगी में कुछ नये काम शामिल कर...
- माली को इतनी चिन्ता रहती है कि अपने कर्तव्यों और अपने फर्ज पूरे किये कि नहीं किये?... दुनिया में रहें, काम दुनिया में करें, पर अपना मन भगवान् में रखें अर्थात् उच्च उद्देश्यों और उच्च आदर...
- मुझे क्यों समझना है?... अक्षत चढ़ाऊँगा। भाड़ चढ़ाएगा अक्षत। मित्रो! क्या करना पड़ेगा? आपको ये करना पड़ेगा कि क्रिया के साथ-साथ मे...
- मुझे गिड़गिड़ाना होगा तो मेरी आत्मा के सामने गिड़गिड़ाऊँगा और मैं यह कहूँगा कि ‘तू है शक्ति की पुञ्ज और मुझे अशक्त बनाये क्यों फिर रही है?... मुझे दरवाजे-दरवाजे भटकने के लिये कह रही है और मुझे पत्थरों के टुकड़ों के सामने नाक रगड़ने के लिये क्यो...
- मुनासिब जिन्दगी नहीं जी सकते तो ऐसी जिन्दगी जीने से क्या फायदा?... आप नहीं जीयें। नहीं जीने से मेरा मतलब ये है, आप गरीबी में गुजारा कर लें। कंगाली में गुजारा कर लें। त...
- मैं उनमें से हरेक से ये कहता हूँ, ये मत पूछो, बल्कि ये पूछो कि क्या बनें?... क्या बनें? अगर आप कुछ बन जाते हैं तो करने से भी ज्यादा कीमती है, पर जो कुछ भी आप कर रहे होंगे, वो सब...
- मैं नाक रगड़ूँ, क्यों रगड़ूँ भगवान् के सामने नाक?... मैं गिड़गिड़ाऊँ, क्यों गिड़गिड़ाऊँ भगवान् के सामने? मैं किसी के सामने नहीं गिड़गिड़ा सकता। मैं गिड़गिड़ाऊँगा...
- मैंने कहा—मेरे पास सामर्थ्य कहाँ है?... उसने कहा—‘‘बेटा! सामर्थ्य तो आत्मा के भीतर रहती है’’। बस मैंने आत्मा की सामर्थ्य को तलाश किया और न ज...
- मैंने कहा—‘‘मेरा कमाया हुआ कहाँ से हो सकता है?... चौदह-पन्द्रह वर्ष का बच्चा कहाँ से धन कमा के लायेगा। पिता जी का दिया हुआ धन है’’। इस सारे के सारे धन...
- यह सृष्टि क्या है?... राजनीति क्या है? समाज क्या है? एक नागरिक कर्तव्य क्या है? जीविका उपार्जन कैसे करनी चाहिए? अर्थशास्त्...
- यहाँ हम अपने विश्वविद्यालय में-शान्तिकुञ्ज में जीवन जीने की कला सिखाते हैं और यह सिखाते हैं कि आज गए-बीते जमाने में आप अपनी नाव पार करने के साथ-साथ सैकड़ों आदमियों को बिठाकर पार किस तरह से लगा पाते हैं?... ">शान्तिकुञ्ज देखिए, गायत्री नगर देखिए, ब्रह्मवर्चस देखिए, चौबीस सौ गायत्री शक्तिपीठों को देखिये। ये...
- ये आपकी क्या है?... जिज्ञासा है। प्रत्येक कर्मकाण्ड देखने से खिलवाड़ मालूम पड़ते हैं। चावल चढ़ा दिया गणेश जी पर। काहे के लि...
- ये क्या आफत आ गई, ये क्या हो गया?... उलटा अज्ञान! उलटा अज्ञान अध्यात्म में समाविष्ट हो गया। ऐसा नहीं होना चाहिए था। तो क्या होना चाहिए? म...
- ये क्या चक्कर है?... गायत्री माता की मूर्ति हो, तो आप ये पूछिए कि क्या बात है साहब! हमने तो मूर्ति रख दी और दण्ड पेल रहे ...
- ये क्या है?... इसको देखने में तो कोई खास बात नहीं है। आपको अमुक काम करने से नमक का क्या ताल्लुक और आपने घी खाना बन्...
- ये जो नये तरीके अख्तियार करने हैं, किसके लिये?... प्रगति के लिये। ये सब आत्म निर्माण में आते हैं। कमी को पूरा करना है। कमी को सुधारना ही सब चीज नहीं ह...
- ये प्रभाव किसका है?... ये प्रभाव विशुद्ध आध्यात्मिकता का है। मेरे जैसे छोटे और मामूली और साधनहीन व्यक्ति का नहीं है।...
- ये मुमकिन है?... ये नामुमकिन है। भगवान् तुम बड़े अच्छे हो, तुम्हारी नाक बड़ी अच्छी है, तुमने महिषासुर को मार डाला, तुमन...
- ये सम्भव है?... ये बेटे, सम्भव नहीं है। मान लीजिए, हम सब हनुमान् जी के भक्त हैं, और हम ये हनुमान् जी से प्रार्थना कर...
- ये सारी की सारी चीजों को आप बनाये रखेंगे, फिर आप कैसे जीयेंगे, बताइये न?... बाहर से भी पिसेंगे और भीतर से भी पिसेंगे तो आप मरेंगे नहीं? आप ऐसे मत कीजिए। आप क्या करें? आप बुराइय...
- रक्त के एक कण की क्या कीमत हो सकती है?... आप बताइये। रक्त के सारे कणों का समूह जब मिल जाता है, तो ही तो खून का संचार होता है। एक कण जरा सा निक...
- राजनीति क्या है?... समाज क्या है? एक नागरिक कर्तव्य क्या है? जीविका उपार्जन कैसे करनी चाहिए? अर्थशास्त्र क्या है? वगैरह।...
- रावण से लड़े बिना कहीं काम चला?... दुर्योधन से लड़े बिना काम चला? कंस से लड़े बिना काम चला? लड़ाई मोहब्बत की है अथवा कैसी है, हिंसा की है,...
- रास्ता भटक तो नहीं गये, भूल तो नहीं गये, इसीलिये जन्म मिला था क्या?... जिस काम के लिये जन्म मिला था, वही किया क्या? पेट के लिये जितनी जरूरत थी, उससे ज्यादा कमाते रहे, क्या...
- रुपया-पैसा हमारे पास कम है, तो पैसा कौन माँग रहा है आपसे?... और पैसा देकर के आप क्या भला करेंगे आदमी का? आप दूसरों को प्यार दीजिए न, आप दूसरों को सम्मान दीजिए न।...
- लेकिन आज सृष्टि का स्वामी बना हुआ है, किस वजह से?... प्राचीन काल की तुलना में आज आदमी का ज्ञान बढ़ता हुआ चला गया है। ज्ञान की दो धाराएँ हैं और दोनों को ही...
- लेकिन आप हिस्सेदार क्यों नहीं बन जाते हमारी दुकान में?... अन्धे और पंगे का योग क्यों नहीं बना लेते। हमारे गुरु और हमने साझेदारी की है। शंकराचार्य ने और मान्धा...
- लोगों के रास्ते पर चलने के बनिस्बत आपको अलग खड़े होकर देखना चाहिए कि मुनासिब रास्ता क्या है, मुनासिब तरीके क्या हैं, मुनासिब क्या है, लोग गलती करें तो आप क्या कर सकते हैं?... आज तो गलतियों का ही जमाना है। आप पानी के बहाव में तिनके के तरीके से बहते हुए चले जायें। भला ये भी को...
- लड़े बिना काम कैसे चलेगा, बताइये न?... रावण से लड़े बिना कहीं काम चला? दुर्योधन से लड़े बिना काम चला? कंस से लड़े बिना काम चला? लड़ाई मोहब्बत क...
- वजह क्या है?... ये सब गलतियाँ हैं। इसी तरीके से अपने स्वास्थ्य के लिये जो खान-पान, आहार-विहार जैसा रखना चाहिए था, वै...
- विचार करने से क्या फायदा?... ये फायदा है कि गलतियाँ समझ में आयेंगी तो सुधार की भी गुंजाइश रहेगी। गलतियाँ समझ में नहीं आयेंगी तो आ...
- विचारणाएँ क्या हैं?... प्रत्येक कर्मकाण्ड हमको कुछ शिक्षा देता है, कुछ नसीहत देता है, कुछ उम्मीदें कराता है।...
- विद्या की कमी को जो पूरा नहीं करेंगे, तो उन्नति कैसे हो जायेगी?... आपके ज्ञान का दायरा कैसे बढ़ेगा? आपकी बुद्धि का विकास कैसे होगा? इसीलिये यहाँ आत्म निर्माण के लिये भी...
- विद्या को आप नहीं पढ़ेंगे?... स्वास्थ्य को सुधारेंगे नहीं? जन सम्पर्क बढ़ायेंगे नहीं? सेवा के लिये कदम बढ़ायेंगे नहीं? जो काम करने ह...
- विद्या से मतलब ये है कि आप अपने विचारों का इस्तेमाल किस तरीके से करें?... आप अपने शरीर का इस्तेमाल किस तरीके से करें? साधनों का इस्तेमाल कैसे करें? परिस्थितियों का उपयोग किस ...
- वेदान्त का, फिलॉसफी का पहला वाला सूत्र है, क्या सूत्र है?... ब्रह्म-जिज्ञासा। पहला काम ये है कि आप जानिए। ये क्या चक्कर है? गायत्री माता की मूर्ति हो, तो आप ये प...
- शिक्षा का क्या मतलब?... शिक्षा का मतलब है, उनको लोकाचार आए।...
- शिक्षा क्या है?... स्थूल शरीर से आप प्रतीकों का पूजन करेंगे, चावल चढ़ाएँ, हाथ जोड़ें, नमस्कार करें, माला घुमाएँ, मन्त्र क...
- शिक्षा न होगी तो आदमी अपने शरीर को सम्भाल किस तरीके से पायेगा?... समाज के साथ में तालमेल बिठा किस तरीके से पायेगा? अपनी अकल का उपयोग किस तरीके से कर पायेगा? ये सब जान...
- शेष तरीके से हम क्यों न भरें?... हम जो बाकी पेट भरने के अलावा कार्य कर सकते हैं, वह क्यों न करें?...
- संसार इतना प्रचार किया करती है, कोई सुनता है क्या?... सुनने के लिये ये बहुत जरूरी है कि जो आदमी उस बात को कहने के लिये आया है, वो संकल्पवान् हो। संकल्पवान...
- समझता नहीं कि क्या चक्कर है?... समझता है कि नहीं? नहीं साहब! मुझे क्यों समझना है? अक्षत चढ़ाऊँगा। भाड़ चढ़ाएगा अक्षत। मित्रो! क्या करना...
- समझता है कि नहीं?... नहीं साहब! मुझे क्यों समझना है? अक्षत चढ़ाऊँगा। भाड़ चढ़ाएगा अक्षत। मित्रो! क्या करना पड़ेगा? आपको ये कर...
- समाज के साथ में तालमेल बिठा किस तरीके से पायेगा?... अपनी अकल का उपयोग किस तरीके से कर पायेगा? ये सब जानकारियों के लिये शिक्षा तो आवश्यक है। शरीर के लिए,...
- समाज क्या है?... एक नागरिक कर्तव्य क्या है? जीविका उपार्जन कैसे करनी चाहिए? अर्थशास्त्र क्या है? वगैरह। लोक व्यवहार म...
- साधकों में से कई व्यक्ति हमसे ये पूछते रहते हैं—क्या करें?... क्या करें? मैं उनमें से हरेक से ये कहता हूँ, ये मत पूछो, बल्कि ये पूछो कि क्या बनें? क्या बनें? अगर ...
- साधनों का इस्तेमाल कैसे करें?... परिस्थितियों का उपयोग किस तरीके से करें? अपने पास जो साधन और सामान मिला हुआ है या मिल सकता है, आप उस...
- सारा विश्व अज्ञान के अन्धकार में डूबा हुआ; भ्रम के जंजाल में फँसता हुआ और अपना वक्त और अपना समय बरबाद करता हुआ; अध्यात्म को बदनाम करता चला जाता है और शिकायत करता हुआ चला जाता है कि हमने भगवान् का नाम लिया था, पूजा की थी, खुशामद की थी, मिठाई खिलायी थी, चावल खिलाया था, धूपबत्ती खिलायी थी, आरती जलायी थी, और हमें कोई फायदा नहीं हुआ, कैसे हो सकता है फायदा?... फायदा होना चाहिए। उसका लाभ उठाने के लिये आदमी को अपने जीवन में आध्यात्मिकता का समावेश करना होगा। जीव...
- सारे के सारे देश में अज्ञान?... अध्यात्म के नाम पर अज्ञान? अध्यात्म तो अज्ञान के निवारण करने के लिये बनाया गया था। ये क्या आफत आ गई,...
- सुधार कैसे करें?... सुधार में क्या बात करनी होती है? सुधार में रोकथाम करनी पड़ती है। मसलन, आप शराब पीते हैं तो आप बन्द की...
- सुधार में क्या बात करनी होती है?... सुधार में रोकथाम करनी पड़ती है। मसलन, आप शराब पीते हैं तो आप बन्द कीजिए। नहीं साहब, हम शराब नहीं पीये...
- सुधार लेंगे, इससे क्या बना?... पूरा नहीं करेंगे? विद्या को आप नहीं पढ़ेंगे? स्वास्थ्य को सुधारेंगे नहीं? जन सम्पर्क बढ़ायेंगे नहीं? स...
- सेवा के कार्यों में अपना खर्च करने लगे तो आप बताइये क्या कमी रह गई उनके पास?... किसी चीज की कमी नहीं थी। गाँधी जी बड़े शानदार आदमी थे और शानदार आदमी सिर्फ इसलिये हुए कि उन्होंने अपन...
- सेवा के लिये कदम बढ़ायेंगे नहीं?... जो काम करने हैं, करेंगे नहीं। नहीं साहब! हमने गलती सुधार ली। गलती सुधारने से क्या मतलब? गलती को सुधा...
- स्वयं नुकसान में रहे?... क्या नुकसान में रहे? आप बताइये न। किसी एक का नाम बताइए। गाँधी जी ने वकालत की होती तो वकालत में कितना...
- स्वार्थों से डूबे हुए, कामनाओं से डूबे हुए, तृष्णाओं से डूबे हुए, लोभ से डूबे हुए, इन सब पाप पंकों में जलते हुए इंसान के पास पानी कहाँ है?... पानी रहा होता तो उनकी आत्मा शान्त हो गई होती, तृप्त हो गयी होती। शीतलता का अनुभव जीवन में किया होता।...
- स्वास्थ्य को सुधारेंगे नहीं?... जन सम्पर्क बढ़ायेंगे नहीं? सेवा के लिये कदम बढ़ायेंगे नहीं? जो काम करने हैं, करेंगे नहीं। नहीं साहब! ह...
- सड़क पर आप निकलते हैं, मालूम नहीं आपके साथ में, पड़ोस में चलने वाला जो व्यक्ति है, चाकू आपको भोंक करके और आपकी घड़ी नहीं छीन ले जायेगा, इसका क्या विश्वास है?... इंसान का चाल-चलन, इंसान का विचार इतना गन्दा और इतना घटिया हो गया है, कि अगर स्थिति यही बनी रहेगी तो ...
- हनुमान् को तो इस बात की तमीज नहीं है कि हमको मनोकामना पूरी करते समय पे ये विचार करना चाहिए कि कौन मुनासिब माँग रहा है, कौन गैर मुनासिब माँग रहा है?... कौन ड्यू माँग रहा है, कौन अन्ड्यू माँग रहा है? अब बताइये। हमारी मनोकामना पूरी करके पड़ोसी को मारेगा क...
- हम इन्सान उनको इतना कमजोर समझते हैं कि कोई आदमी खुशामद करके जो कुछ चाहे, चाहे जब उनसे वसूल कर ले जाये वह भगवान् कैसे हो सकता है?... जो व्यक्ति खुशामद करें, तारीफ करें, जो कुछ भी चाहें, वही हमको मिल जाये। ये मुमकिन है? ये नामुमकिन है...
- हम ईमानदारी से रहते हैं, बीड़ी नहीं पीते हैं, वो तो ठीक है आपकी बात, पर मैं यह पूछता हूँ, विद्या की जो कमी है, उसको आप क्यों पूरा नहीं करते?... विद्या की कमी को जो पूरा नहीं करेंगे, तो उन्नति कैसे हो जायेगी? आपके ज्ञान का दायरा कैसे बढ़ेगा? आपकी...
- हम एक व्यक्ति हैं?... नहीं हैं। हम कोई व्यक्ति नहीं हैं। हम एक सिद्धान्त हैं, आदर्श हैं, हम एक दिशा हैं, हम एक प्रेरणा हैं...
- हम एक व्यक्ति हैं?... नहीं हैं। हम कोई व्यक्ति नहीं हैं। हम एक सिद्धान्त हैं, आदर्श हैं, हम एक दिशा हैं, हम एक प्रेरणा हैं...
- हम एक व्यक्ति हैं?... नहीं हैं। हम कोई व्यक्ति नहीं हैं। हम एक सिद्धान्त हैं, आदर्श हैं, हम एक दिशा हैं, हम एक प्रेरणा हैं...
- हम एक व्यक्ति हैं?... नहीं हैं। हम कोई व्यक्ति नहीं हैं। हम एक सिद्धान्त हैं, आदर्श हैं, हम एक दिशा हैं, हम एक प्रेरणा हैं...
- हम एक व्यक्ति हैं?... नहीं हैं। हम कोई व्यक्ति नहीं हैं। हम एक सिद्धान्त हैं, आदर्श हैं, हम एक दिशा हैं, हम एक प्रेरणा हैं...
- हम जो बाकी पेट भरने के अलावा कार्य कर सकते हैं, वह क्यों न करें?... यह प्रश्न हमारे सामने ज्वलंत रूप से आ खड़ा होगा और हमको यह आवश्यकता मालूम पड़ेगी कि हम अपनी मनःस्थिति ...
- हमको बीज की जरूरत है, बीज लाइये, बीज बनिए, कहाँ से बीज लायेंगे?... आप गलिए, वृक्ष बनिए और अपने भीतर से ही फल पैदा कीजिए और प्रत्येक फल में से ढेरों के ढेरों बीज पैदा क...
- हमारे इतने ऊँचे संस्कार और मनुष्य का जीवन किस खास काम के लिये मिला हुआ है और तुम्हें भगवान् ने किस खास समय पर भेजा?... अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिये भेजा।...
- हमारे तीन लड़कियाँ हैं, चौथा लड़का कहाँ है?... और हमको तो ढाई सौ रुपये मिलते हैं, साढ़े चार सौ रुपये की तरक्की कहाँ हुई? और हमारे पास अस्सी बीघा खेत...
- हार गया तो क्या है?... चेहरे पर कोई शिकन ही नहीं। आप अपने चेहरे पे शिकन मत आने दीजिए। चिन्ताओं को और मुसीबतों की कल्पनाएँ क...
- हिमालय पर क्या होता है?... सिनेमा होता है क्या, नहीं बेटा। हिमालय पे क्या होता है, मिठाइयाँ बिकती हैं क्या? नहीं। हिमालय पे कचौ...
- हिमालय पे कचौड़ियाँ बिकती हैं क्या?... क्या होता है हिमालय पे। रात भर जंगली जानवर चिल्लाते हैं और रात भर बड़े-बड़े अजगर निकलते हैं। पेड़ों के ...
- हिमालय पे क्या होता है, मिठाइयाँ बिकती हैं क्या?... नहीं। हिमालय पे कचौड़ियाँ बिकती हैं क्या? क्या होता है हिमालय पे। रात भर जंगली जानवर चिल्लाते हैं और ...
- ‘संकल्प शक्ति’ किसे कहते हैं?... ‘संकल्प शक्ति’ उसे कहते हैं, जिसमें कि ये फैसला कर लिया जाता है कि हमको ये तो करना ही है। ये हर हाल ...
- , आशीर्वाद देने वाले ही मानते रहोगे क्या?...? मैं जलता हुआ इन्सान हूँ और मैं सही इन्सान हूँ। क्या तुम जलते हुए इन्सान नहीं बन सकते? क्या भगवान् क...
- आज मनुष्य को जीना कहाँ आता है?...? जीना भी एक कला है। सब आदमी खाते हैं, पीते हैं, सोते हैं और मौत के मुँह में चले जाते हैं, किन्तु जीन...
- आप क्या करें?...? आप बुराइयों को बरदाश्त करें? नहीं, यह तो मैं नहीं कहता कि बुराइयों को बरदाश्त करें। आप बुराइयों से ...
- इतने बड़े-बड़े काम मैंने किये हैं—कोई काम रुका रहा क्या?...? भगवान् ने मुझे कहा—साहित्य के माध्यम से लोगों के दिलों और दिमागों को बदल। मैंने कहा—मेरे पास सामर्थ...
- इन्सानों के पास मोहब्बत कहाँ?...? स्वार्थों से डूबे हुए, कामनाओं से डूबे हुए, तृष्णाओं से डूबे हुए, लोभ से डूबे हुए, इन सब पाप पंकों ...
- इसी तरीके से अपने स्वास्थ्य के लिये जो खान-पान, आहार-विहार जैसा रखना चाहिए था, वैसा रखा क्या?...? चिन्तन की शैली में जिस तरीके की शालीनता का समावेश होना चाहिए था, वो रखा गया क्या? ना। न हमने अपने श...
- ओं को पूरा नहीं कर सकता?...? एक आदमी अपनी ख्वाहिशों को पूरा नहीं कर सकता? लेकिन एक आदमी इतने ज्यादा मनुष्यों के, इतने ज्यादा किस...
- ओं में बदलते हुए जा रहे हैं?...? विज्ञान की प्रगति को आप देख नहीं रहे क्या? ऐसी-ऐसी चीजें बनती हुई चली जा रही हैं। एक किरण-एक्स रे क...
- क्यों और क्या?...? पहले यहाँ से चल। भजन पीछे करना। ये क्या चक्कर है? पहले ये पूछना, फिर इसके बाद शुरू करना। ये आपकी क्...
- गलतियाँ न होने देने का तरीका क्या है?...? क्या हम करेंगे? अपने आप में जो कच्चाइयाँ आयेंगी, जब आपको कच्चाइयाँ यह मजबूर करेंगी कि जो करते रहे ह...
- जीवन कैसे जीयें?...? संसार में हम हैं। संसार में रह करके हम अपने कर्तव्य पूरे करें। हँसी-खुशी से रहें, अच्छे तरीके से ...
- मेरे पाँच शरीर हैं, आप जानते नहीं क्या?...? पर पचासों लोग जानते हैं, एक जगह मैं एक काम करता रहता हूँ, दूसरी जगह पर मैं दूसरा काम करता रहता हूँ।...
- मैं गिड़गिड़ाऊँ, क्यों गिड़गिड़ाऊँ भगवान् के सामने?...? मैं किसी के सामने नहीं गिड़गिड़ा सकता। मैं गिड़गिड़ाऊँगा, तो अपनी आत्मा के सामने गिड़गिड़ाऊँगा और अपने मन...
- ये ऐसा भयंकर समय है, ऐसे भयंकर समय में क्या आपके लिये कोई जिम्मेदारियाँ नहीं हैं?...? क्या आपके लिये कोई कर्तव्य नहीं हैं? क्या आपके अन्दर भावनाएँ नहीं हैं? क्या आप भावना शून्य हो गये ह...
- ये कहाँ से बनाया?...? जो पैसा, पिताजी का छोड़ा हुआ था, उसको हमने खाया नहीं। छोटी उमर में खा लिया होगा तो हम नहीं कह सकते। ...
- विद्या से क्या मतलब?...? विद्या से मतलब ये है कि आप अपने विचारों का इस्तेमाल किस तरीके से करें? आप अपने शरीर का इस्तेमाल किस...
- श्रीकृष्ण भगवान् सारे जीवन भर पुरुषार्थ तो करते रहे, पर परिस्थितियाँ कहाँ बनीं उनके साथ में, आप बताइये?...? गृह-कलह हुआ और सारे परिवार के लोग मारे गये, अन्ततः उनको अपना जो राज-पाट बड़ी मेहनत से जमाया था, सुदा...
- साधक कैसे बनें?...? साधकों में से कई व्यक्ति हमसे ये पूछते रहते हैं—क्या करें? क्या करें? मैं उनमें से हरेक से ये कहत...
- ’ तो उन्होंने ये कहा, ‘‘अगर भगवान् ने ऐसे वेद बनाये हैं, जिसमें कि नैतिक सिद्धान्तों का परिपालन नहीं हुआ है तो फिर ऐसे भगवान् को मानने की आवश्यकता क्या है?...? तो उन्होंने भगवान् को मानने से इन्कार कर दिया। कहने का अर्थ ये है कि उन्होंने विवेक को। बुद्ध का अर...
- ’’ तब कोई लगाता क्या?...? संसार इतना प्रचार किया करती है, कोई सुनता है क्या? सुनने के लिये ये बहुत जरूरी है कि जो आदमी उस बात...
- ’’ देने का तेरा अधिकार है, तैने क्या दुनिया में दिया?...? आध्यात्मिकता कहती है, काटती है, भगवान् पूछता है, भगवान् जवाब-तलब करता है हर इन्सान से और जब भगवान् ...